बिहार: कैसे और कब रुकेंगी दलित महिलाओं के साथ रेप की घटनाएं?

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में 14 साल की निम्मी (बदला हुआ नाम) के रोने की आवाज़ कान में ड्रिल मशीन जैसा शोर पैदा करती है.
निम्मी बार-बार रट रही है कि उसे अपने गांव झंडापुर (भागलपुर) जाना है. उसकी तीमारदारी में लगे चाचा बबलू राम बेचैन होकर मुझसे कहते हैं, "सिर्फ रोती है कुछ कहती नहीं."
इधर तकरीबन 250 किलोमीटर दूर झंडापुर गांव के बड़ी टोला में उसका 22 साल का भाई संतोष और दो शादीशुदा बहनें सदमे में हैं. ये लोग कई दफे घर के बाहरी हिस्से में बने चूल्हे की जगह को गोबर और मिट्टी से लीप चुके हैं.
यही वो जगह है, जहां बीती 25 नवंबर की रात मछली बेचने वाले उनके पिता कनिक राम खून से लथपथ पड़े थे. उनकी आंखों को फोड़ दिया गया था.
टोले में सरकार की योजनाओं को बताने के लिए नियुक्त विकास मित्र शशि कहते है, "मैंने जब सुबह देखा तो खून का रंग काला पड़ चुका था."

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छोटे बेटे का काट दिया था लिंग
कनिक के सबसे छोटे बेटे छोटू का लिंग काट दिया गया था. बिना दरवाजे वाले दो कमरे के घर के अंदर पत्नी मीना देवी की हत्या भी किसी धारदार हथियार से की गई थी और पटना के अस्पताल में खुद के भीतर बैठे ख़ौफ़ से लड़ती निम्मी अंदर वाले कमरे के एक कोने में नग्न अवस्था में बेहोश मिली थी.
टोले की दुलारी देवी ने सबसे पहले मृतक परिवार को देखा था. वो बताती है, "मैं पैखाने से लौटी तो देखा छोटू सर नीचे किए बैठा है. कई बार आवाज़ देने पर उसने हल्के से सिर हिलाया. खून निकलता देख मैं कनिक राम के घर के पास दौड़ी तो वहां खून ही खून दिखा, जिसके बाद मैं बेहोश हो गई."

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झंडापुर गांव के इस टोले में 70 महादलितों के घर है और सभी घर एक दूसरे से सटे हुए हैं. रास्ते इतने संकरे है कि साइकिल लेकर ही एक व्यक्ति चल सकता है. लेकिन 25 नवंबर की रात कनिक रात के परिवार की नृशंस हत्या की जानकारी पूरे टोले को 26 नवंबर की सुबह 5 बजे दुलारी देवी के शोर मचाने के बाद मिली.
टोले में रहने वाले साबो देवी, रीमा देवी, सुरेन्द्र राम और संजू देवी बताते हैं कि घटना के वक़्त उन्हें कुछ पता नहीं चला. वह कहते हैं कि जब से यह हुआ है उन्हें ठीक से नींद नहीं आती और न ही काम मिलता है. उनके मुताबिक, "रोज़ कमाने खाने वाले हाथ 25 दिन से बेरोजगार बैठे हैं."
बिहार मेंलगातारदलितों के ख़िलाफ़ हमले

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इस मामले में पुलिस ने अब तक दो लोगों की गिरफ्तारी की है और दो लोग संदेह के घेरे में हैं.
भागलपुर के नवगछिया में एसडीपीओ मुकुल रंजन के मुताबिक, "जांच के मुताबिक कुछ दिन पहले बच्ची के साथ दो लोगों ने अलग-अलग वक्त में दुष्कर्म किया था. बच्ची ने ये बात अपने पिता कनिक राम को बताई. 25 नवंबर की रात को मामला आपस में ही सुलझा लेने के लिए सब ने साथ बैठकर ताड़ी पी. बाद में कनिक अपने घर लौट गए. लेकिन अभियुक्त रात एक बजे के आस-पास फिर लौटे. उन्होंने बच्ची के साथ फिर से दुष्कर्म की कोशिश की और बचाने के लिए आए कनिक राम और उसके परिवार की हत्या कर दी."
बिहार में दलित और महादलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं लगातार हो रही हैं. कैमूर जिले की बात करें तो वहां हाल ये है कि सितंबर 2017 से अब तक वहां पांच महादलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आई हैं.

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'बकरी चराने, मूली उखाड़ने पर दलित बच्चियों से दुष्कर्म'
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता कमला सिंह कहती है, "बहुत छोटे-छोटे मामलों पर मसलन मूली उखाड़ने को लेकर, बकरी चराने को लेकर बीते चार महीनों में महादलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म हुआ है. लेकिन एक महिला एसपी होते हुए भी यहां पुलिस का ध्यान सिर्फ बालू माफिया, ओडीएफ पर है."
एनसीआरबी की रिपोर्ट भी कहती है कि 2016 में दलितों के ख़िलाफ सबसे ज़्यादा अपराध उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में हुए.
भागलपुर में लगातार महिला सुरक्षा के मुद्दों को उठा रहे न्याय मंच के रिंकू यादव भी सरकार के सुशासनी दावे पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, "आप देखिए कि झंडापुर के मामले में एक भी व्यक्ति सामने नहीं आया. इसकी वजह ये है कि लोगों को सरकार और प्रशासन पर भरोसा नहीं रहा. अपराधियों को ये पूरा विश्वास है कि पुलिस उनका कुछ बिगाड़ेगी नहीं."
रिंकू की बात को बिहार महिला समाज की अध्यक्ष सुशीला सहाय भी दोहराती हैं.
वो कहती हैं, "साल की शुरुआत में ही वैशाली में एक दलित बच्ची स्कूल में संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत मिली थी. राज्य के हर हिस्से में महिलाओं, ख़ास तौर पर दलित-महादलितों के साथ अंतहीन हिंसा लगातार बढ़ रही है."
उनका कहना है, "सरकार आरक्षण देकर महिला सशक्तिकरण का ढोंग कर रही है और दूसरी तरफ हर घटना के बाद हम लोग सड़क पर उतरकर संघर्ष करते है लेकिन न तो पुलिस सुनती है और न नीतीश कुमार."
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