रहाणे का टेस्ट करियर क्या पटरी पर लौटेगा?
- अजिंक्य रहाणे अपना पिछला टेस्ट मैच जनवरी 2022 में केप टाउन में खेला था
- आईपीएल में प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया में वापसी
- वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में लड़खड़ाती भारतीय पारी को रहाणे ने संभाला
- इस लेख में पढ़िए कैसे टेस्ट टीम से 2022 में ड्रॉप किए जाने के बाद रहाणे एक बार फिर लौट रहे हैं लय में
सात्विक बिस्वाल
बीबीसी न्यूज़ के लिए

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अजिंक्य रहाणे ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को 2021 में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी. फिर उनके करियर में ऐसा मुक़ाम आया कि 2022 में वे टीम से बाहर कर दिए गए.
एक बार फिर उन पर सबकी नज़रें टिकी हैं, क्योंकि वे वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल खेलने वाली टीम का हिस्सा हैं.
वैसे अजिंक्य रहाणे की मौजूदा मुश्किलों को समझा जा सकता है. अगर टेस्ट में नंबर पांच बल्लेबाज़ के तौर पर खुद को साबित कर चुके श्रेयस अय्यर चोटिल नहीं होते तो संभवत अजिंक्य रहाणे की टीम में वापसी नहीं हो पाती.
रहाणे 18 महीने बाद टेस्ट टीम में वापसी कर रहे हैं. उन पर बेहतरीन प्रदर्शन करने का दबाव भी होगा क्योंकि उन्हें शायद ही दूसरा मौका मिले.
2022 में दक्षिण अफ्रीका से सीरीज़ हारने के बाद रहाणे को टेस्ट टीम से बाहर किया गया था. हालांकि सात जून से शुरू हो रही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल में, 82 टेस्ट खेल चुके रहाणे नयी शुरुआत करना चाहेंगे.

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रहाणे को ख़ुद से क्या है उम्मीद
रहाणे ने बीसीसीआई टीवी से बातचीत में कहा है, “18-19 महीने बाद वापसी की है. जो भी हुआ, अच्छा या बुरा, मैं अतीत के बारे में सोचना नहीं चाहता. मैं नए सिरे से शुरुआत करना चाहता हूं और मैं जो कर रहा हूं, उसे जारी रखना चाहता हूं.”
उन्होंने अपने लक्ष्य को स्पष्ट किया, “मैंने जिस माइंडसेट से आईपीएल और रणजी ट्राफ़ी में बल्लेबाज़ी की है, उसी माइंडसेट से खेलना चाहता हूं. मैं फॉर्मेट के बारे में भी नहीं सोचना चाहता, चाहे वो टी-20 हो या फिर टेस्ट क्रिकेट.”
“मैं जिस तरह की बल्लेबाज़ी अभी कर रहा हूं, उसमें मैं चीज़ों को उलझाना नहीं चाहता. मैं इसे जितना सामान्य रख पाया, उतना मेरे लिए बेहतर होगा.”
हालांकि कई लोगों ने यह मान लिया था कि रहाणे का इंटरनेशनल करियर अब पूरा हो चुका है. लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है.
2022-23 के रणजी सत्र में वे मुंबई की ओर से सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ साबित हुए. सात मैचों में करीब 58 की औसत से उन्होंने 634 रन बनाए. लेकिन रहाणे की बल्लेबाज़ी का तूफ़ानी रंग आईपीएल के दौरान दिखा.

