ईशान किशन और श्रेयस अय्यर के बहाने बीसीसीआई ने क्या सख़्त संदेश दिया है

ईशान किशन और श्रेयस अय्यर

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    • Author, चंद्रशेखर लूथरा
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने बुधवार की शाम 30 खिलाड़ियों के लिए सालाना अनुबंध की सूची जारी की, लेकिन इस सूची में श्रेयस अय्यर और ईशान किशन को जगह नहीं मिली.

माना जा रहा है कि मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर और विकेटकीपर बल्लेबाज़ ईशान किशन को घरेलू रणजी ट्रॉफ़ी मैचों में हिस्सा नहीं लेने की वजह से सज़ा के तौर पर सूची से बाहर का रास्ता दिखाया गया है.

हालाँकि, दूसरी ओर महज कुछ ही मैचों में हिस्सा लेने वाले आवेश ख़ान और रजत पाटीदार जैसे खिलाड़ियों को सूची में शामिल किया गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, श्रेयस अय्यर ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) को सूचित किया था कि पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव के चलते वे रणजी मैचों में हिस्सा नहीं ले पाएँगे.

उन्हें इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट मैच के बाद टीम से बाहर किया गया था और उम्मीद की जा रही थी कि वे उसके बाद मुंबई की टीम की ओर से रणजी मैचों में हिस्सा लेंगे.

हालांकि, नेशनल क्रिकेट एकेडमी के स्पोर्ट्स साइंस विभाग के प्रमुख नितिन पटेल ने श्रेयस की पीठ की तकलीफ़ की वजह को ख़ारिज कर दिया.

इसके चलते दो मार्च से तमिलनाडु के ख़िलाफ़ होने वाले सेमीफ़ाइनल मैच के लिए श्रेयस अय्यर को ख़ुद को उपलब्ध बताने पर मजबूर होना पड़ा.

लेकिन तब तक उनका नुक़सान हो चुका था, वे सालाना अनुबंध की सूची से बाहर हो चुके थे.

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25 साल के ईशान किशन का मामला भी काफ़ी हद तक श्रेयस अय्यर जैसा है.

पिछले साल बीसीसीआई ने सालाना अनुबंध में सी ग्रेड में रखा गया. उस अनुबंध के दौरान उन्होंने भारत के लिए दो टेस्ट, 19 वनडे और 10 टी-20 मैच खेले. लेकिन मौजूदा सत्र में टीम के साथ लगातार दौरे पर रहने के बाद भी उन्हें केवल दो वनडे और तीन टी-20 मैच खेलने का मौक़ा मिल पाया.

विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ईशान, दिसंबर-जनवरी में दो टेस्ट मैचों के लिए दक्षिण अफ़्रीका के दौरे पर भी नहीं जा पा गए. उस वक़्त कहा गया था कि 'लगातार सफ़र करने से वे मानसिक तौर पर थके हुए हैं.'

लेकिन उनके दावों के उलट ऐसा लगा कि उनकी दिलचस्पी टेस्ट मैच खेलने की बजाए, आईपीएल की तैयारी में ज़्यादा थी.

यह स्थिति तब थी जब टीम के प्रमुख कोच राहुल द्रविड़ ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में लौटने से पहले पाँच दिवसीय क्रिकेट मैचों में हिस्सा लेने की सलाह दी थी.

राहुल द्रविड़ की सलाह के बावजूद, ईशान किशन रणजी मैचों को नज़रअंदाज़ करते हुए पंड्या बंधुओं के साथ आईपीएल के अभ्यास के लिए बड़ौदा पहुँच गए.

बीसीसीआई के बड़े अधिकारियों को उन्होंने 27 फरवरी को एक बार फिर नाराज़ किया जब वे मुंबई के डीवाई पाटील स्टेडियम में हुए एक प्राइवेट टूर्नामेंट में खेलने पहुँच गए. इन सबका परिणाम अब सबके सामने है.

बीसीसीआई ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है, "कृपया नोट करें कि इस साल अनुबंध सूची के लिए श्रेयस अय्यर और ईशान किशन के नामों पर विचार नहीं किया गया है."

इस बयान में खिलाड़ियों से राष्ट्रीय टीम से बाहर होने पर घरेलू क्रिकेट मैचों को प्राथमिकता देने की सलाह भी दी गई है.

