बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में क्या-क्या है?

बृजभूषण सिंह

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भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर लगे यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस ने राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दायर की है.

कोर्ट में दायर चार्जशीट में उनके ख़िलाफ़ तीन धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं.

वहीं दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट का मामला रद्द करने की भी सिफ़ारिश की है.

पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ पॉक्सो के मामले में कोई सबूत नहीं मिले हैं.

बीते कई सप्ताह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया जैसे देश के जाने-माने पहलवानों ने बीजेपी सांसद और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.

पहलवानों ने उनके ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी.

सात जून को पहलवानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाक़ात की थी. इसके बाद पहलवानों ने कहा कि सरकार ने कहा है कि 15 जून तक दिल्ली पुलिस इस मामले में चार्जशीट दायर करेगी, तब तक वो अपना विरोध स्थगित करने के लिए तैयार हैं.

मुलाक़ात में सरकार ने पहलवानों से 15 जून तक बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ़ जांच पूरी करने का समय मांगा था.

चार्जशीट में कौन-सी धाराएं लगाई गई हैं?

पटियाला हाउस कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ लगे पॉक्सो के आरोप रद्द करने की सिफ़ारिश की है.

पुलिस का कहना है कि विस्तृत जांच में नाबालिग़ लड़की के लगाए आरोप "साबित करने के लिए "कोई पुष्ट सबूत" नहीं मिले हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ दिल्ली पुलिस ने पॉक्सो केस रद्द करने की सिफ़ारिश लड़की के पिता के बयान के आधार पर पेश है.

पॉक्सो से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी.

कहा जा रहा है कि पॉक्सो के तहत लगे आरोप हटाए जाते हैं तो यह बृजभूषण सिंह के लिए बड़ी राहत होगी.

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सरकारी वकील के अनुसार, राउज़ कोर्ट एवेन्यू में दी गई चार्जशीट के बारे में वरिष्ठ सरकारी अधिवक्ता ने कहा है कि राउज़ एवेन्यू कोर्ट में बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ दायर की गई पहली चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354-ए और 354-डी के तहत आरोप लगाए गए हैं.

राउज़ कोर्ट एवेन्यू में पूर्व और मौजूदा सासदों और विधायकों के ख़िलाफ़ मामलों की सुनवाई होती है.

इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख़ 22 जून तय की गई है.

वहीं इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मामले में एक और अभियुक्त विनोद तोमर के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 , 354-ए, 354-डी और 506(1) के तहत आरोप लगाए गए हैं.

सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि मामले में दो लोगों को अभियुक्त बनाया गया है.

अब पटियाला कोर्ट पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ये तय करेगी कि उन्हें पॉक्सो हटाने की उसकी सिफ़ारिश माननी चाहिए या नहीं.

इन धाराओं में कितनी सज़ा का प्रावधान

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  • धारा 354 : स्त्री की शालीनता को ठेस पहुंचाने के इरादे से उसपर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग. एक से पांच वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान.
  • धारा 354 ए: यौन उत्पीड़न. तीन साल तक की सज़ा संभव
  • धारा 354 डी: पीछा करना. पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सज़ा संभव
  • धारा 506(1): आपराधिक धमकी. दो साल तक की सज़ा का प्रावधान

ये सभी ऐसे अपराध हैं जिनमें पुलिस अभियुक्त को बिना वारंट के गिरफ़्तार कर सकती है लेकिन इन सभी मामलों में ज़मानत अभियुक्त का अधिकार है.

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बृजभूषण सिंह के वकील ने क्या कहा?

महिला पहलवान

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बृजभूषण शरण सिंह के वकील एपी सिंह ने बीबीसी से कहा कि उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ "राजनीतिक साज़िश" की जा रही है और वो बेगुनाह हैं.

उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस को उनके ख़िलाफ़ पॉक्सो मामले में कोई सबूत नहीं मिले हैं इसलिए उन्होंने मामला रद्द करने की सिफारिश की है. न्यायपालिका पर हमारे भरोसा है. सच सामने आ जाएगा और वो इस मामले में बेगुनाह साबित होंगे."

12 साल तक भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और छह बार से सासंद चुने जा रहे बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ एक महीने पहले पुलिस ने 'पहलवानों के शोषण' के मामले में एफ़आईआर दर्ज की.

उन पर पुलिस शिकायत में महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के साथ-साथ एक नाबालिग़ पहलवान के ख़िलाफ़ यौन हिंसा का आरोप भी शामिल है.

हालांकि बृजभूषण सिंह खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है.

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