वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में रोहित, कोहली, शुभमन सब पिटे, रण में बचे रहाणे
विमल कुमार
वरिष्ठ पत्रकार, लंदन के ओवल मैदान से

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भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट में अब तक दो दिनों का खेल हो चुका है.
इन दो दिनों के बाद ओवल टेस्ट को ज़्यादातर क्रिकेट प्रेमी उसी नज़रिए से देखेंगे जहाँ पर ऑस्ट्रेलिया के लिए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में जीत लगभग तय दिख रही है.
लेकिन, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट के मैदान में पिछले 25 सालों में प्रतिद्वंद्विता का आलम ऐसा रहा है कि हर मुश्किल हालात में टीम इंडिया की वापसी होती है और वो भी किसी चमत्कार की तरह.
मौजूदा टेस्ट के दूसरे दिन, पहले सेशन में भी वही दिखा जब भारतीय गेंदबाज़ों ने कंगारुओं के आख़िरी 7 विकेट महज़ 108 रन देकर झटक लिए.
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भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया है और ऐसा लगता है कि तीसरे दिन टीम इंडिया को फॉलो-ऑन की शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ सकती है.
लेकिन, अतीत के कुछ आँकड़े टीम इंडिया को थोड़ी तसल्ली दे सकते हैं.
साल 2002 के बाद से जब-जब ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 400 से ज़्यादा का स्कोर खड़ा किया है तो वो भारत को छोड़कर किसी और दूसरी टीम के ख़िलाफ़ मैच हारे नहीं हैं.
कंगारुओं का इस संदर्भ में बाकी दूसरी टीमों के ख़िलाफ 43 जीत और 10 ड्रॉ का आँकड़ा है.
लेकिन टीम इंडिया के ख़िलाफ़ वो अगर चार मौक़े पर जीते हैं, तो चार बार हारे भी हैं और बाक़ी पाँच बार मैच ड्रॉ बीच हुए हैं. यानी, अभी भी उम्मीदें छोड़ना सही नहीं हैं.

विराट कोहली ने पिछले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के हर फॉर्मेट में तीन साल से शतक के सूखे को ख़त्म कर दिया और आईपीएल में भी शतक जमाए.
लेकिन, ये बात शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में कोहली का बल्ला काफी लंबे समय से जूझ रहा है. ख़ासकर, निर्णायक मैचों में.
2020 से 25 टेस्ट की 43 पारियों में कोहली के बल्ले से सिर्फ़ 7 ही मौक़े पर 50 से ज़्यादा रनों की पारियाँ निकली हैं.
इसमें से इकलौता शतक अहमदाबाद में मार्च के महीने में उस पिच पर आया था, जहाँ पर हर दूसरा बल्लेबाज़ शतक जमा रहा था.
पिछले 25 टेस्ट में कोहली का औसत 30 (29.23) रन से भी कम का रहा है और निश्चित तौर पर ये कहा जा सकता है कि एक असाधारण टेस्ट करियर की यात्रा में ये सबसे संघर्षपूर्ण पड़ाव है.
कोहली को इंग्लैंड में अपनी महानता को साबित करने के लिए मैच के तीसरे ही दिन या फिर चौथे या आख़िरी दिन एक ऐसी पारी खेलनी ही पड़ेगी जिससे ना सिर्फ़ उनकी आलोचना करने वालों के मुंह बंद हो, बल्कि टीम इंडिया के लिए पिछले एक दशक से आईसीसी ट्रॉफी जीतने का सूखा भी ख़त्म हो.

