वीमेन प्रीमियर लीग में नीलामी: सबसे महंगी खिलाड़ी कौन?

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय महिला क्रिकेटर्स के लिए नौ दिसंबर का दिन अहम रहा. एक तरफ़ इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेली जा रही सीरीज़ जीतने का मौका चूकना और दूसरी तरफ वीमेन प्रीमियर लीग में खिलाड़ियों की नीलामी.
बीसीसीआई सेक्रेटरी जय शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा- वीमेन प्रीमियर लीग के लिए ऐतिहासिक दिन.
30 खिलाड़ियों की नीलामी में 12.75 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए. पांच खिलाड़ियों को एक करोड़ से ज़्यादा रुपये में ख़रीदा गया.
इस कहानी में हम आपको पहले शनिवार को खेले मैच में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बारे में बताएंगे.
फिर वीमेन प्रीमियर लीग में कौन सी खिलाड़ी कितने रुपये में बिकीं? इसकी जानकारी देंगे.

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भारतीय महिला बल्लेबाजों ने शनिवार को वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए दूसरे टी-20 मैच में लचर प्रदर्शन कर इंग्लैंड को सीरीज़ में 2-0 की बढ़त बनाकर उसे जीतने का मौका दे दिया.
इंग्लैंड ने दूसरे टी-20 मैच को चार विकेट से जीता.
पहला मैच खोने के बाद भारतीय टीम से वापसी की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने एकदम से समर्पण करके सीरीज में वापसी की उम्मीदों को एकदम से कमजोर कर दिया.
भारतीय टीम का प्रदर्शन

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भारत ने 34 रनों तक स्कोर पहुंचते ओपनर शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, कप्तान हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा और रिचा घोष के विकेट गंवा दिए.
जेमिमा रोड्रिग्ज का धन्यवाद करना चाहिए कि भारतीय टीम 80 रनों के स्कोर तक पहुंच गई और भारतीय गेंदबाजों को थोड़ा संघर्ष करने का मौका दे दिया.
जेमिमा ने 33 गेंद खेलकर दो चौकों से 30 रन बनाए. जेमिमा के अलावा सिर्फ मंधाना ही 10 रन बनाकर दो अंकों में पहुंच सकीं.
भारतीय पारी को ढहाने में इंग्लैंड के पूरे अटैक का योगदान रहा. उसके गेंदबाजों में चार्ली डीन, लॉरेन बेल, इकलिस्टोन और साराह ग्लेन ने दो-दो विकेट निकाले. सभी गेंदबाजों के पैनापन लिए गेंदबाजी करने का ही परिणाम था कि भारतीय बैटर्स कभी दवाब से निकलते नजर नहीं आए.
भारतीय पेस गेंदबाज रेणुका सिंह ने शुरुआत में दोनों ओपनरों सोफिया डंकले और डैनी वायट के जिस तरह से आउट किया और दीप्ति शर्मा ने लगातार दो गेंदों पर एमी जोंस और फ्रेया केंप के विकेट निकाले, उससे हल्की सी उम्मीदें जरूर बनीं. पर लड़ने के लिए लक्ष्य बेहद कमजोर होने की वजह से भारतीय गेंदबाज बाजी को पलट नहीं पाईं. इससे भारत को मैच हारने के साथ सीरीज गंवानी पड़ी.
डब्लूपीएल की नीलामी में कौन कौन चमका

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वीमेन प्रीमियर लीग ने भी आईपीएल की तरह अपनी नीलामी में चौंकाने का सिलसिला शुरू किया है. साल 2024 के सत्र के लिए मुंबई में हुई नीलामी में चंडीगढ़ की सीमर काशवी गौतम ने सभी को चौंका दिया. उन्हें गुजरात जायंट्स ने दो करोड़ में रुपए में खरीदा है.
वीमेन प्रीमियर लीग में इस बार की नीलामी में सिर्फ 30 खिलाड़ियों की खरीद होनी थी. इसलिए बहुत ज्यादा चौंकाने वाली खबर आने की संभावना कम थी.
इसकी एक वजह यह भी थी कि पिछली विजेता मुंबई इंडियंस, उपविजेता दिल्ली केपिटल्स और यूपी वारियर्स ने अपने सभी प्रमुख खिलाड़ियों को रिटेन कर लिया था.
इस स्थिति में पिछले साल आखिरी दो टीमों आरसीबी और गुजरात जायंट्स द्वारा ही प्रमुख खरीद की जानी थी.
काशवी बनीं करोड़पति

