आईपीएल: पहले मुक़ाबले में एक बार फिर हारी मुंबई इंडियंस लेकिन नतीजे से ज़्यादा चर्चा मैच के इन लम्हों की

रोहित शर्मा

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

एक तरह से देखा जाए मुंबई इंडियंस के पास आईपीएल 2024 के पहले मुक़ाबले को एक सुनहरी पटकथा की तरह ख़त्म करना महज़ एक औपचारिकता थी, लेकिन हुआ वही जो अब तक होता आया है.

2013 से कभी भी ये टीम आईपीएल का पहला मैच जीती नहीं थी और वो ऐसा करने के बेहद करीब पहुंच चुकी थी. सोशल मीडिया पर दिन रात सक्रिय रहने वालों के लिए इससे अच्छा नज़ारा और क्या होता.

पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने अपनी टीम को शानदार शुरुआत दी थी और नए कप्तान हार्दिक पंड्या ने आख़िरी ओवर में सनसनीख़ेज़ शुरुआत की. अफ़सोस, पंड्या ना सिर्फ रोहित की एक अच्छी पारी को अंजाम तक ले जाने में नाकाम रहे बल्कि अपने आक्रामक तेवर को आख़िरी ओवर में बरकरार रखने से चूक गए.

उमेश यादव जिन्हें शायद ही कभी कोई कप्तान 20वें ओवर की ज़िम्मेदारी दे, उन्होंने 2 बाउंसर प्रति ओवर वाले नियम का फायदा उठाते हुए पंड्या को आख़िरी ओवर की तीसरी गेंद में पस्त कर दिया और उसके बाद अहमदाबाद में मेज़बान टीम के लिए 6 रनों से एक रोमांचक जीत का रास्ता पक्का हो गया.

आख़िरी 6 ओवर में सिर्फ़ 48 रनों की दरकार

मुंबई

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गुजरात टाइंट्स के खिलाफ़ जीत के लिए 169 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई की टीम को आख़िरी 6 ओवर में सिर्फ 48 रन चाहिए थे. लेकिन, इसके बाद जो हुआ उस पर यकीन करना मुश्किल रहा.

15वें ओवर में 5 रन, 16वें में 4, 17वें में 3, 18वें में 9, 19वें में 8, और फिर 20वें में 12 रन.

यकीन तो इस बात पर भी करना मुश्किल हो रहा रहा था कि तिलक वर्मा ने राशिद ख़ान के ओवर में सिंगल्स लेने से मना कर दिया.

हालांकि, कप्तान पंड्या ने अपने युवा बल्लेबाज़ की इस रणनीति की आलोचना की और इसकी वजह शायद ये हो कि टीम मैनेजमेंट ने पहले ही तय कर लिया था कि टिम डेविड को राशिद के खिलाफ स्ट्राइक देने से बचाना है क्योंकि 2022 से लेग स्पिन के ख़िलाफ़ उनका औसत 7.6 का है.

लेकिन, कप्तान पंड्या खुद के उस फैसले का बचाव कैसे करेंगे जहां पर उन्होंने अपनी टीम के लिए 7वें नंबर पर आकर बल्लेबाज़ी की?

मुंबई की शुरुआत रही मज़बूत

पंड्या

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बहरहाल, मैच की शुरुआत पंड्या ने शानदार तरीक़े से की और टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया.

यूं तो पंड्या ने पूरी पारी के दौरान 7 गेंदबाज़ों का इस्तेमाल किया लेकिन हमेशा की तरह एक ही गेंदबाज़ ऐसा रहा जो ओपनिंग ओवर से लेकर मिडिल ओवर्स और फिर डेथ ओवर्स में उतना ही प्रभावशाली रहता है.

टीमें बदलती रहती हैं, कप्तान बदलते हैं, फॉर्मेट बदलते रहते हैं लेकिन जसप्रीत बुमराह बेहद शालीन तरीके से आक्रामक और असाधारण हुनर का प्रदर्शन करते रहते हैं.

बुमराह ने 4 ओवर में ना सिर्फ कसी हुई गेंदबाज़ी करते हुए महज़ 14 रन दिए बल्कि तीन अहम विकेट भी लिए, जिनमें ऋद्धिमान साहा, साई सुदर्शन और डेविड मिलर जैसे बल्लेबाज़ शामिल हैं. अगर मुंबई मैच जीतती तो मैन ऑफ द मैच बुमराह ही होते.

बुमराह के अलावा साउथ अफ्रीका के युवा तेज़ गेंदबाज़ जेराल्ड कोट्ज़ी ने 4 ओवर में 27 रन देकर 2 विकेट लिए वहीं मुंबई के शम्स मुलानी ने 3 ओवर में कोई विकेट नहीं लिया.

