क्या ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी ख़तरा बना हुआ है?

ईरान की राजधानी तेहरान में लगा एक पोस्टर जून 2025 में इसराइली हमलों और यूरेनियम एनरिचमेंट उपकरणों को दिखा रहा है.

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इमेज कैप्शन, ईरान की राजधानी तेहरान में लगा एक पोस्टर जून 2025 में इसराइली हमलों और यूरेनियम एनरिचमेंट उपकरणों को दिखा रहा है.
    • Author, लुईस बरुचो
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
  • पढ़ने का समय: 11 मिनट

ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर चर्चा में है.

अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने विमान और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं.

माना जा रहा है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होता तो अमेरिका उसके ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई कर सकता है.

19 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि अगर कोई 'सार्थक समझौता' नहीं हुआ, तो 'ख़राब बातें' होंगी.

उन्होंने अपना रुख़ दोहराते हुए कहा, ''ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता. यह बहुत सीधी बात है. अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होंगे तो मध्य पूर्व में शांति संभव नहीं है."

जबकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसने कभी परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं की. लेकिन कई देशों और दुनिया की परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी को इस पर भरोसा नहीं है.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी किस हाल में है?

ईरान परमाणु कार्यक्रम

जून 2025 में इसराइल और ईरान के बीच 12 दिन तक चले युद्ध के दौरान ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर कई हमले हुए थे. उस समय ये पता नहीं था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम किस हाल में है.

अमेरिका भी कुछ समय के लिए इस युद्ध में शामिल हुआ था और उसने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे.

जिन परमाणु ठिकानों पर हमले किए गए थे उनमें इस्फ़हान में ईरान का सबसे बड़ा न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर, नतांज़ और फ़ोर्दो में मौजूद यूरेनियम एनरिचमेंट सेंटर शामिल थे.

यूरेनियम एनरिचमेंट का मतलब उसके कुछ आइसोटोप को बढ़ाना है ताकि इसे न्यूक्लियर ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.

ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद ट्रंप ने कहा कि ये परमाणु ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए हैं.

लेकिन एक हफ़्ते बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफ़ेल ग्रोसी ने कहा कि हमलों से गंभीर नुक़सान हुआ है लेकिन 'पूरी तरह तबाही' नहीं हुई.

उन्होंने संकेत दिया था कि कुछ महीनों के भीतर यूरेनियम एनरिच करने की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है.

डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

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अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि जब 13 जून 2025 को इसराइल ने हवाई हमले शुरू किए, उस समय ईरान के पास 60 फ़ीसदी तक शुद्धता वाला 440 किलो एनरिच यूरेनियम का भंडार था.

ये लेवल 90 फ़ीसदी के हथियार-ग्रेड यूरेनियम से सिर्फ़ एक छोटा तकनीकी कदम दूर है.

आईएईए के प्रमुख राफ़ेस ग्रॉसी ने अक्तूबर में एसोसिएटेड प्रेस से कहा था कि अगर इस यूरेनियम को और एनरिच किया जाए तो यह दस परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है.

नवंबर में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने 'द इकोनॉमिस्ट' से कहा था कि यूरेनियम एनरिचमेंट 'अब रुक चुका' है.

लेकिन पिछले महीने उन्होंने फॉक्स न्यूज़ से कहा, "हां, आपने संयंत्रों और मशीनों को नष्ट कर दिया है लेकिन तकनीक पर बम नहीं गिराया जा सकता और न ही हमारे संकल्प को बम से ख़त्म किया जा सकता है."

जनवरी में रॉयटर्स से बातचीत में ग्रॉसी ने कहा कि आईएईए उन 13 परमाणु स्थलों का निरीक्षण कर सका है, जिन पर बमबारी नहीं हुई थी. लेकिन जिन तीन मुख्य स्थलों पर हमले हुए वहां निरीक्षण नहीं हो सका.

उन्होंने यह भी बताया कि सात महीने हो चुके हैं जब आईएईए ने आख़िरी बार ईरान के हाई लेवल एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार की पुष्टि की थी.

अब भी कई अहम सवालों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, ख़ासकर यूरेनियम के भंडार की मौजूदा स्थिति और स्थान को लेकर. साथ रही एनरिचमेंट संयंत्रों की हालत को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई थी.

हालात यहां तक कैसे पहुंचे

 सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने 2015 में प्रतिबंधों में राहत के बदले अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करने पर सहमति दी थी.

