बिहारः अविवाहिता के मां बनने के बाद उसकी हत्या और नवजात ग़ायब, पिता और प्रेमी गिरफ़्तार

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
बिहार के मधेपुरा के उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र में कथित तौर पर 'झूठी शान के नाम पर' एक अविवाहित मां की हत्या का मामला सामने आया है.
हत्या का आरोप मृत युवती के पिता अम्बेद भारती और चाचा तपेश कुमार यादव पर है.
इस मामले में अविवाहित युवती ने जिस बच्ची को जन्म दिया था, उसको एनएच-106 पर बने पुल से कथित तौर पर थैले में बंद करके फेंक दिया गया.
बच्ची को फेंकने का आरोप अविवाहित युवती के प्रेमी रिशु राज पर है, जिसका नाम अस्पताल के रिकॉर्ड में युवती के पति और नवजात के पिता के रूप में दर्ज है.
उदाकिशुनगंज के सब डिवीज़नल पुलिस ऑफ़िसर (एसडीपीओ) अविनाश कुमार ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को फ़ोन पर बताया, "इस मामले में मृत लड़की के पिता अम्बेद भारती, चाचा तपेश कुमार यादव और उसके प्रेमी रिशु राज को गिरफ़्तार कर लिया गया है."
"रिशु राज की निशानदेही पर वह थैला भी बरामद किया गया है जिसमें रखकर बच्ची को पुल के नीचे फेंक दिया गया था. लेकिन नवजात बच्ची या उसका शव अभी तक बरामद नहीं हुआ है."
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क्या है मामला?
मधेपुरा ज़िले के उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र में पीपरा करौती नाम का गांव है. इस गांव के वार्ड नंबर दो में अलका कुमारी और रिशु राज के परिवार रहते हैं.
20 साल की अलका कुमारी तकरीबन अपनी ही उम्र के रिशु राज से प्यार करती थीं.
अलका कुमारी के पिता अम्बेद भारती अपने ही परिवार के नाम पर बने सरकारी स्कूल कुमार प्रकाश नित्यानंद स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल हैं. उनके पांच बच्चे हैं. वहीं रिशु राज के पिता राजेश कुमार भी उत्क्रमित मध्य विद्यालय में सरकारी टीचर हैं.
दोनों ही परिवार आर्थिक तौर पर समृद्ध हैं.
स्थानीय पत्रकार रजनीकांत के मुताबिक़, "ये दोनों परिवार एक दूसरे के रिश्तेदार हैं. इस प्रेम संबंध के सामने आने पर घरवालों ने दोनों को समझाया था, लेकिन उन लोगों ने मिलना जारी रखा. बाद में अलका गर्भवती हुई. जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक रिशु भी इस बच्चे को नहीं चाहता था. उसने अलका पर गर्भपात करने का दबाव बनाया लेकिन अलका ने इससे इनकार कर दिया."
ढाई किलो की स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया
बीती 12 फ़रवरी की रात तक़रीबन 3 बजे अलका को प्रसव के लिए अनुमंडलीय अस्पताल, उदाकिशुनगंज में भर्ती कराया गया.
उदाकिशुनगंज अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक रूपेश कुमार ने बताया, "12 फ़रवरी की सुबह उसकी नार्मल डिलीवरी हुई थी. उसने अपने पति के तौर पर रिशु कुमार का नाम लिखवाया था. मरीज़ (अलका कुमारी) ने एक ढाई किलो की स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया. लेकिन उसकी ब्लीडिंग बहुत ज़्यादा हो रही थी जिसके बाद हम लोगों ने उसे सदर अस्पताल मधेपुरा रेफ़र कर दिया."
"परिजनों से हम लोगों ने एबुलेंस का इस्तेमाल करने को कहा, लेकिन उन लोगों ने कहा कि हमारे पास अपनी दो गाड़ियां हैं. हमें एंबुलेंस की ज़रूरत नहीं है."
उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ अविनाश कुमार ने बताया, "मृतका को अस्पताल में डिलीवरी के लिए रिशु ही लेकर आया था. पूछताछ में लड़की के घरवालों ने कहा कि उनको उसे गर्भवती होने की जानकारी नहीं थी लेकिन जांच में ये बात झूठ निकली. लड़की के परिजनों को इसकी जानकारी थी और उन्होंने स्वीकारा है कि बदनामी के डर से उन्होंने अपनी बेटी की हत्या की."
हत्या की कहानी ऐसे आई सामने

