सचिन का उत्तराधिकारी कहे जाने वाले क्रिकेटर ने कैसे लिखी अपनी इबारत

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- Author, जान्हवी मुले
- पदनाम, बीबीसी मराठी
विराट, विराट और विराट!
एकदिवसीय विश्व कप 2023 में भारत के प्रत्येक मैच के लिए स्टेडियम में अधिकतर प्रशंसकों द्वारा पहनी जाने वाली जर्सी पर एक ही नाम और 18 नंबर दिखाई देता है.
भारतीय क्रिकेट में विराट का स्थान कितना खास है, इसका अंदाज़ा लगाने के लिए यही बात काफ़ी होगी.
क्रिकेट की दुनिया में हर किसी को इतना प्यार नहीं मिलता. पहले सचिन तेंदुलकर को लेकर लोगों में यही दीवानगी हुआ करती थी. विराट ने सचिन की विरासत को आगे बढ़ाया है.
आज विराट कोहली ने 35 बसंत पूरे कर लिए हैं.

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मार्च 2012 में सचिन ने ख़ुद भविष्यवाणी की थी कि विराट उनके उत्तराधिकारी होंगे.
उस समय सचिन के 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक के मौके पर मुकेश अंबानी द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान ने सचिन से पूछा था कि आपका रिकॉर्ड कौन तोड़ेगा.
जब सचिन ने इसका जवाब देते हुए विराट कोहली और रोहित शर्मा का नाम लिया, तो कई लोगों ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताया. लेकिन एक दशक बाद विराट सचिन के कम से कम वनडे शतकों का रिकॉर्ड तो तोड़ने वाले हैं.

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क्रिकेट के ब्रांड एम्बेसडर
हाल में जब मुंबई में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की बैठक में 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया तो विराट का उदाहरण दिया गया.
पूर्व ओलंपियन निशानेबाज़ और 2028 ओलंपिक-पैरालंपिक खेलों के खेल निदेशक निकोलो कैंप्रियानी ने उसके बाद क्रिकेट की लोकप्रियता के बारे में बात की.
“विराट कोहली वर्तमान में सोशल मीडिया पर तीसरे सबसे लोकप्रिय एथलीट हैं. उनके 34 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. अगर आप सोशल मीडिया पर तीन अमेरिकी सुपरस्टार्स लेब्रोन जेम्स, टाइगर वुड्स और टॉम ब्रैडी के फॉलोअर्स को एक साथ रखें, तो विराट के फॉलोअर्स उनसे कहीं ज्यादा हैं.''
ये 'ब्रांड कोहली' क्रिकेट के लिए भी फायदेमंद रहा है. लेकिन इस सफलता को हासिल करने की राह इतनी आसान नहीं थी. उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.

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पिता की मौत के वक़्त दिखा क्रिकेट के प्रति समर्पण
विराट कोहली की मानसिक दृढ़ता को देखने का मौका 2006 में तब मिला, जब उनके पिता प्रेम कोहली का निधन हो गया.
उनके पिता को ब्रेन स्ट्रोक आया था और वो कई दिनों से बिस्तर पर लेटे हुए थे. उस वक्त विराट 17 साल के थे और रणजी में दिल्ली के लिए खेलते थे.
दिल्ली के फिरोज़शाह कोटला स्टेडियम में कर्नाटक के ख़िलाफ़ हो रहे रणजी मैच के दूसरे दिन का खेल ख़त्म होने पर विराट नाबाद थे. लेकिन उस रात प्रेम कोहली की तकलीफ़ बढ़ गई और क़रीब दो बजे उनकी मौत हो गई.
अपने सिर से पिता की छाया छिन जाना विराट के लिए बहुत बड़ा झटका था. क्रिकेट के उनके सफ़र में पिता की काफ़ी अहम भूमिका थी. लेकिन ऐसे ग़मगीन माहौल में भी विराट रोए नहीं.
सुबह उन्होंने दिल्ली के कोच चेतन शर्मा को फ़ोन किया और घटना की पूरी जानकारी दी, लेकिन कहा कि वे आगे बैटिंग करेंगे. विराट स्टेडियम पहुंचे और 90 रन बनाए.
अपना खेल ख़त्म करने के बाद विराट अपने पिता के अंतिम संस्कार में पहुंचे. विराट के अतुलनीय साहस और कर्तव्यपरायणता की प्रशंसा उनके विरोधियों ने भी की.
पिता की मौत के बाद घर की सारी ज़िम्मेदारी विराट और उनके बड़े भाई विकास पर आ गई थी.
उनकी मां सरोज ने कहा था कि पिता की मौत के बाद विराट रातों-रात बालिग़ हो गए. क्रिकेट के मैदान में भी वह और अधिक दृढ़ हो गए, खेल पर ध्यान केंद्रित किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

