साक्षी मलिक बनाम बृज भूषण शरण सिंह: महिला खिलाड़ियों पर क्या हुआ असर?

साक्षी मलिक

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महिला पहलवानों की दो तस्वीरें– साल की शुरुआत में सीना चौड़ा कर बुलंद हौसलों के साथ यौन शोषण की शिकायत सामने लाने के लिए सड़क पर उतरीं, और साल के अंत में कुश्ती महासंघ के चुनाव परिणाम आने के बाद न्याय की नाउम्मीदी जताते हुए फूटफूट कर रोतीं.

ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने पहलवानी छोड़ने का एलान तक कर दिया.

महिला पहलवानों की इस हार, और यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और उनकी क़रीबी व नए अध्यक्ष संजय सिंह की जीत के इस पल का कुश्ती और खेल जगत की महिलाओं पर असर अभी से दिखने लगा है.

खेल जगत में यौन उत्पीड़न के मामलों की खुलकर चर्चा पहले भी नहीं होती थी और आने वाले समय में ये और मुश्किल हो जाएगी.

हालांकि, केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया था कि जनवरी 2017 से जुलाई 2022 के बीच भारतीय खेल प्राधिकरण को कोच और स्टाफ़ के ख़िलाफ़ यौन शोषण की 30 शिकायतें मिली थीं.

आंकड़े

महिला पहलवानों की बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ़ शिकायत की दिल्ली की अदालत में सुनवाई अभी जारी है और फैसला ही सच और झूठ साबित करेगा.

जून में पुलिस चार्जशीट दायर होने के बाद केस में लगातार सुनवाई चल रही थी लेकिन बीते गुरुवार को इस केस के जज की पद्दोन्नति होने के बाद इसे एक दूसरे जज को ट्रांसफर कर दिया गया जो अब नए सिरे से जनवरी में इसकी सुनवाई शुरू करेंगी.

लेकिन अब तक के घटनाक्रम से कुश्ती ही नहीं, खेल की दुनिया का महिलाओं के लिए असुरक्षित होने का डर पुख़्ता होता दिखता है.

कई कोच और मां-बाप के हवाले से ये ज़ाहिर हो रहा है कि लड़कियों को खिलाड़ी बनाने के उनके इरादे कमज़ोर होने लगे हैं.

साथ ही ये भी साफ हुआ है कि खेल को चलाने वाले संघों में तानाशाही को चुनौती देना बहुत मुश्किल है.

संघ पर एक व्यक्ति का नियंत्रण

बृजभूषण शरण सिंह

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महिला पहलवानों ने यौन शोषण के आरोप के साथ-साथ संघ में एक व्यक्ति के दबदबे का मुद्दा भी उठाया था और सरकार के आश्वासन के बाद ही प्रदर्शन का रास्ता छोड़ा था.

पहलवानों के मुताबिक सरकार ने ये माना था कि बृजभूषण शरण सिंह के किसी भी रिश्तेदार या सहयोगी को कुश्ती महासंघ का अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा.

बृजभूषण, जो भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं, चाहे कुश्ती संघ से हट गए हैं लेकिन चुनाव जीतने वाले उनके सहयोगी और उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष संजय सिंह हैं, जिनके ज़रिए संघ में बृजभूषण का दबदबा कायम रहेगा. गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में विनेश ने यही दावा भी किया.

चुनाव जीतने के बाद जब बृजभूषण के घर यह नारे लगाए गए कि, "संजय भैया क्या ले के चले, बृजभूषण की खड़ाऊ ले के चले", तो स्पष्ट था कि चाहे नए चेहरे कुश्ती संघ में आ गए हों लेकिन बृजभूषण की फेडरेशन पर पकड़ उतनी ही रहेगी जितनी पहले थी.

इस महीने के अंत में अंडर-15 और अंडर-20 नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन गोंडा में होगा. बृजभूषण शरण सिंह गोंडा के ही रहने वाले हैं. वे दो बार वहां से सांसद रह चुके हैं.

महिला पहलवानों का भविष्य

साक्षी मलिक

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पहलवानों की एक और मांग थी कि कुश्ती महासंघ की अध्यक्ष और पैनल के सदस्यों में महिलाएं हों लेकिन चुनाव जीतने वाले 15 सदस्यों में एक भी महिला नहीं है.

संघ के सामने अब एक बड़ा प्रश्न ये है कि वो महिला पहलवानों का विश्वास कैसे जीतेंगे? उन्हें कैसे यकीन दिलाएंगे कि ये खेल उनके लिए सुरक्षित है और वो बेझिझक अपनी बात कह सकती हैं.

बृजभूषण शरण सिंह ने चुनाव के बाद यह बात कही है कि उनकी जीत के बावजूद, उनके विरोधी पहलवानों को बदले की राजनीति का सामना नहीं करना पड़ेगा.