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पुलिस के मुताबिक़, मृतका अलका के परिवार वाले उसे अस्पताल लेकर नहीं गए और गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी.
13 फ़रवरी को मृतका का परिवार उसके शव को दाह संस्कार के लिए भागलपुर ले जाने लगा. लेकिन इस बात की गुप्त सूचना किसी ने पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने मृतका का पोस्टमार्टम करवाया.
एसडीपीओ अविनाश कुमार बताते हैं, "मृतका के गले पर निशान थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र है कि उसकी हत्या गला घोंट कर की गई. जिसके बाद वैज्ञानिक, तकनीकी और मानवीय साक्ष्य संग्रह किया गया. इन तीन गिरफ़्तारियों के अलावा आगे जांच की जा रही है और घटना में शामिल अन्य लोगों की भी गिरफ़्तारी की जाएगी. घटना के बाद से ही रिशु राज के पिता भी फ़रार हैं."
इस मामले में बीबीसी ने दोनों ही परिवारों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.
एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "दोनों ही परिवार में घर की महिलाएं ही घर पर रह गई हैं."
पीपरा करौती पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि संजीव यादव ने बीबीसी से कहा, "यह तो जघन्य अपराध है. इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए."
युवाओं के लिए हेल्थ क्लीनिक कितने कारगर?

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'झूठी शान के नाम पर' हत्या की यह घटना सिर्फ़ समाज की पितृसत्तात्मक सोच पर ही सवाल नहीं उठाती बल्कि नौजवान लड़के-लड़कियों में यौनिकता के सवाल को भी उठाती है.
बिहार में पंचायत के स्तर पर लंबे समय से काम कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता शाहिना परवीन कहती हैं, "इस घटना ने यौनिकता, सुरक्षित सेक्स, समाज, युवा अपने शरीर को कितना जानते हैं, जैसे सवाल खड़े कर दिए हैं. घरवालों ने जो किया वो पितृसत्तात्मक सोच है, लेकिन सरकार के स्तर पर भी देखा जाना चाहिए कि इन सवालों को कैसे डील किया जा रहा है."
"बच्चा 14 या 15 साल का होता है, उसके बाद वह अपने शरीर को एक्सप्लोर करता है. यह फ़िज़िकल और इमोशनल दोनों तरीकों से होता है. लेकिन क्या उसे भावनात्मक सहयोग मिलता है. या फिर अपने शरीर के बारे में जानकारी और उससे जुड़ी समस्याओं को सुलझाने का कोई तरीक़ा हमारी व्यवस्था में है?"
हालांकि राज्य में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 23 ज़िलों में युवा परामर्श केन्द्र हैं. इन केन्द्रों में टीनएज प्रेग्नेंसी, माहवारी, स्वप्न दोष, एनीमिया, बाल विवाह जैसे मुद्दों पर सलाह और चिकित्सीय सुविधाएं दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन यह व्यवस्था बहुत कारगर नहीं है.
मार्च 2025 में लोकसभा में 'झूठी शान के लिए हत्या' को लेकर पूछे गए एक सवाल के उत्तर में गृह राज्य मंत्री बांदी संजय कुमार ने बताया था कि बिहार में साल 2020 में दो, 2021 में शून्य और 2022 में 'झूठी शान के लिए हत्या' का एक मामला रिपोर्ट हुआ है.
जबकि साल 2026 की बात करें तो बिहार में अब तक मुज़फ़्फ़रपुर, बांका और मधेपुरा में 'झूठी शान या इज़्ज़त के नाम पर हत्या' के मामले स्थानीय मीडिया में रिपोर्ट हो चुके हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
















