ओवल टेस्टः क्या तीसरे दिन दम दिखाकर भारत ने मैच में वापसी कर ली है?
विमल कुमार
वरिष्ठ पत्रकार, लंदन के ओवल मैदान से

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पहले दिन की घनघोर निराशा के बाद टीम इंडिया ने दूसरे दिन शानदार वापसी की और फिर एक शानदार टेस्ट टीम की तरह उन्होंने तीसरे दिन भी वापसी के लिए जुझारुपन और निरंतरता बरकरार रखी.
टीम इंडिया को तीसरे दिन मैच में वापसी कराने वाले दो बल्लेबाज़ वैसे रहे जो खुद टेस्ट क्रिकेट में डेढ़ साल और दो साल के बाद वापसी कर रहे थे. उन दोनों की दोबारा टेस्ट में खेलते देखना शायद किसी ने सोचा नहीं होगा.
स्वाभाविक सी बात है कि हम अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा की बात कर रहें हैं जो दोनों लगभग एक साथ मुंबई क्रिकेट की नर्सरी में पलते हुए बड़े हुए हैं.
इत्तेफ़ाक़ से इस टीम का कप्तान भी मुंबई का ही एक खिलाड़ी है जिसने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ अहमदाबाद में टेस्ट जीतने के साथ ही ये कह दिया था कि इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ़ एक बदलाव होगा और वो होगा शार्दुल ठाकुर की वापसी.
रहाणे को इंग्लैंड का टिकट नहीं मिलता अगर मुंबई के ही एक और बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर अनफिट नहीं होते.
रण में रहाणे का जलवा

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ये कहावत बहुत पुरानी और प्रचलित है कि 'नसीब भी उसी की ही मदद करता है जो ख़ुद अपनी मदद करता है.'
जिस अजिंक्य रहाणे का करियर 82 टेस्ट के बाद ईशांत शर्मा और रिद्धिमान साहा की तरह ख़त्म मान लिया गया था उस रहाणे को जब चेन्नई सुपर किंग्स में आईपीएल के लिए चुना गया तो उस वक्त बहुत सारे फैंस को ऐसा लगा कि महेंद्र सिंह धोनी ने सिर्फ पुराने रिश्तों को ध्यान में रखते हुए ‘जिंक्स’ को बस टीम में शामिल कर लिया है.
विडंबना देखिये कि जिस भारतीय कप्तान धोनी ने रहाणे के स्ट्राइक रेट को लेकर सार्वजनिक तौर पर बेबाक राय रखी थी, उसी धोनी की सलाह और भरोसे ने 33 साल की उम्र में 23 साल वाले युवा रहाणे की झलक दिखा दी.
आईपीएल में इस साल सबसे ज़्यादा रन शुभमन गिल ने बनाए, विराट कोहली और यशस्वी जायसवाल ने भी सुर्खियां बटोरी लेकिन जिस अंदाज़ में रहाणे ने बल्लेबाज़ी की उसकी मिसाल शायद ही आईपीएल के 16 सीज़न में आपको देखने को मिले.
क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब आईपीएल की शानदार लय की किसी बल्लेबाज़ ने टेस्ट क्रिकेट में उसी सहज़ता के साथ एंट्री करा दी है.
ओवल टेस्ट के तीसरे दिन लंच से पहले रहाणे की बल्लेबाज़ी में वही रौनक, वही आक्रामकता, वही संयम, वही भरोसा और वही चमक देखने को मिली जो दो महीने तक आईपीएल में दिखी थी.
11 रनों के चलते शतक से चूकने वाले रहाणे को भारतीय क्रिकेट का संकट-मोचक कहा जाता है. एक बार फिर से रहाणे ने साबित किया कि रोहित और कोहली जैसे सुपरस्टार की मौजूदगी में भी अपनी मौजूदगी का अहसास कराया जा सकता है.
शार्दुल ने दिया साथ

