बृजभूषण शरण सिंह: आरोपों और विवादों के साथ कुश्ती, अखाड़े में उलझे

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- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
बृजभूषण शरण सिंह और महिला पहलवानों के बीच टकराव लगातार जारी है, जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के धरने को आज एक महीना पूरा हो रहा है, ऐसे में लोगों की नज़रें बृजभूषण शरण सिंह पर टिकी हैं.
ज्यादातर लोगों को शायद मालूम नहीं होगा कि उनके 50 से भी अधिक स्कूल और कॉलेज हैं, उन पर 'नक़ल माफिया' होने का आरोप भी लगाया जाता है. उनके ख़िलाफ़ गोंडा के स्थानीय थाने में अनेक मामले दर्ज हैं. वे पिछले 12 सालों से कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे हैं.
पढ़िए बृजभूषण शरण सिंह की पूरी कहानी
शिक्षा का बड़ा साम्राज्य
बृजभूषण शरण सिंह प्रदेश के देवीपाटन मंडल के चार ज़िलों- गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में पाँच दर्जन से अधिक डिग्री कॉलेजों और इंटर कॉलेजों के मालिक हैं.
उनके क़रीबी माने जाने वाले बलरामपुर से बीजेपी के विधायक पल्टूराम की मानें तो लगभग 60 शैक्षणिक संस्थान बृजभूषण ने ख़ुद खड़े किए हैं. पल्टूराम कहते हैं, "शिक्षा का केंद्र होने के कारण, बिहार और पूरे पूर्वांचल से यहाँ बच्चे पढ़ने आते हैं. इस प्रकार से उनका पूर्वांचल से हमेशा लगाव रहा है."
उनके बनाए सबसे पहले कॉलेज--नंदिनी नगर महाविद्यालय की वेबसाइट पर आपको दो दर्जन से भी अधिक कॉलेजों की सूची देखने को मिलेगी.
गोंडा के वरिष्ठ पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी बताते हैं कि केवल नंदिनी महाविद्यालय में लगभग 20 हज़ार बच्चे पढ़ते हैं और वहाँ कई सौ लोग काम करते हैं.
उन्होंने टेक्निकल एजुकेशन, वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में काम किया है. चाहे नर्सिंग हो, बीपीएड हो, बीएड हो, पॉलिटेक्निक हो, लॉ हो, उन्होंने सभी पाठ्यक्रमों की शिक्षा उपलब्ध कराई है
द्विवेदी कहते हैं, "इसी तरह इनके सभी कॉलेजों को गिना जाए तो वहाँ पर इनके ढेर सारे स्टाफ़ और टीचर हैं, जब भी कोई चुनाव होता है तो सभी लोगों को चुनाव में लगा दिया जाता है. इसकी वजह से उनका बूथ प्रबंधन बहुत मज़बूत हो जाता है. यही वजह है कि ये चुनाव जहाँ से भी लड़ते हैं, कामयाबी उनके हाथ ही आती है."
वे कहते हैं, "इन कॉलेजों का स्वामित्व अलग-अलग लोगों के नाम पर है. कहीं बेटों के नाम हैं, तो कहीं भतीजे हैं, पत्नी हैं, बहुएँ हैं, लेकिन जैसे एक छतरी में कई सारी तीलियाँ होती हैं, तो इसी प्रकार से वो बृजभूषण शरण सिंह की छत्रछाया में हैं. इन कॉलेजों के संस्थापक बृजभूषण ही हैं."
भाजपा विधायक पल्टूराम बताते हैं, "गोंडा के नंदिनी नगर महाविद्यालय की स्थापना के बाद, सिर्फ देवीपाटन मंडल ही नहीं, अयोध्या मंडल और बस्ती मंडल में भी शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने काफी काम किया है."
जब नंदिनी नगर कॉलेज के छात्रों से बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों के बारे में पूछा गया तो वे "नेताजी ज़िंदाबाद!" के नारे लगाने लगे.
बलरामपुर के छात्र सोनू तिवारी कहते हैं, "वो हमारे गार्जियन हैं. वो एक तरह से गरीबों के मसीहा भी हैं. हम लोग उनसे ज़िन्दगी भर जुड़े रहेंगे."
प्रवेश यादव बिहार से हैं और वो कहते हैं कि बृजभूषण के संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र, "उनसे व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस करते हैं."
'हमारे भगवान हैं...'

