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अश्वराज की हिनहिनाहट.... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
(बिंदास बाबू की डायरी) बीबीसी के प्यारे दुलारे श्रोताओं, आप सबको बिंदास बाबू की राम राम, सलाम, सत् श्रीअकाल. आप सब चतुर सुजान हैं, जानते ही हैं. चुनावी अश्वमेघ के सारे रथी, महारथी, अतिरथी, अल्परथी, कंप्यूटररथी अपने अपने शिविरों में लौट आए हैं. एनडीए का अश्व, कांग्रेस का अश्व और बाक़ी सब के घोड़े, गधे और तबेलों और फार्म हाउसों में बंधे टीवी पर इंटरव्यू देने के लिए हिनहिना रहे हैं, चीं पो - चीं पो कर रहे हैं. एनडीए का अश्वराज टीवी पर आख़िरी सीन देने के लिए मचल रहा है, सो ऐसे शुभ मुहूरत में हमनें फ़ीलगुड अश्व से एक्सक्लूसिव बातचीत कर डाली. आप भी सुनिए... हमने पूछा, ‘हे फ़ीलगुड अश्वराज, चक्रवर्तित्व का सुफल प्रदान करने वाली इस अश्वमेघी सुपर रेस में इस वक़्त आप कैसा फ़ीलगुड कर रहे हैं? कितनी सीटें हिनहिना रहे हैं.’
‘300 से ज़्यादा हिनहिनाएंगे महाराज,’ उन्होंने जवाब दिया. ‘कुछ कम करके चलो महाराज, दिन बहुत बुरे चल रहे हैं.’ ‘अरे क्यों कम करें, हम किसी की धौंस में हैं, किसी से डरते हैं, जानते नहीं, ‘हार नहीं मानुँगा, रार नई ठानुँगा’ गीत किसका है?’ ‘अरे भैया, ये एक्ज़िट पोल वाले ये गाना नहीं जानते. वे कम करने को कह रहे हैं महाराज, वरना आप जो कह रहे हैं ठीक ही कह रहे होंगे.’ हमने उनके चरणों की ओर निहारा, अश्वराज धरती खूंद रहे थे, 300 से एक कम पर तैयार नहीं थे. ‘अभी क्या पूछते हो, 13 को ख़ुद ही देख लेना.’ उन्होंने कहा. तभी कांग्रेस के फार्म हाउस में लव और कुशी दोनों आ गए और कहने लगे, ‘ये फ़ीलगुडवा घोड़ा हमनें यूँ ही रोड शो में पकड़ लिया था. पाँच साल से हिनहिना रहा था. अब चीं पो - चीं पो कर रहा है, हमें तो घोड़ा नहीं गधा लग रहा है. आप हमसे बात करिए हम जवाब देंगे.’ ‘तो आपको कितनी सीटें मिल रही हैं लव कुशियो’ ‘देखिए ये तो हम माताश्री से पूछ कर ही बताएँगे. हम तो बस रोड शो करते फिरते थे, सीट-फीट का मामला ऊपर वाले जानें.’ फार्म हाउस में बंधा अश्वराज हिनहिनाया, मानो पिनपिनाया, ‘देखिए बिंदास जी अब हम 300 को छोड़कर 272 की बात कर रहे हैं, डाउन आ गए हैं. चलिए ढाई सौ ही दे दीजिए आप, बाक़ी का इंतज़ाम हम कर लेंगे. ये आपकी ख़ातिर स्पेशल कंसेशन कर रहा हूँ. वरना 300 से एक कम लेने का नहीं हूँ. सरकार हमारी ही बनेगी, 13 को देख लेना.’ हमने कहा, ‘अश्वराज महाराज, तेरह का अंक बहुत अशुभ होता है कहीं तेरहवीं न हो जाए.’ ऐसा सुनते ही अश्वराज फिर टापों से फार्म हाउस खूंदने लगे और हम भाग खड़े हुए. |
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