वीमेंस आईपीएल चैंपियन को मिली इनामी रक़म की अहमियत क्या है?

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    • Author, शारदा उगरा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

वीमेंस प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए एक मैच के दौरान क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी ने मुझसे कहा, “लगता है कि हम लोगों को बाउंड्री बड़ी करनी चाहिए.”

दरअसल डब्ल्यूपीएल के दूसरे सीज़न में 22 मैचों के दौरान कुल 66 छक्के और 295 चौके लगे यानी प्रत्येक मैच में औसतन तीन छक्के और 13 चौके देखने को मिले.

ज़ाहिर तौर पर इससे लीग के टीवी प्रसारक ख़ुश हुए होंगे क्योंकि टीवी प्रसारक की वजह से ही बाउंड्री छोटी की गई थी, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा छक्के-चौके लगें. कुछ स्टेडियम में तो बाउंड्री 40 मीटर की ही थी.

इन मैचों को देखने के लिए स्टेडियम में हज़ारों की संख्या में दर्शक भी पहुंच रहे थे.

इन लोगों ने देखा कि दुनिया की सबसे बेहतरीन महिला क्रिकेटरों की काबिलियत और दमखम के सामने ये छोटे स्टेडियम, किसी अपमान सरीखे ही थे.

जैसा कि क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी ने माना कि वीमेंस प्रीमियर लीग के दूसरे सीज़न ने साबित किया है कि बाउंड्री को बड़ा बनाने की ज़रूरत है. इसकी ज़रूरत केवल मैदान में ही नहीं बल्कि हमारी कल्पनाओं के लिहाज़ से भी है.

भारतीय महिला क्रिकेट में कितनी संभावना है और देश की सबसे बड़ी महिला टीम लीग से इसे कितनी मदद मिल सकती है, जैसे सवालों के जवाब भी मिल गए हैं.

आरसीबी की जीत का जश्न

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रविवार की रात, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के चैंपियन बनने का जश्न उनके अपने घरेलू शहर में तो मना ही साथ में आतिशबाज़ी और हूटर बजाते हुए उनकी जीत का जश्न दिल्ली में मनाया गया.

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वैसे फ़ाइनल मुक़ाबले में बैंगलोर की टीम ने मेज़बान दिल्ली कैपिटल्स की टीम को हराया था.

फैंस दिल्ली मेट्रो में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के पक्ष में जश्न मनाते दिखे.

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रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम 17 बार कोशिशों के बाद (15 बार पुरुष टीम और दो बार महिला टीम) पहली बार चैंपियन बनने में कामयाब हुई है. कन्नड़ में टीम का एक पॉपुलर स्लोगन है- ई साला कप नमदे यानी इस साल कप हमारा होगा. लेकिन स्मृति मंधाना की टीम के लिए ये स्लोगन थोड़ा बदल गया है- ई साला कप नमदू यानी इस साल कप हमारा हो गया.

पूरे सीज़न के दौरान आरसीबी के प्रशंसकों ने डब्ल्यूपीएल मैचों के पहले दौर के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम में शोर के स्तर और भीड़ को बढ़ाते हुए महिला टीम का उत्साह उसी तरह से बढ़ाया जैसा कि वे विराट कोहली के लिए करते हैं.

वीमेंस प्रीमियर लीग का पहला सीज़न मुंबई में खेला गया था. इसके बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने लीग के दौरान घरेलू और बाहरी पिच पर मैच कराने का वादा किया था लेकिन वह वादा पूरा नहीं हो पाया था. लेकिन दूसरे सीज़न में बोर्ड ने उन दो शहरों को मेज़बान बनाया जिन शहरों की पुरुष आईपीएल टीमें भी हैं. वीमेंस प्रीमियर लीग को जिस तरह का समर्थन इन दोनों शहरों में मिला, उसने एक बार फिर यह ज़ाहिर किया कि सच्चे क्रिकेट प्रेमी भारत में हर जगह मौजूद हैं.

अगर सही मदद और प्रोत्साहन मिले तो महिला क्रिकेट में कितनी संभावना, विविधता और रेंज हो सकती हैं, इसे वीमेंस प्रीमियर लीग ने एक बार फिर से दुनिया को दिखाया है.

नई प्रतिभाओं को मौक़ा

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भारतीय क्रिकेट फ़ैंस देश में प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या को देख रहे हैं और इन खिलाड़ियों को पुरुषों के तरह प्रतिभा दिखाने के लिए मौक़े देने की ज़रूरत भी महसूस की जा रही है.

वीमेंस प्रीमियर लीग फ़िलहाल पांच टीमों और 22 मैचों तक ही सीमित है. यह मीडिया राइट्स को लेकर हुए अनुबंध के चलते हैं. हालांकि 2027 में जब नए सिरे से मीडिया राइट्स का अनुबंध होगा तब अगर कम से कम दो या दो से अधिक टीमों को शामिल नहीं किया जाता है, तो यह एक तरह से नाइंसाफ़ी होगी.

