कम होती सेक्स ड्राइव को क्या इस इलाज से दूर किया जा सकता है?

- Author, रुथ क्लेग
- पदनाम, सीनियर हेल्थ रिपोर्टर
- पढ़ने का समय: 14 मिनट
90 के दशक में, एलन रीव्स नियमित रूप से मंच पर परफ़ॉर्म करते थे और 'द ड्रीमबॉयज़' के सदस्य के रूप में हज़ारों लोगों के सामने अपने कपड़े उतारते थे.
उनकी मांग इतनी अधिक थी कि वह अपने पुरुष डांसर्स के दल के साथ स्पाइस गर्ल्स की फ़िल्म 'स्पाइस वर्ल्ड' में भी नज़र आए थे.
उस समय 24 साल के रीव्स, ख़ुद उनके ही शब्दों में, 'एक तरह के पिन-अप' या चर्चित पोस्टर बॉय थे.
लेकिन जब रीव्स 30 साल से ज़्यादा उम्र के हुए तो उन्होंने ख़ुद को एक बहुत ही अलग स्थिति में पाया- उनका मूड ख़राब रहने लगा था और उनकी कामेच्छा लगभग ग़ायब हो चुकी थी.
वह कहते हैं, "मुझे बस कुछ सही नहीं लग रहा था."
अब 52 वर्ष के हो चुके रीव्स कहते हैं कि सेक्स ड्राइव की कमी का उनके लंबे समय के रिश्ते पर बुरा असर पड़ने लगा था.
बीबीसी हिन्दी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
अब लंदन में एक फ़िटनेस और लाइफ़स्टाइल कोच के रूप में काम कर रहे रीव्स ने टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (टीआरटी) शुरू की और उनका कहना है कि इसने उन्हें उनकी कामेच्छा वापस दिला दी है.
इससे वह 'एक चिड़चिड़े बूढ़े आदमी' से बदलकर वापस वैसा महसूस करने लगे हैं जैसा वह अपनी युवावस्था में महसूस करते थे. वह कहते हैं कि 'यह अद्भुत' अहसास है.
लगातार कम हो रहा है सेक्स

इमेज स्रोत, Fragile Films/ Icon Entertainment International/ Polygram Filmed Entertainment
और महिलाएं भी अब टेस्टोस्टेरोन की ओर रुख़ कर रही हैं. 37 वर्षीय मेनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) ब्लॉगर रशेल मेसन का कहना है कि यह हार्मोन उनके एनर्जी लेवल, एकाग्रता और कामेच्छा के लिए 'कमाल का' रहा है.
टेस्टोस्टेरोन के प्रिस्क्रिप्शन में भारी उछाल आया है. केयर क्वालिटी कमीशन ने एनएचएस बिज़नेस अथॉरिटी के नवीनतम आंकड़े संकलित किए हैं, जिनसे पता चलता है कि 2021 और 2024 के बीच इसके प्रिस्क्रिप्शन में 135% की वृद्धि हुई है.
यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब पूरे ब्रिटेन में सेक्स ड्राइव कम होती दिख रही है. नेशनल सर्वे ऑफ़ सेक्सुअल एटीट्यूड एंड लाइफ़स्टाइल (नैटसल) हर दशक में लगभग 10,000 से अधिक लोगों से इस बारे में सवाल पूछता है और इसके नए आंकड़े इस साल के अंत में आने वाले हैं. इसके अनुसार, सेक्स की आवृत्ति (फ़्रीक्वेंसी) में लगातार गिरावट आई है.
1990 में, 16 से 44 वर्ष की आयु के लोगों ने महीने में औसतन पांच बार सेक्स करने की बात कही थी. 2000 तक यह गिरकर चार बार और 2010 तक तीन बार रह गया.
परिणामों का अगला सेट इस साल के अंत में आने वाला है, और शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि गिरावट का यह रुझान जारी रहेगा- हालांकि वे इस गिरावट के लिए किसी एक कारण की ओर इशारा नहीं करते.
इसी पृष्ठभूमि में, एक बहस ज़ोर पकड़ रही है. क्या टेस्टोस्टेरोन बढ़ाना कामेच्छा में सुधार कर सकता है, या इस पर मिल रहा अधिकांश ध्यान केवल दिखावा, मुनाफ़ा और भ्रम है?