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वो बताते हैं, "यहाँ पढ़ाई सस्ती है, सुविधा अच्छी है. यहाँ सिर्फ बिहार यूपी ही नहीं, कश्मीर, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और नेपाल के लड़के भी पढ़ने के लिए आते हैं. वो यहाँ एलएलबी और एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने आते हैं."
बलरामपुर से सोनू तिवारी चुनावों में छात्रों के इस्तेमाल की बात को गलत बताते हुए कहते हैं, "उन्होंने लड़कों को कभी प्रचार के लिए नहीं बुलाया, लेकिन अगर आपका कोई व्यक्तिगत जुड़ाव है तो आप प्रचार करेंगे ही."
बिहार के आरा ज़िले से ओंकार सिंह कहते हैं, "नेताजी हमारे दिल में बसते हैं. अगर यह आरोप झूठे लगे हैं तो फिर इन पहलवानों के खेल पर जीवन भर के लिए पाबंदी लगाई जाए और उनके मेडल वापस लिए जाएँ. नेताजी सिर्फ यहाँ के ही नेता नहीं हैं. पूरे बिहार के नेता भी हैं."
आरा से आकर बृजभूषण शरण सिंह के कॉलेज में पढ़ रहे विश्वजीत कुमार सिंह कहते हैं, "नेताजी हमारे भगवान हैं. मेरे दिल में बसते हैं. अगर बिहार से भी चुनाव लड़ेंगे तो वहाँ से भी जीतेंगे."
'नक़ल माफिया' होने का आरोप

उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोंडा में एक रैली के मंच से नक़ल का मुद्दा उठाया था.
प्रधानमंत्री मोदी ने अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, "गोंडा में तो जत्थाबंद नकल का बिज़नेस चलता है, व्यापार चलता है. यहाँ चोरी करने की नीलामी होती है. जो सेंटर मिलता है, वो हर विद्यार्थी के माँ-बाप को कहता है कि देखिए, तीन हज़ार डेली का, दो हज़ार डेली का, पांच हज़ार डेली का. अगर गणित का पेपर है तो इतना, अगर विज्ञान का पेपर है तो इतना. होता है कि नहीं होता है, भाइयों?"
रैली में आई जनता कहती है, "होता है!" मोदी पूछते हैं, "यह ठेकेदारी बंद होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए?" जनता कहती है, "होनी चाहिए!" मोदी पूछते हैं, "यह बेईमानी बंद होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए?" जनता कहती है, "होनी चाहिए!"
मोदी मंच से कहते हैं, "यह मेरे देश की भावी पीढ़ी को यह तबाह करने वाला कारोबार है. यह कारोबार बंद होना चाहिए. शिक्षा के साथ यह जो अपराध जुड़ गया है, वो समाज को, आने वाली पीढ़ियों तक तबाह करके रख देता है."
मोदी नक़ल के मुद्दे पर लगातार पाँच मिनट तक बोलते हैं.

गोंडा के वकील और बृजभूषण के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले रवि प्रकाश पांडेय पुराने भाजपाई थे (31 मई, 2023 को मृत्यु) , और 2017 की मोदी की इस रैली में वो भी मौजूद थे. उन्हें गोंडा में नक़ल पर नरेंद्र मोदी का वह चुनावी भाषण अच्छी तरह याद है.
उन्होंने कहा था, "भरी चुनावी सभा में इनको (बृजभूषण) शिक्षा माफिया इंगित किया था."
हमने उनसे पूछा कि शिक्षा माफिया कोई और भी तो हो सकता है, तो रवि प्रकाश पांडेय ने कहा था, "58 कॉलेज इन्हीं के पास तो हैं, तो इनका अपना उद्योग है. इनके (बृजभूषण के) तमाम स्कूलों में एडमिशन करा लीजिए और सर्टिफिकेट ले लीजिए."
उन्होंने बताया कि कि योगी सरकार आने के बाद स्कूलों में नक़ल रोकने के लिए कैमरे लगाए गए.
2022 में एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि उन्हें नक़ल माफिया कहा जाता है तो उन्होंने जवाब दिया, "अब जब प्रदेश में नकल का एक माहौल बना है, नकल हो रही है, तो जिसके पास ज़्यादा संस्थान होंगे उसको नकल माफिया कहा जाएगा."
बृजभूषण शरण सिंह कहते हैं, "नकल माफिया हम नहीं हैं. नकल माफिया हैं मुलायम सिंह. आज मैं पूछना चाहता हूँ कि अगर नकल के कारण मेरे विद्यालय चलते हैं, तो आज भी सबसे अधिक संख्या में मेरे विद्यालय क्यों हैं? क्योंकि प्राइवेट सेक्टर में हम ही एक ऐसे आदमी हैं कि जिसके पास पूरे के पूरे टीचर हैं और क्वालिफाइड टीचर हैं. मेरे पचासों स्कूल-कॉलेज हैं."
नक़ल माफिया के आरोप के बारे में हमने नंदिनी कॉलेज के छात्र प्रवेश यादव से पूछी तो उन्होंने कहा, "नहीं, ऐसा नहीं है. वो गोंडा में सुविधा दे रहे हैं. ज़ाहिर बात है कि उनके इतने कॉलेज हैं, लेकिन पता नहीं लोगों को क्यों लग रहा है कि वो नक़ल माफिया हैं."
गोंडा में भाजपा बनाम बृजभूषण?

