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गुरुवार, 13 मई, 2004 को 16:04 GMT तक के समाचार
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मुँह दिखाई में चाबी मिली...
बिंदास बाबू
(बिंदास बाबू की डायरी)

बीबीसी के प्यारे पाठकों, आप सब को बिंदास बाबू का नमस्कार.

और ये प्रार्थना है कि आज, आप थोड़ी-थोड़ी मिठाई ज़रूर खाना. पाँच साल बाद हुए इस चुनाव का परिणाम आ चुका है और एक नई सरकार आपके सामने है. लेकिन हम अपने रामभरोसे का क्या करें. सबेरे से हाय तेरह मई, तेरा सत्यानाश हो, हाय तेरह मई, तेरा सत्यानाश हो, हाय तेरह के अंक, तेरा सत्यानाश हो, कह-कह कर गरिया रहे हैं.

सुबह से ही रामभरोसे रिज़ल्टों को देखते जा रहे हैं और अपना माथा ठोकते जा रहे हैं.

हमने टोका, ये ठीक नहीं है भइया रामभरोसे, हाय-हाय करना बंद करो, मिठाई-विठाई खाओ.

वे बोले, सर जी, भाजपा वाले सचमुच के वीर हैं. इतनी पिटाई खा कर भी कहे जा रहे हैं कि अटल जी ने पाँच साल बहुत अच्छा काम किया.

भइया, आत्ममुग्ध, घमंडी, दुराभिमानी लोग ऐसे ही कहा करते हैं. यहाँ नक़ली वीरों की नक़ली बाँकी मुद्रा है. वही, हार नहीं मानूँगा, मार बराबर खाऊँगा.

डायरी के पन्ने

तेरह मई को जनता ने एनडीए की तेरहवीं कर दी है. जिमाने के लिए तेरह ब्राह्मण तक नहीं मिल रहे. जनता ने कह दिया है कि भइया टाटा. लेकिन सर, ये क्या बात हुई, एक विदेशी को सत्ता सौंप रहे हैं, हमें तो हरगिज़ मंज़ूर नहीं है कि जनता ऐसा करे.

देखो भइया, प्रमोद महाजन की भाषा मत बोलो. जनता का ग़ुस्सा देखो, इसे एंटी-इन्कम्बैन्सी मत कह बैठना. जनता भाजपा-एनडीए को लगातार पाँच साल देखती रही, और ये फ़ैसला उसके ख़िलाफ़ है.

जनता ने वोट से विदेशी मूल को भी स्वाहा कर दिया है. हमारी भाभी सोनिया अब हमारी पीएम है. परंपरा से भी भाभी को ही घर की चाबियाँ दी जाती हैं. भाजपा ने नहीं दीं, कोई बात नहीं, जनता ने मुँह दिखाई में चाबी ही छीन कर दे दीं.

लेकिन सर, इस जनता के लिए क्या नहीं किया अटल जी ने पाँच-छह साल. अरे अपनी कविता तक लिखनी छोड़ दी. फ़ील गुड करते-कराते रहे.

जी, हम भी जानते हैं, फ़ीलगुड तो साड़ी काँड से ही ज़ाहिर है भाई.

लेकिन सर जी, बहुमत तो नहीं मिला न इन्हें.

उधर मायावती, इधर मुलायम. एक म्यान में दो तलवारें कैसे रहेंगी. फिर ये जो लेफ़्ट है न, कांग्रेस की इकॉनॉमिक पॉलिसी को मानेगा. सरकार कैसे चलाओगे, खिचड़ी कैसे बनाओगे. ए बिंदास जी, ये बताओ.

अरे जब अटल जी खिचड़ी बना सकते हैं, तो हमारी भाभी सोनिया, खिचड़ी के अलावा पिज़्ज़ा, पाश्ता भी बना सकती है. अरे जनता अपना स्वाद बदलना चाहती है. अब ग्लोबल डिश खानी है तो ग्लोबल भाभी से ही मिलेगी न.

लेकिन सर, खाली टाइम में हमारे प्यारे अटल जी क्या करेंगे. कहीं बोर तो नहीं होंगे.

भइया, अटल जी की तो अटल जी ही जाने, हमें तो लगता है कि विपक्ष में बैठेंगे और ख़ाली वक़्त में कविताएं आदि किया करेंगे. उन्हें अफ़सोस रहा है कि वो ज़िंदगी में कविता नहीं कर पाए, अब फुल टाइम कविता करते रहेंगे.

तो फिर बिंदास जी, मिड टर्म पोल के लिए तैयार रहना. 2009 में भाजपा फिर लौटेगी. रामभरोसे बोले.

देखो रामभरोसे, तब तक राहुल और प्रियंका मैदान में आ जाएंगे. इन बालकों ने अपने रोड शो से तो ये कमाल कर दिया कि भाजपा के अश्वमेघ के घोड़े को यों ही कच्चे धागे से बाँध दिया. जब फार्म में आएंगे तो भाजपा कहाँ होगी भइया.

भाजपा का खेल तो अब ख़त्म हुआ समझो. हाय मेरी भाजपा, हाय मेरी भाजपा, हाय मेरे नीरो भइया, हाय मेरे तोगड़िया, हाय मेरे सिंघल जी, हाय मेरा मंदिर, क्या होगा, हाय मेरे मीडिया, हाय मेरे एक्ज़िट पोल, तुम्हारा क्या होगा, रामभरोसे फौरन हिचकियाँ लेने लगा.

हमने कहा, रामभरोसे, इन बेवकूफ़ियों को छोड़ो. अब अगर अपना फ़्यूचर बनाना है तो सोनिया चालिसा, राहुल सतसई और प्रियंका पच्चीसा लिखना शुरू कर दो. कुछ माल खींच लो यार, मौक़ा है.

वे बोले, लेकिन हमें तो तुकबंदी तक नहीं आती.

हमने कहा, यार अपने वो बशीर बद्र हैं न, उन्हीं से मदद ले लेना. वे अटल हिमायत से अब बरी हो गए होंगे.

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