संजय सिंह: कौन हैं बृजभूषण के करीबी कहे जाने वाले कुश्ती महासंघ के नए अध्यक्ष
- संजय सिंह चुने गए कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष
- उनके ख़िलाफ़ चुनाव में उतरी थीं अनिता श्योराण ने कहा इंसाफ़ के लिए लड़ाई जारी रहेगी
- पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाते हैं नए अध्यक्ष संजय सिंह
- संजय सिंह और बृजभूषण सिंह के बीच संबंधों पर पढ़िए बीबीसी हिंदी का लेख
- ये लेख पहली बार 11 अगस्त 2023 में छपा था
- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

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भारतीय कुश्ती महासंघ के सर्वोच्च पद के चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह के बेहद क़रीबी और वफ़ादार माने जाने वाले संजय सिंह ने चुनाव जीत लिया है.
संजय सिंह के बारे में जानने से पहले बृजभूषण शरण सिंह के कुश्ती महासंघ के चुनाव से जुड़े इस बयान गौर करिए.
बृजभूषण शरण सिंह ने संजय सिंह के बारे में कहा था, "वाराणसी से हैं, मोदी जी के क्षेत्र से हैं. उनको हमने अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया है."
संघ की चुनाव प्रक्रिया के बारे में बृजभूषण ने कहा था, "कुश्ती संघ के चुनाव में, पूरे देश में मौजूदा समय में 25 इकाइयां हैं. 25 राज्य हैं और हर इकाई के दो वोट होते हैं. और 20 राज्य हमारे साथ हैं. अगर कहें तो एक तरफ़ा. उधर (विपक्ष में) केवल तीन राज्य हैं. दो राज्य अभी ढुलमुल नीति पर हैं तो, 20 हमारे पास हैं और पांच बाहर हैं. तो आप सोच सकते हैं कि जीत किसकी होगी."
संजय सिंह: "हम मोदी जी के क्षेत्र के वोटर हैं"

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अपने बारे में बीबीसी से संजय सिंह सबसे पहले यह बताते हैं कि वो बनारस के, प्रधानमंत्री मोदी के लोकसभा क्षेत्र के रहने वाले है. वो कहते हैं, "हम मोदी जी के क्षेत्र के ही वोटर हैं. लेकिन भाजपा पार्टी से नहीं जुड़े हैं."
वैसे संजय सिंह मूलतः बनारस के पास राजनाथ सिंह के क्षेत्र चंदौली से हैं और अपने आप को वहां का एक बड़ा काश्तकार बताते हैं और उनका खेती किसानी से जुड़ा व्यवसाय भी है.
संजय सिंह बताते हैं कि वो कुश्ती संघ से 2010 से जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश के कुश्ती संघ और राष्ट्रीय कुश्ती संघ दोनों में वो पदाधिकारी रहे हैं.
वो कहते हैं , "बृजभूषण शरण सिंह और हमारे पारिवारिक ताल्लुकात हैं और हम लोग पिछले तीन दशक से एक दूसरे के क़रीबी हैं."
बृजभूषण शरण सिंह पर लगाए गए महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों के बारे में वो कहते हैं, "यह आरोप निराधार हैं और कुश्ती संघ से उन्हें हटाने की साज़िश थी."
आरोपों और दिल्ली पुलिस की जांच के बावजूद बृजभूषण की तारीफ़ करते हुए संजय सिंह ने कहा, "कुश्ती के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है. कुश्ती कहाँ थी और उसे कहाँ तक वो ले गए. जो बिना ट्रायल से जाना चाहते थे उन्हें यह अच्छा नहीं लगता था. जो नियम क़ानून को तोड़ना चाहते थे उन्होंने ही यह सब साज़िश रची. अब कोर्ट अपना फ़ैसला लेगा."
पूर्व पहलवान अनिता श्योराण की उम्मीदवारी के बारे में संजय सिंह कहते हैं, "वो सांसद जी (बृजभूषण शरण सिंह) के ख़िलाफ़ मामले में गवाह भी हैं. वो एक खिलाड़ी हैं, बाक़ी हम दोनों लोगों का कॉन्टेस्ट होना है. जो वोट करेंगे वो तय करेंगे कि कौन जीतेगा कौन हारेगा."
अनिता श्योराण की उम्मीदवारी पर सवाल उठाते हुए संजय सिंह कहते हैं, " हमारे हिसाब से अगर वो सांसद जी (बृजभूषण शरण सिंह) के ख़िलाफ़ मामले में गवाह हैं तो उन्हें लड़ना नहीं चाहिए था."

