 |  चौदहवीं लोकसभा चुनाव के लिए पाँच चरणों में मतदान होने हैं |
सुपरिचित चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव देश की राजनीतिक परिस्थियों पर बरसों से नज़र रखे हुए हैं और उनका विश्लेषण करते रहे हैं. चौदहवीं लोकसभा चुनाव कई मायनों में देश के पिछले चुनावों से अलग हैं. योगेंद्र यादव विशेष रुप से बीबीसी हिंदी.कॉम के लिए इन चुनावों का विश्लेषण कर रहे हैं. राज्यवार विश्लेषणों को हम अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.
तमिलनाडु इस दक्षिण भारतीय राज्य में गठबंधन की राजनीति बहुत पहले से चल रही है. इस बार द्रमुक के साथ कांग्रेस है तो भाजपा जयललिता की अन्नाद्रमुक के साथ. लेकिन लगता है कि जयललिता सरकार की अलोकप्रियता के कारण एनडीए को नुक़सान हो सकता है.
केरल दक्षिण भारत के इस राज्य के राजनीतिक परिणामों को लेकर पहले बहुत चर्चा नहीं होती थी. लेकिन इस बीच कई दिलचस्प परिवर्तन हुए है और इस बार वहाँ लोकसभा के चुनाव में मुक़ाबला दिलचस्प हो गया है.
उत्तर प्रदेश
 |  कल्याण सिंह के आने से भाजपा में उत्साह है |
उत्तरप्रदेश की चुनावी लड़ाई को दो तरह से देखा जा सकता है - एक तो विशुद्ध चुनाव शास्त्र वाले नज़रिए से आंकड़ों, स्विंग और मतों के बंटवारे के आधार पर सीटों का हिसाब-किताब लगाना है. या फिर जाति और समुदाय के गणित को देखना जो कि चुनावी नतीजों को तय करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
हिमाचल और उत्तरांचल इन दोनों पहाड़ी राज्यों में काफ़ी समानता है. सामाजिक रुप से भी और राजनीतिक रुप से भी. उत्तराँचल नया राज्य है और वहाँ पाँच सीटें हैं जबकि हिमाचल में चार सीटें हैं. पढ़िए दोनों राज्यों के चुनावी विश्लेषण
दिल्ली की सात सीटें दिल्ली में पाँच महीने पहले ही विधानसभा के चुनाव हुए हैं और उसमें कांग्रेस की जीत हुई है. लेकिन सभी संसदीय सीटों पर भाजपा का कब्ज़ा है. इस बार सातों सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुक़ाबला दिखाई दे रहा है.
भारत में मतदान की प्रवृत्ति जहाँ दुनिया भर के चुनाव में लोगों की हिस्सेदारी घटती गई है वहीं भारत में मतदान का प्रतिशत बढ़ा है या काफी ऊँचे स्तर पर टिका हुआ है. यहाँ विभिन्न स्तर की लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों की दिलचस्पी सत्ता के हिसाब से घटती नहीं है. साथ ही भारत में ग़रीब और कमज़ोर लोगों की लोकतंत्र में आस्था औरों से कम नहीं है.
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा
 |  चंद्रबाबू नायडू सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता पाने की कोशिश में है |
कुछेक दिन पहले तक आंध्र प्रदेश के चुनावी मुकाबले को घोर अनिश्चितताओं से भरा बताया जा रहा था. कर्नाटक में भी लोकसभा चुनाव की तस्वीर तो पर्याप्त स्पष्ट होती लग रही थी लेकिन विधानसभा की तस्वीर अस्पष्ट ही थी. अब क्या बन रहे हैं हालात.
मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश में कांग्रेस के लिए हालात अच्छे नहीं लगते. अगर भारतीय लोकतंत्र का यह पक्का नियम यहाँ लागू करें और लोग विधानसभा चुनाव की तरह ही वोट डालें तो भाजपा यहाँ की सारी सीटें जीत लेगी.
बिहार बिहार के राजनीतिक समीकरणों का समझना आसान नहीं है. बिहार में लालू यादव मुस्लिम और यादव गठबंधन के जनाधार पर टिके हुए हैं, और अब रामविलास पासवान भी उनसे जुड़ गए हैं. दूसरी ओर, एनडीए का गठबंधन इस बार बिहार में पूरा ज़ोर लगा रहा है. राज्य की 40 सीटों पर मुक़ाबला बहुत दिलचस्प है
मतदान पूर्व और बाद के सर्वेक्षणों पर छिड़ा विवाद पिछले कुछ चुनावों की तरह इस बार भी मतदान से पहले और बाद में होने वाले सर्वेक्षणों के औचित्य और असर पर फिर विवाद छिड़ा है. इसपर कई सलाव उठते नज़र आते हैं. मतदान से पहले और बाद के जनमत सर्वेक्षणों पर रोक लगाने संबंधी मौजूदा बहस में कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानकारी में ला देना ज़रूरी है. क्या हैं वे महत्वपूर्ण मुद्दे...
राजस्थान
 |  कुछ ही महीने पहले हुए चुनाव में वसुंधरा राजे सिंधिया ने सरकार बनाई है |
राजस्थान में नवंबर 2003 में विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा ने अपनी सरकार बनाई है इसलिए माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन कमोबेश विधानसभा चुनाव की ही तरह रहा है. साथ ही कांग्रेस के पास राज्य में कोई बड़ा नेता नहीं है, अशोक गहलौत हाशिए पर चले गए हैं इसलिए कांग्रेस कमज़ोर दिख रही है.
