सम्राट मिहिर भोज पर विवाद की आंच ग्रेटर नोएडा से मध्य प्रदेश के मुरैना तक- ग्राउंड रिपोर्ट

सम्राट मिहिर भोज
इमेज कैप्शन, सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम 22 सितंबर को था और अब भी कॉलेज के प्रांगन में टेंट और बल्लियाँ पड़ी हुईं हैं
    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे या राजपूत?

इस विवाद ने अब तूल पकड़ना शुरू कर दिया है और उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर से लेकर मध्य प्रदेश के मुरैना तक इसे लेकर एक असहज माहौल पैदा हो रहा है.

गौतम बुद्ध नगर के दादरी में 22 सितम्बर को बालिका इंटर कॉलेज में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने ही विवाद शुरू तब हुआ जब शिलापट्ट पर पर लिखे 'गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज' पर 'गुर्जर' शब्द पर किसी ने कालिख पोत दी.

घटना को लेकर राजपूतों और गुर्जरों के बीच तनाव पैदा हो गया.

क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधित्व का दावा करने वाले संगठन 'करनी सेना' ने शिलापट्ट पर 'गुर्जर' शब्द लिखने का विरोध करते हुए दावा किया कि सम्राट मिहिर भोज 'क्षत्रिय' थे, इसलिए उन्हें सिर्फ 'गुर्जर' जाति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.

सम्राट मिहिर भोज
इमेज कैप्शन, सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे या राजपूत? इस विवाद ने अब तूल पकड़ना शुरू कर दिया है

दादरी के मिहिर भोज बालिका इंटर कॉलेज का हाल

तनाव इस क़दर बढ़ गया कि दादरी के जिस मिहिर भोज बालिका इंटर कॉलेज में प्रतिमा का अनावरण किया गया, वहां अब भारी पुलिस बंदोबस्त किया गया है, जिसमें ज़िला पुलिस बल के जवानों के साथ-साथ सशस्त्र पुलिस बल तैनात किए गए हैं.

पुलिस बल के जवान प्रतिमा के आस-पास किसी को फटकने भी नहीं दे रहे हैं. आने-जाने वाले हर व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है.

समारोह 22 सितंबर को था और अब भी कॉलेज के प्रांगन में टेंट और बल्लियाँ पड़ी हुईं हैं. तेज़ बारिश से मैदान में कीचड़ भर गया है.

मजदूरों को पुलिस की देखरेख में मैदान की सफ़ाई करनी पड़ रही है. लेकिन, प्रतिमा तक जाने वाली दस सीढ़ियों वाले रास्ते को सील कर दिया गया है.

दादरी से काफ़ी दूर मध्य प्रदेश के भिंड में इस मुद्दे पर चल रहा विवाद तब उभर कर सामने आ गया जब ग्वालियर-भिंड उच्च मार्ग पर तीन बसों में तोड़ फोड़ की घटनाएं हुईं.

सम्राट मिहिर भोज
इमेज कैप्शन, जिन इलाकों में राजपूतों या गुर्जरों की आबादी ज़्यादा है, वहां विशेष निगरानी की जा रही है

मध्य प्रदेश के मुरैना तक विवाद की आंच

मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि ग्वालियर सहित मुरैना और भिंड के इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और संवदनशील इलाकों में अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया है.

अधिकारी का कहना है कि जिन इलाकों में राजपूतों या गुर्जरों की आबादी ज़्यादा है, वहां विशेष निगरानी की जा रही है.

अधिकारी ने बताया कि ये विवाद अब अदालत में पहुँच तो गया है लेकिन मुरैना में एहतियात के तौर पर कुछ एक शैक्षणिक संस्थाओं को बंद रखने का आदेश भी दिया गया है.

उनका कहना है कि ग्वालियर और मुरैना में भी ये विवाद मूर्ती लगाए जाने के बाद शुरू हुआ जिसमे गुर्जर समाज ने उन्हें 'गुर्जर प्रतिहार राजा' बताया है.

मगर जिस राज्य में इस विवाद के राजनीतिक दुष्परिणाम हो सकते हैं, वो है उत्तर प्रदेश. यहाँ अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं.