कम होती कामेच्छा

इमेज स्रोत, Melissa Green
शोधकर्ताओं का कहना है कि एलन रीव्स की कामेच्छा कम होने का अनुभव उस रुझान का एक उदाहरण है, जो अब बहुत आम होता जा रहा है.
नैटसल की अकादमिक निदेशक सोएज़िग क्लिफ्टन कहती हैं, "पिछले कुछ वर्षों में, हमने हर वर्ग के लोगों में इसमें गिरावट देखी है."
"उदाहरण के लिए, 90 के दशक की तुलना में अब साथ रहने वाले जोड़ों की संख्या कम है, जो सेक्स ड्राइव में कमी को समझाने में मदद कर सकता है, लेकिन जब हमने विशेष रूप से उस समूह (साथ रहने वाले जोड़ों) को देखा, तो वहां भी गिरावट पाई गई."
वास्तव में, सेक्स की आवृत्ति में सबसे तेज़ गिरावट अधिक उम्र के विवाहित या साथ रहने वाले जोड़ों में देखी गई.
क्लिफ्टन का कहना है कि साफ़-साफ़ यह कहना मुश्किल है कि सेक्स ड्राइव क्यों कम हो रही है.
वह कहती हैं, "हमारे पास अब तक ऐसा कोई डेटा नहीं है जो हमें पूरे भरोसे के साथ बता सके कि एक आबादी के तौर पर हम अब पहले जितना सेक्स क्यों नहीं कर रहे हैं."
ऐसे कई अध्ययन हैं जो इसके कारण को समझने की कोशिश करते हैं. ये अध्ययन बताते हैं कि डिजिटल दुनिया एक बड़ा कारक हो सकती है, जिसकी वजह से स्क्रीन को स्विच ऑफ़ करना मुश्किल हो गया है, साथ ही अब समय बिताने के लिए और भी बहुत से विकल्प मौजूद हैं.
जनरल फ़िज़िशियन (जीपी) और सेक्स थेरेपिस्ट डॉक्टर बेन डेविस कहते हैं कि हमारे तनाव का स्तर भी आम तौर पर 30 साल पहले की तुलना में अधिक है, और यह भी एक कारण हो सकता है.
वह कहते हैं, "लोगों के जीवन में बहुत कुछ चल रहा है. ज़ाहिर है कि तकनीक तो है ही, लेकिन तनाव, अवसाद और अकेलेपन में भी वृद्धि हुई है. ये सभी चीज़ें सेक्स ड्राइव में कमी का कारण बनती हैं."
एक और संभावना है जिसने इंटरनेट पर बहुत दिलचस्पी पैदा की है और एक बड़ा बिज़नेस बन गई है- वह यह कि टेस्टोस्टेरोन का कम स्तर सेक्स ड्राइव पर असर डाल सकता है.
कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट और ब्रिटिश सोसाइटी फॉर सेक्सुअल मेडिसिन (बीएसएसएम) के सदस्य प्रोफ़ेसर जेफ्री हैकेट कहते हैं, "पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर निश्चित रूप से कम हो रहा है."
"मोटापे में वृद्धि, टाइप 2 डायबिटीज़, और गतिहीन जीवन शैली जीने वाले लोगों की बढ़ती संख्या- ये सभी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करते हैं. और गिरता हुआ टेस्टोस्टेरोन स्तर हमारी सेक्स ड्राइव में कमी का एक कारण होगा."
पिछले 20 वर्षों में कई बड़े पैमाने के अध्ययन, जिन्होंने पुरुषों में हार्मोन के स्तर को मापा है, बताते हैं कि टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिरा है. लेकिन हैकेट इस बात पर ज़ोर देते हैं कि यह तस्वीर काफ़ी मामूली फ़र्क दिखाती है- टेस्टोस्टेरोन कम होने से कामेच्छा कम होने की आशंका तो बढ़ जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कम टेस्टोस्टेरोन वाले हर व्यक्ति की सेक्स ड्राइव कम होगी.
इस जटिलता के बावजूद, मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप और सोशल मीडिया फ़ीड अब ऐसे विज्ञापनों से अटे पड़े हैं: 'कम कामेच्छा? दिमागी धुंधलापन? थकान? टेस्टोस्टेरोन चेक कराने का समय आ गया है! क्या आपके आदमी की चमक खो गई है? यह उनके हार्मोन हो सकते हैं!'
