आईपीएल के इस सीज़न में कई सीनियर खिलाड़ी बढ़ा रहे हैं अपनी टीम की शान

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- Author, पराग फाटक
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
क्रिकेटरों के जीवन में 35 या इससे ज़्यादा उम्र का मतलब है करियर का अंतिम पड़ाव.
टी-20 फ़ॉर्मेट के लिए युवा खिलाड़ियों को वरीयता दी जाती है.
लेकिन इस बार आईपीएल में कुछ और ही देखने को मिला है.
कई खिलाड़ी, जो अपने करियर के आख़िरी पड़ाव में दिख रहे हैं, उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है.
इस सूची में रहाणे, अमित मिश्रा और पीयूष चावला जैसे खिलाड़ी हैं.
अजिंक्य रहाणे

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एक ऐसा खिलाड़ी, जिन्होंने भारतीय टीम की कमान संभाली, जिनके नाम पर आईपीएल में शतक और ढेरों रन हैं.
लेकिन इस सीज़न में उन्हें मौक़ा मिलेगा या नहीं, इसको लेकर संशय था.
चोटिल हुए खिलाड़ियों की जगह उन्हें मौक़ा मिला और फिर हमें एक नया अजिंक्य रहाणे देखने को मिला.
बीते 22 दिसंबर को कोच्चि में हुई नीलामी में अजिंक्य रहाणे का नाम आया, तब सिर्फ़ चेन्नई सुपर किंग्स ने उनमें रुचि दिखाई.
भारतीय टीम से बाहर हुए और आईपीएल में पिछले सीजन में कोलकाता के लिए ख़ास प्रदर्शन नहीं करने वाले रहाणे को मौक़ा देने के लिए बाक़ी टीमें उत्सुक नहीं थी.
इस कारण रहाणे बस अपनी बेस प्राइस 50 लाख रुपए पर चेन्नई सुपर किंग्स में शामिल हुए.
लेकिन रहाणे की मुश्किल कम नहीं हुई. 27 मार्च को बीसीसीआई ने वार्षिक करार सूची जारी की और अजिंक्य रहाणे का नाम इसमें नहीं था.
मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ बेन स्टोक्स पैर में चोट के कारण नहीं खेल पाए. मोइन अली भी फ़िट नही थे. इस कारण मैच में रहाणे को अवसर मिला.
मैच में चेन्नई ने मुंबई को 157 रन पर रोक लिया. ये लक्ष्य बहुत बडा तो नही था, लेकिन चेन्नई ने पहले ही ओवर में कॉनवे का विकेट गँवा दिया.
टीम में स्टोक्स नही थे. चोट के चलते धोनी बल्लेबाज़ी के लिए सबसे आख़िर में उतरते है. ऐसे में पॉवरप्ले ओवर्स का फ़ायदा उठाना आवश्यक था.
उस मैच में अजिंक्य रहाणे ने 27 गेंदो में 61 रनों की पारी खेली. उस पारी ने चेन्नई की जीत की नींव रखी.
2020 के बाद आईपीएल में उनका ये पहला अर्धशतक था.
कोलकाता के ख़िलाफ़ अजिंक्य ने 29 गेंदो में अविजित रहते हुए 71 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली.
चेन्नई की जीत में इस पारी ने निर्णायक भूमिका निभाई.
रहाणे क्लासिक और पारंपरिक शैली के लिए जाने जाते है.
वो तेज़ी से रन ज़रूर बनाते है, लेकिन कोई अजीबोगरीब स्ट्रोक नही लगाते.
रहाणे की बल्लेबाज़ी देखना हमेशा से दर्शकों के लिए सुखद अनुभव रहा है.
इस सीज़न मे उनके तेवर अलग दिख रहे है. वे बिना दबाव के खुल कर खेल रहे हैं.
बीसीसीआई ने जून में होने वाली वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के लिए टीम चुनी, उसमें अजिंक्य रहाणे का नाम है.
श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत चोट के चलते इस मैच में खेल नही पाएँगे.
ऐसे में शानदार फ़ॉर्म में खेल रहे अजिंक्य का अनुभव टीम के लिए अहम साबित हो सकता है.
ईशांत शर्मा

