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मंगलवार, 11 मई, 2004 को 13:33 GMT तक के समाचार
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टीडीपी की हार पर सियापा...
बिंदास बाबू
(बिंदास बाबू की डायरी)

बीबीसी के प्यारे पाठको!

आज सुबह-सुबह हमारे घर में सियापा हो रहा है, कुत्ते-बिल्ली तक रो रहे हैं.

हाय मेरे चंद्रबाबू, हाय-हाय. अरे मेरे राजा भइया,

तेरे साथ ये क्या हुआ रे, हाय-हाय.

अरे मेरे भइया, तेरे लैपटॉप को क्या वायरस मार गया रे, हाय-हाय.

अरे अब एनटीआर के सपनों को कौन पूरा करेगा रे, हाय-हाय.

हाय रे मेरे राजा भइया, तू तो जीत रहा था रे, हाय-हाय.

अरे मेरे प्यारे, तू तो पास्ट-फ़्यूचर पीएम था रे, हाय-हाय.

अरे तू ही तो था, एनडीए की आँख का सैक्युलर तारा रे, हाय-हाय.

अरे निगोड़ी आँध्र प्रदेश की जनता, ये तुझे क्या हुआ रे, हाय-हाय.

अरे तेरी हाय-हाय लग गई रे, हाय-हाय.

मेरे कुँवर कन्हैया, चंद्रबाबू नायडू को तेलंगाना वालों की काली नज़र खा गई रे, हाय-हाय.

डायरी के पन्ने

ये तूने क्या किया री जनता कि एनडीए के फ़ीलगुड बाबू को ऐसा फ़ीलगुड कराया कि सब गुड़-गोबर कर दिया रे, हाय-हाय.

अरे क्या तेरी मति मारी गई थी कि केंद्र के संग-संग चुनाव की सूझी रे, हाय-हाय.

अरे ज़रा टिका रहता रे, हाय-हाय.

अब अगर केंद्र में भी वोटर ने ऐसी ही एंटी-इन्कम्बैन्सी की लात जड़ दी तो क्या होगा रे, हाय-हाय.

अब मैं किसके लिए जिऊँ रे, हाय-हाय.

सुबह से अपने रामभरोसे विलाप का आलाप झालातोड़ निकाल रहे हैं, ज्यों-ज्यों आँध्र का रिज़ल्ट आ रहा है, त्यों-त्यों उनके मुँह से धारावाहिक हाय-हाय निकल रही है.

"एकदम सियापा कर रहे हैं, छाती कूट-कूट दुहत्थड़ मार रहे हैं. शाँत हो जाइए रामभरोसे जी, तक़दीर में जो जनता लिख देती है, वही होता है."

'हुइहै वहि जो राम रचि राखा,' इसको अब ठीक कर लीजिए-

"हुइहै वहि जो जनता रचि राखा,
को करि तर्क बढ़ावहिं साखा."

"सो हे वत्स, अभी तुम्हें तेरह को शायद और रोना है, थोड़ा रोना बचाकर रखो. वो शेर याद रखना,"

"रोने वालों से कहो, उनका भी रोना रो लें.
जिनको मजबूर-ए-हालात ने रोने न दिया."

"तो भइया, तैयार रहना रोने के लिए."

"लेकिन बिंदास भाई, हमसे का भूल हुई, जो ये सज़ा हमका मिली."

"भइया एनडीए के साथ मज़ा लोगे तो सज़ा मिलेगी ही. नौ-नौ साथी एनडीए के डूबते जहाज़ को छोड़कर चले गए. तुम्हारे चंद्रबाबू अटके ही रहे. सो भइया मज़ा लिया है तो सज़ा भी प्राप्त करो."

"तो क्या तेरह को भी केंद्र में यही होना है?"

"यूँ तो ये सब जनता जाने रामभरोसे लेकिन जनता जब कुटाई करती है तो तबियत से करती है."

"जब गाँव में मरी फैलती है, तो सबसे पहले सीमांत के जानवर मरते हैं. होने को तो कुछ भी हो सकता है, केंद्र में अगर टूटी-फूटी एनडीए आ भी गई तो तुम्हारे नायडू जैसा हाईटेक, लो-बैक मुख्यमंत्री तो मिलने से रहा."

"हमदर्दी में हम भी इतना कहेंगे, जैसी नायडू के संग की, भगवान, वैसी किसी के संग मत करियो."

ऐसा सुन कर रामभरोसे फिर दुहत्थड़ मार कर रोने लगा.

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