दक्षिण अफ़्रीका वनडे सिरीज़: ये साबित हुए भारत के हीरो

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- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
भारत ने दक्षिण अफ़्रीका को आखिरी वनडे मैच में 78 रनों से हराकर 3 मैचों की सिरीज़ 2-1 से जीत ली.
पार्ल में खेले गए तीसरे मैच में भारत ने पहले बल्लेबाज़ी की और संजू सैमसन के कलात्मक शतक की मदद से 296 रन बनाए.
जवाब में साउथ अफ्रीका की पारी 46वें ओवर में 218 रन पर ही सिमट गई.
अर्शदीप सिंह के चार और आवेश खान-वॉशिंगटन सुंदर के 2-2 विकेट ने घरेलू टीम को बैटिंग की लय में आने का मौका ही नहीं दिया और इस तरह भारतीय टीम मैच आसानी से जीत गई.
युवा खिलाड़ियों से लैस भारतीय टीम ने इस सिरीज़ में कुछ अहम सफलताएं हासिल की, जबकि कुछ खिलाड़ियों ने निराश भी किया.
संजू सैमसन का इंतज़ार हुआ ख़त्म

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संजू सैमसन ने भारत के लिए पहला मैच आठ साल पहले खेला था. तब से लेकर पार्ल से पहले उन्होंने सिर्फ 15 मैच खेले, जिनमें उन्होंने 402 रन बनाए.
उनकी प्रतिभा पर किसी को शक नहीं था लेकिन वो अपनी पारी की बढ़िया शुरुआत के बाद भी जिस आसानी से विकेट गंवा देते थे, उससे टीम मैनेजमेंट और फ़ैंस भी काफ़ी दुखी रहते थे. लेकिन पार्ल में उन्होंने करियर को पलट देने वाली पारी खेली और सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
पूर्व क्रिकेटर और मशहूर कमेंटेर संजय मांजरेकर ने एक शो में क्रिकइन्फ़ो से कहा, "संजू सैमसन पांचवें ओवर में बल्लेबाज़ी करने आए और लगभग 43वें ओवर में उन्होंने शतक पूरा किया. वो टीम की ज़रूरत के हिसाब से बैटिंग कर रहे थे."
अगर संजू सैमसन 80 बॉल पर शतक लगाते तो मैं कहता बहुत बढ़िया, लेकिन ये उससे भी अच्छी पारी थी. उन्होंने दिखाया कि टैलेंट तो उनके पास है ही, टेंपरामेंट में भी वो बहुत मज़बूत हो गए हैं.
"अगर वो 80 बॉल पर शतक लगाते तो मैं कहता बहुत बढ़िया, लेकिन ये उससे भी अच्छी पारी थी. उन्होंने दिखाया कि टैलेंट तो उनके पास है ही, टेंपरामेंट में भी वो बहुत मज़बूत हो गए हैं.”
भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने भी संजू की बैटिंग की तारीफ़ की.
उन्होंने स्टार स्पोर्ट्स को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा, "ये शतक उनका करियर बदल देगा. हम जानते थे उनकी जगह भारतीय टीम में है."
"हम सब को पता था कि उनका टैलेंट क्या है लेकिन उन्होंने उस उम्मीद को कभी पूरा नहीं किया. आज उन्होंने वो कर दिखाया, ना सिर्फ अपनी टीम के लिए बल्कि खुद अपने लिए भी."
नंबर 3 पर मिलेगी बैटिंग?

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सैमसन ने इससे पहले 15 वनडे मैच खेले जिनमें उन्होंने 50 की औसत से रन बनाए है. 15 में से दस मैचों में उन्हें 5वें या छठे नंबर पर बैटिंग मिली, जहां अकसर मैच या पारी फिनिश करने का रोल मिलता है.
संजू नीचे भी बल्लेबाज़ी कर सकते हैं पर घरेलू क्रिकेट में उनकी फ़ेवरिट पोज़िशन 3 नंबर पर है जहां उन्होंने ज़्यादातर पारियां खेली हैं.
तीसरे वनडे में सैमसन के लिए एक अच्छी बात रही कि उन्हें नंबर तीन पर बैटिंग करने का मौका मिला. वो पांचवे ओवर में बल्लेबाज़ी करने आए और संभल कर खेले.
आमतौर पर तेज़ी से शुरुआत करने वाले सैमसन ने बांउड्रीज़ लगाने की जल्दी नहीं दिखाई और उनके पहले तीन चौके जो निकले वो, परफेक्ट टाइम किए हुए शॉट्स थे जिनमें पावर ना के बराबर था. उन्होंने केएल राहुल और बाद में तिलक वर्मा के साथ अच्छी साझेदारी निभाई और कंडीशंस के हिसाब से खेलते हुए 114 बॉल पर 108 नाबाद रन बनाए.
सैमसन ने बाद में प्लेयर ऑफ़ द मैच का खिताब लेते हुए कहा कि वनडे फॉर्मेट बल्लेबाज़ों को सोचने का मौका देता है और वो चाहते थे कि संभल कर खेला जाए.
नंबर तीन पर उन्होंने शतक तो लगा दिया लेकिन इस जगह पर लगातार बैटिंग मिलना मुश्किल हो सकता है क्योंकि भारतीय टीम में 1, 2 और 3 पर पहले से स्थापित खिलाड़ी मौजूद हैं.
संजू को जिस स्थान पर भी मौका मिले, उन्हें उसके मुताबिक ही खेलना होगा.
अर्शदीप ने दिल जीत लिया