बजरंग और विनेश ने ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं नहीं खेलीं लेकिन पेरिस ओलंपिक में खेलने और पदक हासिल करने की उनकी तमन्ना अवश्य है.

अब देखना यह होगा कि वो अपना करियर जारी रखते हैं या साक्षी मालिक की तरह कुश्ती को अलविदा कह देते हैं.

विनेश फोगाट

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विनेश 53 किलोग्राम के वज़न में कुश्ती करती हैं और इस भार में 20 वर्षीय अंतिम पंघाल ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पैरिस ओलंपिक्स के लिए पहले ही कोटा हासिल कर लिया है.

मई में भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा कुश्ती महासंघ का काम चलाने के लिए बनाए गए ऐडहॉक पैनल ने नीति बनाई थी कि कोटा जीतने वाले पहलवान ही ओलंपिक में भाग लें यह जरूरी नहीं है और कोटा जीतने वाले पहलवान को एक और ट्रायल के ज़रिये अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करनी होगी.

संभव है कि नया कुश्ती संघ अंतिम पंघाल को ही पेरिस भेजे और अगर ऐसा हुआ तो विनेश का ओलंपिक पदक हासिल करने का सपना, सपना ही रह जाएगा.

ऐसे में विनेश के सामने केवल दो ही विकल्प हैं या तो वो फिर से 50 किलोग्राम के भार वर्ग में लौट जाएं या वज़न बढ़ा कर 57 किलोग्राम भार वर्ग में कोटा हासिल करें.

बजरंग पुनिया अगर कुश्ती जारी रखते हैं तो उन्हें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि 65 किलोग्राम में किसी भारतीय पहलवान ने अभी तक 2024 के पेरिस ओलिम्पिक के लिए क्वॉलिफाई नहीं किया है.

हैरान करने वाला वोटिंग पैटर्न

अनीता श्योराण

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साल 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता अनीता श्योराण, अध्यक्ष पद के चुनाव में केवल सात मत ही हासिल कर पांई जबकि संजय सिंह को 50 में से 40 मत मिले.

हैरानी की बात यह है कि अगर संजय सिंह के पक्ष में 40 मतदाता थे तो उन्हीं के पैनल के उम्मीदवार वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सचिव पद का चुनाव कैसे हार गए.

प्रेमचंद लोचब और देवेंदर कादियां, जो अनीता के पैनल के थे, वे आसानी से जीते.

इस वजह से कई जानकार ये कयास लगा रहे हैं कि विरोधी पक्ष को दो सीटें मिलने के पीछे किसी तरह का दबाव था, वरना इन उम्मीदवारों का जीतना नामुमकिन था.

इसके बावजूद 15 में से 13 पद बृजभूषण के पक्ष के ही चुने गए हैं इसलिए आने वाले समय में नीतियां बनाने या तदर्थ समिति द्वारा लिए गए निर्णयों को बदलने में संजय सिंह को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

नए कुश्ती संघ के सामने चुनौतियां

बृजभूषण शरण सिंह और उनके साथ खड़े हुए संजय सिंह जिन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की है

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पिछले 11 महीने में देश के कुश्ती के खिलाड़ियों और प्रशंसकों, दोनों को काफी नुकसान हुआ है, और बड़े खिलाड़ियों पर विश्वास कुछ कम हुआ है.

इन खिलाड़ियों को बिना ट्रायल के एशियाई खेलों में भेजे जाने से बाकी कई पहलवानों में रोष है.

कुश्ती संघ के सामने पहली चुनौती है खिलाड़ियों का विश्वास जीत कर उन्हें ये एहसास दिलाना कि अब किसी के साथ पक्षपात नहीं किया जायेगा.

यह भी ज़रूरी होगा कि संघ को पेशेवर तरीके से चलाया जाए. संघ ने पिछली बार कॉन्ट्रैक्ट दिए थे लेकिन उन सभी को निभाया नहीं था. अब अगर संघ फिर से कॉन्ट्रैक्ट ऑफर करता है तो उसे पेशेवर तरीके से उन्हें निभाना होगा.

प्रतियोगिता के दौरान प्रैक्टिस मैट, एरीना, और अन्य बुनियादी जरूरतों समेत खिलाड़ियों की सभी सुविधाओं का ख़ास ध्यान रखा जाना होगा.

सबसे अहम, संघ को महिला नुमाइंदों का चयन कर उन्हें ज़िम्मेदार ओहदा देना होगा ताकि वो खिलाड़ियों और संघ के बीच की कड़ी बनें और कुश्ती में आई सुरक्षा की चुनौती का बेहतर सामना कर सकें.

(वरिष्ठ पत्रकार अमनप्रीत सिंह से बातचीत पर आधारित)

वीडियो कैप्शन, संजय सिंह भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष चुने गए, साक्षी मलिक ने छोड़ी कुश्ती

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