तो, क्या टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (टीआरटी) वास्तव में कम कामेच्छा का रामबाण इलाज हो सकती है?
टेस्टोस्टेरोन ने 'मेरी ज़िंदगी वापस लौटा दी'

इमेज स्रोत, Rachel Mason @raysecommunity
मेलिसा ग्रीन पिछले लगभग एक साल से टेस्टोस्टेरोन ले रही हैं. उनका कहना है कि इसने न केवल उन्हें 'जीने का उत्साह' वापस दिया है, बल्कि उनकी शादी भी बचा ली.
43 वर्षीया मेलिसा कहती हैं कि उनकी सेक्स ड्राइव कम होने का उनके रिश्ते पर बहुत बुरा असर पड़ रहा था.
पेरिमेनोपॉज़ल (रजोनिवृत्ति के शुरुआती लक्षण) होने के कारण, उनके जीपी ने उन्हें हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के ज़रिए पहले से ही एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन लिखकर दिया था, लेकिन ग्रीन का कहना है कि डॉक्टर उनके टेस्टोस्टेरोन के स्तर की जांच करने को तैयार नहीं थे. उनका कहना यह था कि उन्हें इस अतिरिक्त हार्मोन की ज़रूरत नहीं है.
महिलाओं के शरीर में यह हार्मोन कम मात्रा में बनता है, और एनएचएस के दिशा-निर्देशों के अनुसार, महिलाओं को टेस्टोस्टेरोन तब दिया जा सकता है जब उन्हें 'हाइपोएक्टिव सेक्सुअल डिज़ायर डिसऑर्डर' हो, यानी उनकी सेक्स ड्राइव बहुत कम या न के बराबर हो. यह किसी भी उम्र की महिलाओं को प्रभावित कर सकता है, लेकिन रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के आस-पास यह अपने चरम पर होता है.
आखिरकार, ग्रीन एक प्राइवेट क्लिनिक में गईं, ब्लड टेस्ट करवाया, और उन्हें बताया गया कि उनका लेवल कम है. अपने टेस्ट के नतीजों को वापस अपने जीपी के पास ले जाने के बाद, अब उन्हें एनएचएस के ज़रिए कुछ टेस्टोस्टेरोन मिलता है, और थोड़ा हिस्सा एक प्राइवेट प्रिस्क्रिप्शन के माध्यम से.
वह कहती हैं, "इसने मेरी ज़िंदगी वापस लौटा दी है. कुछ मायनों में, मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं वापस अपने 20 के दशक में आ गई हूं. मुझमें अब ज़्यादा ऊर्जा है, मैं ज़्यादा सचेत महसूस करती हूं, और मेरी सेक्स ड्राइव वापस आ गई है."
जहां कुछ लोग सेक्स ड्राइव पर टेस्टोस्टेरोन के प्रभाव को लेकर बहुत उत्साहित हैं, वहीं अन्य का कहना है कि इसके कुछ अप्रिय प्रभाव भी हुए हैं.
चेरिल ओ'मैली ने एक साल तक टेस्टोस्टेरोन लिए थे. उनका कहना है कि हालांकि इसने मेनोपॉज के दौरान खोई हुई कुछ ऊर्जा को वापस लाने में मदद की होगी, लेकिन इसने उनकी सेक्स ड्राइव को बहुत ज़्यादा बढ़ा दिया और उनके मन में तेज़ गुस्से की भावना पैदा कर दी.
"मैं बहुत ज़्यादा कामुक महसूस कर रही थी. मैं अपने पति के साथ संबंध बनाना चाहती थी, लेकिन साथ ही मुझे उनसे नफ़रत भी हो रही थी."
"यही वह समय होता है जब आपको पता चलता है कि यह स्थिति सही नहीं है, यह मैं नहीं थी, मुझे लग रहा था जैसे सब कुछ मेरे नियंत्रण से बाहर है."
रशेल मेसन कहती हैं कि जब वह टीआरटी के बारे में पोस्ट करती हैं, तो देखती हैं कि "कई महिलाएं टेस्टोस्टेरोन शुरू करने से बहुत डरती हैं, उन्हें चिंता होती है कि वे पुरुषों जैसी हो जाएंगी, चेहरे पर बाल आ जाएंगे, या वे अपनी पहचान खो देंगी."
