गुजरात में दलितों पर एक के बाद एक हमले

गुजरात दलित

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हाल ही में गांधी नगर के लिंबोदरा गांव में मूंछ रखने के मामले में एक दलित युवक की पिटाई कर दी गई.

जबकि आणंद ज़िले के भादरणीया गांव में कथित तौर पर गरबा देखने गए एक दलित की हत्या कर दी गई.

गुजरात में पिछले कुछ समय में दलितों के साथ ऐसे हमलों के कई मामले सामने आ चुके हैं.

वरिष्ठ पत्रकार आरके मिश्रा का कहना है कि दलित उत्पीड़न के मामले तो गुजरात में आम हैं, लेकिन आगामी विधानसभा चुनावों और उना की घटना के बाद दलित जागरूकता की वजह से ये मामले सामने आने लगे हैं.

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हाल के दिनों में दलित उत्पीड़न के मामले-

गीर-सोमनाथ ज़िले में उना ताल्लुका के मोटा सम्ढियाणा गांव में 11 जुलाई 2016 को कई दलित युवकों की पिटाई की गई थी.

मृत गाय ले जा रहे दलित युवकों को कथित गौरक्षकों ने पीटा था.

हमलावरों ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो वायरल हो गया. इसके बाद गुजरात में प्रदर्शन शुरू हो गए.

पीड़ित दलित युवकों के हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद ये मामला गरमा गया.

इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे.

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मरा पशु उठाने से मना करने पर हमला

बनासकांठा ज़िले में अमीरगढ़ के कर्जा गांव में 23 सितम्बर 2016 को दलित परिवार पर हमला किया गया.

दलित परिवार के एक सदस्य को गांव के ही एक परिवार ने मरा पशु उठाने कहा, लेकिन दलित परिवार ने मना कर दिया.

इससे गुस्साए छह लोगों ने दलित परिवार पर हमला बोल दिया, पीड़ित परिवार में एक गर्भवती महिला भी थी.

इस मामले में अमीरगढ़ पुलिस ने शिकायत दर्ज की और 23 सितम्बर 2016 को छह अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया.

दलित संगठनों ने मरे हुए पशुओं को उठाने का बायकॉट करने का आह्वान कर दिया और कई दिनों तक ये मुद्दा सुर्खियों में बना रहा.

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बाइक बापू लिखने पर हमला

आणंद ज़िले के बोरसद के निसराया गांव में रहने वाले सौरभ चौहान नाम के एक दलित युवक ने अपने बाइक पर बापू लिखा था. यहां बापू राजपूत समुदाय के लोग लिखते हैं.

ये देखकर गांव के कुछ लोगों ने उसके घर आकर सवाल जवाब किया. इसके बाद उन्होंने अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और मारपीट की.

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मूंछ रखने पर पिटाई

गांधीनगर ज़िले के कलोल के लिंबोदरा गांव में मूंछ रखने पर दो युवकों के साथ मारपीट हुई.

17 साल के दलित और उसके 24 वर्षीय बड़े भाई को 25 सितम्बर को गांव के कुछ लोगों ने धमकी दी.

इतना ही नहीं, उन्होंने 17 साल के दलित युवक को दोबारा बुलाकर उससे कहा कि उसे मूंछ रखने का अधिकार नहीं है और फिर उसके साथ मारपीट की.

27 सितम्बर को उसके बड़े भाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज की.

चंद्रकांत परमार

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गरबा देखने पर हत्या

आणंद ज़िले के भारदणीया गांव के प्रकाश सोलंकी नाम के एक दलित युवक को पहली अक्तूबर को तड़के गांव के मंदिर के पास बैठे थे.

तभी गांव के एक शख्स ने उससे सवाल जवाब किए. उसने कहा कि 'हमारी बहन बेटियां यहां गरबा खेलती हैं.' ऐसा कहते उसने अपमानजनक शब्द कहे. बाद में उस शख्स ने और लोगों को बुलाकर प्रकाश पर हमला कर दिया.

इस बीच प्रकाश का भाई जयेश सोलंकी उसे बचाने वहां पहुंचा तो उसे भी बुरी तरह पीटा गया जिससे उसकी मौत हो गई.

फिलहाल इस मामले सात लोगों को गिरफ़्तार कर जांच शुरू कर दी गई है.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की साल 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक़, अनुसूचित जाति के लोगों पर होने वाले अत्याचार, जिसमें गंभीर चोटें आई हों, ऐसे मामलों में गुजरात देश में दूसरे नंबर पर है.

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