अक्षर पटेल क्या बन सकते हैं भारत के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर

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- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी के चार टेस्ट मैचों में कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया.
सिरीज़ के अलग-अलग पड़ाव पर इन खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी - चाहे हम रोहित शर्मा, शुभमन गिल, विराट कोहली या ख्वाज़ा के शतकों की बात करें, या फिर अश्विन, जडेजा और लॉयन के मैच जिताऊ स्पेल्स को याद करें.
इन खिलाड़ियों ने कुछ ऐसी पारियां खेली या कुछ ऐसे बेहतरीन स्पेल्स फेंके और अपनी टीम को मैच जिता दिया. लेकिन क्या इन बल्लेबाज़ों या गेंदबाज़ों ने लगातार हर मैच में अच्छा प्रदर्शन किया?
अगर हम इस सिरीज़ में परफॉरमेंस की निरंतरता पर बात करें तो हमें इन स्टार खिलाड़ियों से निकलना होगा और उस खिलाड़ी पर नज़र डालनी होगी जिसने चाहे नागपुर का स्पिनिंग ट्रैक हो या फिर अहमदाबाद का बैटिंग फ़्रेंडली पिच - हर पारी में पूरे विश्वास और सकारात्मकता के साथ बैटिंग की और बड़े रन बनाए.
बोलिंग में भी उन्होंने एक एंड को थामे रखा और कुछ ज़रूरी विकेट्स भी निकाले. हम बात कर रहे हैं अक्षर पटेल की जो आठवें नबर पर बैटिंग करते हुए भी सिरीज़ के टॉप स्कोरर्स में शामिल रहे और बॉलिंग में कम अवसर मिलने पर भी उन्होंने अपना प्रभाव छोड़ा.
दरअसल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगभग आठ साल पहले डेब्यू करने वाले अक्षर पटेल आज तक ना तो टेस्ट या वनडे और ना ही टी20में अपनी जगह पक्की कर पाए हैं.
क्या सचमुच अक्षर पटेल एक फिल-इन प्लेयर है, जो किसी बड़े खिलाड़ी की गैर मौजूदगी में उनकी जगह टीम में आ जाते हैं या फिर सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट ने उनकी प्रतिभा के साथ पूरा इंसाफ़ नहीं किया है?
बैटिंग ऑर्डर में कीपर से पहले प्रमोट करने की ज़रूरत

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सबसे पहले इस सिरीज़ में अक्षर पटेल के प्रदर्शन पर नज़र डालते हैं. उन्हें इस सिरीज़ के चार टेस्ट में पांच पारियां खेलने का मौका मिला जिसमें उन्होंने 88 की औसत से 264 रन बनाए.
पांच पारियों में वो दो बार नॉट आउट रहे और उनका औसत इस सिरीज़ में सबसे बढ़िया रहा. ना तो ख्वाज़ा या फिर कोहली या रोहित के औसत उनके करीब पंहुच सके.
नागपुर में उन्होंने 84 रन बनाए जिसे गावस्कर और मार्क वॉ सहित दूसरे कमेंटेटर्स ने भी मैच जिताऊ पारी कहा. अगर पटेल उस मैच में जल्दी आउट हो जाते तो शायद भारत वो मैच हार जाता औऱ सिरीज़ के साथ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का नज़ारा भी अलग होता.
इसके अगले मैच में उन्होंने 74 रन की अहम पारी खेली. इन दोनों मैचों में भारत के लोअर ऑर्डर के बल्लेबाजों ने टॉप ऑर्डर से भी ज्यादा रन बनाए और इसमें सबसे बड़ी भूमिका अक्षर पटेल की पारियों की रही.
मत भूलिए कि पहले तीन टेस्ट मैचों में स्पिनिंग ट्रैक तैयार किए गए थे, जिन पर बैटिंग करना और रन बनाना बड़े-बड़े बल्लेबाजों के लिए मुश्किल रहा. इंदौर की पिच पर जहां भारत खराब बैटिंग की वजह से मैच हार गया वहां भी दोनों पारियों में अक्षर पटेल नॉट आउट रहे.
क्या उन्हें टीम मैनेजमेंट द्वारा बैटिंग ऑर्डर में ऊपर नहीं भेजा जाना चाहिए था, ये देखते हुए कि वो हर पारी में रन बना रहे हैं और पिच पर पहली गेंद से ही सबसे आश्वस्त बल्लेबाज़ दिखाई दे रहे हैं?
उनके मुकाबले श्रीकर भरत और केएल राहुल ने काफी कम रन बनाए. ऐसे में उन्हें प्रमोट ना करके मैनजमेंट ने एक ट्रिक मिस कर दिया. क्या पता इंदौर में वो कितने रन और बना लेते और वो मैच भी भारत जीत जाता?
ना सिर्फ उन्होंने इस सिरीज़ में सबसे ज्यादा औसत से रन बनाए बल्कि सबसे ज्यादा नौ छक्के भी उनके ही बल्ले से आए. ये दर्शाता है कि उन्होंने मौके के हिसाब से बैटिंग की और जब विकेट जल्दी गिरे तो संभल कर खेला और जब टीम को तेजी से रन बनाने की ज़रूरत महसूस हुई तो उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी.
अहमदाबाद टेस्ट में भी वो शतक से कुछ रनों से ही चूक गए लेकिन यहां भी उन्होंने चार छक्के लगाए और टीम के हित में स्कोरिंग रेट बढ़ाने की फिराक में ही आउट हुए.
क्या कप्तान को उनकी बोलिंग पर भरोसा नहीं है

