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गुरुवार, 29 अप्रैल, 2004 को 09:26 GMT तक के समाचार
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चांदनी चौक से 'तुलसी' की ख़बर...
बिंदास बाबू
योगी जी वोट तो लेंगे लेकिन धोकर
(बिंदास बाबू की डायरी)

बीबीसी के प्यारे पाठकों, आप सबको बिंदास बाबू का सलाम, हैलो, हाय-हाय और पाँयलागन.

इन दिनों चाँदनी चौक में जब से चंदू के चाचा ने, चंदू की चाची को, चाँदी की चम्मच से चटाचट चटनी चटाई है, तबसे चाँदनी चौक से लेकर खारी बावली तक में मसालों की भारी कमी हो गई है.

उधर हमारे राम भरोसे अंतर्यामी की तरह मुस्कुरा रहे हैं. हमने पूछा, "महाराज, इस मस्ती का राज़ क्या है."

बोले, "बिंदास बाबू, इतना भी नहीं जानते कि चाँदनी चौक की मॉडल बहू, आदर्श बहू घर आई है, अपनी तुलसी बहूरानी."

"चाँदनी चौक की अखिल चाचियाँ-सासियाँ, सब अपने सपनों की आदर्श बहू को छतों पर, ओटलों पर, छज्जों पर एकटक, अपलक निहारती हुई, बलाइयाँ लेती दिखती हैं. समूचा चाँदनी चौक, 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के 'स्लो-मोशन' में सीन दे रहा है."

डायरी के पन्ने

"लेकिन माई डियर फ्रेंड रामभरोसे जी, घरेलू डाइलेक्टिक्स तो यह कहती है कि अगर चाचियाँ-सासियाँ बहू को प्यार से निहारेंगी तो चाँदनी चौक की अखिल बहुएँ चाँदनी चौक ब्राँड, सीरियल मेड बहू को फूटी आँख भी नहीं देखेंगी."

"तुलसी ने ही लिखा है, मोहि न नारि, नारि के रूपा."

वो तो आदरणीय ससुर जी के रोल वाले कपिल सिब्बल जी को निहारती रहती हैं और कहती हैं, "बाऊ जी, ये माता जी है न, ये हमें अपने 'उन' के साथ चाँदनी चौक में चटनी चाटने तक जाने नहीं देतीं. पहरे बैठी रहती हैं."

रामभरोसे हमारे सास-बहू के शाश्वत डाइलेक्ट संबंधी ज्ञान से झटका खा गए, पलट कर वार किया. "लेकिन बिंदास महोदय, ये तुलसी उनके आँगन की है. जिनके घर में होती है, शुभ-लाभ देती है, चाय में उबाल कर पियो तो ज़ुकाम-खाँसी तक नहीं होने देती."

"हाँ-हाँ, रामभरोसे, मगर वो तुलसी तो बिरवे की होती है, घर के आँगन में सीन देती है. ये तुलसी तो बिरानी दिखती हैं, बिरानी, बिरानी माने दूसरी, पराई, समझे न."

"देखिए बिंदास जी, आगे बोले तो ठीक न होगा, हमारी भावना भड़क रही है." सुना तो उनकी आवाज़ कड़क रही थी.

"भरोसे भाई, भावना की भड़क से उतर कर चाँदनी चौक की ठंडी सड़क पर आ जाओ."

"तुलसी रानी कितनी भी हुलसी फिरें, हे तुलसी के महाफ़ैन, यह तो बताओ कि इस वक्त सीरियल में तुलसी का पति किस ब्राँड का है, किस नंबर का है, किस चेहरे का है."

"अरे, ये क्या सवाल हुआ, पति भी कोई ब्राँड के होते हैं. किसी नंबर के होते हैं. वो भी तुलसी मैडम का पति, राम-राम."

"हाँ भइया, कलजुग है न, सो तुलसी के पति का नाम तो वो ही रहा लेकिन चार-पाँच अभिनेता अलग-अलग वक्त पर उसके पति के रूप में दिखे हैं. जानते हो, ये फ़ैक्ट है."

"यार ये क्या बात हुई, हर एपिसोड में नया पति, तुलसी के नाम को ये क्या शोभा देता है. क्या कहते हो बिंदास भाई. ऐसा है, हे राम." कहकर रामभरोसे ने माथा पकड़ लिया.

"तभी न हम कहते हैं, ज़रा तुलसी की दुश्मन पायल से तो पूछो, उसका प्रेमी तुलसी ने झटक लिया था. अब मुक्ति का एक ही मार्ग है, कपिल सिब्बल को केस दे देते हैं. तुलसी का असली पति कौन है, वो अदालत में जाकर फ़ैसला करा देंगे."

"लेकिन वे तो ससुर की उम्र के लगते हैं, आदर्श बहू को क्या अदालत में घसीटेंगे."

"भइया ये कलजुग है, न तुलसी दूध की धुली हैं, न कपिल दूध के धुले हैं और हम तो कतई नहीं हैं. तुलसी ने भी अपनी पक्की दोस्त के पति से शादी रचाई है यार."

"क्या कहते हो बिंदास भाई?" रामभरोसे गश खाकर गिरने को हुआ. हमने उसे संभाला.

सो हे श्रोताओं,

चाँदनी चौक में इन दिनों चंदू चटनी की जगह सॉस खाता है, चाचा-चाची को एक ठो बहू की तलाश में लगाए है, सास बहू पर बलिहारी जा रही हैं, बहुएँ ससुरों को लंच पहुँचा रही हैं.

इसे कहते हैं, चाँदनी चौक छाप चटनी.

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