सम्राट मिहिर भोज
इमेज कैप्शन, दादरी के मिहिर भोज महिला इंटर कॉलेज में मिहिर भोज की मूर्ती के अनावरण पर हुए विवाद और विरोध के सिलसिले में प्रशासन ने दोनों समाज के लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है

'प्रशासन यथास्थिति बनाए रखना चाहता है'

दादरी गुर्जर समाज का एक तरह से मुख्यालय है क्योंकि पूरे गौतम बुद्ध नगर ने इनकी खासी आबादी है.

सिर्फ झेवर का इलाक़ा ऐसा है जहां राजपूतों की आबादी अच्छी-खासी है जबकि अन्य इलाकों में भी राजपूत रहते हैं लेकिन गुर्जर समाज के लोगों की आबादी ही ज़्यादा है.

यही वजह है कि गौतम बुद्ध जिला प्रशासन माहौल को किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं देना चाहता है.

दादरी के मिहिर भोज महिला इंटर कॉलेज में मिहिर भोज की मूर्ती के अनावरण पर हुए विवाद और विरोध के सिलसिले में प्रशासन ने दोनों समाज के लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

सभा स्थल पर मौजूद एक अधिकारी का कहना है कि प्रशासन यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और नहीं चाहता है कि कोई दूसरी घटना घटे.

करनी सेना की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष करण ठाकुर
इमेज कैप्शन, करनी सेना की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष करण ठाकुर

'महापंचायत' पर सरकार की चिंता

लेकिन 26 सितम्बर को गुर्जर समाज द्वारा सभा स्थल पर बुलाई गई 'महापंचायत' ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.

गौतम बुद्ध नगर से गुर्जर समाज से भाजपा के राज्यसभा के संसद और विधायक भी हैं और सरकार का प्रयास है कि उनके माध्यम से वो गुर्जर समाज के लोगों को समझाने की कोशिश करें.

लेकिन गुर्जर समाज के हरीश चौधरी कहते हैं कि ये सारा विवाद स्थानीय भाजपा के विधायक तेजपाल सिंह नागर और राज्यसभा संसद की मौजूदगी में ही हुआ.

इतने दशकों से कभी ये विवाद नहीं हुआ था कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर प्रतिहार वंश के राजा थे.

लेकिन करनी सेना की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष करण ठाकुर कहते हैं कि राजपूत प्रतिमा का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर सम्राट कहे जाने का विरोध कर रहे हैं.

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के संस्थापक नरेंद्र गुर्जर
इमेज कैप्शन, अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के संस्थापक नरेंद्र गुर्जर

शिलापट्ट पर फिर से 'गुर्जर' शब्द लिखने की कोशिश

बीबीसी से बात करते हुए करण ठाकुर कहते हैं, "विवाद कुछ नहीं है. प्रतिमा लगी है और हम उसका स्वागत करते हैं. लेकिन शिलापट्ट पर गुर्जर सम्राट लिखा जाना ग़लत है क्योंकि वो क्षत्रिय सम्राट थे."

शिलापट्ट पर जिस जगह 'गुर्जर' शब्द लिखा गया था, उस पर किसी ने स्याही लगा दी. इसी के बाद विवाद शुरू हुआ.

अब अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा शिलापट्ट पर फिर से 'गुर्जर' शब्द लिखने का प्रयास कर रहा है. इसीलिए महापंचायत भी बुलाई गई है.

जानकार कहते हैं कि पिछले एक महीने से सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमाएं पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर लगाई गई हैं और जहाँ-जहाँ ये लगीं हैं, वहीं से संघर्ष की ख़बरें भी आ रहीं हैं.

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के संस्थापक नरेंद्र गुर्जर कहते हैं कि राजपूत समाज के लोग कह रहे हैं कि गुर्जर शब्द ही स्थान वाचक है जिसे वो गुजरात के किसी इलाके को जोड़ रहे हैं जबकि इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि गुर्जर प्रतिहार वंश ने लंबे समय तक भारत के बड़े इलाके पर राज किया.

