कुश्ती महासंघ में अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहीं अनिता श्योराण को जानिए

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- Author, सुशीला सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफ़आई) के अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में इस बार दो उम्मीदवारों अनिता श्योराण और संजय कुमार सिंह का आमना-सामना होगा.
हरियाणा से आने वाली अनिता श्योराण राज्य पुलिस सेवा में कार्यरत हैं लेकिन उन्होंने अपना नामंकन ओडिशा इकाई के प्रतिनिधि के तौर पर भरा है.
बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप में अनिता श्योराण गवाह भी थीं.
आपको याद होगा देश के छह पहलवानों ने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.
इस मामले चार्ज़शीट दायर हो चुकी है और हाल ही में दिल्ली कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दी थी.
अब इस पूरे मामले में जांच अभी जारी है.
संजय कुमार सिंह कुश्ती महासंघ का हिस्सा रह चुके हैं और वे निवर्तमान संयुक्त सचिव भी हैं. उन्हें बृजभूषण सिंह का क़रीबी भी माना जाता है.
वहीं संजय को टक्कर दे रहीं अनिता श्योराण राष्ट्रमंडल खेलों में चैंपियन रह चुकी हैं.
कुश्ती महासंघ के लिए चुनाव 12 अगस्त को होंगे.
अगर अनिता श्योराण महाकुश्ती संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत जाती हैं तो इस पद पर पहुँचने वाली वह पहली महिला होंगी.

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कौन हैं अनिता श्योराण
अनिता श्योारण, हरियाणा के भिवानी ज़िले के छोटे से गांव ढ़ाणी माहू से आती हैं.
उनके पिता ड्राइवर थे और मां गृहणी हैं. उन्हें मिलाकर तीन बहनें और एक भाई है.
अनिता श्योराण का बचपन से ही स्पोर्ट्स में रुझान था और वो बताती हैं कि उनके दादाजी पहलवान थे.
अनिता ने बचपन में अपने दादाजी से कुश्ती के कई क़िस्से भी सुने लेकिन कभी दादाजी को कुश्ती खेलते नहीं देखा था.
वे बताती हैं, ''घर का माहौल रूढ़िवादी था और पढ़ने नहीं दिया जाता था .अगर मैं रनिंग के लिए जाती थी तो कहा जाता था कि क्या चैंपियन बनेगी. बड़ा भाई रखवाली करता था कि बहनें इधर-उधर देख न लें. हमें तो घर के चबूतरे पर खड़े रहने की इजाज़त नहीं थी.''
अनिता श्योराण बताती है, ''मेरा भाई जो मौसी का बेटा था वो सेना में जाने के लिए तैयारी कर रहा था और उसने मुझे कहा कि मैं उसके साथ रनिंग के लिए जाया करूं. लेकिन स्पोर्ट्स करने के लिए मेरा गांव से बाहर निकलना ज़रूरी था क्योंकि वहां न माहौल था न ही मौके.''
स्पोर्ट्स के लिए अनिता श्योराण भिवानी आना चाहती थीं लेकिन कोई राह नहीं निकल पा रही थी.
इस बीच उनके चाचा जो टीचर थे उन्होंने अनिता की मां से कहा कि आपकी लड़कियां पढ़ाई में अच्छी हैं. बड़ी बेटी को भिवानी पढ़ने के लिए क्यों नहीं भेजती हो?
अनिता श्योराण ने जब ये सुना तो उन्हें आस बंधी और उन्हें लगा कि बड़ी बहन के सहारे उनका भी भिवानी जाने का रास्ता साफ़ हो जाएगा.
लेकिन गांव से लड़कियों का बस में बैठकर भिवानी जाने की बात आते ही परिवार ने इस पर नामंजूरी दे दी.
अनिता श्योराण बताती हैं, ''मेरी मां अनपढ़ थीं लेकिन पढ़ाई के महत्व को समझती थीं और उन्होंने मुझे सपोर्ट किया. उन्होंने मेरे पिता को मनाया और मेरी दीदी का भिवानी में दाखिला हो गया. इसके बाद चाचा ने मेरा भी भिवानी के स्कूल में दाखिला कराने में मदद की और दीदी ने कहा कि तुम्हारे पास आर्ट्स के विषय हैं, स्पोर्ट्स में भी लग जाओ इससे आगे जाकर मदद मिलेगी.''

