भारत-ईयू डील पर अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया, 'वो अपने ख़िलाफ़ हो रहे युद्ध को फ़ंड कर रहे हैं'

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भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच होने जा रही डील पर अमेरिका ने प्रतिक्रिया दी है.
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'वो ख़ुद ही अपने ख़िलाफ़ लड़ाई को फंड कर रहे हैं.'
यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सोमवार को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे.
मुख्य अतिथियों का चयन भारत की इस कूटनीतिक सोच का भी संकेत देता है कि वो दुनिया के दूसरे हिस्सों के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक रिश्ते तेज़ कर रहा है.
भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफ़टीए) की घोषणा मंगलवार, 27 जनवरी को होने जा रही है.
फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौते के तहत दो देश या दो पक्ष एक-दूसरे के लिए अपने बाज़ारों में पहुँच को आसान बनाते हैं.
यह ऐसे समय हो रहा है जब व्यापार को लेकर भारत और यूरोप, दोनों का ही अमेरिका के साथ तनाव चल रहा है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के विरोध को लेकर यूरोपीय सहयोगियों के ख़िलाफ़ ट्रेड वॉर तेज़ करने की धमकी दी और बाद में पीछे हट गए.
वहीं रूसी तेल की ख़रीद का हवाला देकर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ़ लगा दिया था. कुल मिलाकर ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगा रखे हैं.
क्या कहा स्कॉट बेसेंट ने?

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एबीसी न्यूज़ चैनल से बात करते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, "यूक्रेन वॉर को ख़त्म करने के लिए अमेरिका ने यूरोप से ज़्यादा बलिदान दिया है. हमने रूसी तेल ख़रीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाया और बदले में देखिए यूरोप भारत से ट्रेड डील करने जा रहा है."
बेसेंट ने कहा, "रूसी कच्चा तेल भारत जाता है. वहां वो रिफ़ाइन होता है और वो रिफ़ाइन्ड प्रोडक्ट यूरोपीय देश ख़रीदते हैं. यानी वो ख़ुद ही अपने ख़िलाफ़ लड़ाई को फ़ंड कर रहे हैं. ख़ैर ट्रंप प्रशासन यूक्रेन वॉर को रुकवा के ही दम लेगा."
24 जनवरी को भी स्कॉट बेसेंट ने कहा था, "हमने भारत पर टैरिफ़ लगाए जिसका अच्छा परिणाम निकला लेकिन यूरोपीय देशों ने रूसी तेल की ख़रीद को लेकर भारत पर किसी भी तरह के टैरिफ़ लगाने से इनकार कर दिया क्योंकि वो उनके साथ ये ट्रेड डील साइन करने जा रहे हैं. यूक्रेन वॉर के बाद से भारत भारी डिस्काउंट वाला वो रूसी तेल ख़रीद रहा था जिस पर यूरोप ने बैन लगाया था. वो तेल भारत की ऱिफ़ाइनरी में जाता था और यूरोप की मूर्खता की हरकत देखिए कि वो वही तेल वापस भारत से ख़रीद लेता था."
जब रिपोर्टर ने कहा कि, 'क्या आप यूरोपीय देशों को मूर्ख कह रहे हैं' तो स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'मूर्ख नहीं लेकिन हां मूर्खता का काम ज़रूर है.'
सोमवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को 77वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी थी. भारत में अमेरिकी दूतावास ने ट्रंप का संदेश एक्स पर जारी किया है.
ट्रंप ने कहा, "अमेरिका के लोगों की ओर से, मैं भारत सरकार और भारत के लोगों को आपके 77वें गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं."
उन्होंने कहा कि अमेरिका के दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और भारत के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक संबंध है.
कार्नी करेंगे भारत की यात्रा?