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इमेज कैप्शन, 26 सितम्बर को गुर्जर समाज द्वारा सभा स्थल पर बुलाई गई 'महापंचायत' ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.

महापंचायत के आह्वान के बाद माहौल में तनाव

वहीं, करनी सेना का कहना है कि उन्हें गुर्जर वंश के साम्राज्य को लेकर कोई आपत्ति नहीं है. बल्कि सिर्फ इतनी आपत्ति है कि वो गुर्जर नहीं क्षत्रिय हैं.

राजपूत समाज से ही भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता ठाकुर देवेंद्र खटाना कहते हैं कि चाहे राजपूत हों, गुर्जर या जाट समाज हो, सब क्षत्रिय ही हैं. वो दावा करते हैं कि 'अब कोई विवाद नहीं है.'

लेकिन महापंचायत के आह्वान के बाद माहौल में तनाव है.

दादरी को गुर्जरों की राजधानी कहा जाता है और शहर में जगह-जगह सम्राट मिहिर भोज के नाम से या तो संस्थाएं हैं या फिर उनकी प्रतिमाएं.

लेकिन करनी सेना का कहना है कि दादरी और गौतम बुद्ध नगर ज़िले में हर जगह बोर्ड ज़रूर लगे हैं उनमे 'सम्राट मिहिर भोज' तो लिखा है लेकिन कहीं भी 'गुर्जर सम्राट मिहिर भोज' नहीं लिखा गया है.

सम्राट मिहिर भोज

भाजपा की फिक्र

भारतीय जनता पार्टी इस मामले पर अब फूँक-फूँक कर क़दम रख रही है. पार्टी संगठन इस घटना को लेकर चिंतित है और सांगठनिक स्तर पर इसे लेकर मंथन भी चल रहा है.

पार्टी के स्थानीय नेता फिलहाल इसपर खुलकर कोई बयान नहीं दे रहे हैं जबकि दोनों पक्षों को मनाने का प्रयास जारी है.

दादरी के रहने वाले तेजपाल कहते हैं कि चुनावों से ठीक पहले पैदा हुए इस विवाद ने भारतीय जनता पार्टी को बैकफुट पर खड़ा दिया है क्योंकि किसान आंदोलन को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट पहले से ही नाराज़ चल रहे हैं.

दादरी में पैदा हुए विवाद के बाद मुश्किल ये है कि अगर प्रतिमा के शिलापट्ट पर 'गुर्जर' शब्द लिख दिया जाता है तो फिर 'राजपूत समाज' के लोग नाराज़ हो जाएंगे. इस लिए मामले में पेंच फंसा हुआ है.

सम्राट मिहिर भोज

दादरी के रहने वाले कुछ लोग, जो दोनों ही समाज से नहीं हैं, बीबीसी से कहते हैं कि इस विवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज़बर्दस्ती घसीटा गया है. वो कहते हैं कि मुख्यंत्री के सलाहकारों को ये समझना चाहिए था कि ये विवाद कितना गहरा हो सकता है. और वो भी चुनाव से ठीक पहले. प्रतिमा का अनावरण किसी और से भी करवाया जा सकता था.

मिहिर भोज बालिका इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले एक अध्यापक ने नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "गुर्जरों के बीच अपनी पार्टी की साख मज़बूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी थी. वो ख़ुशी-ख़ुशी आए भी. मगर उनकी ही पार्टी के स्थानीय नताओं ने उन्हें इस मुद्दे पर बरगलाया है. ऐसा लगता है. अगर उनको आभास होता कि ऐसा विवाद पैदा हो सकता है तो शायद वो इस कार्यक्रम में आते ही नहीं."

अब चूँकि मामले में पेंच फँस गया है, इसलिए स्थानीय प्रशासन ने 26 सितम्बर की 'महापंचायत' के लिए गुर्जर समाज को अनुमति नहीं दी है. लेकिन अखिल भारतीय गुर्जर महासभा अपने कार्यक्रम पर अडिग है जिसको लकर चिंता बढ़ गई है.

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