पाकिस्तान-अफ़ग़ान तालिबान संघर्ष का क्या भारत पर भी होगा असर?

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
पाकिस्तान और अफ़ग़ान तालिबान के बीच एक बार फिर से हिंसक संघर्ष शुरू हो गया है. पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने अफ़ग़ान तालिबान के ख़िलाफ़ 'खुली जंग' का एलान किया है.
पाकिस्तान का आरोप है कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ साज़िश रची जाती है और हमलों की योजना बनाई जाती है. तालिबान शासन पाकिस्तान के इन आरोपों से इनकार करता रहा है.
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने अफ़ग़ान तालिबान को चेतावनी देते हुए कहा कि "हमारा धैर्य समाप्त हो गया है" और अब "खुला युद्ध" होगा.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में, ख़्वाजा आसिफ़ ने अफ़ग़ान तालिबान पर "अफ़ग़ानिस्तान में दुनिया भर से आतंकवादियों को इकट्ठा करने" का आरोप लगाया और कहा कि काबुल में अंतरिम सरकार ने "आतंकवाद का एक्सपोर्ट" किया है.
अफ़ग़ान तालिबान के प्रवक्ता ने पहले एक्स पर एक पोस्ट कर दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान के हमलों का जवाब दिया है, लेकिन बाद में ये पोस्ट डिलीट कर दी गई.
तालिबान मिलिट्री के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "अगर हम पर हमला हुआ तो हम जवाब देंगे, लेकिन अभी हम संघर्ष शुरू नहीं करेंगे."
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बीबीसी उर्दू के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार ने दावा किया है कि अब तक उसके सैन्य अभियानों में अफ़ग़ान तालिबान के 133 सदस्य मारे गए हैं और 200 घायल हुए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने राजधानी काबुल, पक्तिका और कंधार में कुछ स्थानों पर बमबारी की है. हालाँकि उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ है.
पिछले हफ़्ते, पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान पर रात भर कई एयर स्ट्राइक किए, जिसमें तालिबान ने कहा कि महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 18 लोग मारे गए हैं.
पाकिस्तान ने कहा था कि हमलों में पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान बॉर्डर के पास सात कथित मिलिटेंट कैंप और ठिकानों को टारगेट किया गया था, और कहा कि ये हमले पाकिस्तान में हाल ही में हुए आत्मघाती बम हमलों के बाद किए गए थे.
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कितना बड़ा ख़तरा

हालांकि भारत अफ़ग़ानिस्तान के साथ कोई सीमा साझा नहीं करता है और तालिबान की सरकार के साथ उनके कोई मज़बूत कूटनीति संबंध नहीं हैं.
लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव कै दौर में अगर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान शासन के बीच लंबी जंग शुरू हो जाए तो इसका क्या असर हो सकता है?
साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर धनंजय त्रिपाठी मानते हैं कि इस तरह की जंग का क्षेत्रीय स्थिरता पर असर हो सकता है और अन्य देशों को इलाक़े में हस्तक्षेप का मौक़ा मिल सकता है.
वो कहते हैं, "पाकिस्तान परेशान होगा तो इस लिहाज से भारत को एक ब्रिदिंग स्पेस मिल सकता है क्योंकि वो हमेशा भारत के ख़िलाफ़ सक्रिय रहता है. इस तरह से फौरी तौर पर यह भारत के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन हमें देखना होगा कि तालिबान इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है."
धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "अगर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए अफ़ग़ानिस्तान में कई तरह के संगठन तैयार होते हैं तो भविष्य में यह भारत के लिए भी अच्छा नहीं होगा. पाकिस्तान को भी चाहिए कि वह तहरीक़-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या बलोच को लेकर अपने रुख़ में बदलाव करे. इस मामले में पाकिस्तान को भी समझदारी दिखानी चाहिए."
दोनों पक्षों के बीच ताजा संघर्ष की शुरुआत पिछले साल 7-8 अक्तूबर की दरमियानी रात को हुई थी, जब पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने ओरकज़ई में ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की. पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन में 19 "चरमपंथियों के मारे जाने का दावा" किया था.
पाकिस्तान कई साल से अफ़ग़ान तालिबान से प्रतिबंधित तहरीक़-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करता रहा है.
पाकिस्तान ने टीटीपी के लड़ाकों पर पाकिस्तानी सैनिकों और नागरिकों पर हमला करने का आरोप लगाया है. उसका यह भी आरोप है कि अफ़ग़ान नागरिक पाकिस्तान में हुए कई चरमपंथी हमलों में शामिल रहे हैं.
भारत का क्या रुख़ हो सकता है?

