बिहार: दलित महिला को निर्वस्त्र कर पिटाई करने का आरोप, क्या है पूरा मामला?

- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बिहार की राजधानी पटना के खुसरूपुर इलाक़े में एक दलित महिला ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने उन्हें निर्वस्त्र कर मारपीट की है.
इस महिला का आरोप है कि दो साल पहले डेढ़ हज़ार का कर्ज़ चुका देने के बाद अब उनसे इसका सूद मांगा जा रहा था.
आरोप के मुताबिक़ सूद देने से इनकार करने पर महिला को निवर्स्त्र कर मारपीट की और चेहरे पर पेशाब भी कर दिया. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है.
पटना ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बीबीसी को बताया है कि मामले के मुख्य नामज़द अभियुक्त प्रमोद सिंह को मंगलवार को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. उनके बेटे की तलाश जारी है.
इससे पहले समाचार एजेंसी एएनआई को उन्होंने बताया था कि पुलिस अभियुक्तों की तलाश में छापेमारी कर रही है.
पुलिस की जांच में पैसे के लेन-देन के विवाद और मारपीट की पुष्टि हुई है, लेकिन बाक़ी जो आरोप लगाए गए हैं, उनकी जांच की जा रही है.
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कपड़े उतारकर पीटने का आरोप
पटना शहर से क़रीब 50 किलोमीटर दूर खुसरूपुर के मोसिमपुर गाँव की ये घटना है. जब हम पीड़िता के घर पहुंचे तो देखा कि उनके सिर पर पट्टी बंधी हुई है. उनके आसपास चार-पांच लोग बैठे हुए थे.
पीड़ित महिला बात करने की हालत में नहीं थीं, लेकिन उनके एक रिश्तेदार के मुताबिक़ गांव के ही कुछ दबंगों से इलाज के लिए पीड़ित महिला ने दो साल पहले डेढ़ हज़ार रुपये कर्ज़ के तौर पर लिए थे.
आरोप है कि उसी रक़म के सूद की वसूली के लिए उनके साथ ऐसा किया गया है.
घरवालों का दावा है कि कर्ज़ लेने के कुछ दिनों बाद पैसे आते ही उन्होंने कर्ज़दारों को सूद समेत सारे पैसे वापस कर दिए थे.
घरवालों के आरोपों के मुताबिक़ पिछले हफ़्ते गुरुवार यानी 21 सितंबर को मोसिमपुर गांव के ही एक व्यक्ति ने दो साल पहले दिए गए रुपयों के बदले महिला से सूद की मांग की.
पीड़ित महिला ने यह कहकर सूद देने से इनकार कर दिया पहले कभी सूद बाक़ी होने के बारे में क्यों नहीं बताया.
पीड़ित महिला के जेठ यानी पति के बड़े भाई ने बीबीसी को बताया, “महिला के इनकार के बाद मुख्य अभियुक्त प्रमोद सिंह ने उन पर ईंट से वार किया और भाग गया. उसके बाद महिला ने ख़ुद पुलिस को फ़ोन कर इसकी सूचना दी. इसी पर दबंग लोग फिर से आए और कपड़े उतारकर पीटने की धमकी दी.”
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक़ शनिवार रात क़रीब दस बजे सूद मांगने वाले प्रमोद सिंह और उनके बेटे ने पीड़ित महिला को धोखे से अपने घर बुलाया.
महिला शौच के लिए पानी लाने गई थीं. उनसे अभियुक्तों ने कहा कि उनके पति को बंधक बनाकर रखा है. इस बात पर महिला उनके घर की तरफ चली गई, जहां उनके साथ मारपीट की गई और निर्वस्त्र किया गया.
मोसिमपुर गांव की आबादी क़रीब तीन हज़ार है. यहाँ सबसे बड़ी आबादी यादवों की है. इसके अलावा गांव में दलित, निषाद और मुस्लिम भी हैं. दलित महिला के साथ मारपीट करने वाला अभियुक्त यादव परिवार से है.

गाँव में ख़ामोशी
महिला के जेठ ने बताया कि पीड़ित महिला जब वहाँ से जान बचाकर भाग रही थी तब उनकी पत्नी और गाँव की बाक़ी महिलाओं ने उन्हें कपड़ों से ढंक लिया. महिला के परिवार वालों के मुताबिक़ मुख्य अभियुक्त प्रमोद सिंह के बेटे ने महिला पर पेशाब भी किया.
उसके बाद पीड़ित परिवार ने 112 नंबर पर फ़ोन कर पुलिस को इसकी सूचना दी. पुलिस अपनी गाड़ी से महिला का प्राथमिक उपचार कराने ले गई.
आरोप लगने के बाद से ही अभियुक्त प्रमोद सिंह और उनका बेटा फ़रार हो गया. पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी.
इस मामले पर हमने गांव के लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन इस मुद्दे पर कोई बात करने को राज़ी नहीं हुआ. फिर मामले पर पुलिस का पक्ष जानने के लिए हम खुसरूपुर पुलिस स्टेशन पहुंचे.

