जंग और डिप्लोमेसी की आशंकाओं के बीच झूलते ईरान के अंदर क्या चल रहा है?

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- Author, पूया क़ुर्बानी
- पदनाम, बीबीसी फ़ारसी
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
ईरान के कई शहरों में बहुत से लोगों की रातों की नींद ग़ायब हो गई है और उनके दिन चिंता में गुज़र रहे हैं, क्योंकि वहाँ लगातार ये कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिकी मिलिट्री का हमला होने वाला है.
ख़ासकर कुछ युवा लोग प्लेन और शिप-ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म को बहुत ज़्यादा चेक कर रहे हैं. कुछ लोग बाहरी दख़ल से डरे हुए हैं, तो कुछ चुपचाप या खुले तौर पर इसकी उम्मीद कर रहे हैं कि देश पर अमेरिकी सेना की कार्रवाई हो सकती है, क्योंकि क़रीब दो महीने पहले देश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को हिंसक तरीके़ से दबाया गया था.
कई लोग उम्मीद कर रहे थे कि ईरान पर बाहरी दबाव से सत्ता का संतुलन बदल सकता है. लेकिन यह उम्मीद तब कम हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डिप्लोमेटिक बातचीत की ओर मुड़ते दिखे.
ट्रंप ने पहले प्रदर्शनकारियों को "आंदोलन करते रहने" के लिए बढ़ावा दिया था और वादा किया था कि "मदद पहुंच रही है."
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ईरान के मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ताज़ा बयान में कहा, "हमें एक बड़ा फ़ैसला लेना है, जो आसान नहीं है. इसके बदले मैं शांति के रास्ते यह काम करना चाहता हूँ. लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि ये बहुत ख़तरनाक और मुश्किल लोग हैं."
ईरान में अनिश्चितता का दौर जारी

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ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों की संख्या पर अभी भी काफ़ी बहस चल रही है. अमेरिका की ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन एचआरएएनए की रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रदर्शनों के दौरान 7,007 लोग मारे गए हैं, और हज़ारों मामलों की अभी भी जांच चल रही है.
यह ईरान के 3,117 लोगों के मारे जाने के आधिकारिक आंकड़े से कहीं ज़्यादा है और इस कार्रवाई के बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी न होने का संकेत देता है.
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ, जिनमें ईरान के मानवाधिकार मामलों के विशेष दूत माई सातो भी शामिल हैं, इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इंटरनेट पर रोक और बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने से इस स्तर पर "हिंसक कार्रवाई के असली स्तर का पता लगाना नामुमकिन" है.
इस हफ़्ते जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का तीसरा राउंड बिना किसी अंतिम समझौते के ख़त्म हो गया.
इस मामले में प्रगति के बहुत कम संकेत मिले हैं और ईरान एक बार फिर गहरी अनिश्चितता के दौर में जा रहा है.
कई ईरानियों को डर है कि बातचीत टूटने से ख़तरनाक नतीजे हो सकते हैं.
कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि ईरान के नेताओं ने पहले भी इशारा किया है कि वे हार मानने के बजाय "एक क्षेत्रीय युद्ध" का जोख़िम उठाएंगे.
कुछ इंटेलिजेंस ऑब्ज़र्वर का कहना है कि अगर मिलिट्री से सामना हुआ तो इस्लामिक रिपब्लिक "उन्मादी" जैसा रवैया अपना सकता है, और बिना किसी मुक़ाबले के हार मानने के बजाय "सुलगती हुई ज़मीन" छोड़ने की धमकी दे सकता है.
सरकारी मीडिया दिखा रहा है ईरानी मिसाइलों की ताक़त