मेसन कहती हैं कि उनकी कलाई का वह हिस्सा 'काफी बालों वाला' हो गया है जहां वह रोज़ाना टेस्टोस्टेरोन जेल लगाती हैं, लेकिन उन्हें इस हार्मोन से जो फ़ायदे मिल रहे हैं, उसके हिसाब से यह कोई बड़ी बात नहीं.
शरीर के बालों में वृद्धि के साथ-साथ, टीआरटी के कई अन्य दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स) भी हो सकते हैं. महिलाओं के लिए, सबसे आम प्रभाव अत्यधिक बालों का उगना, मुंहासे और वज़न बढ़ना हैं, जो आमतौर पर ख़ुराक कम करने या बंद करने पर ठीक हो जाते हैं. टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट के साथ गंजापन और आवाज़ का भारी होना दुर्लभ होता है.
पुरुषों के लिए, इसके कारण वज़न बढ़ना, दर्दनाक और लंबे समय तक बने रहने वाले इरेक्शन, आदमियों की तर्ज़ पर गंजापन और मूड में बदलाव जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं. इससे शुक्राणु उत्पादन भी कम हो सकता है जो प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है. ऐसे उपचार उपलब्ध हैं जो मदद कर सकते हैं, लेकिन चिकित्सकीय सलाह की सिफ़ारिश दी जाती है.
'कमाई का एक ज़रिया है'

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images
बीबीसी से बातचीत में कुछ एनएचएस के जनरल फ़िज़िशियन्स और विशेषज्ञों ने कहा है कि निजी क्लीनिक एक जटिल समस्या के लिए टीआरटी को एक 'क्विक फ़िक्स' (तुरंत समाधान) के रूप में बेचकर मुनाफ़ाखोरी कर रहे हैं.
यौन और प्रजनन स्वास्थ्य की एनएचएस कंसलटेंट, डॉक्टर पाउला ब्रिग्स इसे एक 'ग्रेवी ट्रेन' (कमाई का ज़रिया) बताती हैं, जहां लोग ऐसी चीज़ के लिए भारी रकम चुका रहे हैं जिसकी उन्हें ज़रूरत ही नहीं है.
वह कहती हैं, "यह नियंत्रण से बाहर है."
"वेलबीइंग (कल्याण) उद्योग ने बाज़ार में एक ख़ाली जगह पैदा कर दी है जिसका वह अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं."
"यह अनुचित है."
हालांकि, निजी क्लीनिकों का कहना है कि वे एक ऐसी सेवा देकर लोगों के जीवन में सुधार कर रहे हैं जिसे एनएचएस प्रदान करने में विफल रहा है.
पुरुषों के स्वास्थ्य में विशेषज्ञता रखने वाले एक मल्टी-मिलियन पाउंड (करोड़ों रुपये वाले) क्लीनिक 'वॉय' के मेडिकल डायरेक्टर और एनएचएस जीपी जेफ़ फ़ोस्टर कहते हैं कि निजी क्षेत्र देखभाल की इस कमी को पूरा कर रहा है.
"फिलहाल, एनएचएस उन हज़ारों पुरुषों की जांच या इलाज करने के लिए तैयार नहीं है जिनमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है."
माइकल कोक्सिस 2016 से अपनी कंपनी 'बैलेंस माई हार्मोन्स' के माध्यम से टीआरटी की सुविधा दे रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इसकी मांग में 'अत्यधिक' वृद्धि देखी है.
कोक्सिस कहते हैं कि उनके कुछ मरीज़ एनएचएस के पास जांच के लिए गए थे, और उन्हें बताया गया कि उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम नहीं है, इसलिए उन्होंने निजी क्षेत्र के पास जाने का फ़ैसला किया.
"सिर्फ़ इसलिए कि उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर एनएचएस द्वारा निर्धारित सीमा से थोड़ा अधिक हो सकता है, इसका मतलब यह नहीं है कि टीआरटी उनकी मदद नहीं कर सकता."
"यह ब्लैक एंड व्हाइट नहीं है, यह कहीं ज़्यादा बारीक अंतर है."
पुरुषों में, 30 से 40 वर्ष की आयु के बीच टेस्टोस्टेरोन लगभग 1% कम होने लगता है. एनएचएस की सलाह कहती है कि यह उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा है और इससे कामेच्छा प्रभावित होने की संभावना कम है.
