राजस्थान: पूर्व बीजेपी सांसद ने जिन मुस्लिम महिलाओं से कंबल वापस लिए, वे अब क्या कह रही हैं?

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, टोंक से
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर से लोकसभा के पूर्व सांसद और बीजेपी नेता सुखबीर सिंह जौनापुरिया के कंबल बाँटने के दौरान मुस्लिम महिलाओं से नाम पूछकर उन्हें दिए हुए कंबल वापस लेने पर विवाद बढ़ गया है.
इन मुस्लिम महिलाओं ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा, ''मुसलमान होने के कारण नाम पूछकर कंबल वापस लेना हमारा अपमान है. धर्म के नाम पर लड़वाने का प्रयास किया गया है. पूर्व सांसद को हमसे माफ़ी मांगनी चाहिए.''
घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने एक टीवी चैनल से बातचीत में इस मामले की जांच करने की बात कही है.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस घटना का वीडियो एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजनीति एवं RSS की विचारधारा नफ़रत, ध्रुवीकरण और बांटने की हो, तो ज़मीनी स्तर पर BJP नेताओं का ऐसा घटिया बर्ताव सामने आना आश्चर्य की बात नहीं है."
इस मामले में प्रतिक्रिया के लिए सुखबीर सिंह जौनापुरिया और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उनका जवाब आने पर उसे इस लेख में शामिल कर लिया जाएगा.
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राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है कि जो सांसद रहा हो, उसकी ये हरकत निंदनीय है.
टोंक-सवाई माधोपुर से सांसद हरीश चन्द्र मीणा ने प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए पत्र लिख कर सुखबीर सिंह जौनापुरिया पर कठोर कार्रवाई की मांग की है.
कैसे शुरू हुआ विवाद

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जयपुर से क़रीब 70 किलोमीटर दूर कैथून-लालसोट हाइवे से सटा करेड़ा गांव देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
यहां 22 फ़रवरी को दो बार के पूर्व सांसद और बीजेपी नेता सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने एक कंबल वितरण कार्यक्रम रखा. गांव की महिलाओं को बुलाया गया.
इस दौरान जौनापुरिया ने कंबल देने के बाद नाम पूछा और मुस्लिम महिलाओं से कंबल वापस ले लिए गए.
मामले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें जौनापुरिया महिला का नाम पूछते हुए कहते हैं, "क्या नाम है तेरा." महिला के नाम बताने पर वह कहते हैं, "हट, एक तरफ़ हो." इसके बाद वह कंबल छीन लेते हैं.
इसके बाद वह वीडियो में कहते दिखते हैं, ''बुरा मानो या भला मानो. मोदी को गाली देने वाले को लेने का हक़ ही नहीं है. ले जाओगे और जाते-जाते कहोगे कि बेवकूफ़ बना रहे हैं.''
इसके बाद गांव के ही कुछ युवक घटना का विरोध करते हैं तो पूर्व सांसद गाड़ी में बैठकर निकल जाते हैं.

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गाँव के लोग क्या कह रहे हैं?
करेड़ा गांव में एक कच्चे मकान के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई है. यहीं क़रीब 60 साल की महिला शकूरन बानो किराए पर रहती हैं. इन्हीं से नाम पूछने के बाद विवाद बढ़ा था.
शकूरन के बेटे हनीफ़ कहते हैं, ''मैं काम पर गया हुआ था. शाम को लौटा तो देखा यहाँ बहुत से लोग खड़े थे. लोगों ने मुझे डांटा कि अपनी मां को क्यों भेजा वहां, मुझे नहीं पता था कि ऐसी बेइज्ज़ती होगी.''
शकूरन कहती हैं, ''हमें बुलाया गया था. हम पाँच मुस्लिम महिलाएं थीं. हमारा नाम पूछा और फिर हमें दूर अलग बैठा दिया. उन्होंने कहा कि तुम तो मोदी को गाली देती हो. तुम्हें कंबल लेने का कोई अधिकार नहीं है. जो कंबल दिया था वो हमारे हाथों से छीन लिया. यह तो बेइज्ज़ती हुई हमारी. फिर भी हम ख़ामोश रहे और कुछ नहीं बोले. हम वापस लौट आए.''

