अजित पवार: चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ने से लेकर डिप्टी सीएम तक का सफ़र

शरद पवार के साथ अजित पवार

इमेज स्रोत, Rahul Raut/Hindustan Times via Getty Images

"हयात ले के चलो, कायनात ले के चलो

चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो"

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार ने 28 जून 2024 को बजट सत्र के दौरान मख़दूम मुहिउद्दीन का यह शेर पढ़ा था.

उनकी राजनीतिक यात्रा को ये पंक्तियां बख़ूबी दर्शाती हैं. उनकी आदत कुछ-कुछ ऐसी ही रही, सियासत के ठीक-ठाक जानकार भी बमुश्किल ही बता पाएं कि अजित पवार की शत्रुता किससे थी.

वे अपनों के साथ भी रहे, ग़ैरों के साथ भी.

अजित पवार ने इस बात को चरितार्थ किया कि 'सियासत में न तो कोई स्थाई दोस्त है और न ही स्थाई दुश्मन.'

28 जनवरी को एक प्लेन हादसे में उनकी मौत हो गई. उनकी मौत पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी से लेकर कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने शोक प्रकट किया है.

अजित पवार ने अपने चाचा और भारतीय राजनीति में 'चाणक्य' की उपमा पाने वाले शरद पवार से अलग राह बनाई.

उन्होंने अधिकांश राजनीति चाचा के साथ रहकर ही की, लेकिन 2023 में उन्होंने अलग राह चुन ली थी.

अजित पवार का बचपन और शुरुआती राजनीतिक यात्रा

अजित पवार

इमेज स्रोत, Anshuman Poyrekar/Hindustan Times via Getty Images

अजित, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव के बेटे थे.

उनका जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के देओलाली प्रवरा में हुआ.

चाचा के सियासत में सक्रिय होने की वजह से अजित को बचपन से ही राजनीति का माहौल मिला. अजित ने अपने चाचा शरद पवार की छत्र-छाया में रहते हुए ही राजनीति का पाठ सीखा था.

अजित 12वीं क्लास तक पढ़े हैं, उन्होंने बारामती के महाराष्ट्र एजुकेशन सेकेंडरी हाई स्कूल से पढ़ाई की थी.

1982 में उन्होंने राजनीति में क़दम रखा, जब वे एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड में चुने गए.

1991 में वे पुणे ज़िला सहकारी बैंक के चेयरमैन बने. अजित पवार साल 1991 में ही पहली बार बारामती से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए.

हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए इसे खाली कर दिया.

फिर इसी सीट पर उपचुनाव में शरद पवार जीते जो पीवी नरसिंहा राव की सरकार में रक्षा मंत्री बने.

जब मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए अजित पवार

अजित पवार

इमेज स्रोत, Raju Shinde/Hindustan Times via Getty Images

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अजित पवार ने साल 1995 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की.

बाद के सालों में वो एनसीपी के टिकट पर लगातार जीतकर कुल सात बार विधानसभा गए.

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित को बड़ा पद 1999 में मिला, जब वे विलासराव देशमुख के नेतृत्व वाली कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में 1999 से दिसंबर 2003 तक सिंचाई मंत्री रहे.

अजित पवार इसके बाद साल भर के लिए ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे.

इसके बाद साल 2004 में एनसीपी-कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई, इस बार अजित जल संसाधन मंत्री बने. फिर 2009 से 2014 के बीच भी उन्होंने अलग-अलग मंत्रालय संभाले.

ऐसा कहा जाता है कि साल 2004 में अजित पवार मुख्यमंत्री बन सकते थे. लेकिन शरद पवार के कुछ सियासी समीकरणों के कारण एनसीपी को सीएम की पोस्ट नहीं मिल पाई थी.

वरिष्ठ पत्रकार श्रीमंत माने ने साल 2020 में बीबीसी मराठी से कहा था, "अजित पवार 2004 में मुख्यमंत्री बन सकते थे. क्योंकि कांग्रेस-एनसीपी फ़ॉर्मूले के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद एनसीपी को ही मिलना तय था. अगर उस फ़ॉर्मूले के अनुसार काम हुआ होता, तो शायद तब ऐसा हो जाता. लेकिन उस वक़्त समीकरण कुछ ऐसे बन गए कि अजित सीएम नहीं बन पाए."