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विराट का नाम चीकू कैसे पड़ा?
एक बार भारत-इंग्लैंड मैच के दौरान महेंद्र सिंह धोनी ने मैदान में विराट कोहली को 'चीकू' कहा.
लेकिन उन्हें ये नाम कब और कैसे मिला? विराट ने खुद एक बार केविन पीटरसन के साथ इंस्टाग्राम लाइव में इसकी जानकारी दी थी.
जब विराट ने दिल्ली के लिए रणजी क्रिकेट खेलना शुरू किया तो वे अपने बाल बहुत छोटे रखते थे. उस समय उनके गाल गुलाबी थे और छोटे बालों से उन पर निखार आ रहा था.
उसे देखकर दिल्ली टीम के एक कोच को बच्चों की पत्रिका 'चंपक' के चीकू की याद आती थी. उन्होंने विराट को चीकू कहकर बुलाना शुरू कर दिया.

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अंडर-19 वर्ल्ड कप और टीम इंडिया में पदार्पण
फ़रवरी 2008 में, भारत ने विराट कोहली की कप्तानी में मलेशिया के कुआलालंपुर में अंडर-19 विश्व कप जीता. उस टीम में रवींद्र जडेजा भी थे.
एक बल्लेबाज़ के तौर पर उस विश्व कप में विराट ने शानदार प्रदर्शन किया था. और उसके केवल छह महीने के अंदर यानी 18 अगस्त, 2008 को विराट का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण हो गया.
विराट को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था. सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग दोनों घायल थे. इसलिए विराट को वनडे में डेब्यू करने का मौका मिला. विराट ने उस सिरीज में अर्धशतक भी बनाया.
उसके बाद 2010 में हरारे में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ उन्होंने अपना टी-20 डेब्यू किया. वहीं 2011 में वेस्ट इंडीज़ दौरे के दौरान उनका टेस्ट डेब्यू हुआ. आईपीएल में भी विराट पहले सीज़न से रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के साथ जुड़े हुए हैं.
अपनी निरंतरता और रन बनाने की भूख के कारण विराट की तुलना अक्सर सचिन तेंदुलकर से की जाती है.
विराट को सचिन तेंदुलकर का मार्गदर्शन भी मिला. 2011 विश्व कप जीत के बाद, विराट ने सचिन को अपने कंधों पर उठाकर मैदान के चारों ओर घुमाने की पहल की थी.
2011-12 में ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज़ में भारतीय टीम को हार मिली थी. लेकिन ये सीरीज़ विराट के लिए खास थी, क्योंकि इस सीरीज़ में उन्होंने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक लगाया था.

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नए ज़माने के आक्रामक क्रिकेटर
2011-12 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर विराट के कमेंट्स भी चर्चा में रहे. वे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों और प्रशंसकों की स्लेजिंग का जवाब देने से नहीं डरे. वे सबसे मज़बूत खिलाड़ियों को भी सीधे चुनौती देने से नहीं डरते थे.
ऑस्ट्रेलिया में इसके बाद की कई सीरीज़ में यही तस्वीर देखने को मिली. 2014-15 के दौरे के दौरान जब विराट और मिशेल जॉनसन मैदान पर भिड़ गए, तो अंपायरों को हस्तक्षेप करना पड़ा.
भारतीय क्रिकेटर का ये आक्रामक रूप कई लोगों के लिए नया था. दरअसल, जब विराट ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में क़दम रखा तो बदलाव की बयार चल रही थी. आईपीएल और टी-20 की वजह से क्रिकेट की दुनिया बदल रही थी.
इस तरह विराट न सिर्फ भारतीय क्रिकेट के बल्कि देश की नई पीढ़ी के भी प्रतिनिधि बन गए. उनमें इस नई पीढ़ी की बराबरी करने का आत्मविश्वास था.
स्वाभाविक रूप से उन दिनों विराट के आक्रामक और कुछ हद तक रूखे स्वभाव की भी चर्चा हुई. हालांकि उनका यह रवैया हर किसी को स्वीकार्य नहीं था.
वहीं टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और उनके साथी कहते थे कि विराट बहुत मेहनती और विनम्र हैं. धीरे-धीरे दुनिया ने भी इसे देखा.
विराट का ज़िद्दी लड़ाके वाला रवैया कई देशों के प्रशंसकों को पसंद आने लगा. बात चाहे ऑस्ट्रेलिया की हो या वेस्टइंडीज, पाकिस्तान की. इन सभी देशों में उनके प्रशंसक बढ़ने लगे. लोग चाहने लगे कि उनके बच्चे विराट जैसे बनें.

