मयंक यादव के पिता की वो सलाह जिसने उन्हें बना दिया भारत का सबसे ख़तरनाक गेंदबाज़

मयंक यादव

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    • Author, संजय किशोर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

आईपीएल के पिछले 15 सीज़न में जो नहीं हुआ वो लखनऊ सुपर जाएंट्स के मयंक यादव ने कर दिखाया है. महज 21 साल की उम्र में उन्होंने ऐसा क्या कर दिखाया है जो आईपीएल के इतिहास में अब तक नहीं हुआ है?

डेब्यू करते हुए पहले दो मैच में मैन ऑफ़ द मैच हासिल करने का कारनामा मयंक यादव के नाम हो गया है.

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के ख़िलाफ़ मयंक ने 4 ओवरों में महज 14 रन देकर तीन विकेट चटकाया, इसमें ग्लेन मैक्सवेल और कैमरन ग्रीन जैसे धुरंधरों के विकेट शामिल थे.

इससे पहले पंजाब के ख़िलाफ़ 27 रन देकर तीन विकेट उन्होंने लिए थे. दो मैच में एक बात कॉमन उनके गेंदों की गति थी, जो उन्हें भारत का सबसे ख़तरनाक गेंदबाज़ बनाती है.

मैंने पिछले दो साल से इस दुबले-पतले-सांवले लड़के को क़रीब से देखा है. मयंक यादव को आप लखनऊ सुपर जाइंट्स का सबसे शांत और शायद सबसे अंतर्मुखी खिलाड़ी कह सकते हैं.

सर पर मारने वाला गेंदबाज़

मयंक यादव, भारतीय गेंदबाज़

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सुबह नाश्ते के टेबल पर चुपचाप बैठे रहते हैं और फिर कमरे से प्रैक्टिस सत्र के लिए ही निकलते हैं. हां, खाली समय में पूल ज़रुर खेलते हैं.

कोई चुहलबाज़ी या शरारत नहीं. देख कर आप कह नहीं सकते कि इस नौजवान की गेंद पिच पर आग उगलती होंगी. मयंक के चेहरे और क़द-काठी पर मत जाइए, बेहद ख़तरनाक है ये युवा खिलाड़ी.

मयंक ने पिछले दो मैचों से सुर्खि़यां ज़रूर बटोरी हैं, लेकिन दिल्ली में उनका नाम कुछ सालों से तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर चमकने लगा था.

दिल्ली के सोनेट क्रिकेट एकेडमी ने मयंक को 'राजधानी एक्सप्रेस' नाम दिया और और दिल्ली क्रिकेट के गलियारों में मयंक को 'सर पर मारने वाले गेंदबाज़' के रूप में जाना जाता है.

इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है जो पिता प्रभु यादव खुद बताते हैं.

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मयंक के पिता प्रभु यादव वेस्टइंडीज़ के दिग्गज गेंदबाज़ कर्टली एंब्रोस के फ़ैन थे. पिता की दिल्ली में एक फ़ैक्ट्री है जहां एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियों के लिए सायरन बनाए जाते हैं.

एक दिन पिता फ़ैक्ट्री से लौट रहे थे. सीधे घर जाने की बजाए वेंकटेश्वरैया कॉलेज ग्राउंड पहुँच गए जहां उनका बेटा मशहूर सोनेट क्लब में ट्रेनिंग कर रहा था.

मशहूर कोच तारक सिन्हा की इसी एकेडमी से आशीष नेहरा, शिखर धवन, ऋषभ पंत, आयुष बडोनी जैसे खिलाड़ी निकले हैं.

उस दिन पिता प्रभु यादव ने मयंक को एक बात कही थी जिसे बेटे ने गाँठ बाँधकर रख ली थी.

"तुझे पता है कर्टली एंब्रोस से लोग डरते क्यों हैं? क्योंकि वो सर पर गेंद डालता था. अगर तू चाहता है कि बल्लेबाज़ तुमसे ख़ौफ़ खाएँ तो तुम्हें भी ऐसा ही करना चाहिए."

पिता को गर्व है कि बेटा आज भी उनकी सीख को भूला नहीं है.