हालांकि, मुलानी ने सिर्फ 24 रन दिये. यही वजह रही कि गुजरात की पारी के एक चौथाई हिस्से (5 ओवर) में 5 या उससे भी कम रन बने.

लेकिन, पंड्या, पीयूष चावला, ल्यूक वुड और नमन धीर की गेंदों पर हमला बोलते हुए गुजरात ने काफी हद तक वापसी करने की कोशिश की. गुजरात ने 4 ओवर में 60 रन जोड़ लिए, जिसमें 30 रन 10वें और 11वें ओवर में आए.

रोहित नहीं थे कप्तान, बल्लेबाज़ी की कमाल

रोहित

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रोहित और ईशान किशन को एक बार फिर से साथ में बल्लेबाज़ी करने के लिए उतरते देखने वाला नज़ारा ना सिर्फ मुंबई इंडियंस बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी एक ठहर कर ग़ौर करने वाला लम्हा रहा.

लेकिन अफ़सोस की बात ये रही कि लंबे समय के बाद क्रिकेट से दूर रहने वाले झारखंड के विकेटकीपर-बल्लेबाज़ किशन खाता खोलने में नाकाम रहे.

मैदान के बाहर अपनी फ्रैंचाइजी के फ़ैसलों को लेकर शायद रोहित शर्मा भी किशन की ही तरह विचलित रहे हों लेकिन अपने अनुभव के चलते उन्होंने इस मैच में इसका असर अपनी बल्लेबाज़ी पर पड़ने नहीं दिया.

29 गेंद में 43 रनों की पारी में 7 चौके और 1 छक्के के दम से करीब 150 का स्ट्राइक रेट रखने वाले रोहित की इस पारी से बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और मुख्य कोच राहुल द्रविड़ भी खुश हुए होंगे.

रोहित ने कप्तान के तौर पर वनडे वर्ल्ड कप के दौरान ऐसे ही आक्रामक तेवर दिखाये थे और टीम इंडिया ख़िताबी जीत से बस एक कदम दूर रह गयी थी.

सोशल मीडिया पर भी चर्चा

पंड्या

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मैच के दौरान मुंबई की गेंदबाज़ी के आख़िरी ओवर में जब पंड्या रोहित को बाउंड्री लाइन पर फील्डिंग के लिए भेजने का इशारा करते हैं तो उन्हें थोड़ा अजीब लगता है. ये क्लिप भी सोशल मीडिया में वायरल है और कामेंटेटर का वो कहना भी कि- ‘अब हार्दिक कप्तान हैं तो रोहित आपको वहां जाना ही होगा!’

मैच के दौरान अलग अलग तस्वीरों ने फैंस को अलग अलग तरीकों से उलझाये रखा.

अगर किसी को हार्दिक का मैच के बाद रोहित को पीछे से गले मिलना और काफी देर तक बातचीत करना भाया. तो किसी को इस बात से भी अलग कहानी बुनने का मौका मिला कि मैच ख़त्म होने के ठीक बाद डगआउट में बुमराह और रोहित बैठे हुए थे जो शायद मिडिल ऑर्डर में सूर्यकुमार यादव की कमी महसूस कर रहे हों.

वहीं उसी वक्त पंड्या और ईशान किशन अपने साथी शुभमन गिल के साथ यूं खिलखिला रहे थे मानों मैच का नतीजा कोई मायने ही नहीं रखता हो.

गुजरात की गेंदबाज़ी में था दमखम

गुजरात

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बहरहाल, अगर गुजरात ने ये मैच जीता तो इसका पूरा श्रेय उनकी विविधतापूर्ण गेंदबाज़ी आक्रमण को जाता है.

निसंदेह, राशिद ख़ान इस आक्रमण के हीरो हैं लेकिन इस मैच में उन्होंने किफायती गेंदबाज़ी करते हुए एक छोर से दबाव बनाया और वहीं दूसरे छोर से कभी उमेश यादव तो कभी मोहित शर्मा और यहां तक कि युवा साई किशोर ने भी निर्णायक मौकों पर टीम को कामयाबी दिलाने का काम बरकरार रखा.

अज़मतुल्लह ओमारज़ाई ने भी टॉप ऑर्डर के दो विकेट झटके और बल्लेबाज़ी के दौरान 17 रनों का योगदान दिया.

23 साल के इस खिलाड़ी को अफ़ग़ानिस्तान का हार्दिक पंड्या कहा जाता है लेकिन रविवार को अहमदबाद में पंड्या की टीम के ख़िलाफ अपने शानदार हरफनमौला खेल के लिए इस खिलाड़ी ने पंड्या की कप्तानी वाली मुंबई टीम को ही चुना.

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