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भारत के लिए 100 टेस्ट खेल चुके ईशांत शर्मा का वैसे तो टीम इंडिया में लौटना फ़िलहाल मुश्किल लग रहा है और वे बीसीसीआई की रणनीति का हिस्सा नहीं दिखते.
पिछले दिनों बीसीसीआई ने अपनी वार्षिक करार सूची से ईशांत को बाहर कर दिया था.
दो साल तक ईशांत आईपीएल का हिस्सा भी नही थे. लेकिन इस अनुभवी गेंदबाज़ ने वापसी के लिए जमकर मेहनत की.
दिल्ली के शुरुआती मैचों में उन्हें मौक़ा नही मिला.
कोलकाता के ख़िलाफ़ मैच में दिल्ली टीम के प्रबंधन ने ईशांत को मौक़ा देने का फ़ैसला किया.
ईशांत ने सिर्फ़ वापसी ही नहीं की, बल्कि शानदार प्रदर्शन करते हुए मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी जीता.
ईशांत ने चार ओवर्स में केवल 19 रन देकर 2 विकेट चटकाए. दिल्ली का अरुण जेटली इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम ईशांत का घरेलू मैदान है.
यहाँ खेलने का अनुभव रखने वाले ईशांत ने कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान नीतीश राणा को पवेलियन का रास्ता दिखाया. राणा काफ़ी साल से आईपीएल का हिस्सा है.
घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए खेलने वाले राणा इस सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी कर रहे हैं.
ईशांत ने उन्हें आउट कर कोलकाता को झटका दिया. पिंच हिटर के तौरपर खेलने आए सुनील नरेन को भी ईशांत ने चलता किया.
हैदराबाद के ख़िलाफ़ हुए मुक़ाबले में भी दिल्ली ने ईशांत पर भरोसा किया. ईशांत ने तीन ओवर्स में 18 रन देकर राहुल त्रिपाठी का विकेट लिया.
ईशांत आईपीएल में अब तक कोलकाता नाइट राइडर्स, किंग्स इलेवन पंजाब, राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स, सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेल चुके हैं.
34 वर्षीय ईशांत ने दिखा दिया कि अभी भी वे विकेट चटकाना नही भूले हैं.
नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने ईशांत को 50 लाख रुपए देकर अपने टीम में शामिल किया था.
करियर के अंतिम दौर में चल रहे ईशांत टी-20 में बल्लेबाज़ों के चौके-छक्के वाले फ़ॉर्मेट के बीच अपनी उपयोगिता साबित कर पाएँगे, इस पर सवाल उठ रहे थे.
इम्पैक्ट प्लेयर जैसे नियम से ईशांत जैसे सीनियर खिलाड़ियों का पूरे 40 ओवर्स खेलना ज़रूरी नहीं.
चार ओवर्स फेंकने के बाद उनकी जगह बल्लेबाज़ को शामिल किया जाता है.
अगर बल्लेबाज़ी पहले है, तो किसी बल्लेबाज़ की जगह पर बाद में उन्हें शामिल किया जाता है.
ईशांत उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं, जो आईपीएल के पहले संस्करण का हिस्सा थे.
मोहित शर्मा

