यूएसएस अब्राहम लिंकन: ईरान की सीमा के पास पहुँचे अमेरिकी युद्धपोत के बारे में क्या पता है?

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- Author, हबीबी आज़ाद
- पदनाम, बीबीसी फ़ारसी फ़ैक्ट चेक
ईरान भर में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है.
इन प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका, ईरान पर हमला कर सकता है.
इसका संकेत तब मिला जब इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 'एक बड़ा समुद्री बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है.' हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि 'इसे इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.'
बीबीसी फ़ारसी की फैक्ट-चेकिंग टीम पिछले हफ्तों के दौरान मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक जहाज़ों की गतिविधियों पर नज़र रख रही थी.
हाल के हफ़्तों में अमेरिकी विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' की चर्चा सबसे ज़्यादा हो रही है.
यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत 1989 में अमेरिकी नौसेना में शामिल हुआ था और इसे अमेरिका के सबसे बड़े और अत्याधुनिक विमानवाहक पोतों में से एक माना जाता है.
हालांकि इस पोत ने अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया है, फिर भी विभिन्न तरीकों से इसकी निगरानी संभव है. कोई जहाज़ अगर अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद भी कर दे, तो भी वह पूरी तरह विशेषज्ञों की नज़र से गायब नहीं होता.

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इस मामले में हम Flightradar24 वेबसाइट के ज़रिए विमानवाहक पोत के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टरों को ट्रैक करने में सफल रहे और उनके आधार पर पोत की संभावित स्थिति का अनुमान लगाया.
ये हेलीकॉप्टर आमतौर पर विमानवाहक पोतों के साथ उड़ते हैं. इनके ज़रिए गश्त करने, सैनिकों को ले जाने या लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए जैसे काम किए जाते हैं.
इन जानकारियों के मुताबिक, यूएसएस अब्राहम लिंकन ने 14 जनवरी को दक्षिण चीन सागर से मध्य पूर्व की ओर यात्रा शुरू की थी और 26 जनवरी को इसकी संभावित स्थिति ओमान के तट के पास थी.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर पुष्टि की कि यूएसएस अब्राहम लिंकन हिंद महासागर में प्रवेश कर चुका है.
सेंट्रल कमांड ने कहा कि इसे मध्य पूर्व में 'क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने' के लिए तैनात किया गया है.

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विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन की एक झलक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड रक्षा मंत्रालय की छह लड़ाकू कमांड में से एक है और यह मध्य पूर्व क्षेत्र को कवर करती है, जिसमें ईरान भी शामिल है. मिस्र और मध्य एशिया भी इसके दायरे में आते हैं.
11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद इराक़, अफ़गानिस्तान और सीरिया इसके प्रमुख सक्रिय अभियान क्षेत्र रहे हैं.
अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति के नाम पर रखा गया यह विमानवाहक पोत 11 नवंबर 1989 को सेवा में आया था और यह अमेरिकी नौसेना के अटैक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है.
अब्राहम लिंकन के साथ इस समूह में तीन गाइडेड मिसाइल विध्वंसक भी शामिल हैं. ये हैं - यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुएंस, और यूएसएस माइकल मर्फी.

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इस पोत पर F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, EA-18G ग्राउलर, F-35C फाइटर जेट और MH-60R हेलीकॉप्टर तैनात हैं।
यूएसएस अब्राहम लिंकन की लंबाई लगभग 333 मीटर से थोड़ी कम है और इसकी अधिकतम चौड़ाई करीब 77 मीटर है. इसका वजन लगभग एक लाख टन है और यह करीब 56 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता है. इस विमानवाहक पोत को पहले भी कई बार अरब की खाड़ी और ओमान सागर में तैनात किया जा चुका है.
1990 के दशक में 'डेज़र्ट स्टॉर्म' अभियान के दौरान, जिसका उद्देश्य कुवैत से इराक़ी सेनाओं को बाहर करना था, इसे क्षेत्र में टोही मिशनों के लिए भेजा गया था. इसके बाद 1995, 1998 और 2000 में भी यह अरब खाड़ी में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के गश्ती अभियानों, जिन्हें 'ऑपरेशन सदर्न वॉच' कहा जाता है, में शामिल रहा.
मार्च 2003 में इराक़ पर अमेरिकी हमले से ठीक पहले इस युद्धपोत को मध्य पूर्व में तैनात किया गया था.
उस समय ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी और यूरोपीय तेल प्रतिबंधों का सामना कर रहा था. इसके अलावा होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












