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बुधवार, 07 अप्रैल, 2004 को 15:27 GMT तक के समाचार
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फ्री इश्टाइल की महाकुश्ती का सीन...
बिंदास बाबू
(बिंदास बाबू की डायरी)

हे बीबीसी को सदा से सुनने वालो, भारत में डब्ल्यू डब्ल्यू एफ़ का महा सीन शूट हो रहा है.

जोड़ खुल रहे हैं, फ्री-स्टाइल हिंदुस्तान में जिसे देखो, जहाँ देखो, वहीं अपना लंगोट घुमाता नज़र आता है.

वह देखो, देखो, महासमुंद से जोगी महाराज ने ताल ठोंक दी है. जवाब में विद्याचरण शुक्ल कह रहे हैं - ‘आने दो, आने दो, बचुवा को देख लूंगा.’

अपना प्रीतम पानवाला बोला, ‘क्या बड़बड़ा रहे हो बिंदास बाबू, 90 नंबर के चक्कर में 300 नंबर तंबाकू तो नहीं चर गए.’

‘नहीं प्रीतम भाई, महासमुंद की कुश्ती में डब्ल्यू डब्ल्यू एफ़ का मज़ा ले रहा था.’

अब जूदेव भी कूद पड़े हैं.

कहे हैं, ‘ई जोगीवा ने हमारा बड़ा नुकसान किया है, हमऊ उसे देखबे करी, जोगीवा का उखाड़ के दम लेई.’

एक ओर विद्या भइया, दूसरी ओर जोगी राजा, इसमें थर्ड-पार्टी का क्या काम?

क्या सीन है, फ्री फंडिया, फ्री स्टाइल डब्ल्यू डब्ल्यू एफ़ हो रहा है.

अवसर शरणं गच्छामि, मतलब शरणं गच्छामि,खलबल शरणं गच्छामि,ऐसे रामराज्यं को नमामि-नमामि...

प्रीतम प्यारे पानवाले ठिठके, बोले, ‘ई विद्या भइया वही न रहे, जो इमरजेंसी में पत्रकारों को अंदर कराए रहे, सेंसर बिठाए रहे, अख़बार काले कराए रहे?

अरे हमार ई खोखवा भी उन्ही संजय की ब्रिगेड बालों ने उजाड़े थे.

सुनते हैं कि अब विद्या बाबू को भाजपा ने गोद ले लिया है, सारी खताएं भी माफ कर दी हैं.

‘सो तो है प्रीतम भइया’, बिंदास बाबू बोले.

‘देखो तो बिंदास जी, कैसे दिन आ गए हैं? इमरजेंसी में भाजपा के बड़े नेता अंदर थे, इमरजेंसी के विरोधी थे.

अब इमरजेंसी के सबसे बड़े आलमबरदार को ही गोद में बैठाए लिए हैं.’

‘हे राम,’ प्रीतम बाबू ने पान में 90 नंबर डालते हुए ठंडी साँस ली.

‘उधर जोगी भइया क्या-क्या तो लेते-देते रहे, कांग्रेस से निकाल दिए गए. अब ज़रा सी देर में फिर कांग्रेस का टिकट दे दिया गया.’

डायरी के पन्ने

‘तब किस विजन डाक्यूमेंट की बात करते हैं ये बड़े लोग? जब यही सब करना है तो एक ही घोषणा-पत्र काफी है. सार्वभौमिक - अवसरवादी - घोषणा-पत्र, जो सब दलों का एक जैसा हो सकता है.’

‘वो रहीम ने कहा है न, काफी पहले, कहो तो सुनाए’ प्रीतम ने पूछा.

सुनाओ भइया, जरा जोर से सुनाओ, पूरा देश सुने.

उन्होंने कहा, ‘तो लीजिए, अवसर के अनुकूल यह महान दोहा भी सुन लीजिए पान के साथ.’

रहीम बाबू कहते हैं - ‘काल परे कछु और है, काछ सरे कछु और, रहिमन भाँवर के भए, नदी सिरावत मौर...’

‘मतलब निकलने पर सब साथ छोड़ देते हैं और मतलब आने पर सब साथ ले लेते हैं.’

अवसर शरणं गच्छामि
मतलब शरणं गच्छामि
खलबल शरणं गच्छामि
ऐसे रामराज्यं को नमामि-नमामि...

नमस्कारम.

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