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रहाणे को भरपूर साथ मिला शार्दुल ठाकुर का. मुंबई के इस खिलाड़ी की तकनीक को लेकर भले ही सवाल उठाए जाएं, लेकिन उनके साहस और टैम्प्रामेंट का जोड़ कहां से लाएंगे?
दिन का खेल ख़त्म होने के बाद ठाकुर जब प्रेस कांफ्रेस में आये तो उनसे उनके खेल और रहाणे की बल्लेबाज़ी के बारे में पूछा गया. उनका जवाब था- "रहाणे के लिए ये सब कुछ नया नहीं था."
ठाकुर के लिए भी मुश्किल हालात में एक बेशकीमती शतक बनाना कोई नई बात नहीं हैं.
तीसरे दिन का खेल ख़त्म होते होते टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलियाई टॉप ऑर्डर के चार विकेट भी झटक लिए और फिर से इस टेस्ट में वापसी की उम्मीदों ने ज़ोर मारना शुरु कर दिया है.
क्या भारत ऑस्ट्रेलिया को 50-60 रन के भीतर चौथे दिन लंच से पहले आउट करके जीत के बारे में सोच सकता है?
अतीत के आंकड़े आपको बतायेंगे कि 300 से ज़्यादा रनों वाले लक्ष्य का पीछा करते हुए मैचों में टीम इंडिया 46 मौके पर हारी है, 32 मौके पर ड्रॉ कराने में कामयाब हुई और 3 बार वो जीते भी हैं. 1986 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ मद्रास टेस्ट टाई हुआ था.
ओवल में लक्ष्य भेदना कितना मुश्किल?

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ओवल के मैदान पर लक्ष्य का पीछा करते हुए टीमों का रिकॉर्ड तो और भी बुरा है.
121 साल पहले मेज़बान इंग्लैंड ने जीत के लिए 263 रन बनाये थे और इस सदी में किसी भी टीम ने ओवल में 200 से ज़्यादा का स्कोर बनाकर मैच नहीं जीता है.
लेकिन, ये नहीं भूलना चाहिए कि पारंपरिक तौर पर ओवल में टेस्ट क्रिकेट अगसत्-सितंबर के महीनों में स्पिन के लिए मददगार पिचों पर हुए हैं. जून के पहले हफ्ते में ओवल में पहली बार टेस्ट क्रिकेट का आय़ोजन होल रहा है.
वैसे, इंग्लैंड की टीम ने पिछले साल 4 मौक़ों पर सहज़ता से 270 से ज़्यादा रनों का पीछा करके ये भरोसा दूसरी टीमों की भी दिया है अब चौथी पारी में लक्ष्य का पीछा करना उतना मुश्किल काम भी नहीं है. पिछले साल भारत के ही खिलाफ एजबेस्टन टेस्ट के दौरान इंग्लैंड ने 378 रन सिर्फ 3 विकेट के नुक़सान पर बना लिये थे.
तर्क देने वाले तो ये भी कह सकते हैं कि टीम इंडिया ने ब्रिसबेन में "गाबा का घमंड" भी 328 रन बनाकर तोड़ा था. लेकिन, उस टीम में ऋषभ पंत थे जबकि इस टीम में श्रीकर भरत. तो जीत नहीं सकते तो ड्रॉ का नतीजा तो हासिल किया जा सकता है.
इस नतीजे से ट्रॉफी साझे तौर पर मिलेगी. भले ही भारत इस मामले में इंग्लैंड में अव्वल रहा है. 1979 में टीम इंडिया ने 150.5 ओवर की बल्लेबाज़ी करके मैच बचाया था जो कि एक अटूट रिकॉर्ड है.
2007 में आख़िरी बार जब टीम इंडिया ने इंग्लैंड में टेस्ट सिरीज़ जीती थी तो उस वक्त भी ओवल में टीम इंडिया ने ड्रॉ के नतीजे के लिए 110 ओवर की बल्लेबाज़ी की थी. लेकिन, टीम इंडिया में स्ट्रोक्स-प्लेयर्स की भरमार देखते हुए जीत की मुश्किल संभावना ड्रॉ के नतीजे से ज़्यादा आसान दिखती है.
अब ये मत सोचियेगा कि ऐसा होना मुश्किल है. क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ जब भी मुक़ाबले कड़े होते हैं, टीम इंडिया कुछ ना कुछ असाधारण प्रदर्शन करने में कामयाब होती है.
ओवल टेस्ट के चौथे दिन ही ये पता चल जायेगा कि मैच आख़िरी दिन तक जायेगा भी या नहीं और अगर जायेगा तो टीम इंडिया के लिए जीत मुमकिन होगी या नहीं?
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