आंध्र प्रदेश आंध्र प्रदेश में एनडीए सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी तेलुगू देशम के प्रदर्शन पर काफ़ी कुछ निर्भर है. राज्य में चंद्रबाबू नायडू की सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में है इसलिए उसे सत्ता में होने का नुक़सान होने की संभावना व्यक्त की जा रही है लेकिन दूसरी तरफ़ प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस की हालत काफ़ी कमज़ोर है और उसके पास कोई बड़ा लोकप्रिय नेता राज्य में नहीं है.
उड़ीसा उड़ीसा में पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का सफ़ाया हो गया था. इस बार बीजू जनता दल की स्थिति कुछ नाज़ुक है लेकिन कांग्रेस की स्थिति भी मज़बूत नहीं है. राज्य में विधानसभा चुनाव भी लोक सभा चुनाव के साथ ही हो रहे हैं. काँग्रेस अपने बेहतर परिणाम की उम्मीद कर सकती है क्योंकि उनके विरोधी भी बहुत एकजुट नहीं हैं.
कर्नाटक
 |  कर्नाटक विधानसभा के लिए भी चुनाव हो रहे हैं | दक्षिण में कर्नाटक ही ऐसा राज्य है जिसने भाजपा को पाँव टिकाने दिया. 28 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य पर भाजपा का ख़ास ध्यान है और कांग्रेस यहाँ सत्ता में है लेकिन उसके मुख्यमंत्री को अलोकप्रिय नहीं माना जाता. कर्नाटक में भाजपा अगर पैठ बना पाती है तो उसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव होंगे.
महाराष्ट्र मौजूदा चुनावों में महाराष्ट्र में सवाल ये है कि कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन का लाभ चुनाव पर भारी पड़ेगा या इन दोनों दलों की साझा राज्य सरकार की अलोकप्रियता. इन्हीं दो कारकों से न सिर्फ़ राज्य की राजनीति ही प्रभावित होगी बल्कि राष्ट्रीय परिदृश्य पर भी इसका असर होगा क्योंकि महाराष्ट्र से लोकसभा की सीटें सिर्फ़ उत्तर प्रदेश से ही कम है.
जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर में तीन अलग-अलग इलाक़े हैं. कश्मीर घाटी, जम्मू और लद्दाख. तीनों क्षेत्रों की सामाजिक परिस्थियाँ अलग हैं लेकिन राजनीतिक परिस्थियाँ वैसी ही हैं जैसी कि सारे देश में हैं. आतंक और गोलियों के साए में दशकों से रह रहे जम्मू-कश्मीर के लिए बढ़ा सवाल है कि क्या वहाँ सामान्य लोकतंत्र लौट पाएगा? जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण पढ़िए
झारखंड
नया आदिवासी राज्य यूँ तो भाजपा का गढ़ बना हुआ है लेकिन इस बार विपक्षी दलों की रणनीति ने भाजपा को चिंतित होने का कारण दे दिया है. यदि विपक्षियों बहुत दिनों बाद हुआ एका बना रहा तो परिणाम पिछले चुनावों से बहुत अलग हो सकते हैं. ज़मीनी परिस्थितियों का विश्लेषण पढ़िए
पूर्वोत्तर राज्य भारत के पूर्वोत्तर में बसे सात राज्यों में लोकसभा की सिर्फ़ 11 सीटें हैं. पिछले बरसों में इन राज्यों की राजनीतिक परिस्थियाँ बदली हैं लेकिन अभी भी हर राज्य की अपनी अलग परिस्थियाँ हैं और अपना अलग समीकरण है. इन राज्यों की राजनीतिक परिस्थियों का विश्लेषण पढ़िए
असम असम से भारतीय जनता पार्टी को बहुत उम्मीदें हैं क्योंकि वहाँ कांग्रेस की सरकार है और भाजपा के लिए 14 में से कई सीटें पाने की आशा है. असम गण परिषद के खोए हुए जनाधार को पाने में भाजपा कितनी सफलता मिल सकती है? क्या हैं राज्य में प्रमुख मुद्दे? एक विस्तृत विश्लेषण.
छत्तीसगढ़
नए राज्य में लोकसभा के चुनाव पहली बार हो रहे हैं. यह आख़िरी राज्यों में से था जहाँ कांग्रेस का प्रभाव ख़त्म हुआ और भाजपा हावी हुई. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हराकर भाजपा ने अपनी सरकार बनाई है. अपने पुराने गढ़ पर कब्ज़े के लिए कांग्रेस को किसी चमत्कार की ज़रुरत है. छत्तीसगढ़ के राजनीतिक परिस्थियों का विश्लेषण पढ़ें
गुजरात गुजरात में भाजपा ने अपना अच्छा दबदबा बनाया हुआ है. उसने न केवल कांग्रेस के खाम समीकरण को तोड़ा बल्कि अपने वोट बैंक में कई नए आयाम जोड़े. लेकिन दंगों के बाद पहली बार हो रहे लोकसभा चुनाव में क्या संभावनाएँ हैं. पढ़िए विश्लेषण
देश के चुनावी परिस्थियों का विश्लेषण
पिछले चुनावों और देश की राजनीतिक परिस्थियों का विश्लेषण बताता है कि देश में किसी भी पार्टी या गठबंधन के लिए कोई लहर नहीं है और न ही वोटर किसी से नाराज़ है. ऐसे में चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले भी हो सकते हैं. पढ़िए विश्लेषण दो किस्तों में.
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