क्या है सख़्त संदेश

ईशान किशन

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बीते सप्ताह ही बंगाल के वरिष्ठ खिलाड़ी मनोज तिवारी ने अपनी फ़ेयरवेल स्पीच में बीसीसीआई पर घरेलू क्रिकेट की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था.

ऐसे में यही कहा जा रहा है कि बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट की उपेक्षा करने वाले खिलाड़ियों पर तत्काल कार्रवाई करके सख़्त संदेश दिया है.

भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने रांची टेस्ट के बाद ईशान और श्रेयस जैसे खिलाड़ियों पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाने पर लेते हुए कहा कि 'जिन खिलाड़ियों में टेस्ट क्रिकेट खेलने की भूख नहीं है, उन्हें नहीं चुना जाएगा.'

बंगाल के वरिष्ठ क्रिकेटर मनोज तिवारी तो रणजी मैचों के प्रबंधन को लेकर बीसीसीआई से इतने निराश हैं कि उन्होंने अगले सत्र से इसे बंद करने का सुझाव तक दे दिया है.

मनोज तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा है कि रणजी ट्रॉफ़ी से जुड़े कई पहलू हैं, जहाँ ठीक से काम नहीं हो रहा है. इससे टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और अहमियत कम हो रही है.

मनोज तिवारी के रणजी ट्रॉफ़ी को बंद करने की मांग के बाद से घरेलू क्रिकेट को लेकर एक तरह से चर्चाओं का दौर शुरू हुआ.

उनके बयान के बाद इस टूर्नामेंट की अहमियत को बनाए रखने के लिए कई तरह के सुधारों की चर्चा भी शुरू हुई है.

घरेलू क्रिकेट की सुविधाओं और स्तर को बेहतर करने की बात हो रही है ताकि नई प्रतिभाओं को संरक्षित किया जा सके, उन्हें निखारा जा सके. मनोज तिवारी ने घरेलू क्रिकेटरों को मिलने वाली सुविधाओं और स्तर को लेकर भी चिंता जताई है.

हालाँकि घरेलू क्रिकेट पर नज़र रखने वालों ने यह महसूस किया है कि बीते 10-15 सालों में भारत के सभी शीर्ष खिलाड़ी रणजी मैचों की उपेक्षा करने लगे हैं ताकि वे ख़ुद को आईपीएल मैचों के लिए तरोताज़ा, फ़िट और उपलब्ध रख सकें.

यहाँ यह भी जानना दिलचस्प है कि बीसीसीआई ने लंबे समय से एक नीति बनाई हुई है, जिसके मुताबिक़ चोट या अन्य वजहों से इंटरनेशनल क्रिकेट से बाहर हुए खिलाड़ियों को वापसी के लिए मैच फ़िटनेस साबित करने के लिए प्रथम श्रेणी (रणजी या ईरान ट्राफ़ी जैसे टूर्नामेंट) मैच में हिस्सा लेना होता है.

दिलीप वेंगसरकर के भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता होने तक इस नीति का पालन होता रहा.

लेकिन 2008 के बाद से टीम में आईपीएल प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों का चयन होने लगा, ऐसे में सभी खिलाड़ियों ने आईपीएल को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी, यही वजह है कि कई खिलाड़ियों ने लंबे समय तक रणजी ट्रॉफ़ी के मैचों में हिस्सा नहीं लिया.

लेकिन बीसीसीआई के इस ताज़ा फ़ैसले से यह संदेश तो ज़रूर गया है कि टेस्ट या घरेलू क्रिकेट से ज़्यादा आईपीएल को प्राथमिकता देने से नुक़सान हो सकता है.

राहुल, सिराज और शुभमन को प्रमोशन

ग्रेड ए में आने वाले खिलाड़ी

बीसीसीआई ने अपने सालाना अनुबंध में शीर्ष कैटेगरी ( ग्रेड ए प्लस) में रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा को बनाए रखा है.

वहीं ग्रेड ए में मोहम्मद सिराज, केएल राहुल और शुभमन गिल को शामिल किया गया है.

इन खिलाड़ियों को ग्रेड बी से ग्रेड ए में प्रमोट किया गया है. वहीं हार्दिक पंड्या टेस्ट क्रिकेट के लिए उपलब्ध नहीं होने के बाद भी ग्रेड ए में बने हुए हैं.