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गोंडा के गलियारों में एक बात यह भी सुनने को मिलती है कि गोंडा और आसपास के ज़िलों में बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक कद भाजपा पर निर्भर नहीं है, उनका अपना दम-खम है.
उनके प्रभाव को बेहतर समझने के लिए बीबीसी की टीम गोंडा में यूपी के निकाय चुनाव वाले मतदान के दिन मौजूद थी. उनके पैतृक इलाके नवाबगंज में हमने नगर पालिका अध्यक्ष के 'निर्दलीय' प्रत्याशी सत्येंद्र कुमार सिंह की प्रचार सामग्री में बृजभूषण की बड़ी-बड़ी तस्वीरें देखीं.
ऐसा लग रहा था कि बृजभूषण खुलेआम भाजपा के प्रत्याशी के ख़िलाफ़ निर्दलीय सत्येंद्र कुमार सिंह का समर्थन कर रहे हैं.
लेकिन सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है, "इस चुनाव से बृजभूषण शरण सिंह जी ने अपनी दूरी बना रखी है. हम लोग उनके बच्चे हैं. यह उनका क्षेत्र है. पोस्टर में लगे फोटो भाजपा सांसद के नाते नहीं हैं, वो इस क्षेत्र के अभिभावक हैं. मेरे लिए भगवान स्वरुप हैं. अगर मैं पॉलिटिक्स में आया हूँ तो 110 प्रतिशत बृजभूषण शरण सिंह जी की वजह से आया हूँ."
वहीं भाजपा के प्रत्याशी जनार्दन सिंह को यूपी जैसे भाजपा शासित राज्य में भय और ख़ौफ़ महसूस हो रहा है. वो कहते हैं, "गोंडा की राजनीति थोड़ी अलग है. बहुत ज़्यादा नहीं कह सकते हैं, लेकिन यहाँ पर थोड़ा डर का माहौल है."
सत्येंद्र कुमार सिंह की निर्दलीय उम्मीदवारी के बारे में गोंडा से वरिष्ठ पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी कहते हैं, "यह माना जा सकता है कि वो बृजभूषण के इशारे पर चुनाव में हैं, लेकिन इस बार पहलवानों के प्रदर्शन का एक मनोवैज्ञानिक प्रेशर था तो शायद उन्हें लगा कि एक और मोर्चा खोलना मुनासिब नहीं होगा. लेकिन चाहे वो निकाय चुनाव हों या पंचायत चुनाव हों, समय-समय पर बृजभूषण पार्टी के घोषित कैंडिडेट के ख़िलाफ़ निर्दलीय को चुनाव लड़वाते हैं और यह संदेश देते हैं कि अगर हमारे हिसाब से होगा तो होगा, वरना हम अपना रास्ता बनाना भी जानते हैं."
निकाय चुनाव के नतीजों में निर्दलीय सत्येंद्र सिंह ने 5100 वोटों के साथ जीत दर्ज की और भाजपा के प्रत्याशी जनार्दन सिंह को सिर्फ 150 वोट मिले.
रिश्तेदारों पर ज़मीन कब्ज़े के आरोप