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बनारस कुश्ती संघ से राष्ट्रीय महासंघ तक का सफ़र
51 साल के संजय सिंह के क़रीबी माने जाने वाले वाराणसी कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष राजीव सिंह रानू कुश्ती से जुड़े उनके करियर के बारे में बताते हैं.
वो कहते हैं, ''संजय सिंह गाँव वाली पहलवानी करते थे. इनके पिताजी और बाबा बड़े किसान थे. तो गाँव में वो बड़ा अखाड़ा बनवा कर पहलवानों को लड़वाते थे. आप तो जानते हैं कि गाँव में दो ही खेल होते हैं, एक कुश्ती और एक कबड्डी."
संजय सिंह को सरल स्वाभाव का बताते हुए राजीव सिंह कहते हैं कि उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. बनारस भी अखाड़ों का शहर है.
राजीव सिंह कहते है, "कोई ऐसा मोहल्ला नहीं है जहाँ अखाड़ा नहीं है. हनुमान का मंदिर होगा तो अखाड़ा ज़रूर होगा."
राजीव सिंह कहते हैं कि संजय सिंह 2008 में वाराणसी कुश्ती संघ के अध्यक्ष बने.
जब 2009 में उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ बना तो बृज भूषण शरण सिंह प्रदेश अध्यक्ष बने और संजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने और पिछले चार सालों से वो भारतीय कुश्ती संघ के संयुक्त सचिव थे.
बनारस से अलग अलग श्रेणी में खेलने वाले कुल हज़ार पहलवान होंगे. राजीव सिंह कहते हैं कि संजय सिंह की पहलवानों और खिलाडियों की मदद करने वाली छवि रही है.
वो कहते हैं कि संजय सिंह के कार्यकाल में पहलवानी से जुड़ी कई सारी प्रतियोगिताएं बनारस में हो चुकी हैं.
राजीव सिंह का मानना है कि वो 2008 से कुश्ती संघ के साथ बने हुए हैं तो तभी उन्हें बृजभूषण शरण सिंह ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के रूप में सही समझा.
कितने कद्दावर हैं संजय सिंह?

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बनारस में अमर उजाला में लम्बे समय से स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग करते आ रहे रोहित चतुर्वेदी के मुताबिक़, संजय सिंह उर्फ़ बबलू, बृजभूषण शरण सिंह के सबसे भरोसेमंद और विश्वासपात्र माने जाते हैं.
वो कहते हैं, "संजय सिंह पर फ़िलहाल किसी तरह का कोई आरोप नहीं है. बृजभूषण शरण सिंह से जुड़ा जो विवाद चल रहा है उसमे संजय सिंह का दूर-दूर तक कोई नाम नहीं है."
पत्रकार रोहित चतुर्वेदी कहते हैं, "संजय सिंह बृजभूषण के साये की तरह रहते हैं. तो संजय सिंह पर अपना भरोसा जताना बृजभूषण का एक फ़र्ज़ भी है."
बीबीसी ने संजय सिंह को बृजभूषण के साथ कुछ वीडियो भी देखे हैं और इसमें ये साफ़ नज़र आता है कि बृजभूषण की मौजूदगी में संजय सिंह उनकी परछाई बन कर चलते हैं.
तो अगर संजय सिंह अध्यक्ष चुने जाते हैं तो फिर बृजभूषण का कुश्ती संघ पर अप्रत्यक्ष रूप से दबदबा कायम रहेगा? इस बारे में रोहित कहते हैं, "भले ही संजय सिंह 'बबलू' अध्यक्ष हो जाएँ लेकिन कुश्ती का चेहरा बृजभूषण शरण सिंह ही रहेंगे. यह बात सामने आ रही है कि ज़्यादातर राज्य संघ बृजभूषण के साथ ही खड़े हैं. लेकिन संजय सिंह ने भी पूर्वांचल में कुश्ती पर काम किया है और अब लगभग सारी कुश्ती मिट्टी से मैट पर आ गई है."
इस दौर में किसी की शख़्सियत और क़द का अंदाज़ा सोशल मीडिया के ज़रिए भी लगाया जा सकता है. लेकिन संजय सिंह सोशल मीडिया पर ढूंढ़े नहीं मिलते हैं.
बृजभूषण ने उनसे जुड़ी एकाध तस्वीर अपने सोशल मीडिया पर साझा की लेकिन उससे संजय सिंह के बारे में आप ज़्यादा कुछ जान और समझ नहीं पाएंगे.
दूसरी ओर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह अभी भी मीडिया और सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. वो अपने क्षेत्र, यूपी और दिल्ली में दौरा करते हुए, लोगों और समर्थकों से मिलते हुए तस्वीरें और वीडियो रोज़ाना साझा करते हैं.
अब देखना यह है कि 12 अगस्त को संजय सिंह और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडलिस्ट रहीं अनीता श्योराण के बीच कैसा मुक़ाबला होता है, बृजभूषण शरण सिंह उस पर कितने हावी होते हैं और उसमें कौन विजयी घोषित होता है.
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