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क्या बोले मोहममद सिराज?
दूसरे दिन की एक और दिलचस्प बात साझा करना चाहूंगा. दिन का खेल ख़त्म होने के बाद मोहम्मद सिराज जब प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिए आए, तो उन्हें क़रीब 15 मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा अपनी पारी के लिए.
स्टीवन स्मिथ से पत्रकारों के सवाल-जवाब समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
इस इंतज़ार के दौरान सिराज के चेहरे पर झुंझलाहट को पढ़ा जा सकता था. इसलिए जब सिराज से मैंने ये सवाल किया कि इंग्लैंड में टीम इंडिया को क्या हो गया है?
मैंने पूछा कि इस टेस्ट में पहले दो दिन गेंदबाज़ों को विकेट के लिए इंतज़ार करते रहना पड़ा और अब बल्लेबाज़ों को एक अच्छी पारी के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है. मुमकिन है कि आईसीसी ट्रॉफी जीतने का इंतज़ार इस मैच के दौरान पूरा होगा.
ये सुनकर सिराज थोड़ा मुस्कराए और अपने जानेमाने अंदाज़ में जवाब दिया, "देखिए टेस्ट क्रिकेट संयम का दूसरा नाम है. हमें और आपको संयम रखना होगा. हमें अभी भी उम्मीद है कि हम इस मैच में वापसी करेंगे."
सिराज शायद ये बात अकेले कह सकते हैं क्योंकि उन्होंने अपनी शानदारी गेंदबाज़ी से टीम इंडिया के लिए मैच में एक बार वापसी तो कराई ही है.
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रहाणे पर टिकी उम्मीदें
लेकिन, मैच के तीसरे दिन टीम इंडिया को दोबारा फिर से वापसी कराने के लिए उस बल्लेबाज़ पर निर्भर रहना होगा जो कि टेस्ट क्रिकेट में एक साल से लंबे समय के बाद वापसी कर रहा है. वो हैं अजिंक्य रहाणे.
अंजिक्य रहाणे का टेस्ट करियर 82 मैचों के बाद ख़त्म होता दिख रहा था लेकिन किस्मत और आईपीएल में सही वक़्त पर सही तरीक़े से रन बनाने के चलते उन्हें टेस्ट क्रिकेट में फिर से लाइफ़लाइन मिली है.
अपनी छोटी पारी के दौरान ऑस्ट्रेलिया कप्तान पैट कमिंस की नो बॉल के चलते रहाणे को एक अहम लाइफ़लाइन फिर से मिली है.
लेकिन, ये देखना होगा कि क्या रहाणे एक ऐसी पारी खेल पाएँगे, जिससे ना सिर्फ़ उनका करियर फिर से जीवित हो बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए टेस्ट क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीतने का सपना भी तीसरे दिन ही दम ना तोड़े.

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वैसे ओवल के मैदान पर पिछली बार 2021 में मेज़बान इंग्लैंड के ख़िलाफ कुछ ऐसे ही हालात में टीम इंडिया ने वापसी की थी जब रोहित शर्मा ने एक शानदार शतक बनाया था.
2021 में लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान एकदम से हारे हुए टेस्ट मैच में मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह ने अपनी बल्लेबाज़ी से ना सिर्फ जान फूंक दी थी बल्कि हैरतअंगेज तरीक़े से मैच भी जिताया था.
क्या रहाणे को शार्दुल ठाकुर, शमी और उमेश यादव से भी वैसा साथ मिलेगा जिससे अगर पहली पारी में बढ़त भले ही ना मिले लेकिन कम से कम 100 रनों का अंतर ही सही रखने में कामयाबी मिले?
सवाल अभी कम हैं और जवाब देने का वक्त बल्ले और गेंद से टीम इंडिया के पास बचा हुआ है.
लेकिन, अगर तीसरे दिन भी टीम इंडिया फिसलेगी तो सवाल रोहित शर्मा की कप्तानी पर भी उठेंगे और कोच राहुल द्रविड़ पर भी.
छह महीने के भीतर ये दूसरी आईसीसी ट्रॉफ़ी होगी, जो भारत के हाथ से फिसल सकती है.
अगर वाकई ऐसा होता है तो फिर से आईपीएल पर निशाना साधते हुए बीसीसीआई को भी फैन्स आड़े हाथ ले सकते हैं.
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