भारत के ये पांच सितारे चले तो रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 विश्व कप आना पक्का

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में भारत का हमेशा ही दबदबा रहा है. वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविवार को होने वाले फाइनल को जीतकर रिकॉर्ड छठी बार खिताब जीतने में कोई कसर छोड़ने वाला नहीं है.
उदय प्रताप सहारन की अगुआई वाली भारतीय टीम ने अब तक जिस तरह का दबदबे वाला प्रदर्शन किया है, उससे उसके चैंपियन बनकर लौटने की बेहतर संभावनाएं मानी जा रही हैं.
भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2012 और 2018 के फाइनल में हराया था. इसका उसे फायदा मिल सकता है.
भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने ही बहुत ही रोमांचक अंदाज़ में सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर यह तो जता दिया है कि खिताबी मुकाबला खेलने की हकदार टीमें वही दोनों हैं.
भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने जिस तरह से तनाव भरे मैचों को एक-एक विकेट से जीता, उससे यह तो साफ है कि रविवार को होने वाले फाइनल में भी रोमांच रहने वाला है.
भारत के लिए फाइनल में कोई खतरा बन सकता है तो वह हैं ऑस्ट्रेलिया के कप्तान हग बेवगेन और सीमर टॉम स्ट्रेकर.
कप्तान ने बल्लेबाज़ी में जानदार प्रदर्शन किया है तो स्ट्रेकर ने पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में 24 रन पर छह विकेट निकालकर ऑस्ट्रेलिया की जीत में अहम भूमिका निभाई थी.
भारत की खिताबी जीत के शिल्पकार बन सकते हैं ये पांच

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भारत अगर छठी बार खिताब पर कब्ज़ा जमाता है तो इसमें पांच खिलाड़ियों की भूमिका अहम रहने वाली है. ये पांच खिलाड़ी हैं - कप्तान सहारन, सचिन धस, मुशीर खान, पेस गेंदबाज़ राज लिंबानी और लेफ्ट आर्म स्पिनर सौम्य पांडे.
भारत के हर मुकाबले में 250 से ज़्यादा रन बनाने और सभी मुकाबले जीतने में इन पांचों खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा है. इसलिए भारत को फाइनल की नैया पार कराने में भी इन पांचों के महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद ज़रूर की जा रही है.
ज़िम्मेदारी निभाने में कप्तान का कोई जवाब नहीं

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भारतीय कप्तान उदय सहारन की कप्तानी की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल में मफाका के कहर के सामने भारतीय टीम ताश के पत्तों की तरह ढहती नज़र आ रही थी. लेकिन सहारन लंगर डालकर खेले.
उन्होंने सचिन धस के साथ पहले पारी को जमाने का प्रयास किया और एक बार विकेट पर जम गए तो दिखाया कि अब जीत की तरफ बढ़ा जा सकता है.
सहारन के खेल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह जोखिम उठाए बगैर खेलते हैं. उन्होंने इस चैंपियनशिप में सबसे ज़्यादा 389 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं. पर वह किसी भी मैच में 'प्लेयर ऑफ द मैच' नहीं बने हैं.
इसकी वजह यह रही कि वह हमेशा सहायक की भूमिका में रहते हैं और सामने वाले बैटर को खुलकर खेलने का मौका देते हैं.
वह बल्लेबाज़ी में तो धूम मचा ही रहे हैं. साथ ही फील्डिंग करते समय वह जिस तरह से फील्डिंग को सजाते हैं, वह भी काबिल-ए-तारीफ होती है. यही नहीं वह गेंदबाज़ी में बदलाव भी चतुराई के साथ करते हैं.
सचिन को आदर्श मानते हैं मुशीर खान

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अपने भाई सरफराज़ खान को देखकर क्रिकेटर बने मुशीर खान को बचपन से ही चुनौतियों से जूझने का शौक रहा है. वह कहते हैं कि 'मैं जब छह साल का था, तब से ही अपने पिता और भाई के साथ क्रिकेट सीखने जाता था. पर हर कदम पर चुनौतियां मिलीं तो पिता ने कहा कि एक बार चुनौतियों को स्वीकारना सीख लोगे तो आगे बढ़ने की राह खुद ब खुद बनती जाएगी.' इस बात को वह हमेशा गांठ बांधकर चलते हैं.
वह इस फाइनल की राह तक दो शतकों और एक अर्धशतक से 338 रन बनाकर दूसरे स्थान पर हैं. वह धीमी गेंदबाज़ी भी करते हैं. उन्होंने इस चैंपियनशिप में छह विकेट भी निकाले हैं. मुशीर के कौशल को अगर सही तरीके से मांझा जाए तो वह एक अच्छे ऑलराउंडर के तौर पर निकल सकते हैं.
मुशीर खान ने मुंबई के लिए अब तक तीन प्रथम श्रेणी मैच खेलकर 96 रन बनाए हैं और दो विकेट निकाले हैं. वह अगर इसी तरह खेलते रहे तो आने वाला कल उनका ही है.
सचिन धस में दिखती है तेंदुलकर की झलक