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'चेज़ मास्टर' विराट कोहली
विराट को पूरे जोश में बल्लेबाज़ी करते देखना, खासकर उनके पसंदीदा कवर ड्राइव शॉट्स को देखना, प्रशंसकों के लिए किसी तोहफ़े से कम नहीं है. वे गेंद को हवा में उठाकर खेलने से ज़्यादा ग्राउंड स्ट्रोक्स मारने पर यकीन करते हैं.
वनडे क्रिकेट में रन चेज़ यानी रनों का पीछा करते वक़्त विराट कोहली का प्रदर्शन अद्भुत है. उन्होंने लक्ष्य का पीछा करते हुए अपनी टीम को जिताने की चुनौती को अक्सर सफलतापूर्वक पूरा किया है. इसी वजह से विराट कोहली को चेज़ मास्टर का खिताब मिला है.
विराट दुनिया में जहां भी खेले रनों का अंबार खड़ा कर दिया. उनके इस शानदार प्रदर्शन के चलते आईसीसी ने उन्हें 2010-2020 दशक के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के तौर पर सर गारफील्ड सोबर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया.
कोहली वनडे में 13 हज़ार रनों के आंकड़े को पार करने वाले सचिन तेंदुलकर के बाद भारत के दूसरे बल्लेबाज़ हैं.
कब कौन सा शॉट खेलना है, साझेदारी बनाते समय स्कोर बोर्ड को गतिशील रखने की योजना, विरोधी गेंदबाज़ों की तकनीक का गहन अध्ययन, मैदान और पिच की गहरी समझ विराट के खेल की विशेषता है.
वे अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहते हैं. भारतीय क्रिकेट में फिटनेस के प्रति उनसे पहले इतनी संजीदगी शायद ही किसी और खिलाड़ी ने अपनाई हो.
विराट 2013 से अपनी फिटनेस के लिए कठोर एक्सरसाइज़ और सख़्त डाइट रूटीन फॉलो करना शुरू कर दिया. 2018 से तो उन्होंने मांस और दूध उत्पादों को भी खाना बंद कर दिया. वे उसके बाद 'वीगन' डाइट पर ही निर्भर रहने लगे.
विराट की सफलता की वजह उनके आत्मविश्वास, खेल के प्रति समर्पण, एकाग्रता, निष्ठा और अनुशासन को बताया जा सकता है. इन्हीं गुणों के कारण विराट की भारतीय टीम में पक्की जगह हुई. आख़िरकार धोनी के संन्यास के बाद कप्तानी का भार उनके कंधों पर ही आया.

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कप्तानी का कांटों भरा ताज
2014 में भारतीय टीम जब ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी, तो एडिलेड टेस्ट से ठीक पहले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अंगूठे की चोट ठीक न होने के कारण विराट को पहली बार टेस्ट टीम की कप्तानी करने का मौका मिला.
कोहली ने पहले ही मैच में दिखा दिया कि वे एक कप्तान के तौर पर कैसा प्रदर्शन कर सकते हैं.
2022 में कप्तानी से हटने तक उन्होंने 68 टेस्ट मैचों में भारत का नेतृत्व किया. इनमें से 40 मैच भारत ने जीते, जबकि 17 बार टीम को हार का सामना करना पड़ा. टेस्ट में कप्तान के तौर पर विराट की जीत का प्रतिशत क़रीब 59 है.
उन्होंने 95 एकदिवसीय मैचों में भारत का नेतृत्व किया और इनमें से 65 मैच टीम ने जीते. इनमें से भारत में 24 और भारत के बाहर 41 जीत नसीब हुई. इस तरह वनडे में उनकी टीम की जीत का प्रतिशत 68.42 रहा.
टी-20 क्रिकेट में विराट की कप्तानी में भारत को 50 मैचों में से केवल 16 मैचों में हार मिली. इस तरह उनका प्रतिशत 64.58 रहा.
कप्तान के रूप में उनके आंकड़े भारतीय क्रिकेट के महानतम कप्तानों की क़तार में खड़ा करते हैं. लेकिन कप्तान के तौर पर वे आईसीसी का कोई टूर्नामेंट कभी नहीं जीत सके, जो उनके प्रशंसकों को कचोटती है. वहीं आईपीएल में भी वे अपनी टीम को कभी चैंपियन नहीं बना सके.
कप्तानी के दबाव का बुरा असर विराट की बल्लेबाज़ी पर पड़ा. 2019 से कोहली की बल्लेबाज़ी फॉर्म में गिरावट आना शुरू हो गई. इसके बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ने और बल्लेबाज़ी पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया. पहले टी-20, फिर वनडे और अंत में उन्होंने टेस्ट टीम की कप्तानी भी छोड़ दी.

