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शुक्रवार, 30 अप्रैल, 2004 को 12:54 GMT तक के समाचार
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ज़्यादा ही सेकुलरा गए हैं यदुवंशी...
बिंदास बाबू
योगी जी वोट तो लेंगे लेकिन धोकर
(बिंदास बाबू की डायरी)

बीबीसी के श्रोताओं, बिंदास बाबू का आप सब को सादर नमन.

एक दिन इस चुनाव को कवर करते-करते बिंदास बाबू महाभारत के मूसलपर्व में पहुँच गए. देखा तो एक से एक ऐक्शन सीन सामने आने लगे. बीआर चोपड़ा के महाभारत में ये सीन नहीं थे. ये उनसे आगे के हैं.

यदुवंशियों में युद्ध हो रहा था. मूसलपर्व दुहर रहा था. रामभरोसे इस सीन को देख-देख उदास हो रहा था.

हमने कहा, “हे रामभरोसे, तुम क्यों भए उदास, नए महाभारत का मज़ा लो, ये सीरियल है, सिर्फ़ सीरियल.”

रामभरोसे बोला, “यदुवंशी लड़ रहे हैं, ये ठीक नहीं है, जब-जब यदुवंशी लड़े हैं, महाभारत हुआ है. और ऐसा महाभारत हुआ है कि बाद में न नाम लेवा बचा, न पानी देवा. हे बिंदास जी, आप कुछ करते क्यों नहीं.”

“हे रामभरोसे, देखो मैं तुम्हारे लिए स्पेशली महाभारत के मूसलपर्व की कथा का संक्षेप में बखान करता हूँ जिसको सुनने से तुम माया-मोह से मुक्त जाओगे और मस्त हो जाओगे.”

डायरी के पन्ने

“जान जाओगे कि उस महाभारत में और इस चुनावी महाभारत में बहुत बड़ा भेद है. वो असल था, यह नकल है, ये सीरियल है, स्पॉन्सर्ड है. सीरियल को सीरियसली मत लेना.”

कथा कुछ इस तरह है कि महाभारत युद्ध 35 वर्ष बाद कुछ ही यदुवंशी बचे थे. उनके कुछ बिगड़े हुए रईसज़ादे, महाबली, अतिबली, जेनरेशन नेक्स्ट मार्का युवक एक बार एक साम्न को स्त्रीवेश में सजा कर विश्वामित्र और नारद के पास लेकर आए और उनकी परीक्षा लेने हुए पूछा, “महाराज, बताइए तो कि इस स्त्री के गर्भ से क्या पैदा होगा.”

त्रिकालदर्शी ऋषियों को उन उद्धत युवकों की बात अखर गई और क्रोध में बोले, “इसके गर्भ से एक लोहे का मूसल पैदा होगा जो तुम्हारे पूरे कुल-वंश का नाश कर देगा. कृष्ण-बलराम बचे रहेंगे लेकिन उनका नंबर भी जल्द आएगा.”

अगले ही दिन मूसल उत्पन्न हो गया. राजा युधिष्ठिर ने मूसल को पिसवा कर समुद्र में डलवा दिया. बस, चारों तरफ़ काल चक्कर लगाने लगा. अपसगुन होने लगे, युवक आपस में ही लड़ने लगे, मूसल चलने लगा और इस तरह यदुवंशियों का पूरा वंश नष्ट होने गया.

''मगर ये तो महाभारत के मूसलपर्व की कथा है.'' रामभरोसे बोला.

“इसका मर्म जानो प्यारे, देखते नहीं, बिहार से यदुकुल तिलक, लालू ने कह दिया है कि ग़ैर-एनडीए सरकार में मुलायम सिंह यादव को कोई जगह नहीं होगी. उधर मुलायम सिंह यादव ने भी लालू के इलाक़े में अपने कैंडीडेट उतारे हैं.”

“यही तो नया मूसलपर्व है. एक बार इसका सदुपयोग वीपी सिंह ने भी किया था. मंडल रूपी मूसल चल निकला. अंततः उन्हीं की सरकार चली गई.”

“अब फिर मूसलपर्व चल रहा है, बिहार का गोला यूपी में गिरता है और धड़ाक होती है और यूपी का गोला बिहार में गिर रहा है.”

“यदुवंशियों के भाग्य में आख़िर में ऐसा ही कुछ लिखा रहता है. इतने ज़्यादा सेकुलरा जाते हैं कि आपस में ही लड़कर कहीं ख़त्म हो जाते हैं.”

“तो फिर रास्ता क्या है?”

“देखो रामभरोसे, हम सीरियल की बात कर रहे हैं, सारे यदुवंशी भगवान कृष्ण की एक ही बात याद करके ही तो ऐक्शन करते हैं. उन्होंने कहा है न, यह आत्मा कभी नहीं मरती है, शरीर मरता है, सत्ता नहीं मरती, आत्मा सत्ता में रहती है.”

“सो हे अर्जुन, हे लालू यादव, हे मुलायम यादव, तुम लोग शरीर का मोह न करना, धर्म के लिए युद्ध करना.”

लेकिन ये अपने लालू-मुलायम तो भगवान कृष्ण की गीता से भी कुछ आगे निकल गए हैं, जन्म से ही जानते हैं कि लड़ना ही धर्म है, ये सब माया मोह की बातें हैं और ये इनसे बहुत परे जा चुके हैं.

“सो हे रामभरोसे, तू इनसे पँगा मत लीयो, जा चाय ला, अभी ‘ऐड’ आ रहे हैं.”

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