अभी बाक़ी आरोपों की पुष्टि
बातचीत करने पर स्थानीय पुलिस ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि महिला के साथ हुई घटना पर पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर लिया है.
इसमें एससी-एसटी एक्ट और महिला उत्पीड़न से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है. इस मामले में दो नामज़द और चार अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. फ़िलहाल पुलिस बाक़ी अभियुक्तों की तलाश कर रही है.
पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि जिन लोगों ने पीड़ित महिला को कर्ज़ दिया था, वो सूद पर पैसे देने का काम करते हैं. वो प्रभावशाली लोग हैं.
हालांकि पुलिस भी पुख़्ता तौर पर कुछ दावा करने से पहले मामले की पूरी जांच में जुटी है.
छोटे से गांव में छह लोगों ने मिलकर महिला के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की है, जिसकी गवाही पुलिस को कुछ स्थानीय लोगों ने भी दी है.
पुलिस अब इस बात की जांच भी कर रही है कि मुख्य अभियुक्त प्रमोद सिंह और उनके बेटे के अलावा बाक़ी चार लोगों को महिला के परिवार वाले क्यों नहीं पहचान पाए हैं.

खुसरूपुर की घटना पर सियासत तेज
खुसरूपुर की घटना को लेकर बिहार में सियासत भी तेज़ हो गई है. बीजेपी ने बिहार की नीतीश सरकार पर निशाना साधा है. बीजेपी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने इसके लिए राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है.
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वहीं एलजेपी (रामविलास) के सांसद चिराग पासवान ने दलित महिला के साथ दुर्व्यवहार की इस घटना पर राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की है. गांव में हमें पीड़ित परिवार का हालचाल लेने पहुंचे आरजेडी के स्थानीय विधायक और वाम दलों के विधायक दिखे.
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सूदखोरों का जाल
सीपीआईएमएल के पालीगंज विधायक संदीप सौरव के मुताबिक़, “हमें पीड़ित परिवार ने बताया कि मारपीट की सूचना पुलिस को देने से गुस्साए दबंगों ने कपड़े उतारकर महिला को पीटा है. इलाक़े में लोगों ने बताया कि यहां गुंडा बैंक चलता है. गांव में कर्ज़ लेने वाले सभी लोग घबराए हुए हैं. ऐसे कई लोग तो कर्ज़ के डर से भाग गए हैं.”
इस इलाक़े में दलितों का कई परिवार है जो आमतौर पर मज़दूरी कर घर चलाते हैं. इनमें से कई प्रवासी मज़दूर भी हैं जो बड़े शहरों तक जाने के लिए स्थानीय स्तर पर कर्ज़ लेते हैं और मज़दूरी कर कर्ज़ चुकाते हैं.
फुलवारी शरीफ़ से सीपीआईएमएल विधायक गोपाल रविदास का कहना है कि ज़रूरत के समय सभी लोग सहयोग लेते हैं, हम भी लेते हैं, लेकिन कर्ज़ लेने के बाद मज़दूरों से सारी कमाई वसूल लेते हैं. पंद्रह सौ रुपये के बदले पंद्रह हज़ार रुपये सूद लेते हैं.

शशी यादव आशा रसोइया योजना में काम करने वाली महिलाओं के संगठन की नेता हैं. उनका आरोप है कि सामंती मानसिकता समाज में बढ़ रही है. बिहार हो या अन्य जगह हो, महिलाओं पर इस तरह से दमन का सिलसिला चल पड़ा है.
वो आरोप लगाती हैं, “यह मणिपुर जैसी घटना है, केवल पंद्रह सौ रुपये, जो तीन दिन में लौटा दिए गए, उसके सूद के लिए ऐसा किया गया है. पुलिस में शिकायत करने पर अभियुक्तों ने महिला के कपड़े उतारकर मारपीट की.”
खुशरूपुर का यह इलाक़ा बख़्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र में आता है. पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे आरजेडी के स्थानीय विधायक अनिरुद्ध कुमार का कहना है कि इलाक़े में पहली बार इस तरह की घटना हुई है. इस मामले की तह तक जाकर इसका पता लगाया जाएगा.
राजनीतिक दावों और आरोपों के बीच मोसिमपुर का पीड़ित परिवार अब तक सदमे में है. महिला के घरवालों को यह भी डर सता रहा है कि उनके साथ भविष्य में भी हिंसा की जा सकती है.
इस बीच बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि राज्य सरकार की तरफ से पीड़ित परिवार को एक लाख 25 हज़ार रुपये की सहायता दी गई है.
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