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विराट की दूसरी पारी
साल 2021-22 विराट के लिए कठिन समय लेकर आया. उनके बल्ले से रन नहीं बन रहे थे.
लगातार खेलने से थकावट के कारण 2022 में उन्होंने एक महीने का आराम भी लिया. 2008 से टेस्ट, वनडे, टी20 और आईपीएल खेल रहे कोहली ने पहली बार एक महीने तक बल्ला भी नहीं छुआ.
उसके बाद एशिया कप में अफगानिस्तान के खिलाफ उन्होंने शतक लगाया और फिर 2022 विश्व टी20 में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 82 रनों की पारी खेलकर टीम की जीत की नींव रखी.
उसके बाद से विराट नए जोश के साथ खेलते नज़र आ रहे हैं. वह टीम में सीनियर खिलाड़ी की भूमिका निभाते नज़र आ रहे हैं.
हालांकि ये वापसी इतनी आसान नहीं थी. 2022 में स्टार स्पोर्ट्स को दिए इंटरव्यू में विराट ने इसके पीछे के मानसिक संघर्ष के बारे में बताया था.
उन्होंने कहा था, "मैंने एक महीने अपना बल्ला नहीं छुआ, ऐसा पिछले 10 सालों में कभी नहीं हुआ. मेरा मन और शरीर कह रहा था कि ज़रा रुको, तुम्हें आराम की ज़रूरत है, थोड़ा आराम कर लो.''
"लोग सोचते थे कि मैं मानसिक रूप से मज़बूत हूं. लेकिन हर किसी की अपनी सीमाएं होती हैं. आपको उन सीमाओं को समझना होगा अन्यथा चीजें ख़राब हो जाएंगी. यह दिखावा करना कभी भी अच्छा नहीं है कि आप बहुत मज़बूत हैं."
कई लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करने के लिए विराट को धन्यवाद भी दिया.

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अनुष्का शर्मा के साथ 'पार्टनरशिप'
विराट और अनुष्का शर्मा की पहली मुलाकात 2013 में एक शैम्पू के विज्ञापन के मौके पर हुई थी. दोनों में पहले दोस्ती और फिर प्यार का रिश्ता बन गया.
2014 में टीम इंडिया के इंग्लैंड दौरे के दौरान अनुष्का को विराट के साथ उनकी गर्लफ्रेंड के तौर पर रहने की इजाज़त मिल गई, जिससे रिश्ते पर एक तरह से मुहर लग गई.
क्रिकेटर और एक्ट्रेस की इस स्टार जोड़ी के रिश्ते की चर्चा न हो तो हैरानी होगी.
दुर्भाग्य से, विराट उस दौरे पर टेस्ट सीरीज़ में अपनी लय हासिल नहीं कर पाए और कुछ लोगों ने इसके लिए अनुष्का को दोषी ठहराया. बेशक, दोनों ने ऐसी सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया. लेकिन 2016 में जब दोबारा ऐसा हुआ तो विराट अनुष्का के साथ खड़े हुए.
एक साल बाद दिसंबर 2017 में उन्होंने लोगों को सरप्राइज देते हुए इटली में शादी कर ली. विराट ने अपनी बेटी वामिका के जन्म के दौरान जब पितृत्व अवकाश लिया, तब इसकी भी खूब चर्चा हुई थी.
सुर्खियों में रहने के बावजूद विराट और अनुष्का ने दिखाया है कि अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच दूरी कैसे बनाए रखनी है.
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