एलन रीव्स को शुरू में एनएचएस पर टीआरटी मिला था. दो जांचों में 10nmol/L (नैनोमोल्स प्रति लीटर) और 12nmol/L का स्तर पाया गया. और उन्हें तीन सप्ताह के अंतराल पर चार इंजेक्शन का कोर्स दिया गया. लेकिन उनके चौथे इंजेक्शन के बाद, रीव्स को बताया गया कि "बिना किसी ख़ास स्पष्टीकरण के" इसे अब और जारी नहीं रखा जा सकता.
वह बताते हैं, "मैं वापस वहीं पहुंच गया था जहां से शुरू किया था. तभी मैंने निजी क्षेत्र से इलाज करवाने का फ़ैसला किया."
जिन्हें फ़ायदा होता है, उनका अनुपात बहुत कम है

इमेज स्रोत, Alan Reeves @coachalreeves
तो, पुरुषों के लिए स्वस्थ टेस्टोस्टेरोन स्तर क्या है? यह इस पर निर्भर करता है कि आप किस संस्था से पूछ रहे हैं और आप कौन सा अध्ययन पढ़ रहे हैं.
बीएसएसएम के दिशा-निर्देश, जिन्हें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से लिया गया है, के अनुसार 12nmol/L से कम स्तर वाले पुरुषों के लिए टीआरटी पर विचार किया जाना चाहिए और उनमें संभवतः 'हाइपोगोनाडिज़्म' के लक्षण दिख रहे होंगे- एक ऐसी स्थिति जिसमें अंडकोष इस महत्वपूर्ण सेक्स हार्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रहे होते हैं.
एनएचएस का मार्गदर्शन अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से अलग हो सकता है, लेकिन यह बताता है कि 6 से 8nmol/L से कम स्तर वाले पुरुष में टेस्टोस्टेरोन की न्यूनता या डेफ़िशिएंसी हो सकती है.
महिलाओं के लिए, टेस्टोस्टेरोन का स्तर 20 से 40 वर्ष की आयु के बीच कम होने लगता है और मेनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) में प्रवेश करने पर यह एक स्थिर स्तर पर आ जाता है. स्तर का कम होना सामान्य है, लेकिन सवाल यह है कि उस कमी का सेक्स ड्राइव और समग्र स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ता है.
इसके लिए टेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन सटीक रीडिंग लेना मुश्किल होता है क्योंकि महिलाओं के लिए टेस्टोस्टेरोन महत्वपूर्ण तो है, लेकिन इसकी आवश्यक मात्रा बहुत कम होती है. और अगर इसे प्रिस्क्राइब किया भी जाता है, तो इसे 'ऑफ़-लेबल' देना पड़ता है क्योंकि अभी तक एनएचएस में महिलाओं के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त उपचार उपलब्ध नहीं है.
ब्रिग्स टीआरटी को लेकर चल रही चर्चाओं और शोर-शराबे को लेकर सतर्क हैं. उनका कहना है कि उन्होंने ऐसे मरीज़ों की संख्या में भारी उछाल देखा है जो उनसे कहते हैं कि उन्हें टेस्टोस्टेरोन की ज़रूरत है क्योंकि वे 'लो' महसूस कर रहे हैं और अब उनका सेक्स का मन नहीं करता.
"वे मुझसे कहते हैं कि उन्होंने अपनी रिसर्च पूरी कर ली है. अक्सर इसका मतलब यह होता है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर किसी को इस हार्मोन के जीवन बदल देने वाले प्रभाव के बारे में पोस्ट करते हुए देखा है."
"सिर्फ़ इसलिए कि यह किसी सेलिब्रिटी के लिए काम करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि यह आम जनता के लिए भी काम करेगा."
उनका कहना है कि उनके स्थानीय क्षेत्र, चेशायर और मर्सीसाइड के डॉक्टरों के पास ऐसे मरीज़ों की भीड़ है जो टेस्टोस्टेरोन चेक कराने की मांग कर रहे हैं. वह कहती हैं कि ऐसे कई लोग हैं जो टीआरटी प्रिस्क्रिप्शन लेकर जाते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद वापस आकर कहते हैं कि इसका असर बहुत कम हुआ है.