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बृजभूषण शरण सिंह के विरोधी और भाजपा से जुड़े स्थानीय वकील रवि प्रकाश पांडेय का दावा है कि उन्होंने दो महीने पहले बृजभूषण शरण सिंह के भतीजे और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ नज़ूल की सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने की शिकायत की.
उनका कहना है कि उनकी शिकायत के बाद आख़िरकार सरकार ने बुलडोज़र चलवाया.
फरवरी में गोंडा प्रशासन ने बृजभूषण के भतीजे सुमित सिंह और आठ अन्य लोगों पर गोंडा के सिविल लाइंस में तीन एकड़ सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने और धोखाधड़ी का मुक़दमा दर्ज किया और बुलडोज़र से कब्ज़े को गिराया दिया.
वकील रवि प्रकाश ने कहा कि यह कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने गोंडा में भू-माफ़िया के खिलाफ मुहिम चलाई. उनका दावा है जब बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँची तब प्रशासन का बुलडोज़र चला, मुक़दमा दर्ज हुआ और पचास करोड़ की ज़मीन छुड़वाई गई.
हत्या के प्रयास का आरोप, हुए बरी

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जनवरी 2023 में जब बृजभूषण शरण सिंह पर पहली बार यौन शोषण का आरोप लगा तो उनका एक वीडियो वायरल हुआ था.
वीडियो में वो कहते हैं, "मेरे जीवन में मेरे हाथ से एक हत्या हुई है. लोग कुछ भी कहें, मैंने एक हत्या की है. रविंदर को जिस आदमी ने मारा है, मैंने हाथ छुड़ा करके उसको तुरंत राइफल से उसकी पीठ पर रख करके मार दिया और वो मर गया."
सूरज सिंह समाजवादी पार्टी नेता हैं. उनके चाचा पंडित सिंह अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. जिस रविंदर को गोली मारने वाले की हत्या की बात बृजभूषण शरण सिंह कैमरे पर कर रहे थे, वो रविंदर सूरज सिंह के पिता है. बृजभूषण रविंदर सिंह को अपना दोस्त बताते थे.
उस घटना के तीन दशक बाद रविंदर सिंह के बेटे और गोंडा में समाजवादी पार्टी के नेता सूरज सिंह कहते हैं कि बृजभूषण "हमारे पक्के राजनीतिक दुश्मन हैं."
आतंकवाद निरोधक क़ानून टाडा का मामला

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उनके पिता की हत्या के 10 साल बाद 1993 में बृजभूषण शरण सिंह पर उनके चाचा और सपा से पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित सिंह की हत्या का प्रयास का आरोप लगा.
सूरज सिंह कहते हैं, "21 गोलियां लगीं थीं. उस वक्त मुलायम सिंह जी मुख्यमंत्री थे और गोली लगने के मात्र 20 मिनट के भीतर ही उन्होंने अपना सरकारी हेलीकॉप्टर भेजकर मेरे पिता को एयरलिफ्ट कराया."
पंडित सिंह तब बच गए थे, अब उनका निधन हो चुका है, पिछले साल दिसंबर में पंडित सिंह की हत्या के प्रयास के मुकदमे में अदालत ने बृजभूषण को बरी कर दिया. सूरज सिंह ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार विवेक वार्ष्णेय ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ चले टाडा के मामले की रिपोर्टिंग की थी, वे इस मामले को याद करते हुए बताते हैं कि बृजभूषण पर 1997 में दाऊद इब्राहिम के चार साथियों को शरण देने का आरोप लगा था.
विवेक वार्ष्णेय बताते हैं कि 1997 में बृजभूषण शरण सिंह ने छह महीने दिल्ली के तिहाड़ जेल में बिताए. उन पर आतंकवाद विरोधी कानून टाडा के तहत मुकदमा दर्ज था.
उन पर दाऊद इब्राहिम के चार सहयोगियों सुभाष सिंह ठाकुर, जयेन्द्र (भाई) ठाकुर, परेश मोहन देसाई और श्याम किशोर गरिकापट्टी को दिल्ली में अपने सरकारी निवास में पनाह देने का आरोप था. ये चारों लोग मुंबई के जेजे अस्पताल शूटआउट कांड के अभियुक्त थे.
उस वक्त केंद्र में भाजपा की वाजपेयी सरकार थी और वो खुद भाजपा के लोकसभा सांसद थे. वार्ष्णेय बताते हैं, "एडिशनल सेशंस जज शिव नारायण ढींगरा ने सबूतों के अभाव में बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया था."

