रोहित शर्मा की टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ की ये ग़लतियाँ

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
भारत और ऑस्ट्रेलिया: तीसरा टेस्ट, इंदौर
भारत: 109 और 163
ऑस्ट्रेलिया: 197 और 78/1
नतीजा: ऑस्ट्रेलिया नौ विकेट से जीता
भारत टेस्ट सिरीज़ में 2-1 से आगे
आखिरकार, इंदौर टेस्ट में नतीजा वही आया, जिस बात का डर था.
स्पिन गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलिया को पहले दो मैचों में बेबस करने वाली टीम इंडिया ने सोचा कि फिर से ज़रूरत से ज़्यादा मददगार स्पिन पिच पर खेलने का जुआ सफल होगा.
लेकिन कई बार ये होता है कि हर बाज़ी एक ही टीम नहीं जीतती है.
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में तीसरा टेस्ट हारते ही अब भारत के लिए फिर से अपनी पुरानी रणनीति पर पुनर्विचार करने का वक़्त आ गया है.
सबसे पहला सवाल ये है कि क्या अब भी भारत को एक अच्छी टीम के ख़िलाफ़ टेस्ट जीतने के लिए पिचों पर इतना ज़्यादा निर्भर रहने की ज़रूरत है?
अगर टीम इंडिया अहम खिलाड़ियों की ग़ैर-मौजूदगी के बावजूद ऑस्ट्रेलिया को उसी की ज़मीन पर पिछले चार साल में एक नहीं बल्कि दो बार हरा सकती है, तो फिर कंगारुओं से ऐसा भय क्यों?
पहली गेंद से ही स्पिनर को मदद मिलने वाली पिचों की रणनीति शायद उस बल्लेबाज़ी क्रम के लिए सही होता होगा, जिसमें वीरेंदर सहवाग, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण जैसे स्पिन के धुरंधर थे.
लेकिन, मौजूदा भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम स्पिन के ख़िलाफ़ वैसी दक्षता नहीं रखता है. 1978 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब टीम इंडिया घरेलू टेस्ट की दोनों पारियों में 200 का आँकड़ा पार करने में नाकाम रही.
विराट कोहली जब अपने प्रभुत्व के दौर में थे, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे का डंका भी ख़ूब बज रहा था, तब भी स्पिन-पिचों पर किसी भी तरीक़े से विरोधी को मात देने वाली रणनीति कामयाब हो जाती थी.
2016 और 2017 में टीम इंडिया ने घर पर 16 टेस्ट खेले और टॉप 5 बल्लेबाज़ों का औसत स्पिन के ख़िलाफ़ के करीब 60 (58.20) का था.
लेकिन, 2021 से लेकर अब तक 11 घरेलू मैचों में टॉप 5 बल्लेबाज़ों का औसत स्पिन के ख़िलाफ़ तुलनात्मक लिहाज से आधा से भी कम (26.13) का हो जाता है.
क्या भारत ने लिया जोख़िम?

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अगर इसमें आप ये भी जोड़ दें कि आपके पास ऋषभ पंत जैसा धुरंधर बल्लेबाज़ नहीं, जो कई मौक़ों पर टीम की नैय्या पार कर दिया करता था.
पंत के बदले फ़िलहाल मौजूदा टीम में के एस भारत खेल रहे हैं, जिनकी कीपिंग भले ही ठीक है लेकिन पंत की कमी काफ़ी खल रही है.
क्योंकि जब विरोधी टीम के गेंदबाज़ पूरी तरह हावी हों तो पंत की 'काउंटर अटैक' करने की रणनीति की दरकार होती है. दूसरी पारी में श्रेयस अय्यर ने इसी रणनीति पर चलने की कोशिश की, लेकिन वो अपनी पारी को 30 रनों तक भी नहीं ले जा पाए.
स्पिन के ख़िलाफ़ पंत का ना सिर्फ़ औसत (77.16) सबसे शानदार रहा है, बल्कि वो 100 (100.87) से ज़्य़ादा की स्ट्राइक रेट से भी रन बनाते थे.
इन सारी बातों से अवगत होने के बावजूद राहुल द्रविड़ जैसे कोच ने ऐसा जोखिम क्यों लिया?
ये सही है कि भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुचने के लिए कम से कम 3 मैच जीतने ज़रूरी थे, लेकिन पहले दो मैच में जीत हासिल करने के बाद और 2-0 की अपराजेय बढ़त लेने के बाद फिर से इंदौर की पिच पर वही जुआ खेलना शायद मुनासिब नहीं था.
समस्या

