ध्रुव जुरेल में क्यों दिख रही है महेंद्र सिंह धोनी की झलक

रांची टेस्ट में ध्रुव जुरेल

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, रांची से

ईशान किशन कुछ महीने पहले तक तीनों फॉर्मैट में टीम इंडिया के नियमित विकेटकीपर बल्लेबाज़ के तौर पर खेल रहे थे. लेकिन दो महीने पहले टीम इंडिया जब साउथ अफ्रीका के दौरे पर थी, तब ईशान किशन अचानक भारत लौट आए थे.

वजह ये कि वो मानसिक रूप से थका हुआ महसूस कर रहे थे. उसके बाद केएल राहुल ने टेस्ट सीरीज़ में विकेटकीपर की भूमिका निभाई.

ऋषभ पंत के टीम इंडिया से दूर रहने के दौरान अलग-अलग फॉर्मैट में केएस भरत, संजू सैमसन और जितेश शर्मा विकेटकीपर बल्लेबाज़ की जगह के लिए दावा पेश कर रहे थे.

इन नामों के अलावा अगर आप भारतीय घरेलू क्रिकेट को काफ़ी दिलचस्पी से देखते हैं तो आपने विकेटकीपर बल्लेबाज़ के तौर पर कभी-कभार उपेंद्र यादव का भी नाम सुना होगा.

ध्रुव जुरेल के बारे में शायद ही कोई बात करता होगा लेकिन सिर्फ़ 10 दिन के भीतर कितना कुछ बदल गया.

रांची में खेली यादगार पारी

रांची टेस्ट जीतने के बाद शुभमन गिल और ध्रुव जुरेल

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रांची में अपने करियर का सिर्फ़ दूसरा टेस्ट मैच खेलते हुए उत्तर प्रदेश के जुरेल ने एक ऐसी पारी खेल दी जिसके बारे में शायद उन्हें ख़ुद भी अंदाज़ा न हो.

सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज ने उनमें महेंद्र सिंह धोनी वाले चरित्र की झलक देखी. वहीं, टीम इंडिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ रूद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जब रांची में उनकी मुलाकात ध्रुव से हुई तो उन्होंने युवा खिलाड़ी से कहा, ''शायद, तुम आने वाले वक़्त में एक से बढ़कर एक पारी खेलोगे लेकिन जब भी अपने करियर को पीछे मुड़कर देखोगे तो इस पारी पर तुम्हें काफ़ी नाज़ होगा.''

''ऐसा बहुत ही कम होता है कि कोई युवा खिलाड़ी ऐसे वक्त में बल्लेबाज़ी करने आता है, जब न सिर्फ़ मैच नाज़ुक हालात में होता है बल्कि उसका असर एक अहम टेस्ट सीरीज़ पर पड़ सकता है. ऐसे में जि, शांत भाव से तुमने बल्लेबाज़ी की है. उस पर रांची के मेरे दोस्त माही को भी काफ़ी अच्छा महसूस हुआ होगा.''

धोनी ने रांची में ध्रुव को बल्लेबाज़ी करते तो नहीं देखा और ये कहना मुश्किल है कि उन्होंने टीवी पर भी उनकी 90 रनों की शानदार पारी को देखा या नहीं, लेकिन प्रतिभा पहचानने के मामले में श्रीलंका के महान खिलाड़ी और पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ कुमार संगकारा की राय को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

कुमार संगकारा ने पहचानी प्रतिभा

रांची में अर्धशतक लगाने के बाद ध्रुव जुरेल

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आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए डायरेक्टर ऑफ़ क्रिकेट की भूमिका निभाने वाले संगकारा पिछले साल टीम में संजू सैमसन और जोश बटलर जैसे कीपर-बल्लेबाज़ों की मौजूदगी के बावजूद जुरेल की प्रतिभा को सही समय पर मौक़ा देने से नहीं हिचके.

इंपैक्ट खिलाड़ी के तौर पर एक मैच में सिर्फ़ 15 गेंदों पर 32 रन बनाने के बाद जुरेल हर मैच में खेले और उनके 152 रनों से ज़्यादा उनके 172.73 के स्ट्राइक रेट ने हर किसी का ध्यान खींचा.

लेकिन, इस बात ने भी हैरान किया कि ऐसी आक्रामकता से खेलने वाला यही खिलाड़ी सफ़ेद गेंद की बजाए लाल गेंद की क्रिकेट में इतने संयम से कैसे खेल सकता है?

राजकोट में अपने पहले ही टेस्ट में जुरेल को बल्लेबाज़ी करने का मौका मिला तो उनसे पहले टीम के स्पिनरों की बारी आ चुकी थी. लेकिन पहली ही पारी में सिर्फ़ चार रनों से अर्धशतक से चूकने के बावजूद उनके चेहरे पर मायूसी नहीं थी.