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इस बीच रॉयटर्स ने कनाडा में भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश पटनायक के हवाले से बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले हफ्ते में भारत का दौरा कर सकते हैं और दोनों देशों के बीच यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में समझौते हो सकते हैं.
ट्रंप के टैरिफ़ लगाने की धमकी के बाद से कनाडा भी अमेरिका के अलावा दूसरे देशों से व्यापारिक संबंध मज़बूत करने पर ज़ोर दे रहा है ताकि अमेरिकी टैरिफ़ का जवाब दिया जा सके.
भारत और यूरोप के अलावा कनाडा से भी अमेरिका के संबंध हाल के दिनों में तनावपूर्ण हुए हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है.
दावोस में हाल ही में हुए वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम में मार्क कार्नी के उस भाषण पर जो़रदार तालियां बजी थीं जिसमें उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए 'नए वर्ल्ड ऑर्डर' पर एक भाषण दिया और इस बात पर ज़ोर दिया कि कनाडा जैसे मिडिल पावर वाले देश आपसी सहयोग से लाभ उठा सकते हैं.
यह भाषण ऐसे समय में दिया गया जब रूस, चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ रहा है और जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहयोगी देशों पर टैरिफ़ लगाने की धमकी दे रहे हैं.
इसके अलावा, अमेरिका नेटो सैन्य गठबंधन के सदस्य देश डेनमार्क से ग्रीनलैंड को हासिल करने की कोशिश कर रहा है.
मार्क कार्नी ने हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाक़ात की थी. उन्होंने कनाडा और चीन के बीच एक ट्रेड डील होने की भी घोषणा की थी.
इसी के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि अगर कनाडा ने चीन के साथ कोई डील की, तो कनाडा से अमेरिका आने वाली चीज़ों पर 100 प्रतिशत टैरिफ़ लगाया जाएगा.
यह साफ़ नहीं है कि वह डील लागू हुई है या नहीं, या ट्रंप उसी का ज़िक्र कर रहे थे.
ट्रंप ने लिखा था, "अगर (मार्क) कार्नी को लगता है कि वह कनाडा को चीन के सामान उतारने की जगह बना देंगे ताकि चीन अमेरिका में सामान और प्रोडक्ट भेज सके, तो वह बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं."
इसके बाद ट्रंप ने कनाडाई पीएम को अपने 'बोर्ड ऑफ़ पीस' में शामिल होने के लिए भेजा न्योता वापस ले लिया था.
भारत-ईयू डील

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भारत-ईयू डील से दोनों पक्षों को क्या मिलेगा, इसकी भी काफ़ी चर्चा हो रही है.
यूरोपीय संघ के लिए भारत के साथ क़रीबी व्यापारिक रिश्ते इसलिए अहम हैं क्योंकि भारत की आर्थिक ताक़त तेज़ी से बढ़ रही है.
भारत दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है.
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के मंच से यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा था कि यूरोपीय संघ और भारत साथ आते हैं तो दो अरब लोगों का एक विशाल मुक्त बाज़ार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी का एक चौथाई हिस्सा होगा.
भारत के लिए यूरोपीय संघ पहले से ही उसका सबसे बड़ा व्यापारिक समूह है. यह समझौता जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज यानी जीएसपी की बहाली भी करेगा, जिसके तहत विकासशील देशों से यूरोपीय बाज़ार में आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगता.
दिल्ली स्थित ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अजय श्रीवास्तव के मुताबिक़, "भारत ने यूरोपीय संघ को करीब 76 अरब डॉलर का निर्यात किया और वहां से 61 अरब डॉलर का आयात किया. इससे भारत को व्यापार सरप्लस मिला. लेकिन 2023 में यूरोपीय संघ की ओर से जीएसपी लाभ हटाए जाने से कई भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमज़ोर हुई है."
श्रीवास्तव कहते हैं, "मुक्त व्यापार समझौता खोई हुई बाज़ार पहुंच को बहाल करेगा. इससे कपड़ा, दवाएं, इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी जैसे प्रमुख निर्यात पर टैरिफ़ कम होंगे और अमेरिकी टैरिफ़ बढ़ने से पैदा हुए झटकों को झेलने में भारतीय कंपनियों को मदद मिलेगी."
हालांकि भारत कृषि और डेयरी जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखने की कोशिश करेगा. कार, वाइन और स्पिरिट जैसे क्षेत्रों में शुल्क धीरे-धीरे घटाए जा सकते हैं.
यह वही तरीका है जो भारत ने ब्रिटेन जैसे देशों के साथ पिछले समझौतों में अपनाया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