पहले ही मैच में फैला दी सनसनी

मयंक यादव

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बीते शनिवार को जब लखनऊ सुपर जॉइंट्स ने 21 साल के इस नौजवान को कैप दिया तो उसने पहली ही गेंद फेंकी जिसकी रफ़्तार 147 किमी प्रति घंटे मापी गई.

दुनिया भर के गेंदबाज़ों की धुनाई कर चुके जॉनी बेयरस्टो उनकी रफ़्तार से हैरान रह गए. पंजाब किंग्स के खिलाफ़ मैच में मयंक ने 24 में से 9 गेंदें 150 या उससे अधिक की रफ़्तार से डाली.

उसमें से एक गेंद की गति 155.8 किमी प्रति घंटे की थी जो इस सीज़न की सबसे तेज़ गेंद थी. मयंक ने वो गेंद पंजाब किंग्स के कप्तान शिखर धवन को डाली थी.

अपने 4 ओवर में मयंक यादव ने 27 रन देकर जॉनी बेयरस्टो, प्रभसिमरन सिंह और जितेश शर्मा के विकेट लिए. मयंक यादव आईपीएल के पहले ही मैच में ही प्लेयर ऑफ़ द मैच पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

मैच के बाद मयंक ने कहा, "आम ज़िंदगी में भी मुझे रफ़्तार पसंद है. मैं रॉकेट, जेट और सुपर बाइक पसंद है. स्पीड से मुझे रोमांच आता है."

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रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के साथ दूसरे मैच में मयंक अपनी गेंदों की गति 156.7 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले गए जो इस सीज की सबसे तेज़ गेंद है.

उन्होंने सिर्फ़ 14 रन देकर तीन विकेट लिए जिसमें रजत पाटीदार, कैमरन ग्रीन और ग्लेन मैक्सवेल जैसे दिग्गजों के विकेट शामिल थे.

अभी तक 48 में से तक़रीबन आधे गेंद डेढ़ सौ किमी की ज़्यादा की गति से डाली है.

आईपीएल इतिहास में अपने पहले ही दो मैच में मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए है.

मयंक ने लगातार दूसरी जीत के बाद कहा, "मेरा लक्ष्य देश के लिए ज़्यादा से ज़्यादा समय तक खेलना है. मुझे लगता है कि यह तो बस शुरुआत है और मेरा पूरा ध्यान अपने लक्ष्य को हासिल करने पर है."

बिहार से है परिवार का नाता

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मयंक यादव के परिवार का नाता बिहार से है. बिहार के सुपौल जिले का रतहो उनका पैतृक गाँव है, मगर मयंक का जन्म दिल्ली में हुआ है.

मयंक का परिवार दिल्ली में बस चुका है. तो दिल्ली के मोती नगर की गलियों से शुरू हुआ सफ़र अब राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के दरवाज़े पर पहुँच गया है और टी-20 विश्व कप में दावेदारी पेश कर रहा है.

मयंक के लिए इस मुक़ाम तक पहुंचना आसान नहीं था.

उन्होंने क्रिकेट के लिए स्कूल छोड़ने का फ़ैसला किया तो घर में हंगामा मच गया. तब तक मयंक का चयन कहीं के लिए नहीं हो पाया था. वे दिल्ली के पंजाबी बाग में एसएम आर्या स्कूल में पढ़ते थे.

मयंक बताते हैं, "फिर मैंने घर वालों को बोला कि मुझे केवल छह महीने दीजिए, अगर उसमें मुझसे कुछ नहीं होगा या मेरा चयन कहीं नहीं होता है तो जो आप बोलेंगे वो करूंगा."

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विराट कोहली भी पश्चिमी दिल्ली से आते हैं और मोती नगर भी उसी इलाक़े में है. तो पिता जहां कर्टली एंब्रोस के फ़ैन थे तो बेटा दक्षिण अफ़्रीकी पेसर डेल स्टेन को अपना आदर्श मानते हैं.

सोनेट क्लब के कोच मरहूम तारक सिन्हा ने 13 साल के बच्चे की प्रतिभा भाँप ली थी. मज़े की बात है कि मयंक यादव को शुरुआती दिनों में नहीं लगता था कि वो तेज गेंदबाज़ी करते हैं.