पिछले साल अक्तूबर महीने में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान प्रशासन के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी छह दिन की भारत यात्रा पर आए थे. अगस्त 2021 में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद यह तालिबान सरकार के किसी मंत्री की पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी.
मुत्तक़ी के भारत दौरे के बीच ही पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर संघर्ष हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को काफ़ी नुक़सान पहुंचाने की बात कही.
मुत्तक़ी की भारत यात्रा को लेकर माना गया कि पाकिस्तान को यह पसंद नहीं आया. पाकिस्तान ने हाल के समय में बड़ी संख्या में अफ़ग़ान शरणार्थियों को वापस भी भेजा है.
मिडिल ईस्ट इनसाइट्स प्लेटफ़ॉर्म की संस्थापक डॉक्टर शुभदा चौधरी कहती हैं, "इस तरह के संघर्ष का भारत और ईरान दोनों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीमा रेखा है."
हालाँकि वो मानती है कि यह संघर्ष ज़्यादा दिनों तक नहीं चलेगा क्योंकि पाकिस्तान के आर्थिक हालात भी बहुत अच्छे नहीं हैं.
विदेश मामलों के जानकार कमर आगा का मानते हैं, "भारत के लिए दोनों ही पक्ष मित्र नहीं हैं, इसलिए वो चाहेगा कि यह संघर्ष चलता रहे और यह छोटे-बड़े स्तर पर चलता भी रहेगा. इससे भारत को एक फ़ायदा यह होगा कि उनका एक शत्रु किसी अन्य मोर्चे पर उलझा हुआ है."
वो कहते हैं, "अगर यह संघर्ष लंबा चला तो इसका भारत पर भी असर होगा और ईरान पर भी, जो ख़ुद इसराइल और अमेरिका के साथ तनाव के दौर में है. अलग लड़ाई लंबी चली तो जैसा पहले भी हुआ है एक बार फिर अफ़ग़ान शरणार्थी भारत और ईरान जाना चाहेंगे."
हालाँकि उनका कहना है, "चीन, पश्चिमी देश और ख़ासकर अमेरिका नहीं चाहेगा कि यह संघर्ष आगे बढ़े, क्योंकि वह पाकिस्तान के साथ नए सिरे से अपने संबंध बना रहा है."
उनका कहना है कि भारत का तालिबान शासन के साथ कूटनीतिक संबंध नहीं है लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ भारत का पुराना 'पिपल-टू-पिपल कॉन्टैक्ट' है और भारत की सद्भावना हमेशा उनके साथ रहेगी.
भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच संबंध

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तालिबान शासन से पहले भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच काफ़ी अच्छे संबंध रहे हैं.
दरअसल कूटनीतिक लिहाज से भारत के लिए अफ़ग़ानिस्तान हमेशा से काफ़ी महत्वपूर्ण रहा है और ख़ासकर पाकिस्तान से भारत के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं, जिससे भारत के लिए अफ़ग़ानिस्तान का महत्व बढ़ जाता है.
इस बार भी अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के शासन को क़रीब पांच साल का समय हो गया है और भारत की कोशिश रही है कि पाकिस्तान को साधने के लिए वह तालिबान शासन से बातचीत को सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ता रहे.
कमर आगा कहते हैं, "अगर तालिबान शासन और पाकिस्तान के बीच संघर्ष लंबा चला तो इससे अफ़ग़ानिस्तान कई टुकड़ों में बंट सकता है. इसकी काफ़ी आशंका है."
वो कहते हैं, "ऐसा होना भारत के लिए अच्छा नहीं होगा, क्योंकि कई ग्रुप्स खड़े होने से उनमें से कुछ भारत के ख़िलाफ़ भी हो सकते हैं और क्षेत्रीय स्तर पर यह भारत के लिए ठीक नहीं है. इससे पूरे क्षेत्र में भी अस्थिरता आ सकती है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