वीमेंस प्रीमियर लीग के दूसरे सीज़न में हमलोगों ने देखा कि भारतीय महिला टीम की प्रतिष्ठित खिलाड़ी- शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने अपनी अपनी टीमों के लिए बेहतरीन भूमिका निभाई. वहीं युवा खिलाड़ियों में विकेटकीपर बैटर ऋचा घोष सबसे प्रभावी फिनिशर के तौर पर उभरी हैं.

लेकिन सबसे बड़ा आनंद कुछ नयी प्रतिभाओं के प्रदर्शन को देखकर मिला, जैसे कि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की स्पिन जोड़ी ने कमाल कर दिखाया. ऑफ़ स्पिनर श्रेयंका पाटिल और 33 साल की लेग स्पिनर आशा सोभना ने आख़िरी ओवरों में सधी हुई गेंदबाज़ी की.

ख़ासकर एलिमिनेटर मुक़ाबले में इन दोनों की वजह से डिफेंडिंग चैंपियन मुंबई इंडियंस को हार का सामना करना पड़ा. इस सीज़न के दौरान उभरे खिलाड़ियों की वजह से भारतीय चयनकर्ताओं के सामने अब कहीं ज़्यादा विकल्प होंगे. यह इस लिहाज़ से भी अहम है कि अगले साल भारत 50 ओवरों के आईसीसी वीमेंस वर्ल्ड कप की मेज़बानी करने वाला है.

वीमेंस प्रीमियर लीग दुनिया की दूसरी क्रिकेट लीगों की तुलना में कहां है, ये सवाल भी उठता है. प्राइज़ मनी के हिसाब से यह दूसरी लीगों से आगे है. इंग्लैंड में 100 प्रतियोगिता में महिला और पुरुष दोनों में विजेता टीम को एक समान 1.5 करोड़ रुपये की इनामी रक़म मिलती है.

इंग्लैंड की घरेलू महिला टी-20 चार्लोट एडवर्ड्स कप में कुल इनामी रक़म 1.3 करोड़ रुपये की है. ऑस्ट्रेलिया में महिला बिग बैश लीग की इनामी रक़म का पता लगाना मुश्किल चुनौती है क्योंकि वहां प्रतियोगिता की सभी टीमें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया यानी ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड की ही टीमें हैं.

सबसे बड़ी लीग और इनामी रक़म

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वहां लीग में प्रत्येक खिलाड़ी कितना पैसा कमाते हैं, इसके ब्रेकअप दिए जाते हैं. अप्रैल 2023 में वीमेंस बिग बैश लीग के दौरान खिलाड़ियों को अनुबंधित करने की रक़म को बढ़ाकर क़रीब 29 लाख रुपये किया गया था. बहुत संभव है कि यह वीमेंस प्रीमियर लीग के खिलाड़ियों की औसत आमदनी के बराबर हो या उससे ज़्यादा ही हो.

लेकिन वीमेंस प्रीमियर लीग सीज़न 2 में चैंपियन बनने के बाद रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम को इनामी रक़म के तौर पर छह करोड़ रुपये मिले. क्या यह महिलाओं की खेल की दुनिया की सबसे बड़ी इनामी रक़म है? नहीं, यह दूसरे नंबर पर है.

महिला खिलाड़ियों के लिए दुनिया की दो सबसे बड़ी लीग आयोजन हैं- अमेरिकी बास्केटबॉल में वीमेंस एनबीए और यूरोपियन फ़ुटबॉल में यूईएफ़ए वीमेंस चैंपियंस लीग (यूडब्ल्यूसीएल).

वीमेंस एनबीए की इनामी रक़म, वीमेंस प्रीमियर लीग की तुलना में कम है. वहां चैंपियन टीम को 4.1 करोड़ रुपये मिलते हैं. लेकिन इस साल यूरोपियन वीमेंस चैंपियंस लीग की विजेता टीम को जीते हुए मैचों के आधार पर कुल 12.6 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. यह फ़ाइनल 25 मई को खेला जाएगा.

हालांकि अभी महिला क्रिकेट को एक लंबी दूरी तय करनी है और उन्हें ऐसा करने के लिए जगह देनी होगी. सबसे पहले बाउंड्री की साइज़ को बढ़ाना होगा, नियमों के मुताबिक़ वीमेंस टी-20 क्रिकेट में बाउंड्री न्यूनतम 54.66 मीटर से अधिकतम 64 मीटर तक होनी चाहिए.

वहीं पुरुषों की टी-20 इंटरनेशनल में बाउंड्री की साइज़ न्यूनतम 59.4 मीटर और अधिकतम 82.3 मीटर हो सकती है.

वीमेंस प्रीमियर लीग के पहले सीज़न में यूपी वॉरियर्स की टीम के ख़िलाफ़ सोफी डिवाइन ने 94 मीटर लंबा छक्का लगाया था. ऐसे में अगले वीमेंस प्रीमियर लीग में भारतीय क्रिकेट बोर्ड को बाउंड्री का साइज़ बढ़ाकर कम से कम 55 मीटर करना चाहिए. इससे महिला क्रिकेटरों को वह सम्मान मिल पाएगा, जो उन्होंने अर्जित किया है.

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