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वे बताते हैं, "जज ने सीबीआई को ढंग से जांच न करने और ठीक से सबूत न जुटाने के लिए फटकार लगाई थी, जिसकी वजह से बृजभूषण शरण सिंह को मामले में बरी कर दिया गया था."
बृजभूषण के 2019 लोकसभा के चुनावी हलफ़नामे के मुताबिक़ उनके खिलाफ चार मामले विचाराधीन हैं जिसमें हत्या का प्रयास, डकैती, सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट और चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले हैं.
गोंडा के पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी कहते हैं, "1998 में जब लोकसभा का चुनाव हुआ तो बृजभूषण जेल में बंद थे. उनकी पत्नी केतकी सिंह को भाजपा ने टिकट दिया और वो लोकसभा सदस्य चुनी गईं."
बृजभूषण का इतिहास तलाशते हम गोंडा के नवाबगंज थाने में पहुंचे जो उनके गांव के करीब है. थाने के अंदर टंगी हिस्ट्रीशीटर्स की सूची में बृजभूषण शरण सिंह का नाम लिखा हुआ था.
पुलिस के मुताबिक़ बृजभूषण शरण सिंह की हिस्ट्रीशीट 1987 में खुली थी उसमें 38 मुकदमों का ज़िक्र है.
अगर उनके 2019 के चुनावी हलफ़नामे की बात करें तो उसमें चार मुकदमों का ज़िक्र है, इनमें से बाबरी मस्जिद विध्वंस वाले में मामले में वे बरी हो चुके है, साथ ही, सपा नेता पंडित सिंह की हत्या के प्रयास के मामले में भी बरी हो चुके हैं लेकिन फ़ैसले को कानूनी चुनौती दी गई है.
योगी और पार्टी से रिश्ते?
ऐसा सुनने में आया है कि ये (बृजभूषण सिंह) मुख्यमंत्री से मिलने के लिए गए, मुख्यमंत्री जी लखनऊ में मौजूद थे, लेकिन इनसे मुलाकात नहीं हो पाई और यह वापस हो लिए.
जब बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाने बलरामपुर से विधायक पल्टूराम 2021 में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, पहली बार मंत्री बने तो इसका श्रेय उन्होंने योगी आदित्यनाथ और बृजभूषण शरण सिंह दोनों को दिया.
पल्टूराम का मानना है कि लंबे संसदीय कार्यकाल के दौरान योगी और ब्रजभूषण शरण सिंह के अच्छे रिश्ते रहे हैं.
वो कहते हैं, "योगी जी और सांसद जी का सम्बन्ध बहुत पहले से चला आ रहा है. वो दोनों साथ-साथ सांसद होते थे. मैं कई बार उनके साथ मिलकर उनका आशीर्वाद लेता रहता था. दोनों के सम्बन्ध बहुत अच्छे हैं."
लेकिन पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी इससे अलग राय रखते हैं और कहते हैं, "यह आम चर्चा है, ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री जी से इनके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं."
कुछ लोग कहते हैं कि पार्टी फिलहाल बृजभूषण पर ज़्यादा मेहरबान नज़र नहीं आ रही है लेकिन कुछ लोग ये भी कहते हैं कि इतने हंगामे के बावजूद उन पर कार्रवाई न होना ये दिखाता है कि पार्टी उनके साथ है.
जानकी शरण द्विवेदी कहते हैं, "बताया जाता है कि हाल ही के निकाय चुनाव में जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की अवध क्षेत्र के सांसदों की बैठक में बृजभूषण शरण सिंह भी शामिल हुए थे. जब इनसे राय देने को कहा गया तो इन्होंने कहा कि हम पार्टी अध्यक्ष से बाद में मिलकर अपनी राय देंगे लेकिन बताते हैं कि इन्हें अलग से मिलने के लिए समय नहीं दिया गया."
लेकिन बात वहीं पर ख़त्म नहीं हुई. बृजभूषण ने मुख्यमंत्री से पहले भाषण दिया तो उसमें उन्होंने एक शेर सुनाया, "मैं महफ़िल का फ़र्द हूँ, बिछावन नहीं हूँ."
द्विवेदी कहते हैं, "यह संकेत उन्होंने मुख्यमंत्री और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की जनसभा में सार्वजनिक रूप से दिया था कि उन्हें बिना इज़्ज़त दिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता."
गोंडा-बलरामपुर में वफादारों की फ़ौज

