ईरान और इसराइल-अमेरिका के टकराव पर भारत, पाकिस्तान समेत इन देशों ने क्या कहा

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ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्यपूर्व के कई देशों को निशाना बनाया है.
अमेरिका ने मध्य-पूर्व में मौजूद अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है.
अमेरिका की ओर से जारी बयान में कहा गया, "अमेरिकी सरकार संयुक्त अरब अमीरात, दोहा और बहरीन में अपने नागरिकों से 'घर के अंदर ही सुरक्षित रहने' की अपील करती है."
अमेरिका-इसराइल के ईरान पर हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई पर दुनियाभर के देशों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है.
इन हमलों के बाद भारत ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बने हालात पर चिंता जाहिर की है. वहीं रूस और चीन ने ईरान पर अमेरिका-इसराइल के हमलों की निंदा की है. जबकि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील नाकाम होने पर चिंता जताई है.
यूरोपीय देशों ने भी ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमले पर प्रतिक्रिया दी है.
सऊदी अरब,और कतर ने अपनी जमीन पर किए गए ईरान के हमलों की निंदा की है और जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है.
भारत, चीन और रूस ने क्या कहा

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भारत के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल की घटनाओं से भारत बहुत चिंतित है. हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव ना बढ़ाने और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हैं.
बयान में कहा गया है, "तनाव कम करने और संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए. सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए."
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस क्षेत्र में भारत के दूतावास भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं.
मंत्रालय के मुताबिक़ भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करने की सलाह जारी की गई है.
वहीं चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "अमेरिका और इसराइल के ईरान पर किए गए सैन्य हमलों को लेकर चीन बेहद चिंतित है. ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए."
"चीन सैन्य कार्रवाई को तत्काल रोकने, तनावपूर्ण स्थिति को और बढ़ने से रोकने, संवाद और बातचीत को फिर से शुरू करने और मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का आह्वान करता है."
रूस के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले की निंदा की.
रूस ने कहा कि वह 'शांतिपूर्ण समाधान' खोजने में मदद कर सकता है.
रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने टेलीग्राम चैनल पर जारी किए गए बयान में कहा, "हम मांग करते हैं कि तुरंत राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान के रास्ता पर लौटना चाहिए."
रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इसराइल पर क्षेत्र को 'मानवीय, आर्थिक और संभवतः रेडियोलॉजिकल त्रासदी' की ओर धकेलने का आरोप लगाया.
पाकिस्तान ने कहा- 'बातचीत टूटने से निराश हैं'

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पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में बातचीत के टूटने और शत्रुता के बढ़ने पर अफ़सोस जताता है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है,'' पाकिस्तान ईरान के इस्लामी गणराज्य पर बिना उकसावे किए गए हमलों की निंदा करता है. ये हमले उस समय हुए हैं जब राजनयिक प्रयास एक शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से समाधान की दिशा में बढ़ रहे थे.''
''ऐसी कार्रवाई पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता को कमज़ोर कर सकती है और इसके दूरगामी नतीजे हो सकते हैं. पाकिस्तान ईरान द्वारा सऊदी अरब, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे भाईचारे वाले देशों पर किए गए हमलों की भी कड़ी निंदा करता है. ''
''पाकिस्तान इन सभी देशों के साथ एकजुट है और अधिकतम संयम बरतने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है. ये बिना उकसावे वाले हमले इन देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन हैं.''
'' पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात में इस हमले के दौरान एक पाकिस्तानी नागरिक की दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर भी दुख व्यक्त करता है. पाकिस्तान सभी पक्षों से अपील करता है कि वे किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचें जो क्षेत्र के अन्य देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डाल सकती हो.''
बयान में कहा गया है, ''पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है.''
यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया

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अमेरिका और इसराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यूरोपीय देशों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने याद दिलाया कि यूरोपीय संघ ने ईरान के "हत्यारे शासन" के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं.
उन्होंने कहा, "हम सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह सम्मान करने की अपील करते हैं."
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के कार्यालय ने ईरान की आम जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की.
उनके बयान में कहा गया कि नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के सम्मान की मांग जारी रहेगी.
साथ ही यह भी कहा गया कि मेलोनी तनाव कम करने के प्रयासों के लिए अपने सहयोगियों और क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत करेंगी.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा कि उनका देश "दमन के खिलाफ संघर्ष कर रहे ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है" और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करता है.
उधर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने अमेरिका और इसराइल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान द्वारा पड़ोसी देशों पर की गई जवाबी कार्रवाई की निंदा की है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज़ के साथ जारी संयुक्त बयान में स्टार्मर ने कहा, " फ़्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम लगातार ईरानी शासन से यह मांग करते रहे हैं कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम समाप्त करे, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाए, क्षेत्र और हमारे देशों में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियां बंद करे, और अपने ही लोगों के खिलाफ हो रही भयानक हिंसा और दमन को रोके.''
''हमने इन हमलों में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन हम अमेरिका, इसराइल और क्षेत्र के अन्य साझेदारों सहित अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम क्षेत्रीय स्थिरता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं.''
मध्यपूर्व के देशों पर ईरान के हमलों की निंदा

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सऊदी अरब ने कुछ मध्यपूर्व देशों पर ईरान के जवाबी हमले की निंदा की है.
सऊदी अरब ने कहा है, ''हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं. ईरान को अंधाधुंध सैन्य हमलों से बचना चाहिए. हम ईरानी नेतृत्व से अपील करते हैं कि वह बातचीत के जरिए समाधान तलाशे. अंततः ईरान के लोगों को अपना भविष्य स्वयं तय करने की अनुमति मिलनी चाहिए."
सऊदी अरब ने ईरान के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है. सऊदी अरब ने इसे ईरान की संप्रभुता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन किया है.
ईरान के हमलों को उसने संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, कुवैत और जॉर्डन की संप्रभुता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन किया है.
सऊदी अरब ने कहा है कि वो इन देशों के साथ मजबूती से खड़ा है और उन्हें अपने भाई जैसा मानता है.
अगर इन देशों को सऊदी अरब से किसी मदद की जरूरत हुई तो वो इसके लिए पूरी तरह तैयार है.
सऊदी अरब ने कहा है कि अगर इन देशों की संप्रभुता का लगातार उल्लंघन होता रहा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है.
क़तर ने ईरान द्वारा क़तरी क्षेत्र को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की है.
इसे उसने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन, अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला, तथा ऐसा अस्वीकार्य उकसावा बताया है जो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालता है.
क़़तर के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि क़तर अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रावधानों के अनुसार इस हमले का जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है. यह जवाब हमले की प्रकृति के अनुरूप और संतुलित होगा, ताकि उसकी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सके.
विदेश मंत्रालय ने यह भी जोर देकर कहा कि क़तर हमेशा से और अब भी ईरान के साथ संवाद का प्रमुख समर्थक रहा है.
वह लगातार यह कहता रहा है कि मतभेदों को सुलझाने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत ही है, ताकि क्षेत्र को तनाव बढ़ने के खतरों से बचाया जा सके.
मंत्रालय ने कहा कि क़तरी क्षेत्र को निशाना बनाना अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है और इसे किसी भी बहाने या तर्क के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















