हैदराबाद टेस्ट मैच में मिली हार से सामने आई टीम इंडिया की कमज़ोरी

रोहित शर्मा

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय टीम घरेलू पिचों पर टेस्ट मैच आसानी से नहीं हारती है.

आठ साल तक विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया भारतीय ज़मीन पर महज़ दो टेस्ट हारी थी लेकिन रोहित शर्मा की कप्तानी में सिर्फ़ एक साल के भीतर ही दो टेस्ट मैच हार चुकी है.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ इंदौर और अब इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हैदराबाद में टीम इंडिया को हार मिली.

ये सच है कि घरेलू ज़मीन पर टीम इंडिया हमेशा अपराजित रहने का रिकॉर्ड बरकरार नहीं रख सकती है.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ जिस तरह से बैज़बॉल की रणनीति ने टीम इंडिया को चौंकाया, उससे ये साफ़ है कि बदलाव के दौर से गुज़र रही मौजूदा टीम के लिए आने वाले वक़्त में टेस्ट क्रिकेट में चुनौतियां बढ़ेंगी.

विराट कोहली भले ही निजी कारणों के चलते इसमें नहीं खेले लेकिन पिछले 24 महीनों में ईशांत शर्मा, रिद्दिमान साहा, उमेश यादव, चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्य रहाणे जैसे अनुभवी खिलाड़ी टेस्ट टीम की योजनाओं से बाहर हो चुके हैं.

आने वाले 24 महीनों में शायद आर अश्विन, रविंद्र जडेजा, रोहित शर्मा और शायद कोहली भी सफेद जर्सी में नज़र ना आएं.

रोहित शर्मा

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ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था

इन खिलाड़ियों की ग़ैर-मौजूदगी वाले दौर में हैदराबाद जैसी हार शायद इस तरह से घरेलू फैंस को नहीं झकझोरेंगी.

आख़िर ऐसा पहले तो कभी नहीं हुआ कि 190 रनों की बढ़त लेने के बावजूद टीम इंडिया टेस्ट मैच हार जाए.

इंग्लैंड ने 690 टेस्ट विकेट लेने के अनुभव वाले और कामयाब गेंदबाज़ जेम्स एंडरसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने का बहादुरी भरा फैसला लिया. फिर भी इंग्लैंड की टीम को शिकन तक नहीं आई.

इंग्लैंड ने मैच से 24 घंटे पहले ही एलान कर दिया कि वो तीन स्पिनर के साथ उतरेंगे. इनमें से दो खिलाड़ियों के पास मिलाकर महज एक टेस्ट खेलने का अनुभव था.

दरअसल, इंग्लैंड ने गेंद और बल्ले की बजाय अपनी आक्रामक सोच के चलते एक असंभव सी जीत हासिल की.

यही तो बेज़बॉल का मूल दर्शन है.

हालात चाहे जैसे भी हों, आपको हार की परवाह किए बग़ैर जीत के लिए खेलते रहने के बारे में सोचते रहना है.

काग़ज़ पर पढ़ने और कानों से सुनने में ये शब्द अच्छे लगते हों लेकिन 22 गज की पिच पर इसी सोच को अमली जामा पहनाना बेहद मुश्किल है.

क्रिकेट मैच

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जिस क्रिकेट को बनाया जीने का हिस्सा

इंग्लैंड के कोच ब्रैंडन मैक्कलम और कप्तान बेन स्टोक्स ने तो इस तरह के क्रिकेट को जीने का हिस्सा बना दिया है.

तभी तो ओली पोप आकर एक ऐसी पारी खेल जाते हैं जिसके सामने अश्विन-जडेजा जैसे सर्वकालीन महान स्पिन जोड़ी भी नौसिखिए की तरह असहज दिखने लगती है.

सिर्फ़ एक हार के बाद और वो भी इतने क़रीबी अंतर से पिछड़ने के बाद टीम इंडिया की बहुत ज़्यादा आलोचना शायद नहीं की जा सकती है.