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बृजभूषण शरण सिंह पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर भाजपा के केंद्र और राज्य के बड़े-बड़े प्रवक्ता फिलहाल खुलकर उनके बचाव में मैदान में नहीं उतरे हैं लेकिन जो उनके एहसानमंद हैं वो खुलकर बोल रहे हैं.
पल्टूराम बलरामपुर की आरक्षित सीट से दूसरी बार भाजपा के विधायक चुने गए हैं. अजय सिंह गोंडा के कर्नलगंज से भाजपा विधायक हैं. भाजपा भले ही चुप है, लेकिन पल्टूराम और अजय सिंह जैसे पार्टी के विधायक, दोनों बृजभूषण शरण सिंह के बचाव में मैदान में उतर चुके हैं.
पल्टूराम पहलवानों के प्रदर्शन को कांग्रेस की साज़िश बताते हुए कहते हैं, "यह माननीय सांसद जी के राजनीतिक चरित्र को खराब करना चाहते हैं. माननीय सांसद जी आम जनता के दिलों में बसते हैं.
विधायक अजय सिंह कहते हैं, "आदरणीय बृजभूषण हमारे पितातुल्य हैं और हम उन्हें शुरुआती दौर से जानते हैं. लगाया गया आरोप निराधार है. यह षड्यंत्र है और वजह उनकी लोकप्रियता और जनप्रियता है. आपको मालूम होगा की पूर्वांचल में आदरणीय नेताजी के कद का कोई नेता नहीं है."
पल्टूराम बताते हैं कि वो बृजभूषण शरण सिंह का नाम अपने स्टूडेंट पॉलिटिक्स के ज़माने से सुनते आ रहे हैं और उन्हीं के समर्थन से पल्टूराम और उनके परिवार ने राजनीतिक ऊंचाइयाँ छुईं और 2021 में योगी सरकार में मंत्री बने.
भाजपा विधायक पल्टूराम कहते हैं, "हम जैसे कई लोग हैं जो राजनीति में उपेक्षित थे, उन्हें पार्टी के साथ-साथ मुख्यधारा में जोड़ने का काम किया है."
किसी क्षेत्र से गहरा रिश्ता बनाए रखने के बारे में वो कहते हैं, "बलरामपुर लोक सभा क्षेत्र से वो सांसद पहले रह चुके हैं, लेकिन आज भी विभिन्न कार्यक्रमों में उनका आना-जाना लगा रहता है. सम्बन्ध वो हमेशा के लिए बनाते हैं."
क्रॉस वोटिंग का मामला

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साल 2008 में जब समाजवादी पार्टी ने मनमोहन सिंह सरकार को न्यूक्लियर डील से जुड़े विश्वास प्रस्ताव पर समर्थन दिया तो भाजपा के कुछ सांसदों पर भी क्रॉस वोटिंग के आरोप लगे.
पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी कहते हैं कि, "बताया गया कि इसका नतीजा हुआ कि उसी समय से इनको एक तोहफे के रूप में वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई और यूपीए सरकार से मिली सुरक्षा चलती चली आ रही है."
एक वीडियो इंटरव्यू में बृजभूषण ने क्रॉस-वोटिंग की बात स्वीकार की लेकिन इसके लिए उन्होंने अपनी पार्टी की बेरुख़ी को ज़िम्मेदार ठहराया. 2017 में जब मनोहर पर्रिकर को गोवा के विधानसभा चुनावों में बहुमत नहीं मिला तो भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह को एक बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी.
एक प्राइवेट जेट भेजकर बृजभूषण शरण सिंह को गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विधायक विजय सरदेसाई और उनके दो विधायकों को जोड़ने का काम दिया गया, इसमें वे कामयाब रहे और पार्टी के संकटमोचक की तरह दिखे.
विजय सरदेसाई प्रोग्रेसिव रेसलिंग एसोसिएशन ऑफ़ गोवा के अध्यक्ष हैं और कुश्ती की वजह से उनकी बृजभूषण से दोस्ती है.
सिर्फ गोवा ही नहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भी काफी करीब माने जाते हैं, और अप्रैल में शिंदे और फडणवीस के अयोध्या दौरे में वो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए नज़र आए.
बीबीसी ने इस सभी पहलुओं और आरोपों पर सांसद बृजभूषण शरण सिंह से विस्तार से उनका पक्ष जानने के कई प्रयास किए. उनके एक प्रतिनिधि ने कहा कि 'किसी भी तरह की सफ़ाई देना ग़ैर-ज़रूरी है.'
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