भारत-ईयू की 'मदर ऑफ़ ऑल डील्स', भारत में यूरोपीय कारों पर टैरिफ़ होगा कम

यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच ट्रेड डील होने का एलान किया है.

इस मौक़े पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "आज भारत ने अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट संपन्न किया है. आज 27 तारीख है और ये सुखद संयोग है कि आज ही के दिन, यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के साथ भारत ने ये एफ़टीए किया है."

इस मौक़े पर यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहीं.

उन्होंने दा कोस्टा को 'लिस्बन का गांधी' कहकर संबोधित किया.

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पीएम ने कहा, "ये दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक शानदार उदाहरण बना है. ये समझौता ग्लोबल जीडीपी के क़रीब 25% और ग्लोबल ट्रेड के क़रीब वन थर्ड हिस्से को रिप्रजेंट करता है. "

"ये समझौता ट्रेड के साथ-साथ डेमोक्रेसी और रूल ऑफ लॉ के प्रति हमारे शेयर्ड कमिटमेंट को भी सशक्त करता है."

पीएम ने दावा किया कि इससे ट्रेड और ग्लोबल सप्लाई चेन दोनों को 'मज़बूती मिलेगी'.

उन्होंने कहा कि इस समझौते से टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, लेदर एंड शूज़, जैसे सेक्टर को फ़ायदा होगा.

सरकार ने उम्मीद जताई कि इस ट्रेड डील से भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बल मिलेगा और सर्विसेज़ से जुड़े सेक्टर का भी विस्तार होगा. साथ ही ये फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दुनिया के हर बिज़नेस, हर इन्वेस्टर के लिए भारत पर कॉन्फिडेंस को और मज़बूत करेगा.

यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि थीं

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वहीं एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा ने कहा, "ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर बदल रहा है. ऐसे में भारत और यूरोप के बीच ये साझेदारी ऐतिहासिक है. भारत हमारे भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर आगे आया है. भारत तेज़ी से बढ़ती इकॉनमी है. और इस डील से दो अरब लोगों का फ़ायदा होगा. हम विश्व शांति के लिए आप पर भरोसा कर सकते हैं."

वहीं यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने कहा, "भारत और यूरोप मिलकर इतिहास बना रहे हैं. हमने मदर ऑफ़ ऑल डील्स पूरी कर ली है. हमने दो अरब लोगों के लिए फ़्री ट्रेड ज़ोन बनाया है जिससे भारत और यूरोप, दोनों को ही फ़ायदा मिलेगा."

उन्होंने कहा, "ये तो अभी शुरुआत है. हमारी रिलेशनशिप आगे और भी मज़बूत होगी,"

यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सोमवार को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे.

मुख्य अतिथियों का चयन भारत की इस कूटनीतिक सोच का भी संकेत देता है कि वो दुनिया के दूसरे हिस्सों के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक रिश्ते तेज़ कर रहा है.

भारत और यूरोप दोनों का इस समय अमेरिका के साथ व्यापार को लेकर तनाव चल रहा है.

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत और ईयू के बीच फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट के पीछे एक वजह ये भी है.

फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौते के तहत दो देश या दो पक्ष एक-दूसरे के लिए अपने बाज़ारों में पहुँच को आसान बनाते हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के विरोध को लेकर यूरोपीय सहयोगियों के ख़िलाफ़ ट्रेड वॉर तेज़ करने की धमकी दी और बाद में पीछे हट गए.

वहीं रूसी तेल की ख़रीद का हवाला देकर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ़ लगा दिया था. कुल मिलाकर ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगा रखे हैं.

मोदी, उर्सुला और कोस्टा

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इमेज कैप्शन, एफ़टीए से 263.5 अरब डॉलर के यूरोपीय संघ के टेक्सटाइल बाज़ार तक पहुंच खुलेगी

डील की ख़ास बातें

यूरोपियन कमीशन ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि भारत यूरोपीय संघ को ऐसे टैरिफ़ में रियायतें देगा, जो उसके किसी अन्य व्यापारिक साझेदार को नहीं मिली हैं.

उदाहरण के तौर पर, कारों पर टैरिफ़ को धीरे-धीरे 110% से घटाकर 10% तक किया जाएगा, जबकि कार के पुर्ज़ों पर पाँच से दस साल में शुल्क पूरी तरह ख़त्म कर दिया जाएगा.

