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एक पॉलिटिकल लव स्टोरी पर फ़िल्म... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
(बिंदास बाबू की डायरी) बीबीसी के प्रेमी पाठकों, आपके दिव्य प्रेम की ख़ातिर इन दिनों बिंदास बाबू एक पॉलिटिकल लव स्टोरी 2004 नामक मेगाफ़िल्म की शूटिंग कर रहे हैं. शूटिंग यूपी में चल रही है, हीरोइन है अपनी वही मिस यूपी समाजवादी साइकिल वाली और हीरो हैं महामना विकास पुरुष. टेक पर टेक चल रहे हैं. सीन है कि फ़िनिश में नहीं आ रहा है. हीरो रह-रह कर गा उठता है, सौ साल पहले, मुझे तुझसे प्यार था, आज भी है और कल भी रहेगा. उधर ज़ालिम ज़माने की नज़रों से डरती-मरती, अपने दाएँ पैर के अँगूठे के नाख़ून से कच्चे आँगन की धरती कुरेदती, अपने आँचल को बेवफ़ा तेज़ राजनीतिक हवाओं से बचाती, संभालती, सकुचाती, हीरोइन मिस क्वीन समाजवादी साइकिल वाली गाने लगती है, 'छोड़ दो आँचल, ज़माना क्या कहेगा...'
हीरो मिक्स और रिमिक्स का उस्ताद है, गाने को पलटी दे, दूसरा गाना पेल देता है- 'कुछ न कहो, कुछ भी न कहो, क्या कहना है, क्या सुनना है, तुमको पता है, मुझको पता है, लोहिया जी हमारे हैं, हम लोहिया जी के हैं. समय का ये पल थम सा गया है...' ऐसे लव सीन देख-देख रामभरोसे डिस्टर्ब हो रहे हैं, पूछते हैं, ऐ बिंदास भाई, आपकी इस लव स्टोरी में पॉलिटिकल ऐंगिल डिफ़ेक्टिव है. भला अल्लाह का घर तोड़ने वाले और जोड़ने वाले के बीच कोई लव साँग पॉसिबल है. ''अरे यही तो इस लव स्टोरी का असली फ़ंडा है. सारी कलजुगी डिक्सनरियों में इंपॉसिबिल शब्द का पेज ही फाड़ दिया गया है.'' देखो तो प्राचीन समाजवादी मिस्टर डायनामाइट कुछ साल पहले तक भाजपा नामक गजगामिनी को ताना मारते रहते थे कि हे प्रिये, तुम संघ की पालिता हो या आत्मचालिता हो. ऊँची-ऊँची दुनिया की संघी दीवारों को तोड़ दो. गजगामिनी ने न घर छोड़ा, न संघ छोड़ा. उल्टे मिस्टर डायनामाइट समाजवादी ही गजगामिनी के पीछे-पीछे हो लिए और उन्हें पद्मिनी समझ लिए और रीझ गए, और पाँच साल से एक ही गाना गा रहे हैं, 'तुम मुझे भूल भी जाओ, तो ये हक़ है तुमको. मेरी बात और है, मैनें तो मोहब्बत की है...' और अब वे ही समाजवादी साइकिल वाली को यूपी में फुसला कर कह रहे हैं, 'मैनें तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने, गोरी तू अब तो आ जा...' अरे तब इसमें प्रॉबलम क्या है बिंदास भाई, स्टोरी तो सीधी है, अरे अब तो आ जा, सही बात है, हीरो विकास भाई हैं, ईलू-ईलू कहते हैं, तो ये हरजाई क्यों नहीं उनके पास चली जाती. रामभरोसे कहानी को सुखान्त देखना चाहते हैं. नहीं रामभरोसे, हाँ कर देती है तो हीरोइन के दाम क्या उठेंगे. अरे बहुत चालू है, कह रही है, अभी मोहरत तो निकलने दो. कुंडलियों का मिलान तो होने दो. ग्रह-नक्षत्रों की गणना तो ठीक होने दो, हिसाब-किताब बैठने दो. सो इस हिसाबी-किताबी ज़माने में यह लव स्टोरी भी हिसाब-किताब का मिक्स और रिमिक्स कर रही है. इतना तय है, जिस दिन नौ मन तेल आ जाएगा, उस दिन ये राधा नाचेगी ज़रूर. संगम होगा ज़रूर. अगले एक्शन सीन की शूटिंग के लिए इजाज़त दीजिए हमारे भाई. |
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