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आईपीएल में तूफ़ानी बल्लेबाज़ी
जब चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से खेलते हुए मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ रहाणे ने 27 गेंदों पर 61 रन ठोक दिए, उनकी इस पारी के बाद ही उनको लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था. आईपीएल में खेली गई अन्य पारियों की बदौलत चयनकर्ताओं ने उन्हें वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल खेलने वाली टीम में शामिल किया है.
आईपीएल में चेन्नई टीम के कोच स्टीफ़न फ्लेमिंग ने भी कहा है कि उनकी शुरूआती योजनाओं में रहाणे फ़िट नहीं बैठ रहे थे लेकिन उनकी फॉर्म और आक्रामक शॉट्स खेलने की काबिलियत के चलते टीम प्रंबधन को अपनी योजना बदलनी पड़ी.
रहाणे ने चेन्नई सुपर किंग्स के शीर्ष बल्लेबाज़ी क्रम को संभाला और टीम को पांचवीं बार खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. चेन्नई के लिए 14 मैचों में उन्होंने 172.48 की स्ट्राइक रेट से 326 रन बनाए. ऐसे में सवाल यह है कि रहाणे में आख़िर क्या बदलाव आया?
स्टीफ़न फ्लेमिंग ने इसके बारे में मीडिया से कहा, “रहाणे अपनी पुरानी पहचान से छुटकारा पा चुके हैं. उन्होंने शायद सोचा होगा कि वे जिस तरह के बल्लेबाज़ माने जाते हैं, उस रूप में नहीं खेलना है.”
फ्लेमिंग का आकलन सही हो सकता है. पांच नंबर बल्लेबाज़ के तौर पर रहाणे के कंधों पर अतिरिक्त ज़िम्मेदारी होती थी, टीम की पारी को संभालने की कोशिश में वे पूरी आज़ादी के साथ नहीं खेल पाते थे. लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाज़ी का उदाहरण 2014 में लॉर्ड्स के मैदान में और 2020 में मेलबर्न के मैदान में लगाया गया शतक है.
हालांकि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल में उनकी वापसी पर विश्लेषकों की राय बंटी हुई है. एक सवाल यह भी बना हुआ है कि क्या रहाणे को फॉर्म में चल रहे सूर्यकुमार यादव की जगह अंतिम एकादश में खेलने का मौका मिलेगा? हालांकि इंग्लैंड की परिस्थितियों में खेलने के अनुभव से रहाणे का दावा मज़बूत दिख रहा है.
इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ी में पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और नैथन लॉयन शामिल हैं, ऐसे में रहाणे जैसा बल्लेबाज़ मिडिल ऑर्डर को स्थायित्व दे सकता है. रहाणे के हाव-भाव से उनके व्यवहार का पता नहीं चलता लेकिन मुश्किल चुनौतियों के बीच संयम के साथ उनमें आक्रामकता आ जाती है, लेकिन वे इसे शब्दों से नहीं बल्कि बल्ले से ज़ाहिर करते हैं.

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शांत लेकिन आक्रामक है रहाणे का नज़रिया
14 साल की उम्र में जूडो का ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके रहाणे ने स्टार स्पोर्ट्स को दिए एक इंटरव्यू में अपने पुराने दिनों के एक मुक़ाबले को याद करते हुए कहा है, जब उनका विपक्षी उन पर भारी पड़ने लगा था तब उन्होंने रक्षात्मक रूख़ अपनाने के बदले काउंटर अटैक शुरू किया और इस रणनीति ने उन्हें जीत दिलाई थी.
रहाणे किस तरह के आक्रामक खिलाड़ी हैं, इसे देखने के लिए 2020-21 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे को याद करना चाहिए.
एडिलेड टेस्ट की दूसरी पारी में भारतीय टीम महज़ 36 रन पर ऑलआउट हो गई थी. टेस्ट इतिहास में यह भारत का सबसे न्यूनतम स्कोर है. इसके बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली स्वदेश लौट आए थे और चोट के चलते टीम के कुछ अन्य खिलाड़ी भी अनुपस्थित थे. सीरीज़ में तीन टेस्ट मैच बाक़ी थे और वहां से भारत के लिए सीरीज़ जीतना अकल्पनीय लग रहा था.
लेकिन अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में टीम ने सीरीज़ में वापसी करने को अपना लक्ष्य बनाया.
रहाणे ने ख़ुद मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ों के सामने एक शानदार शतक जमाया. यहां से सीरीज़ में भारतीय टीम ने वापसी की और तमाम मुश्किलों के बावजूद भारत ये सीरीज़ जीतने में कामयाब रहा.
इतनी बड़ी कामयाबी तक पहुंचने के बाद फिर से नयी शुरुआत करना, अपने आप में निराश करने वाला हो सकता है. लेकिन रहाणे इसे अपने लिए मौके के तौर पर देख रहे हैं.
उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदों पर खरा उतरने की है. अगर वे बड़े मुक़ाबले में शानदार वापसी करते हैं, तो निस्संदेह यह एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर याद किया जाएगा. रहाणे से पहले भी कई क्रिकेट खिलाड़ियों ने दूसरी पारी में वापसी करके अपने करियर को लंबा बनाया है. सवाल यही है कि क्या रहाणे उन खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो पाएंगे?
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