ग्रेड ए में प्रमोट होने वाले खिलाड़ी
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पंड्या ने 2023 में 11 टी-20 मैचों में भारतीय टीम का नेतृत्व किया था. उन्हें टेस्ट और वनडे क्रिकेट में रोहित शर्मा के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन वर्ल्ड कप के दौरान वे चोटिल हो गए और उनकी तमाम संभावनाओं पर फ़िलहाल के लिए ब्रेक लग गया.

दिसंबर, 2022 में कार दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए ऋषभ पंत पिछले साल मैदान पर अपनी वापसी नहीं कर पाए.

ग्रेड बी में आने वाले खिलाड़ी
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अक्षर पटेल के साथ ऋषभ पंत को ग्रेड ए से डिमोट करते हुए ग्रेड बी में भेजा गया है.

वहीं सूर्यकुमार यादव ने 2023-24 में भारतीय टीम का नेतृत्व आठ टी-20 मैचों में किया है. वे बी ग्रेड में बने हुए हैं.

वहीं बीते साल शानदार डेब्यू करने वाले यशस्वी जायसवाल भी बी ग्रेड में प्रमोट होने में कामयाब रहे. उनके अलावा कुलदीप यादव को भी बी ग्रेड का अनुबंध मिला है.

पुजारा और शिखर धवन के लिए क्या हैं संकेत

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी शिखर धवन

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बीसीसीआई की सालाना अनुबंध सूची से चेतेश्वर पुजारा और शिखर धवन को बाहर हुए हैं, माना जा रहा है कि इन दोनों के लिए अब टीम में वापसी करना संभव नहीं होगा.

इनके अलावा लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल, आलराउंडर दीपक हुडा और तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव को भी अनुबंध की सूची से बाहर रखा गया है.

बीसीसीआई के प्रावधानों के मुताबिक़ अगर कोई क्रिकेटर एक निर्धारित समय के बीच न्यूनतम तीन टेस्ट मैच, आठ वनडे या फिर 10 ट्वी-20 मैच खेल ले, तो उसे ग्रेड सी में जगह मिल जाती है.

यानी अगर सात मार्च से शुरू होने वाले धर्मशाला टेस्ट में ध्रुव जुरैल और सरफ़राज़ ख़ान को खेलने का मौक़ा मिल गया, तो वे अपने आप ही सी ग्रेड का हिस्सा हो जाएँगे.

बीसीसीआई ने आकाश दीप, विजयकुमार वैखाक, उमरान मलिक, यश दयाल और विधवत कावेरप्पा जैसे युवा तेज गेदबाज़ों के लिए अलग से अनुबंध जारी किया है.

आकाश दीप ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ रांची टेस्ट में शानदार डेब्यू किया था. अनुमान ये है कि बीसीसीआई अनुबंध के बहाने इन तेज़ गेंदबाज़ों को वित्तीय मदद पहुँचा रहा है ताकि ये ख़ुद को बेहतर ढंग से निखार सकें.

बीसीसीआई ने अनुबंध सूची जारी तो की है, लेकिन प्रत्येक ग्रेड के भुगतान को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है.

बोर्ड से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो ये पिछले साल के भुगतान से ज़्यादा होगा.

पिछले साल ग्रेड ए प्लस खिलाड़ियों को सात करोड़, ग्रेड ए के खिलाड़ियों को पाँच करोड़, ग्रेड बी खिलाड़ियों को तीन और ग्रेड सी के खिलाड़ियों के एक करोड़ रुपए सालाना दिए गए थे.

बीसीसीआई की अनुबंध सूची

टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर से बात करते हुए

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ग्रेड ए प्लस (चार खिलाड़ी)

रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा

ग्रेड ए (छह खिलाड़ी)

रविचंद्रन अश्विन, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, केएल राहुल, शुभमन गिल और हार्दिक पांड्या.

ग्रेड बी (पांच खिलाड़ी)

सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल और यशस्वी जायसवाल

ग्रेड सी (पंद्रह खिलाड़ी)

रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, ऋतुराज गायकवाड़, शार्दुल ठाकुर, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, जीतेश शर्मा, वाशिंगटन सुंदर, मुकेश कुमार, संजू सैमसन, अर्शदीप सिंह, केएस भरत, प्रसिद्ध कृष्णा, आवेश ख़ान और रजत पाटीदार.

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