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"नेट बॉलर होना कोई बुरी बात नहीं. बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौक़ा मिलता है. फ़िटनेस बना रहता है. खेल से जुड़े रहना मेरे लिए महत्वपूर्ण था. नेट बॉलर होने का कोई मलाल नहीं, क्योंकि हमारी टीम ने पहले सीज़न में ही आईपीएल की ट्रॉफ़ी जीती. हमने ख़ूब सेलिब्रेट किया. टीम ने कोई भेदभाव नही किया."- ये कहना है मोहित शर्मा का.
मोहित शर्मा का नाम क्रिकेट प्रेमियों के लिए नया नहीं. 2014 में मोहित शर्मा ने आईपीएल में पर्पल कैप का पुरस्कार जीता था.
सीज़न में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ को पर्पल कैप से सम्मानित किया जाता है.
2015 में ऑस्ट्रेलिया में हुए वर्ल्ड कप में मोहित भारतीय टीम का हिस्सा थे.
चेन्नई सुपर किंग्स के लिए जब वे खेलते थे, तब महेंद्र सिंह धोनी डेथ ओवर्स के लिए उन पर विश्वास करते थे.
चेन्नई के बाद मोहित पंजाब टीम के लिए खेले. उनके फ़ॉर्म में गिरावट आई.
बाद में वे दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलने लगे. 2020 और 2021 के आईपीएल सीज़न को मिलाकर उन्हें चार मैचो में खेलने का मौक़ा मिला.
2022 सीज़न के लिए नीलामी में उन्हें किसी टीम ने जगह नहीं दी.
नई टीम गुजरात टाइटंस के हेड कोच आशीष नेहरा ने उनको कॉल किया.
नेट बॉलर की रूप में टीम के साथ जुड़ सकते हो क्या- ये पूछा.
पीठ की सर्जरी से उभरकर वापसी के लिए तैयार मोहित ने नेहरा को हाँ कहा.
इससे पहले प्रमुख गेंदबाज़ के तौर पर खेले मोहित नेट बॉलर बने. यानी बल्लेबाज़ों के अभ्यास के समय युवा गेंदबाज़ों से गेंदबाज़ी कराई जाती है. मोहित ने ये काम बख़ूबी किया.
2023 सीज़न से पहले हुई नीलामी में गुजरात टाइटंस ने मोहित को टीम में शामिल किया.
शुरुआती मैचों में मोहित को मौक़ा नही मिला. 13 अप्रैल को मोहाली में खेले गए मुक़ाबले में मोहित ने 18 रन देकर 2 विकेट लिए.
इस गेंदबाज़ी के लिए मोहित को मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार मिला.
22 अप्रैल को मोहित ने एक और उपलब्धि हासिल की.
लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी एकाना स्टेडियम की धीमी पिच पर गुजरात टाइटंस की टीम 135 रन बना सकी.
इस लक्ष्य का पीछा करते लखनऊ की टीम लड़खड़ा गई. आख़िरी ओवर में उन्हें 6 गेंद में 12 रन बनाने थे.
मोहित शर्मा ने केएल राहुल और मार्कस स्टॉइनस को आऊट कर मैच का रुख़ पलट दिया.
उस ओवर में सिर्फ़ चार रन बने और गुजरात ने शानदार जीत दर्ज की.
मोहित को फिर एक बार मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार मिला.
संदीप शर्मा

