'बेहद निराशाजनक', भारत-ईयू डील से अमेरिका हुआ नाराज़

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भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच हुई ट्रेड डील पर अमेरिका ने प्रतिक्रिया दी है.
भारत और यूरोप दोनों ही इस ट्रेड डील को 'मदर ऑफ़ ऑल डील्स' बता रहे हैं.
लेकिन अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस डील की आलोचना की है.
उन्होंने न्यूज़ चैनल सीएनबीसी से बात करते हुए कहा, "वैसे तो उन्हें वही करना चाहिए जो उनके लिए बेस्ट है. लेकिन मैं यूरोप के इस रवैये से बेहद निराश हूं."
बेसेंट ने कहा, "यूक्रेन-रूस वॉर की वजह से वही लोग फ़्रंटलाइन पर हैं. भारत ने पहले तो प्रतिबंधित रूसी तेल ख़रीदना शुरू किया क्योंकि वो उन्हें डिस्काउंट पर मिल रहा था. बाद में यूरोप ने वही ऱिफ़ाइन्ड तेल भारत से ख़रीदना शुरू कर दिया. यानी वो ख़ुद ही अपने ख़िलाफ़ लड़ाई को फ़ंड कर रहे हैं."
बेसेंट ने कहा कि 'भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए' अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया जबकि यूरोप ने ऐसा नहीं किया.
वो बोले, "यूरोपियन हमेशा यूक्रेन के लोगों की बेहतरी की बात करते रहते हैं लेकिन भारत के साथ ये डील करके उन्होंने दिखा दिया कि उन्हें यूक्रेनी लोगों से ज़्यादा व्यापार की परवाह है."
बेसेंट ने इससे पहले भी इस डील की आलोचना की थी.
उन्होंने 26 जनवरी को एबीसी न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा, "यूक्रेन वॉर को ख़त्म करने के लिए अमेरिका ने यूरोप से ज़्यादा बलिदान दिया है. हमने रूसी तेल ख़रीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाया और बदले में देखिए यूरोप भारत से ट्रेड डील करने जा रहा है."
'डील में भारत का पलड़ा भारी'

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इससे पहले अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रियर ने फ़ॉक्स बिज़नेस से बात करते हुए कहा था कि इस डील से यूरोप के बजाय भारत का पलड़ा भारी है.
उन्होंने कहा, "अब तक समझौते के कुछ डीटेल्स मैंने देखे हैं. साफ़ कहूं तो इसमें भारत को ज़्यादा फ़ायदा मिलता दिख रहा है. भारत को यूरोप के बाज़ारों तक अधिक पहुंच मिलेगी."
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि भारत को कुछ अतिरिक्त इमिग्रेशन अधिकार भी मिल रहे हैं. मुझे पक्के तौर पर नहीं पता, लेकिन यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारतीय कामगारों की यूरोप में आवाजाही (मोबिलिटी) की बात की है. इसलिए कुल मिलाकर मुझे लगता है कि इससे भारत को काफ़ी फ़ायदा होगा. उनके पास कम लागत वाला श्रम है."
भारत के रूसी तेल ख़रीदने संबंधी प्रश्न पर ग्रियर ने कहा, "इस दिशा में उन्होंने काफ़ी प्रगति की है. मैं भारत में अपने समकक्ष के साथ लगातार संपर्क में हूं. उनके साथ मेरे अच्छे संबंध हैं लेकिन इस मुद्दे पर उन्हें अभी और आगे जाना है. उन्हें डिस्काउंट वाला रूसी तेल पसंद है. इसलिए उनके लिए यह छोड़ना मुश्किल है."
उन्होंने कहा कि अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने कुछ हफ़्ते पहले 'और कड़े प्रतिबंध' लागू किए हैं और कहा कि 'अमेरिका को उम्मीद है कि भारत इसे धीरे-धीरे कम करता रहेगा, लेकिन हम इस पर क़रीबी नज़र रख रहे हैं.'
भारत-ईयू डील

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इससे पहले 27 जनवरी को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा के साथ यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच ट्रेड डील होने का एलान किया.
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज भारत ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट संपन्न किया है. आज 27 तारीख है और ये सुखद संयोग है कि आज ही के दिन, यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ भारत ने ये एफ़टीए किया है."
वहीं एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा ने कहा, "ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर बदल रहा है. ऐसे में भारत और यूरोप के बीच ये साझेदारी ऐतिहासिक है. भारत हमारे भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर आगे आया है. भारत तेज़ी से बढ़ती इकॉनमी है. और इस डील से दो अरब लोगों का फ़ायदा होगा. हम विश्व शांति के लिए आप पर भरोसा कर सकते हैं."
विश्लेषक मान रहे हैं कि इस समझौते की सबसे बड़ी वजह मौजूदा वैश्विक राजनीति है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप कारोबार का इस्तेमाल अन्य देशों पर दबाव बनाने के लिए एक कूटनीतिक हथियार की तरह कर रहे हैं.

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विश्लेषकों के मुताबिक़, अमेरिका की इसी आक्रमकता का जवाब देने के लिए यूरोपीय संघ और भारत तेज़ी से मुक्त व्यापार समझौते की तरफ़ बढ़े हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के विरोध को लेकर यूरोपीय सहयोगियों के ख़िलाफ़ ट्रेड वॉर तेज़ करने की धमकी दी और बाद में पीछे हट गए.
वहीं रूसी तेल की ख़रीद का हवाला देकर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ़ लगा दिया था. कुल मिलाकर ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगा रखे हैं.
डील की ख़ास बातें

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यूरोपियन कमीशन ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि भारत यूरोपीय संघ को ऐसे टैरिफ़ में रियायतें देगा, जो उसके किसी अन्य व्यापारिक साझेदार को नहीं मिली हैं.
उदाहरण के तौर पर, कारों पर टैरिफ़ को धीरे-धीरे 110% से घटाकर 10% तक किया जाएगा, जबकि कार के पुर्ज़ों पर पाँच से दस साल में शुल्क पूरी तरह ख़त्म कर दिया जाएगा.
मशीनरी पर 44% तक, रसायनों पर 22% तक और दवाओं पर 11% तक लगने वाले टैरिफ़ भी ज़्यादातर समाप्त कर दिए जाएंगे.
इसके अलावा, समझौते से छोटे यूरोपीय व्यवसायों को नए निर्यात अवसरों का पूरा लाभ उठाने में मदद मिलेगी.
साल 2024-25 में भारत और ईयू के बीच सामान का व्यापार क़रीब 11.5 लाख करोड़ रुपये का रहा, जबकि सेवाओं का व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
पीआईबी ने बताया है कि इस डील की वजह से टेक्सटाइल, परिधान और कपड़ों पर पहले दिन से ही ज़ीरो ड्यूटी लागू होगी. एफ़टीए से 263.5 अरब डॉलर के यूरोपीय संघ के टेक्सटाइल बाज़ार तक पहुंच खुलेगी. कारीगरों, महिलाओं, बुनकरों और एमएसएमई क्लस्टरों के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार के मौके बनेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया है कि दुनिया की दूसरी (यूरोप) और चौथी (भारत) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ये ऐतिहासिक समझौता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