उनका कहना है कि हालांकि इससे लोगों को फ़ायदा तो मिलता है लेकिन उन लोगों का अनुपात बहुत कम है जो कहते हैं कि उन्हें टेस्टोस्टेरोन चाहिए और जिन्हें वास्तव में इससे लाभ होगा. महिलाओं के मामले में अब तक के क्लीनिकल एविडेंस बताते हैं कि टीआरटी केवल उन महिलाओं के इलाज के लिए प्रभावी है जिनकी रजोनिवृत्ति हो चुकी है और उनकी कामेच्छा कम हो गई है.
ब्रिग्स कहती हैं कि निजी क्लीनिकों के विज्ञापनों ने "सब कुछ ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर दिया है."
वह कहती हैं, "मैं ज़रूरत पड़ने पर टीआरटी के ख़िलाफ़ नहीं हूं, मैं इसके इतने ज़्यादा प्रचार-प्रसार के ख़िलाफ़ हूं."
'यह कोई जादुई छड़ी नहीं है'

इमेज स्रोत, Cheryl O'Malley
जीपी बेन डेविस भी चेतावनी देते हैं कि टीआरटी का एक 'प्लेसिबो इफ़ेक्ट' (भ्रम वाला असर) भी हो सकता है, जिसकी वजह से मरीज़ कभी-कभी निजी तौर पर ऐसी दवाओं के लिए भुगतान करते और लेते रहते हैं, जिनकी उन्हें ज़रूरत नहीं होती.
चेरिल ओ'मैली ने टेस्टोस्टेरोन लेना बंद कर दिया है. उनका कहना है कि उपचार के दौरान उन्होंने जिस तेज़ गुस्से और अत्यधिक यौन उत्तेजना का अनुभव किया था, वह अब शांत हो गया है, और उनकी कामेच्छा उस स्तर पर वापस आ गई है जो उनके लिए सहज़ है.
वह कहती हैं, "मुझे बहुत राहत महसूस होती है कि मैंने इसे लेना बंद कर दिया."
डेविस कहते हैं, "कुछ लोगों के लिए दवा वाकई जीवन बदलने वाली साबित हो सकती है," लेकिन वह यह भी जोड़ते हैं कि यह सिर्फ़ दवा बांटने से कहीं बढ़कर है."
"डॉक्टरों के पास शायद इतना समय न हो कि वे मरीज़ के साथ इस बात पर चर्चा कर सकें कि उनकी कम सेक्स ड्राइव के पीछे असल वजह क्या है, क्या यह उनके पार्टनर के साथ उनके रिश्ते की वजह से है, क्या यह इस बारे में है कि वह खुद को कैसे देखते हैं, या क्या यह इसलिए है कि वे अभी जैसा सेक्स कर रहे हैं वह अब उन्हें उत्तेजित नहीं करता?"
वह कहते हैं कि कामेच्छा की कमी के पीछे बहुत से कारक काम करते हैं और टेस्टोस्टेरोन ही इसका एकमात्र समाधान नहीं है.
हालांकि, एलन रीव्स पिछले सात सालों से टीआरटी पर हैं और उन्हें निजी क्लीनिक 'बैलेंस माई हार्मोन्स' ने टेस्टोस्टेरोन प्रिस्क्राइब किया है. उनका कहना है कि उनके जीवन में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है.
"मेरी कामेच्छा वापस आ गई, शुरुआत में तो इतनी ज़्यादा कि मैं लगातार 10 रातों तक हर रात सेक्स करना चाहता था."
"लेकिन अब वह स्थिति शांत हो गई है और मैं बस एक अच्छी मानसिक और शारीरिक स्थिति में हूं."
इसके बावजूद, रीव्स का मानना है कि 'यह कोई जादू की छड़ी नहीं है' और अपनी जीवनशैली में अन्य बदलाव किए बिना टेस्टोस्टेरोन लेने का कोई मतलब नहीं है.
वह कहते हैं कि वरना यह वैसा ही होगा जैसे किसी 'खटारा कार' में फ़रारी का इंजन लगा दिया जाए.
"मैं अब... ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ चलता हूं, यह आंशिक रूप से टेस्टोस्टेरोन की वजह से है और आंशिक रूप से मेरी अपनी मेहनत की वजह से."
अतिरिक्त रिपोर्टिंगः नैट राइट
शीर्ष चित्र साभार: गेटी इमेजेज
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
















