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मैडम लू ने चूमा कुँवर कन्हैया राहुल को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
(बिंदास बाबू की डायरी) बीबीसी के प्यारे-दुलारे पाठकों, आप सबको बिंदास बाबू की हैलो, हाय-हाय. आगे का हाल ये है कि अमेठी में लू मैडम से मुलाकात हो गई. लू मैडम तेज चल रही थी, गरम गरम लग रही थी. न्यारे-व्यारे, कुँवर-कन्हैया राहुल को लगकर आई थीं. बहुत फीलगुड कर रही थीं.
हमने पूछा, हे गरमी की मिस इंडिया लू, तू आज किस बात पर इतना डाँस कर रही है. क्या तू मिस वर्ल्ड लू बन गई है. न भइया बिंदास, ऐसे कुछ नहीं है, बस अपने सपनों के राजकुमार, प्रिंस चार्मिंग राहुल गांधी से मिलकर आ रही हूँ. लू देवी बोलीं. हमारा माथा ठनका, लो जी, हो गया अपने राजकुमार का चुनाव, ये हरजाई उसे भी ढेर कर आई, कर दिया बीमार, जरूर भाजपा ने भेजा होगा. यह तो परम दुष्टा निकली. हमने लू देवी को मन ही मन धिक्कारा. कहा, हो गई तसल्ली. पहुँचा दिया न लौटा के दिल्ली. तू तो भाजपा की एजेंट निकली. देखो बिंदास बाबू, हमने कुछ नहीं किया, हमने तो बस एक चुम्मा लिया. यहाँ किसान मजदूरों को लगते लगते बोर हो गई थी. अपने फ्यूचर पीएम मिले और अपन एक किस भी न करें. ये तो सीन में फिट नहीं बैठता. अरे, हमें क्या मालूम था कि वो ऐसा नाजुक होगा कि हमारी एक किस तक बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. परदेशी छोरियों से फ्रेंडशिप करता रहा है, ज़रा देसी लू से नज़र मिलाए. तभी न अमेठी वाले कहेंगे, मेरा पिया घर आया-ओ राम जी. लेकिन तूने तो वायरल में डाल दिया, कुछ तो रहम किया होता. हल्के से लगती, ठंडी होकर लगती, हमने कहा. यार बिंदास, तू तो जानता ही है, ये इंडिया है, गरमा-गरम मुल्क. जमीन गरम, आसमान गरम, हम भी गरम, तुम भी गरम, यह अमेठी है. जो इसे झेले, वो वोट ले ले. इतने नरम नाजुक थे तो भइया पधारे क्यों. ऐसा कहकर लू झकझोरती हुई, कान के पास प्यार भरा थप्पड़ लगाती हुई चली गई. प्रिय पाठकों, मैडम लू से बचकर रहना, अपना ख्याल रखना, नमस्कार. |
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