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वैसे इस सिरीज़ में अगर पटेल की बोलिंग फिगर्स को देखें तो लगता है कि उन्होंने बहुत ज्यादा नहीं किया. दरअसल अक्षर पटेल की पहचान एक बोलिंग ऑलराउंडर के तौर पर है लेकिन इस सिरीज़ में उन्हें बैटिंग में ही मौके मिले क्योंकि टॉप ऑर्डर कुछ खास नहीं कर पाया. बॉलिंग में उन्हें कम ओवर दिए गए.
जब टीम में अश्विन और जडेजा की जोड़ी मौजूद हो तो तीसरे स्पिनर को कम ही मौका मिलता है.
उन्हें सबसे अच्छी सफलता अहमदाबाद में मिली क्योंकि यहां कप्तान ने उन्हें ज्यादा ओवर दिए क्योंकि दूसरे छोर पर विकेट नहीं आ रहे थे.
हालांकि ये कहना जल्दबाजी होगी लेकिन ऐसा प्रतीत हुआ मानो टीम मैनेजमेंट को उनकी बोलिंग पर कम भरोसा है और वो उम्मीद करते हैं कि विकेट लेने का काम अश्विन-जडेजा और सीमर्स पूरा कर लेंगे.
ये पूरी तरह से किसी प्रतिभा का कमतर उपयोग करना है और इससे टीम का कोई फायदा नहीं होगा. अच्छी बैटिंग की मदद ऑलराउंडर को बोलिंग में भी मिलती है, क्या पता ज्यादा ओवर्स देने की वजह से वो कुछ और विकेट ले जाते.
दूसरे ऑलराउंडर्स की तुलना में अक्षर कहां ठहरते हैं

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अक्षर पटेल ने 2014 में वनडे में डेब्यू किया. उन्होंने 2015 में पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेला और 2022 में इंगलैड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया.
उन्होंने 40 टी20आई में 37 विकेट लिए हैं और 288 रन बनाए हैं. वहीं वनडे में उन्होंने 49 मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 56 विकेट लिए औऱ 381 रन बनाए हैं.
उनका सबसे बढ़िया प्रदर्शन टेस्ट मैचों में रहा है जहां उन्होंने मौजूदा टेस्ट से पहले खेले गए 11 मैचों में 16.14 की औसत से 48 विकेट लिए हैं और 33.38 की औसत से 434 रन बनाए हैं.
अगर हम उनके प्रदर्शन को जडेजा या फिर अश्विन के ओवरऑल प्रदर्शन से तुलना करना चाहें तो औसत देखना ज़रूरी होगा क्योंकि मैच के नंबर में पटेल उन दोनों से काफी पीछे हैं.
टेस्ट मैच में अश्विन ने 23.97 की औसत से विकेट लिए हैं जबकि जडेजा ने 23.84 की औसत से विकेट लिए हैं. वहीं बैटिंग पर नज़र डाले तो पाएंगे कि टेस्ट में अश्विन का औसत 27.14 का है जबकि जडेजा ने 36 की औसत से रन बनाए हैं.
बल्लेबाज़ के तौर पर वो इन तीनों में अश्विन से ऊपर दूसरे नंबर का औसत लाते हैं, वहीं गेंदबाज़ी में वो तीसरे नंबर पर हैं. अगर उन्हें टेस्ट मैचों में और मौका दिया जाए तो कोई हैरानी नहीं होगी कि उनके नंबर में और ज्यादा सुधार होगा.
वैसे अगर कप्तान रोहित शर्मा की बात करे तो वो इस सिचुएशन से परेशान नहीं होंगे. ये दरअसल 'प्रॉब्लम ऑफ़ प्लेंटी' है जिसमें उन्हें ज्यादातर मैचों में तीन में से दो को चुनना होगा.
लेकिन अगर पटेल इसी तरह शानदार बैटिंग करते रहे तो शायद वो टीम में एक दिन बतौर बल्लेबाज़ भी जगह बना लेंगे. उन्हें ज़रूरत है तो बस लगातार मौका दिए जाने की.
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