''हम पाँचों मुस्लिम महिलाएं थीं तो हमसे ले लिए. मैं तो उस नेता का नाम तक नहीं जानती. कुछ युवकों ने नेता को बोला कि ऐसा क्यों कर रहे हो? तब वो गाड़ी में बैठकर निकल गए, रुके नहीं.''
शकूरन कहती हैं, ''वो कह रहे थे कि हम मोदी को गालियां देते हैं. मोदी को गालियां हम क्यों देंगे? खाना परोस कर खाना छीन रहे हो तो हमारी क्या इज़्ज़त रह गई. हम कंबल के लिए भूखे नहीं मर रहे. हमें बुलाया था इसलिए गए थे. हमें तो बहुत बुरा लग रहा है. हमारे साथ रमज़ान के महीने में इस तरह से बर्ताव किया गया. हम भी इंसान हैं, कोई जानवर थोड़े हैं.''
ज़ुबैदा एक अन्य मुस्लिम महिला हैं, जिनसे कंबल वापस ले लिया गया. उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, ''पहले कंबल दिए, फिर नाम पूछा और कंबल छीन लिए. हमें बहुत बुरा लगा. हमें कहा कि आप मुसलमान हैं और आप मोदी को गाली देते हैं. अरे, हमने मोदी को कब गाली दे दी. मोदी तो हमारे खाते में भी पैसे डालते हैं, वो तो ऐसा नहीं करते कि हिंदू के खाते में पैसे डालें और हमारे में नहीं.''

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गाँव में हिन्दू-मुस्लिम का भेद नहीं
शकूरन कहती हैं, ''गाँव में कभी भेदभाव नहीं हुआ. हम सब मिल जुलकर रह रहे हैं. पहली बार ऐसा हुआ है. गाँव वाले कह रहे हैं कि यह सबका अपमान है. गाँव के लोग हमारे साथ हैं.''
ज़ुबैदा कहती हैं, ''हमारा अपमान करने वाले वो नेता गांव में आएं और हमसे माफ़ी मांगें.''
करेड़ा के पास ही गांव जगसा के रहने वाले धर्मवीर मीणा कहते हैं, ''हिंदू-मुस्लिम करने की मानसिकता ग़लत है. हमारे सांसद रहे हैं, इन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है. दिल्ली के रहने वाले को टिकट देकर यहां भेज दिया और हमें लगा अच्छे आदमी होंगे तो लोगों ने दो बार सांसद बनाकर भेज दिया. ये जातिवाद और धर्म के नाम पर लड़ाने का प्रयास करते हैं. इसीलिए हमने इस बार हरा दिया.''
गांव में महिलाओं से मिलने आईं जयपुर शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष मंजू लता मीणा भी शकूरन के घर मौजूद हैं. वह कहती हैं कि 'बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ' का नारा देने वाली बीजेपी के दो बार सांसद रहे जौनापुरिया ने इन महिलाओं से धर्म पूछ कर इनको दिए कंबल छीन लिए.
मंजू लता कहती हैं, ''बात कंबल की नहीं है. बात इनके स्वाभिमान और आत्म सम्मान की है. यह नफ़रत की राजनीति करने आए थे.''
इस गाँव में क़रीब छह मुसलमान परिवार रहते हैं. शकूरन के पति की छह साल पहले मौत हो गई. एक हज़ार रुपये किराए के कमरे में अपने बेटे-बहू और पोतों के साथ वह रहती हैं.
ज़ुबैदा कहती हैं, ''मेरे पति भी नहीं हैं. मैं अपने बेटे-बहू के साथ रहती हूँ. छोटी सी दुकान से बमुश्किल से गुज़ारा चलता है.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















