जितेंद्र सिंह: केजरीवाल और सिसोदिया को बरी करने वाले स्पेशल जज कौन हैं?

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शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू अदालत से आई एक ख़बर ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं को बड़ी राहत दी है.
स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया है.
यह पहली बार नहीं है जब जज जितेंद्र सिंह के किसी फ़ैसले ने सुर्खियां बटोरी हों.
कानून की बारीकियों पर उनकी पकड़ और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवालों के लिए उन्हें कानूनी हलकों में एक सख़्त जज के तौर में देखा जाता है.
'अनुमानों पर मुकदमा नहीं चल सकता'

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शुक्रवार को अपना फ़ैसला सुनाते हुए जज जितेंद्र सिंह ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया.
उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ "आपराधिक मंशा" या "साज़िश" के ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रही है.
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "केवल अनुमानों के आधार पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के ख़िलाफ़ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.''
अदालत ने यह भी कहा कि सबूतों की कमी के कारण अभियुक्तों को लंबे समय तक मुकदमे की प्रक्रिया में उलझाए रखना उचित नहीं है.
कानून और प्रक्रिया को प्राथमिकता

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जज जितेंद्र सिंह को कानूनी प्रक्रियाओं, ख़ासकर 'प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन' (मुकदमा चलाने के लिए ज़रूरी अनुमति) के मामले में सिद्धांतों पर अडिग रहने वाला न्यायाधीश माना जाता है.
इसके उदाहरण उनके इन पिछले फैसलों में भी मिलते हैं -
दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड मामला: नवंबर 2024 में उन्होंने आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान को रिहा करने का आदेश दिया था. हालाँकि जज ने माना था कि उनके ख़िलाफ़ साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने केवल इस तकनीकी आधार पर संज्ञान लेने से मना कर दिया क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ज़रूरी 'सरकारी अनुमति' नहीं ली थी.
अधिकारों की रक्षा: जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेशों में बार-बार यह स्पष्ट किया है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और अनिवार्य अनुमति के किसी भी व्यक्ति को हिरासत में रखना "अवैध" है.
1984 सिख दंगे: जगदीश टाइटलर मामले की सुनवाई

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जज जितेंद्र सिंह कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के ख़िलाफ़ 1984 के सिख विरोधी दंगों (पुल बंगश मामला) की सुनवाई भी कर रहे हैं.
इस मामले में उन्होंने पीड़ित परिवारों और गवाहों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं.
उन्होंने इस मामले में 40 साल बाद चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को सुचारू बनाया और फॉरेंसिक साक्ष्यों (वॉइस सैंपल रिपोर्ट) को रिकॉर्ड पर लेकर यह सुनिश्चित किया कि दशकों पुराने इस मामले में इंसाफ़ की प्रक्रिया पारदर्शी रहे.
अपनी अदालतों में जांच एजेंसियों की कमियों को उजागर करने के लिए जज जितेंद्र सिंह अक्सर चर्चा में रहते हैं.
आबकारी मामले में उन्होंने 'सरकारी गवाह' (अप्रूवर) बनाने की सीबीआई की रणनीति पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि अगर जांच की ख़ामियों को भरने के लिए इस तरह के गवाहों का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है.
क्या था मामला

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अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री रहते दिल्ली सरकार ने एक नई आबकारी नीति (आबकारी नीति 2021-22) नवंबर 2021 में लागू की थी.
नई आबकारी नीति लागू करने के बाद दिल्ली का शराब कारोबार निजी हाथों में आ गया था. दिल्ली सरकार ने कहा था कि नई नीति लागू होने के बाद राज्य को मिलने वाले राजस्व में वृद्धि होगी.
लेकिन 22 जुलाई 2022 को दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय सक्सेना ने इस नई एक्साइज़ पॉलिसी की सीबीआई जांच कराने के आदेश दिए थे.
दिल्ली शराब नीति से जुड़े केस में ईडी और सीबीआई दोनों ने जांच की थी और आम आदमी पार्टी के कई बड़े नताओं को गिरफ़्तार किया गया था.
21 मार्च, 2024 को अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार किया गया था. हालांकि इसी साल उन्हें 12 जुलाई को ईडी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी. मगर ज़मानत मिलते ही सीबीआई ने केजरीवाल को गिरफ़्तार कर लिया था. इस कारण तब केजरीवाल जेल से बाहर नहीं आ सके थे.
इस मामले में दिल्ली के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी उस वक़्त जेल में थे. मनीष सिसोदिया को फ़रवरी 2023 में गिरफ़्तार किया गया था.
26 फ़रवरी 2023 को गिरफ़्तार हुए सिसोदिया 530 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत लेकर 9 अगस्त 2024 को जेल से रिहा हुए थे.
इस केस में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी गिरफ्तार किए गए थे.
संजय सिंह अक्तूबर 2023 में गिरफ़्तार किए गए थे. ईडी की टीम ने संजय सिंह को दिल्ली की शराब नीति से जुड़े कथित घोटाले केस में गिरफ़्तार किया था.
संजय सिंह सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद अप्रैल 2024 में जेल से बाहर आए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