6 बार उप मुख्यमंत्री रहे अजित पवार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ अजित पवार

इमेज स्रोत, Satish Bate/Hindustan Times via Getty Images

इमेज कैप्शन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ अजित पवार

अजित पवार 6 बार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री रहे. 2010 से 2012 के बीच अजित पहली बार उप मुख्यमंत्री बने.

पृथ्वीराज चव्हाण की सरकार में दिसंबर 2012 से सितंबर 2014 तक उनका बतौर उप मुख्यमंत्री दूसरा कार्यकाल रहा.

इसके बाद 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद अप्रत्याशित तरीक़े से अजित पवार भारतीय जनता पार्टी के साथ आए और तीसरी बार डिप्टी सीएम बने.

हालांकि, बाद में वे वापस शरद पवार के साथ आ गए और उद्धव ठाकरे सरकार में उप मुख्यमंत्री बने.

फिर एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बग़ावत कर दी और सरकार गिर गई. अजित पवार 2023 में महायुति (शिवसेना शिंदे गुट, बीजेपी और एनसीपी अजित पवार गुट) गठबंधन में शामिल हुए और पांचवीं बार उप मुख्यमंत्री बने थे. 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद अजित छठवीं बार उपमुख्यमंत्री बने.

चाचा से दूर, लेकिन क़रीबी बनी रही

शरद पवार, सुप्रिया सुले और अजित पवार (फ़ाइल फ़ोटो)

इमेज स्रोत, ajitpawar.org

इमेज कैप्शन, शरद पवार, सुप्रिया सुले और अजित पवार (फ़ाइल फ़ोटो)

अजित पवार की राजनीतिक यात्रा का सबसे अहम मोड़ 2023 आया, जब एनसीपी में विभाजन हुआ.

2 जुलाई 2023 को अजित पवार ने चाचा शरद पवार से अलग होकर अपना अलग गुट बनाया और भाजपा-शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के साथ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए.

इस फ़ैसले ने पारिवारिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा की. शरद पवार से अलग होकर अजित ने चुनाव आयोग से मूल एनसीपी का नाम और सिंबल हासिल किया.

इसके बाद शरद पवार को एनसीपी (एससीपी) बनानी पड़ी.

भले अजित पवार महायुति गठबंधन का हिस्सा रहे, लेकिन उनके संबंध अपने चाचा शरद पवार और बहन सुप्रिया सुले से नहीं बिगड़े थे.

घर-परिवार के कार्यक्रमों में हमेशा साथ नज़र आए. यही कारण है कि महाराष्ट्र में एनसीपी के अधिकतर कार्यकर्ताओं का यही मानना था कि ऊपर से चाहे जैसा हो, लेकिन अंदर से सब एक है.

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में भी एक ही परिवार के दोनों दलों ने कुछ इलाकों में साथ मिलकर चुनाव लड़ा. राजनीतिक पत्रकार सुधीर सूर्यवंशी ने नगर निगम चुनाव के दौरान बीबीसी मराठी से कहा था, "इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है. सबको पता था कि ऐसा कभी न कभी होना ही था. राजनीति में बाक़ी क्षेत्रों के मुक़ाबले ख़ून ज़्यादा गाढ़ा होता है और मेरी राय में पवार का ख़ून ज़्यादा गाढ़ा है."

अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से अलग हो गए लेकिन उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर एक ख़ास तस्वीर लगी है. इसमें अजित अपने चाचा शरद पवार और बहन सुप्रिया सुले के साथ खड़े हैं.

साथ ही लिखा है, "अजित पवार ने शरदचंद्र पवार के कार्यों को ध्यानपूर्वक देखकर समय की पाबंदी, लोगों के लिए सुलभता, समस्याओं के समाधान में सहायता, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेना जैसे गुण आत्मसात किए हैं. पवार साहब के मार्गदर्शन में, अजीत पवार अगले 25-30 वर्षों के लिए दूरदर्शी विकास के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.