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इन चिंताओं को घरेलू दबाव की चल रही रिपोर्टों से और बल मिलता है.
माई सातो ने ह्यूमन राइट्स वकीलों पर बढ़ते दबाव की चेतावनी दी है और कहा है कि ईरान में बड़े विरोध की लहर के कम होने के बाद भी गिरफ्तारी, धमकी और लोगों की निगरानी जारी है.
वह इसे ईरान के हाल के इतिहास के सबसे बुरे ह्यूमन राइट्स दौर में से एक मानती हैं.
ईरान में "पारदर्शिता और जवाबदेही" के लिए उनकी बार-बार की गई मांगें बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को दिखाती हैं.
ईरान में सरकार के समर्थन वाले सोशल मीडिया चैनलों पर, दो अलग-अलग बातें हावी हैं.
यहाँ एक खेमा सावधानी से उम्मीद जता रहा है और उम्मीद कर रहा है कि बातचीत से एक और जंग नहीं होगी क्योंकि आठ साल के ईरान-इराक़ युद्ध और हाल ही में इसराइल के साथ 12 दिनों के युद्ध की यादें ताज़ा हैं.
हालिया युद्ध में ईरान में 1,200 से ज़्यादा लोग मारे गए और 6,000 से ज़्यादा घायल हुए जबकि इसराइल में 28 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए.
जबकि दूसरा पक्ष एक तबाही वाली सोच को अपनाता है. वह इस बात पर ज़ोर देता है कि डिप्लोमेसी के बावजूद "अच्छाई और बुराई" के बीच एक बड़ा टकराव होना तय है.
इस बीच, सरकारी मीडिया ने ईरानी मिसाइल की काबिलियत दिखाने वाले प्रसारण तेज़ी से बढ़ा दिए हैं. यह बढ़े हुए तनाव के समय में एक जाना-पहचाना तरीक़ा है.
ईरानी नव वर्ष का मौक़ा, लोग कर रहे तैयारी

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आर्थिक रूप से देखें तो ईरान में फ़ारसी नव वर्ष 'नौरोज़' से पहले सबसे बिज़ी शॉपिंग सीज़न चल रहा है. फिर भी बाज़ारों में माहौल वैसा नहीं है, जैसा इस समय आम तौर पर होता है.
ईरान पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं और देश में महंगाई 62% से ऊपर बढ़ गई है, ऐसे में अनिश्चितता के कारण बाज़ार ठप हैं.
यहाँ कारोबारियों का कहना है कि लोग कम आ रहे हैं, और निवेशक हिचकिचा रहे हैं, जिससे वे बड़े क़दम उठाने में देरी कर रहे हैं. कारोबार के लिहाज़ से बड़े क़दम अब रणनीतिक फ़ैसलों के बजाय जुआ ज़्यादा लगते हैं.
ईरान में सोशल नेटवर्क पर एक और ट्रेंड दिख रहा है और वह है आपालकालीन तैयारी में इज़ाफ़ा होना.
लोग डिब्बाबंद खाना, टॉर्च और पानी की बोतलें जमा कर रहे हैं, और इमरजेंसी बैकपैक तैयार कर रहे हैं.
हालांकि कुछ विपक्षी नेता अमेरिका के दख़ल की संभावना को एक टारगेटेड स्ट्राइक के तौर पर देखते हैं, वहीं दूसरे लोग एक बड़े और ज़्यादा ख़तरनाक मिलिट्री ऑपरेशन की संभावना की चेतावनी देते हैं.
इस अनिश्चितता की भावना सिर्फ़ ईरान तक ही सीमित नहीं है. कई देशों ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है.
जैसे-जैसे इलाक़े में तनाव बढ़ रहा है, ईरान के अंदर लाखों लोगों के लिए आने वाले हफ़्ते ज़्यादा स्पष्ट नहीं हैं. उन्हें बस यही उम्मीद है कि डर के सच होने से पहले कूटनीतिक तरीके़ कामयाब हो जाएं.
इस संकट से बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता न होने की वजह से ईरान के अंदर भावुक माहौल, सामाजिक ध्रुवीकरण और अत्यधिक सतर्कता की स्थिति देखी जा रही है.
जैसे-जैसे ईरान-अमेरिका बातचीत का अगला दौर क़रीब आ रहा है, लोग कूटनीति की हल्की उम्मीदों और इस गहरी समझ के बीच झूल रहे हैं कि ऐसी घटना जो उनके नियंत्रण से बहुत दूर है, वो रातों-रात उनका भविष्य बदल सकती है.
कई लोगों को लगता है कि ईरान अब एक ऐसे तनाव भरे माहौल में फंसा हुआ है जहाँ सब कुछ और कुछ भी नहीं की स्थिति एक ही बार में बदल सकती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
