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इमेज कैप्शन, सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने 2015 में प्रतिबंधों में राहत के बदले अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करने पर सहमति दी थी.

ईरानी का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नागरिक उद्देश्यों के लिए है. ईरान परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर कर चुका है.

यह संधि देशों को चिकित्सा, कृषि और ऊर्जा जैसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु तकनीक इस्तेमाल करने की अनुमति देती है, लेकिन परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाती है.

हालांकि आईएईए की लगभग दस साल लंबी जांच में पाया गया कि ईरान ने 1980 के दशक के अंत से लेकर 2003 तक 'परमाणु विस्फ़ोटक उपकरण के विकास से जुड़ी कई गतिविधियां की थीं.'

आएईए के मुताबिक़ बाद में इसे रोक दिया गया था. इसे प्रोजेक्ट अमाद कहा जाता है. लेकिन 2009 में पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने फ़ोर्दो न्यूक्लियर संयंत्र को खोज निकाला था.

2015 में आईएईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2009 के बाद ईरान में परमाणु विस्फोटक उपकरण के विकास से जुड़ी किसी गतिविधि के 'विश्वसनीय संकेत' नहीं मिले.

2015 में ही ईरान ने दुनिया के छह ताक़तवर देशों के साथ एक समझौता किया. इस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख़्त को मंजूर कर लिया. बदले में उस पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी गई.

इस समझौते के मुताबिक़ यूरेनियम एनरिचमेंट की सीमा 3.67 फ़ीसदी तय की गई थी. ये परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त है और फ़ोर्दो में एनरिचमेंट रोक दिया गया. साथ ही एनरिचमेंट पर कड़ी निगरानी लागू की गई.

लेकिन 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया. उनका तर्क था कि यह समझौता ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने में पर्याप्त नहीं है. इसके बाद अमेरिका ने फिर से प्रतिबंध लगा दिए.

इसके जवाब में ईरान ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया. उसने यूरेनियम को 60 फ़ीसदी तक एनरिच किया. एडवांस सेंट्रीफ्यूज लगाए और फ़ोर्दो में फिर से एनरिचमेंट शुरू कर दिया.

12 जून 2025 को आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि ईरान ने दो दशकों में पहली बार अपने परमाणु अप्रसार दायित्वों का उल्लंघन किया है.

इसके अगले ही दिन, इसराइल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए.

क्या ईरान अपने परमाणु संयंत्रों को लेकर काम कर रहा है

ईरान परमाणु कार्यक्रम

हाल के महीनों में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि नतांज़ और इस्फ़हान दोनों परमाणु ठिकानों पर काम हो रहा है.

अमेरिका में मौजूद थिंक टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड (आईएसआईएस) इंटरनल सिक्योरिटी की ओर से देखी गई सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक़ इस्फ़हान में सुरंग परिसर के सभी प्रवेश द्वार अब मिट्टी से बंद दिखाई दे रहे हैं. वहां एक नई छत भी बनाई गई है.

तस्वीरों से यह भी पता चलता है कि नतांज़ में मौजूद परमाण ठिकाने पर भी एक छत बनाई गई है.

आईएसआईएस ने सबसे पहले जिन तस्वीरों का विश्लेषण किया था उनमें ये भी दिखाई दिया. हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में यह भी दिखा है कि ईरान माउंट कोलंग गाज़ ला नामक एक अंडरग्राउंड परिसर को मजबूत कर रहा है.

इसे पिकैक्स माउंटेन भी कहा जाता है. यह स्थान इसराइल या अमेरिका के हमलों का निशाना नहीं बना था और यह नतांज़ परमाणु संयंत्र से लगभग दो किलोमीटर दक्षिण में स्थित है.

ईरान को एक परमाणु हथियार बनाने में कितना समय लगेगा?

आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी का कहना है कि एजेंसी ने हाल के महीनों में ईरान के हाई लेवल के एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार की पुष्टि नहीं की है.

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इमेज कैप्शन, आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी का कहना है कि एजेंसी ने हाल के महीनों में ईरान के हाई लेवल के एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार की पुष्टि नहीं की है.

हथियार-ग्रेड (90 फ़ीसदी के आसपास ) यूरेनियम तैयार करना और एक इस्तेमाल करने लायक परमाणु हथियार बनाना, दोनों अलग बातें हैं.

परमाणु हथियार को मिसाइल से दागने योग्य बनाने के लिए कई अतिरिक्त तकनीकी चरणों की ज़रूरत होती है.