मशीनरी पर 44% तक, रसायनों पर 22% तक और दवाओं पर 11% तक लगने वाले टैरिफ़ भी ज़्यादातर समाप्त कर दिए जाएंगे.

इसके अलावा, समझौते से छोटे यूरोपीय व्यवसायों को नए निर्यात अवसरों का पूरा लाभ उठाने में मदद मिलेगी.

साल 2024-25 में भारत और ईयू के बीच सामान का व्यापार क़रीब 11.5 लाख करोड़ रुपये का रहा, जबकि सेवाओं का व्यापार 7.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

पीआईबी ने बताया है कि इस डील की वजह से टेक्सटाइल, परिधान और कपड़ों पर पहले दिन से ही ज़ीरो ड्यूटी लागू होगी. एफ़टीए से 263.5 अरब डॉलर के यूरोपीय संघ के टेक्सटाइल बाज़ार तक पहुंच खुलेगी. कारीगरों, महिलाओं, बुनकरों और एमएसएमई क्लस्टरों के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार के मौके बनेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया है कि दुनिया की दूसरी (यूरोप) और चौथी (भारत) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ये ऐतिहासिक समझौता है.

पीएम मोदी ने एक्स पर इस डील से जुड़ी कुछ जानकारियों को शेयर किया है जिसमें बताय गया है इस सौदे में भारत से निर्यात किए जाने वाली 9425 टैरिफ़ लाइन को ख़त्म कर दिया गया है. यानी इन 9425 टैरिफ़ लाइन से जुड़े सामानों पर कोई टैरिफ़ नहीं लगा करेगा.

साथ ही उनकी पोस्ट में यह भी बताया गया है कि यूरोप को 6.41 लाख करोड़ का सामान निर्यात किए जाने के लिए तैयार है.

इसके अलावा अब भारत से ईयू को तक़रीबन 99 फ़ीसदी की निर्यात वैल्यू ज़ीरो-ड्यूटी के अंतर्गत आएगी. वहीं भारत को अपने 99 प्रतिशत से ज़्यादा निर्यात पर ईयू के बाज़ार में सीधी और आसान पहुंच मिलेगी.

इस सौदे के ज़रिए भारतीय कामगारों और छात्रों को भी लाभ मिलेगा. इस सौदे के मुताबिक़, यूरोप के आईटी, शिक्षा और फ़ाइनैंस जैसे ईयू के 144 सब-सेक्टर्स में भारत को पहुंच दी जाएगी.

साथ ही यूरोप पढ़ने जाने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद नौ महीने के पोस्ट-स्टडी वीज़ा फ्रेमवर्क पर भी सहमति बनी है. इसके अलावा यूरोप में भारतीय पारंपरिक दवाओं के चिकित्सकों को भी अनुमति दी जाएगी.

दोनों देशों को क्या मिलेगा?

इस साल भारत चार ट्रिलियन जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़ सकता है.

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इमेज कैप्शन, इस साल भारत चार ट्रिलियन जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़ सकता है

यूरोपीय संघ के लिए भारत के साथ क़रीबी व्यापारिक रिश्ते इसलिए अहम हैं क्योंकि भारत की आर्थिक ताक़त तेज़ी से बढ़ रही है.

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. इस साल उसकी जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की राह पर है और वह जापान को पीछे छोड़ सकता है.

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के मंच से वॉन डेर लेयेन ने कहा था कि यूरोपीय संघ और भारत साथ आते हैं तो दो अरब लोगों का एक विशाल मुक्त बाज़ार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी का एक चौथाई हिस्सा होगा.

भारत के लिए यूरोपीय संघ पहले से ही उसका सबसे बड़ा व्यापारिक समूह है.

यह समझौता जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज यानी जीएसपी की बहाली भी करेगा, जिसके तहत विकासशील देशों से यूरोपीय बाज़ार में आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगता.

इस समझौते के साथ ईयू भारत का 22वां एफ़टीए साझेदार बन गया है. भारत ब्रिटेन से पहले ही एफ़टीए कर चुका है और अब यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों के साथ मिलकर भारतीय कारोबारियों के लिए लगभग पूरा यूरोपीय बाज़ार खुल गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.