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आईपीएल के 16वें सीज़न से पहले हुई नीलामी में संदीप शर्मा का नाम आया, तब लगा टीमें उनके लिए बिड करेंगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
आईपीएल में 100 से ज़्यादा विकेट लेने वाले संदीप का अनुभव कारगर हो सकता था. संदीप निराश नही हुए.
राजस्थान रॉयल्स के तेज़ गेंदबाज़ प्रसिद्ध कृष्णा चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए.
राजस्थान ने बिना वक़्त गँवाए संदीप को अपनी टीम में शामिल कर लिया.
चेन्नई के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में संदीप ने करियर की सबसे अहम गेंद फेंकी.
चेन्नई को 176 रनों का लक्ष्य मिला था. मुक़ाबला ओवर तक गया. छह गेंदो में चेन्नई को 21 रनों की ज़रूरत थी.
चेन्नई के फ़ैंस को जीत की उम्मीद थी, क्योंकि पिच पर महेंद्र सिंह धोनी और रवींद्र जडेजा मौजूद थे.
संदीप की पहली गेंद वाइड थी. दूसरी गेंद भी वाइड हो गई. इससे संदीप पर दबाव बढा.
लेकिन तीसरी गेंद डॉट बॉल हो गई. धोनी जैसे फ़िनिशर के सामने संदीप ने यॉर्कर गेंद फेंकी.
दूसरी गेंद पर धोनी ने छक्का जड़ दिया. समीकरण 4 गेंदो में 13 हो गया. तीसरी गेंद पर धोनी ने एक और छक्का लगा दिया.
संदीप के लिए वापसी करना मुश्किल दिखाई दे रहा था. लेकिन चौथी गेंद पर संदीप ने धोनी को केवल सिंगल लेने दिया.
पाँचवीं गेंद पर जडेजा भी एक रन ही बना सके. आख़िरी गेंद पर चेन्नई को छह रनों की ज़रूरत थी. धोनी के लिए पूरा स्टेडियम नारे लगा रहा था.
एक छोटी सी ग़लती और धोनी गेंद को दर्शक दीर्घा में पहुँचा सकते थे. लेकिन संदीप ने अपनी यॉर्कर गेंद पर भरोसा किया.
धोनी ने गेंद को नीचे से खेलने की कोशिश की, लेकिन वे सिर्फ़ एक रन ले सके.
संदीप ने भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए आसमान की तरफ़ देखा. धोनी जैसे महान बल्लेबाज़ को जीतने से संदीप ने दूर रखा.
नीलामी में अनसोल्ड गए इस गेंदबाज़ ने उस मैच के अहम मोड़ पर अपनी ताक़त दिखाई.
पीयूष चावला

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34 वर्षीय पीयूष 2011 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा रह चुके है.
वे चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेल चुके हैं.
नीलामी में मुंबई इंडियंस ने पीयूष में रुचि दिखाई, तब कई लोगों को आश्चर्य हुआ था. लेकिन पीयूष की स्पिन अब भी बल्लेबाज़ों को सिरदर्द दे रही है.
22 अप्रैल को वानखेड़े स्टेडियम में हुए मुक़ाबले से इसका अंदाज़ा मिलता है.
पंजाब टीम ने बल्लेबाज़ी करते हुए 214 रन बनाए. सभी गेंदबाज़ों की पिटाई हुई सिवाय पीयूष चावला के.
उन्होंने तीन ओवरों में 15 रन देकर 2 विकेट झटके. उनसे चौथा ओवर न कराने का कप्तान रोहित शर्मा का फ़ैसला क्रिकेट प्रेमियों के लिए भ्रम में डालने वाला था.
पीयूष सिर्फ़ विकेट ले रहे है, ऐसा नहीं, बल्कि वे रन गति पर भी अंकुश लगाते हैं. मुंबई टीम के लिए ये सीज़न चुनौती भरा है.
प्रमुख गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं.
जोफ़्रा आर्चर भी अभी तक पूरी तरह से फ़िट नहीं हैं. गेंदबाज़ी में अनुभव की कमी खल रही है.
ऐसी परिस्थिति में पीयूष चावला टीम के लिए मज़बूत कड़ी बन गए हैं.
अमित मिश्रा

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आईपीएल में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में उनका नाम तीसरे स्थान पर है.
इस टूर्नामेंट में उनके नाम पर तीन हैट्रिक है. 40 साल के अमित मिश्रा आईपीएल में बड़ा नाम है.
लखनऊ सुपरजाएंट्स टीम ने उन्हें टीम में शामिल किया, तब काफ़ी लोग चकित रह गए थे.
लेकिन अमित मिश्रा ने अपने प्रदर्शन से समीक्षकों को करारा जवाब दिया है.
अमित मिश्रा लगातार अहम विकेट ले रहे हैं और रन देने में बेहद कंजूस हैं.
अमित मिश्रा के चार ओवर्स में बल्लेबाज़ बडे स्ट्रोक खेलने का रिस्क नहीं लेते.
उनके चार ओवर्स में प्रतिस्पर्धी टीम का रन बनाने का सिलसिला धीमा हो जाता है.
डेक्कन चार्जर्स, दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेल चुके अमित मिश्रा का अनुभव लखनऊ के लिए कारगर साबित हो रहा है.
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