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कैसे हुई खेल से शुरुआत?
भिवानी के सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान अनिता ने स्पोर्ट्स में जूडो लिया. वे जूडो सेंटर प्रशिक्षण के लिए जाती थीं और स्कूल स्तर पर ही उन्होंने जूडो में कई पदक हासिल कर लिए.
इस बीच कुछ दिन ऐसा हुआ कि जूडो सेंटर में कोच नहीं आए और उसी दौरान अनिता की मुलाक़ात एक लड़की से हुई जिन्होंने अनिता को स्टेडियम चलने को कहा.
यहीं से अनिता श्योराण की जिंदगी में एक नया मोड़ आ गया.
भिवानी के भीम स्टेडियम में उनकी मुलाक़ात रेसलिंग कोच जि़ले सिंह बागड़ी से हुई.
अपने कोच के बारे में बात करते हुए अनिता श्योराण की आवाज़ में खनक सुनाई दी.
उनके अनुसार, ''मुझे स्टेडियम पहुंचकर और उनसे मिलकर जो खुशी महसूस हुई वो मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती. इतनी खुशी मुझे कॉमनवेल्थ जीतने पर भी नहीं हुई थी.''
वे कहती हैं,''कोच ने मुझे देखते ही पूछा था कि कोई स्पोर्ट्स करती हैं?''
अनिता फ़ोन से बातचीत में कहती हैं, ''वो मेरी फिटनेस देखकर समझ गए कि ये लड़की स्पोर्ट्स के लिए बनी है. इसके बाद मैं वहां प्रशिक्षण के लिए जाने लगी और मेडल आने लगे. इसके बाद घरवाले भी खुश थे और उन्होंने मुझे कभी नहीं रोका बल्कि पूरा सहयोग देना शुरू कर दिया.
वे कहती हैं,'' कोच ज़िले सिंह ने उन्हें रेसलिंग तो सिखाई लेकिन इंसानियत का पाठ भी पढ़ाया.''
कोच ज़िले सिंह के ज़हन में अनिता की यादे अभी भी तरोताज़ा हैं.
वे बीबीसी से बातचीत में बताते हैं, ''साल 1999-2000 में अनिता मेरे पास आई थी तो वो बिगनर यानी एकदम नई थी. उसने रेसलिंग की शुरूआत ही मेरे पास की थी लेकिन बहुत ज़ल्दी ही उन्होंने पहलवानी के गुर सीख लिए थे.''
ज़िले सिंह कहते हैं , ''वे किसी भी चीज़ को सीखने में बहुत ध्यान लगाती थीं और बहुत जल्द ही उन्होंने नेशनल में मेडल अपने नाम कर लिए थे.''
ये सवाल पूछने पर कि उनकी महारत कुश्ती के किस दांव पेंच में थी तो इसके जवाब में वे कहते हैं, ''वे एकपट देने में बहुत माहिर रही हैं.''
कुश्ती में एकपट ऐसा दांव होता है जब एक खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ी की एक टांग पकड़कर पटखनी दे देता है.
हालांकि बीबीसी से बातचीत में साई के कोच रह चुके ज़िले सिंह ये ज़रूर कहते हैं कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि अनिता कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं.
वहीं कोच भूपेंद्र घनकस के अनुसार अनिता श्योराण एक बढ़िया पहलवान रहीं हैं और उन्होंने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं.
अनिता श्योराण दिल्ली में साल 2010 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. एशियन चैंपियनशिप में दो बार उन्होंने भाग लिया और दोनों में कांस्य पदक हासिल लिए
वे आठ से ज़्यादा बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं.

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नेशनल कोच रह चुके ज्ञान सिंह कहते हैं कि साल 2007 में अनिता श्योारण उनके पास आई थीं.
वह कहते हैं ,'' अभी बहुत लंबा अरसा बीत चुका हैें और हमें कभी कभी लड़कियों के कैंप में प्रशिक्षण देने को कहा गया था लेकिन जितना याद आता है, वह बहुत कम बोलती थीं और अपने मैच को लेकर बड़ी एकाग्र रहती थीं और कुश्ती अच्छा खेलती हैं.''
ध्यानचंद अवार्डी और ओलंपियन ज्ञान सिंह कहते हैं, ''ये अच्छी बात है कि अनिता श्योराण इस पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं और अभी तक इस पद पर कोई महिला नहीं आई है. अब लड़कियां बहुत आगे बढ़ रही हैं. अगर वो जीतती हैं तो अच्छा लगेगा.''
वहीं आगे बातचीत में वे संशय भी जताते हैं, ''अनिता कुश्ती महासंघ का कभी हिस्सा नहीं रही हैं और ये एक बड़ा पद है और उनका कोई अनुभव नहीं है. ऐसे में वे नई बच्ची रहेगी, कैसे मैनेज करेगी इसे लेकर थोड़ा लगता है.''
इसका जवाब देते हुए अनिता श्योराण कहती हैं,''मेरे पास रेसलिंग में 20 साल का अनुभव है, मैं इसे बारीकी से समझती हूं. मुझे नहीं लगता मेरा अनुभव कम है. रेसलिंग मेरा एक दूसरा परिवार है और मेरे दिमाग में स्पष्ट है कि कैसे आगे बढ़ना है, किस पर ज़ोर देना है. मेरे पास एक विज़न है.''
वे कहती हैं कि कितने ही वर्षों से महिलाएं रेसलिंग के क्षेत्र में है और महिलाओं और पहलवानों को मानना है कि महिला भी फेडरेशन में होनी चाहिए.
वहीं कोच कुलदीप मलिक कहते हैं कि ये एक राजनीतिक मामला है और वो इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहेंगे.
अनिता श्योराण से जब पूछा गया कि उन्हें अध्यक्ष पद के लिए जीत की कितनी उम्मीद है तो उनका कहना था, ''उम्मीद तो है लेकिन ज़्यादा नहीं कह सकती पर ये जानती हूं कि अगर मुझे मौका मिलेगा तो आत्मविश्वास से साथ कह सकती हूं कि कैसे पहलवानों को आगे बढ़ाना है.''
कुश्ती महासंंघ के अंतर्गत वर्तमान में 25 इकाईयां आती है. देश के 25 राज्यों में ये इकाईयां हैं.
12 अगस्त को होने वाले कुश्ती महासंघ के चुनाव में हर इकाई के दो वोट डाले जाएंगे और इसमें
स्टेट रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष और सेक्रेटरी अपने मत डालेंगे.
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