टीम भावना वाला खिलाड़ी

रांची टेस्ट में कुलदीप याद के साथ रन लेते ध्रुव जुरेल

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रांची टेस्ट के तीसरे दिन जुरेल जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए तो उनसे सीधा सवाल पूछा कि इस बार शतक से चूकने का उन्हें अफसोस तो नहीं. जुरेल ने बड़ी सहज़ता और तपाक से जवाब दिया- बिल्कुल नहीं.

रांची में जीत के बाद रोहित शर्मा ने ज़ोर देकर कहा कि उनके टीम के कई युवा खिलाड़ी निजी रिकॉर्ड और रन को अहमियत ना देकर टीम के बारे में सोच रहें हैं और टीम की ज़रूरतों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

कप्तान का इशारा जुरेल जैसे खिलाड़ियों की तरफ़ ही था.

दरअसल, टीम के लिए खेलते हुए निजी हितों को कुर्बान करने की प्रेरणा और सबक उन्हें विरासत में मिला है. जुरेल के पिता करगिल युद्ध के दौरान देश की सेवा कर चुके हैं.

भले ही बेटा सेना में शामिल नहीं हुआ लेकिन क्रिकेट खेलते हुए वह देश के लिए उसी भाव के साथ मैदान में उतरता है. रांची में जुरेल ने अपने पिता को एक सैनिक वाले अंदाज़ में ही सैल्यूट किया.

और आज पूरी दुनिया जुरेल के ज़बरदस्त आत्मविश्वास को सैल्यूट कर रही है.

दबाव में आए बिना खेली शानदारी पारी

रांची टेस्ट में ध्रुव जुरेल

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रांची टेस्ट के चौथे दिन भारत 192 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय एक विकेट के नुक़सान पर 99 रन बना चुका था.

जीत सहज दिख रही थी, लेकिन अचानक से 21 रनों के भीतर चार खिलाड़ी आउट हो गए. दबाव पूरी तरह से टीम इंडिया पर आ गया.

इन हालात में शुभमन गिल को दूसरे छोर पर शिकन तक नहीं आई. वह इसलिए क्योंकि उन्हें पता था कि साथ देने के लिए जुरेल है.

जुरेल ने फिर से नाबाद 39 रनों की पारी खेली. इसके चलते उन्हें प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी मिला.

पहली पारी में जब जुरेल बल्लेबाज़ी के लिए आए थे तो 155 रन पर ही टीम इंडिया के 5 विकेट गिर चुके थे. जल्द ही ये स्कोर 7 विकेट के नुकसान 177 रन में बदल गया.

इन अति दबाव वाले हालात में भी जुरेल ने मैच के तीसरे दिन लंच तक आक्रामकता और सूझबूझ के बीच तालमेल दिखाते हुए 90 रन की पारी खेली.

उनकी इस पारी का हर कोई इस कदर कायल हो गया कि अब चर्चा ये होने लगी है कि क्या टी20 वर्ल्ड कप के लिए जुरेल की दावेदारी बाक़ी विकेटकीपर-बल्लेबाज़ों के साथ मज़बूत हो चुकी है.

ध्रुव जुरेल के करियर की दिशा

राजकोट टेस्ट में सरफराज खान के साथ ध्रुव जुरेल को टेस्ट कैप मिली थी

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23 साल को जुरेल को हालात ने अचानक ही टेस्ट क्रिकेट की चुनौती का सामना करने वैसे ही धकेल दिया है, जैसा कि क़रीब दो दशक पहले धोनी के साथ हुआ था.

उस वक्त पार्थिव पटेल और दिनेश कार्तिक को ही भारतीय विकेटकीपिंग का भविष्य बताया जा रहा था.

तब चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट ने धोनी के कम अनुभव को नज़रअंदाज़ करते हुए टीम में शामिल किया था. उनका मानना था कि धोनी सिर्फ सफे़ेद गेंद के ही ज़बरदस्त खिलाड़ी नहीं हैं.

जुरेल ने अपने अब तक के करियर में सिर्फ 15 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं. कुछ वक्त पहले तक उन्हें अपने राज्य की टीम में भी सहज़ तरीक़े से मौक़े नहीं मिलते थे.

लेकिन राजकोट और रांची ने जुरेल के करियर को एक नई दिशा दे दी है.

धोनी की राह पर चलना शायद इस युवा के लिए बहुत बड़ा लक्ष्य हो लेकिन उनमें पंत का विकल्प या फिर साझेदार बनने की योग्यता तो है ही.

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