अमेरिका की रक्षा खुफ़िया एजेंसी डिफ़ेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) ने पिछले साल मई में इसराइल और अमेरिका के हमलों से पहले एक आकलन किया था. इसके मुताबिक़ उस समय ईरान 'संभवतः एक सप्ताह से भी कम समय में' पहले न्यूक्लियर डिवाइस के लिए पर्याप्त हथियार-ग्रेड यूरेनियम तैयार कर सकता था.

हालांकि इस बात पर अलग-अलग आकलन हैं कि क्या ईरान समृद्ध यूरेनियम को हथियार में बदलने की क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है.

डीआईए की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ''ईरान लगभग निश्चित रूप से परमाणु हथियार नहीं बना रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में उसने ऐसी गतिविधियां की हैं जो अगर वह चाहे तो उसे हथियार बनाने की बेहतर स्थिति में ला सकती हैं.''

लेकिन इसराइली सेना ने जून में कहा कि उसके पास ऐसी ख़ुफ़िया जानकारी है, जिससे पता चलता है कि 'ईरानी शासन' ने परमाणु बम के लिए लायक वेपन कंपोनेंट उत्पादन की कोशिश में ठोस तरक्की की है.

हथियार नियंत्रण विशेषज्ञ पेट्रिसिया लेविस कहती हैं, ''2003 तक ईरान ने वारहेड के डिज़ाइन में कुछ क्षमता विकसित कर ली थी लेकिन उसके बाद कार्यक्रम रुकता हुआ दिखाई दिया."

हालांकि उनका कहना है, ''2015 के परमाणु समझौते के टूटने और नए समझौते की दिशा में बातचीत की लगातार विफलता के बाद यह संभव है कि ईरान ने फिर से वारहेड क्षमता विकसित करने का फैसला किया हो."

18 फरवरी को जब आईएई के प्रमुख राफ़ेल ग्रॉसी से पूछा गया कि क्या एजेंसी ने सक्रिय हथियार विकास के कोई संकेत देखे हैं, तो उन्होंने फ़्रेंच ब्रॉडकास्टर टीफआई से कहा-नहीं.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों में ''समझौते तक पहुंचने की इच्छा'' दिखाई देती है.

ईरान का परमाणु हथियार क्यों मायने रखेगा?

पश्चिमी देशों के नेता लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार मिलने से रोकने की कोशिश करनी चाहिए. किसी भी हालत में उसे परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए.

मई 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गया तो ''दुनिया तबाह हो जाएगी."

2024 के चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि इससे ''पूरी तरह अलग दुनिया बन जाएगी. पूरी तरह अलग तरह की बातचीत होगी'' और इसराइल ख़त्म हो जाएगा.''

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने परमाणु हथियारों से लैस ईरान को ''क्षेत्र की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा ख़तरा'' बताया है.

ब्रिटेन के थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट (आरयूएसआई) के मध्य पूर्व विशेषज्ञ डॉ. एच ए हेलियर का कहना है, ''यह क्षेत्रीय तनाव बढ़ाएगा और ख़सकर इसराइल और अमेरिका के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट को और जटिल बना देगा.''

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु हथियार हासिल करने से ईरान की इस क्षेत्र में और अधिक हिम्मत बढ़ सकती है.

चीन और रूस के साथ उसके बढ़ते संबंध और मजबूत हो सकते हैं और इससे सऊदी अरब के साथ हथियारों की होड़ भी शुरू हो सकती है.

इसराइल के पास परमाणु हथियार होने की बात मानी जाती है. हालांकि वह इसकी न तो पुष्टि करता है और न ही इनकार करता है.

हेलियर का कहना कि ऐसे में अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हो तो तुरंत तनाव बढ़ने के बजाय म्यूचुअल डेटरेंस की स्थिति पैदा होगी. यानी दोनों ओर से रक्षा कवच हासिल करने की क्षमता होगी.

उनका कहना है कि क्षेत्र के ज़्यादातर "एक काल्पनिक ईरानी बम" की तुलना में "इसराइल की ताक़त" को अधिक तात्कालिक और अस्थिर करने वाली सुरक्षा चिंता मानते हैं.

हालांकि, उनके अनुसार परमाणु हथियारों से लैस ईरान को लेकर एक बड़ा जोख़ि यह होगा कि टकराव के समय "गलत आकलन' यानी मिसकैलकुलेशन की आशंका बढ़ जाएगी.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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