"मैं जब 14 साल का था, सोनेट क्लब में प्रैक्ट‍िस करता था. वहां मुझे कोच (तारक स‍िन्हा) सर ने बॉल दी, उस समय मेरे एज ग्रुप वाले प्रैक्ट‍िस कर रहे थे, जब मैंने अपने एज ग्रुप वालों को बॉल डाली तो उन्हें काफी परेशानी हो रहा थी, फ‍िर मुझे कोच ने कहा कि सीन‍ियर लोगों के साथ प्रैक्ट‍िस करो. उस समय मुझे कोच सर ने कहा कि तू अपने एज ग्रुप के हिसाब से बहुत तेज गेंद डालता है."

तब पहली बार मयंक यादव को इस बात का अहसास हुआ कि वो तेज़ गेंदबाजी़ कर सकते हैं.

अपनी प्रतिभा पर शुरू से ही भरोसा

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मयंक के दिल्ली के लिए अंडर-14 और अंडर-16 खेलने का मौक़ा नहीं मिल पाया.

साल 2020 में मयंक यादव ने सर्विसेज़ की टीम की ओर से खेलने और नौकरी का ऑफ़र ठुकरा दिया था. कोच तारक सिन्हा इस बात को लेकर मयंक से ग़ुस्सा हो गए थे.

मयंक उस दिन के बारे में बताते हैं, "जब सर्विसेज़ वालों ने मुझे बताया कि मेरा चयन हो गया है तो मैं भाग गया. ट्रायल मैं मैंने अपना 50 प्रतिशत भी नहीं दिया था. मैंने तीन या चार बाउंसर फेंकी, जिससे वे प्रभावित थे. लेकिन मैं दिल्ली के लिए खेलना चाहता था."

मयंक ने ग़ुस्साए तारक सिन्हा को समझाने की कोशिश कर रहे थे, "सर मैं दिल्ली का लड़का हूं और यहीं से खेलना था."

मयंक यादव ने किसी तरह उन्हें भरोसा दिलाया कि कभी न कभी उन्हें दिल्ली की टीम में मौक़ा मिलेगा.

दुर्भाग्यवश कोच तारक सिन्हा की कोविड के कारण 2021 में निधन हो गया. उनके जाने के एक महीने बाद मयंक को विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी के लिए दिल्ली की टीम में शामिल कर लिया गया.

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मयंक ने अब तक दिल्ली के लिए एक फर्स्ट क्लास मैच खेला है जिसमें उन्होंने दो विकेट लिए हैं. इसके अलावा मयंक ने 17 लिस्ट-ए मैचों में 34 विकेट लिए हैं. जबकि 13 टी-20 मैचों में उनके नाम पर 18 विकेट दर्ज हैं.

लखनऊ सुपर जॉइंट्स ने साल 2022 में 20 लाख की बेस प्राइस पर ख़रीदा था. मगर उस साल उन्हें खेलने का मौक़ा नहीं मिला. कई लोग कह रहे हैं कि मयंक यादव को दो साल से बैठाकर रखा गया था.

मगर सच्चाई ये है कि पिछले साल वह पूरी तरह फ़िट नहीं थे. मगर घर जाने की बजाय टीम से जुड़े रहे ताकि बाक़ी खिलाड़ियों से कुछ नया सीख सकें.

अभ्यास सत्र के दौरान उनके चेहरे पर नहीं खेल पाने की बेबसी देखी जा सकती थी. मगर टीम मैनेजमेंट ने उनका पूरा ख़्याल रखा. चोटिल होने के बाद भी उन्हें वापस घर नहीं भेजा गया और फ़ी भी नहीं काटी गई. लखनऊ सुपर जाइंट्स टीम मैनेजमेंट और कोच को उनकी प्रतिभा और क्षमता पूरा यक़ीन रहा है.

तेज़ गेंदबाज़ों के व्यक्तित्व में एक आक्रामकता होती है मगर मयंक बेहद सौम्य हैं. मुझे पिछले साल आईपीएल शुरू होने के पहले लखनऊ सुपर जॉइंट्स के तीन खिलाड़ियों के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर जाने का सौभाग्य मिला था. मयंक यादव ने बाक़ियों की तरह कोई नख़रा नहीं दिखाया था.

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