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इस सिरीज़ में भारतीय टीम के लिए दूसरी बड़ी सफलता अर्शदीप सिंह की रही. 3 मैचों में अर्शदीप ने सर्वाधिक 10 विकेट लिए.
पहले मैच में जहां उन्होंने पांच विकेट हासिल किए, वहीं तीसरे मैच में उन्होंने 4 विकेट झटके. सिरीज़ से पहले आत्मविश्वास में कमी महसूस करने वाले अर्शदीप ने खोया विश्वास पा लिया और बेहतरीन स्विंग गेंदबाज़ी का प्रदर्शन किया.
संजय मांजरेकर मानते हैं कि अर्शदीप की बॉलिंग भारतीय टीम के लिए सैमसन की बैटिंग से भी बेहतर बात रही.
उन्होंने कहा, "अर्शदीप ने सिरीज़ में लगातार विकेट लिए. तीसरे मैच में भी उन्होंने फ़ॉर्म में चल रहे जॉर्ज़ी को आउट किया फिर एक और बल्लेबाज को डिफेंसिव शॉट खेलते हुए आउट किया. जिस तरह वो लगातार ब्रेक दिलवा रहे थे उसने भी भारतीय टीम को ये मैच जिताया."
सुदर्शन और तिलक वर्मा की बल्लेबाज़ी

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वर्ल्ड कप के तुरंत बाद खेले गए इस सिरीज़ में भारत ने कई सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिया और इसी बहाने युवा प्रतिभाओं को साउथ अफ़्रीका की मुश्किल कंडीशंस में खेलने का मौका मिला.
इस सिरीज़ में दो और युवा भारतीय बल्लेबाज़ों ने प्रभावित किया और जो भी मौके उन्हें मिले उसका भरपूर फायदा उठाया. पहले दो वनडे में साई सुदर्शन ने दो अर्धशतक लगाए और अपनी परिपक्वता का परिचय दिया.
पहले मैच में वो 55 पर नॉट आउट रहे जबकि दूसरे मैच में उन्होंने 62 रन बनाए. सुदर्शन ने इस सिरीज़ में भारत के लिए सर्वाधिक 127 रन बनाए.
वहीं तिलक वर्मा ने आखिरी वनडे में अपना टेलेंट दिखाया जिसमें उन्होंने सैमसन के साथ बेहतरीन पार्टनरशिप निभाई और मैच जिताने वाली 52 रनों की पारी खेली.
इन दोनों ने अपनी बैटिंग से सिलेक्टर्स को संदेश दिया है कि आने वाले समय में जब भारत के कुछ दिग्गज क्रिकेटर्स खेल को अलविदा कहेंगे तो टीम में उनकी जगह सुदर्शन और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी ही लेंगे.
कुछ निराशाएं

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इस सिरीज़ में कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने मिले मौके को ज़ाया भी किया और फ़ैंस को निराश किया. ऋतुराज गायकवाड़ को दो मौके मिले लेकिन वो कुछ खास नहीं कर पाए.
दो पारियों में उन्होंने सिर्फ 9 रन जोड़े और जिस अंदाज़ में वो लगातार आउट हुए उसने उनकी बैटिंग में एक कमज़ोरी भी दर्शा दी. तीसरे मैच में उनकी जगह रजत पाटीदार को ओपन करने का मौका मिला और उन्होंने 22 रन बनाए..
वहीं टीम के दो सीनियर बल्लेबाज़ों की बात करे तो अपने कद और मौजूदा फॉर्म के हिसाब से कप्तान केएल राहुल और श्रेयस अय्यर के लिए भी ये वनडे सिरीज़ औसत ही रही.
दोनों ने सिर्फ 1-1 अर्धशतक लगाया और उनके खाते में एक भी शतक नहीं आया. वहीं अगर बॉलिंग पर नज़र डाले तो टी20 में तो मुकेश कुमार ने इंप्रेस किया लेकिन वनडे में वो कुछ खास नहीं कर पाए.
तीन पारियों में उन्होंने 148 रन खर्च कर सिर्फ एक विकेट लिया और हर ओवर 6.16 रन भी खर्च किए. ज़ाहिर है उनका लर्निंग कर्व अभी और उंचा जाएगा और इस कठिन सिरीज़ से उन्होंने बहुत कुछ सीखा होगा.
बैटिंग और बॉलिंग दोनों के लिहाज़ से टीम के एक और अनुभवी ऑलराउंडर अक्षर पटेल के लिए भी ये सिरीज़ भुला देने वाला ही रहा.
टी20 और वनडे के बाद अब भारतीय टीम दो मैचों की टेस्ट सिरीज़ खेलेगी. दक्षिण अफ्रीका में सिरीज़ जीतना हमेशा से कठिन रहा है और यहां एक बार फिर भारतीय टीम की कठिन परीक्षा होगी.
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