टीम मैनजमेंट इस हार के बाद अलग-अलग दिशा में दिखा.

कप्तान रोहित शर्मा को ऐसा महसूस हुआ कि चौथी पारी में 230 रनों के लक्ष्य का पीछा उतना मुश्किल नहीं था और उनके बल्लेबाज़ों ने दिलेरी नहीं दिखाई.

कोच राहुल द्रविड़ का मानना था कि पहली पारी में बल्लेबाज़ों को 500 रनों का लक्ष्य हासिल करना चाहिए था क्योंकि भारत में आख़िरी पारी में 200 से ज़्यादा रनों की चुनौती हमेशा से एक कड़ा इम्तिहान होती है.

शुभमन गिल

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खिलाड़ी ख़ुद भी मायूस होंगे

द्रविड़ से प्रेस कांफ्रेस में शुभमन गिल और श्रेय्यस अय्यर को लेकर भी तीखे सवाल पूछे गए.

ये खिलाड़ी न सिर्फ़ हैदराबाद की दोनों पारियों में नाकाम हुए बल्कि हाल ही में साउथ अफ्रीका के दौरे पर भी नाकाम हुए थे.

इतना ही नहीं, इन दोनों खिलाड़ियों के टेस्ट आंकड़ों पर ग़ौर किया जाए तो सबसे ज़्यादा मायूसी उन्हें खुद होगी.

मुमकिन है कि विशाखापत्तनम में अगर एक बदलाव होता है तो इन दोनों में से एक खिलाड़ी को बाहर बैठना पड़ेगा और रजत पट्टीदार को पहली बार टेस्ट क्रिकेट में अपनी प्रतिभा को दिखाने का मौका मिले.

बहरहाल, अगर भारतीय प्रशंसक ना होकर अगर आप क्रिकेट के प्रशंसक हैं तो एक बात से बहुत ख़ुशी मिलेगी कि महज कुछ घंटों के भीतर टेस्ट क्रिकेट ने दो ऐसे नतीजे देखे जिसकी कल्पना बहुत सारे क्रिकेट प्रेमियों ने नहीं की होगी.

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इमेज कैप्शन, वेस्टइंडीज़ ने ऑस्ट्रेलिया को हराया

वेस्टइंडीज़ और इंग्लैंड का खेल

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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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वेस्टइंडीज़ की टीम ने ऑस्ट्रेलिया में फिर से गाबा का घमंड तोड़ा तो इंग्लैंड ने भारत को हैदराबाद में बताया कि हमेशा अपने विरोधी को हल्के में लेना परेशानी का ही सबब बनता है.

इंग्लैंड ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिस तरह से अपने से बेहद मज़बूत दिख रहे विरोधी को पस्त किया, उससे अनायास ही टीम इंडिया के दो साल पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे की यादें ज़ेहन में ताज़ा हो गईं.

रहाणे की टीम ने पहले गाबा में एकदम साधारण से दिख रहे आक्रमण के बूते टेस्ट जीता और बाद में सीरीज़ भी जीती.

क्या इंग्लैंड फिर से वही कमाल कर सकता है जो 2012 में उन्होंने किया था?

भारत को फिर से भारत में मात देकर टेस्ट सीरीज़ जीतने का?

ये इतना आसान नहीं होगा क्योंकि 2017 में ऑस्ट्रेलिया ने भी सीरीज़ में 1-0 की बढ़त लेकर ये सपना देखा था जो चकनाचूर हो गया था.

रोहित और द्रविड़ की जोड़ी पर इस बात का दबाव बढ़ेगा कि वो हर हाल में भारत के गौरवपूर्ण घरेलू रिकॉर्ड को इस सीरीज़ में बरकरार रखें.

अगर भारत वापसी करते हुए इंग्लैंड को टेस्ट सिरीज़ में हराने में कामयाब रहा तो इसका मतलब होगा कि कुछ और सालों तक विदेशी टीमों की भारत को भारत की जमीं पर हराने की हसरत पूरी नहीं हो पाएगी.

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