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भारतीय टीम फाइनल खेल रही है तो उसमें सचिन धस की भूमिका बेहद अहम है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत ने 32 रन पर चार विकेट खो दिए थे और भारतीय कैंप में हड़कंप मचा हुआ था.
सचिन धस ने आकर कप्तान सहारन के साथ पहले पारी को जमाने का प्रयास किया और पांचवें विकेट की साझेदारी में 171 रन जोड़कर भारत की जीत की राह बना दी थी. इसमें उन्होंने 11 चौकों और एक छक्के से 96 रनों का योगदान किया. वह तेंदुलकर की तरह ही स्ट्रोक खेलते हैं.
सचिन ने इस चैंपियनशिप में अब तक खेले छह मैचों में 73 से अधिक के औसत से 294 रन बनाए हैं, इसमें एक शतक शामिल है. यह कहा जाता है कि धस का नाम सचिन तेंदुलकर के नाम पर ही रखा गया है.
बीड में रहने वाले धस को क्रिकेटर बनाने की योजना उनके पैदा होने से पहले ही बना ली गई थी. पिता ने बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए पैसा उधार लेकर विकेट तक तैयार कराया था.
सचिन धस के बारे में एक किस्सा मशहूर है कि स्थानीय स्तर पर उनकी छक्के लगाने की धूम थी. एक बार तो उनके बल्ले की जांच तक की गई थी.
राज लिंबानी का है जलवा

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राज लिंबानी में भले ही बहुत गति नहीं है पर विकेट से उछाल मिलने की वजह से कई बार बहुत घातक साबित होते हैं.
उन्होंने सेमीफाइनल में तीन विकेट निकालकर अपनी गेंदबाज़ी की छाप छोड़ी थी, वैसे उन्होंने अब तक आठ ही विकेट निकाले हैं.
राज लिंबानी इस विश्व कप से पहले टीम की पहली पसंद नहीं थे. इसकी वजह उनसे आगे नमन तिवारी, अराध्य शुक्ला और धनुष गौड़ा को रखा जा रहा था. लेकिन एक प्रदर्शन ने उनकी स्थिति को एकदम से बदल दिया.
यह मुकाबला था एशिया कप में नेपाल के खिलाफ. इसमें उन्होंने 13 रन पर सात विकेट निकाले और इस प्रदर्शन के बाद वह भारतीय टीम की पहली पसंद बन गए.
अगले जडेजा माने जा रहे हैं सौम्य पांडे

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इस विश्व कप में भारतीय अभियान को आगे बढ़ाने में लेफ्ट आर्म स्पिनर सौम्य पांडे ने अहम भूमिका निभाई है. वह अब तक 8.47 के औसत से 17 विकेट निकाल चुके हैं. उनका इकॉनमी रेट 2.44 है. वह जिस किफायती अंदाज़ में गेंदबाज़ी करते हैं, उससे उन्हें भविष्य का रविंद्र जडेजा कहा जाने लगा है.
मध्य प्रदेश के सीधी ज़िले में सरकारी स्कूल में हिंदी के टीचर पिता कृष्ण कुमार पांडे इस बराबरी को कोई अहमियत देने के पक्षधर नहीं हैं. वह कहते हैं कि वह ग्रेड देने में बहुत सख्ती बरतते हैं, इसलिए उसकी जडेजा से तुलना करने के पक्ष में नहीं हैं.
पिता के अनुसार- 'मैं चाहता था कि वह अपनी बहन की तरह डॉक्टर बने. पर वह यूपीएसी परीक्षा में बैठना चाहता था और क्रिकेट खेलने का भी शौक रखता था. इसलिए बचपन में उससे कहा गया कि वह इतने नंबर ले आएगा तो उसे क्रिकेट अकादमी में भर्ती करा देंगे.'
पहले वह रीवा में अकादमी में खेले. पर प्रतिभा के धनी होने की वजह से आज इस मुकाम तक पहुंच गए हैं.
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