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आख़िरी लम्हों में सिरीज़ का तीसरा टेस्ट धर्मशाला की बजाए इंदौर पहुँचा और कोच द्रविड़ नेट्स सत्र में खिलाडियों के साथ वक़्त बिताने की बजाय ज़्यादा समय पिच क्यूरेटर के साथ बिताते दिखे.
द्रविड़ जिन्हें हमेशा से ही टेस्ट क्रिकेट की शानदार परंपरा और विरासत का ख़्याल रखने वाले एक महान प्रवक्ता के तौर पर देखा जाता रहा है, वो आख़िर किस तरीक़े से इस बात का बचाव करेंगे कि भारत में टेस्ट मैच के नतीजे पिछले एक साल में अमूमन तीसरे दिन ही तय हो जाते हैं.
गेंदबाज़ी के लिहाज़ से अब भी भारत के लिए चिंता की बात नहीं है, क्योंकि रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की जोड़ी ने 2017 के बाद सिर्फ़ दूसरी बार एक साथ भारत में खेलते हुए हार का सामना किया.
लेकिन, बल्लेबाज़ी के फ़्रंट पर टीम इंडिया के सामने कई मुश्किल सवाल खड़े हैं. क्या विकेटकीपर भरत की जगह ईशान किशन को आख़िरी मैच में मौक़ा मिलना चाहिए, जो पंत की तरह ही स्पिन के ख़िलाफ़ तूफानी पारी खेलने का माद्दा रखते हैं?
कोहली को लेकर सवाल

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टीम के दिग्गज बल्लेबाज़ विराट कोहली के शतकों का सूखा आख़िर कब ख़त्म होगा?
कोहली को टेस्ट क्रिकेट में शतक बनाए 41 पारियाँ बीत चुकी हैं और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज को अपने करियर के सिर्फ़ आख़िरी दौर में ही ऐसे सूखे से गुज़रना पड़ा था.
तेंदुलकर ने अपनी आख़िरी 40 पारियों में कोई शतक नहीं बनाया था. इतना ही नहीं अगर कोहली के समकालीन स्टीव स्मिथ (30 शतक) और जो रूट (29 शतक) पर नज़र डालें, तो वो शतकों के मामले में उन्हें पछाड़ चुके हैं.
इस रेस में सबसे पीछे रहने वाले केन विलियम्सन भी कोहली से सिर्फ़ एक क़दम ही पीछे हैं. कोहली के 27 जबकि विलियम्सन के 26 शतक हैं.
बचाव

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कप्तान रोहित शर्मा ने हार के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पिच को लेकर टीम मैनेजमेंट की रणनीति का बचाव किया.
उन्होंने दलील दी कि पाकिस्तान पिचों पर टेस्ट क्रिकेट बोरिंग होने की आलोचना हो रही थी और साउथ अफ्रीका-वेस्टइंडीज़ का मैच भी तीन दिन में ही ख़त्म हो गया.
टीम इंडिया शायद अब भी अहमदाबाद में आख़िरी मैच जीतकर सिरीज़ 3-1 से जीत ले और वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फ़ाइनल में पहुँच जाए, लेकिन जीत के लिए हर हाल में टर्निंग ट्रैक पर ही अपने सारे दांव लगाना शायद सही नहीं हो.
क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने इंदौर टेस्ट जीतकर ये साबित कर दिया है कि अगर अहमदाबाद में भी ऐसी पिचें मिलें, तो पलटवार वो भी कर सकते हैं और सिरीज़ 2-2 से बराबर कर सकते हैं.
यही बात और सोच टीम इंडिया और कप्तान-कोच को रणनीति के मोर्चे पर थोड़ा और मजबूर कर सकता है.
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