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चंडीगढ़ की यह सीमर पिछले कुछ सीजन से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. खास बात यह है कि यह खिलाड़ी इस टी-20 लीग के पिछली नीलामी में बिना बिके रह गई थी. पर उन्होंने इससे निराश हुए बगैर अच्छे प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखा और अब वह अपनी कड़ी मेहनत का इनाम पाने में सफल हो गई हैं. उन्हें 10 लाख के बेस प्राइज की 20 गुनी रकम यानी दो करोड़ रुपए में खरीदा गया.
काशवी गौतम ने सही मायनों में 2020 में उस समय सुर्खियां बटोरीं, जब वह अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ अंडर-19 मुकाबले में चंडीगढ़ के लिए सभी 10 विकेट निकालने में सफल रहीं, इसमें उनकी हैट्रिक भी शामिल थी.
पुरुष वर्ग में यह करिश्मा करने का गौरव सिर्फ अनिल कुंबले को हासिल है.
इस तरह के प्रदर्शन के दम पर वह चंडीगढ़ के लिए टी-20 ट्रॉफी के खेले सात मुकाबलों में 12 विकेट लेकर चयनकर्ताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रहीं.
इस प्रदर्शन की खूबी यह थी कि उन्होंने यह विके ट4.12 की इकॉनमी रेट से निकाले थे.
इसकी बदौलत वो एसीसी एमर्जिंग टीम कप में खेलीं और अंडर-23 भारतीय टीम में स्थान पाने में सफल रहीं. इसमें भारत को विजेता बनाने में उनका योगदान रहा. हाल ही में इंडिया ए की सीरीज में भी वह दो मैचों में तीन विकेट लेकर अपनी छाप छोड़ने में सफल रहीं.
वृंदा दिनेश की भी हुई बल्ले-बल्ले

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पॉवर हिटिंग के लिए मशहूर कर्नाटक की बैटर वृंदा दिनेश दूसरी अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी हैं, जो करोड़पति बनने में सफल रहीं.
वह घरेलू सीजन में कर्नाटक के लिए पिछले दो सालों से लगातार रन बना रहीं थीं. वह इंग्लैंड ए के खिलाफ सीरीज में भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहीं थीं. इसका इनाम उन्हें यूपी वारियर्स ने 1.3 करोड़ रुपए में खरीदकर दिया.
इस साल जून में हांगकांग में हुई एसीसी एमर्जिंग टीम चैंपियनशिप में उन्हें नियमित तौर पर खेलने का मौका नहीं मिला. पर जब भी उन्हें खेलने का मौका मिला, वह प्रभावित करने में सफल रहीं. सही मायनों में बांग्लादेश के खिलाफ फाइनल में जब उन्हें खेलने का मौका मिला तो वह भारतीय जीत में अहम भूमिका निभाने वाली खिलाड़ी बन गईं.
वृंदा ने बांग्लादेश के खिलाफ फाइनल में भारत द्वारा बनाए सात विकेट पर 127 रनों में 36 रनों का योगदान किया. यह रन उन्होंने 29 गेंदों में बनाए थे. पिछले घरेलू सीजन में सीनियर महिलाओं के वनडे टूर्नामेंट में कर्नाटक को फाइनल में पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही.
उन्होंने इस टूर्नामेंट की 11 पारियों में 47.70 के औसत से 471 रन बनाए. वृंदा के सेमीफाइनल में खेली 81 रनों की पारी को कैसे भुलाया जा सकता है.
वृंदा की खरीद पर अंजुम हैरान

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यह हमेशा कहा जाता रहा है कि टी-20 लीग में खिलाड़ियों के खरीदे जाने के बारे में कोई लॉजिक नहीं होता है. कई बार बड़े नाम वाले खिलाड़ी बिना बिके रह जाते हैं और कई बेनामी खिलाड़ी करोड़पति बनकर सभी को हैरत में डाल देते हैं.
भारत की स्टार खिलाड़ी रहीं अंजुम चोपड़ा ने एक टीवी चैनल पर चर्चा के दौरान वृंदा दिनेश को यूपी वॉरियर्स के 1.3 करोड़ रुपए में खरीदने पर हैरत जताई. उनका कहना था कि किसी भी टीम का एक युवा को लेना अच्छा कदम है. पर वह कहती हैं कि मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि उनकी टीम में जगह कहां बनती है, क्योंकि टीम में पहले से स्वेता सेहरावत और पार्श्वी चोपड़ा हैं.
वह कहती हैं कि टीम में नयापन लाने के लिए वृंदा से एलीसा हीली के साथ पारी की शुरुआत कराई जा सकती है. पर इससे किरण नवगीरे पर दवाब बन जाएगा, जो कि टीम के लिए अच्छा नहीं होगा.
मन्नत कश्यप का भाग्य

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भारतीय यंग ब्रिगेड की सदस्य मन्नत कश्यप का भाग्य काशवी और वृंदा की तरह मेहरबान नहीं रहा. वह इन दोनों खिलाड़ियों की तरह करोड़पति नहीं बन सकीं. उन्हें गुजरात जायंट्स ने बेस प्राइज 10 लाख रुपए में खरीद लिया. वैसे तो इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी के सफर की शुरुआत भर है. वह लीग के इस सीजन में छाप छोड़कर आगे की सफल राह बना सकती हैं.
पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 मैच में अपनी शानदार फील्डिंग से दक्षिण अफ्रीकी बैटर को रन आउट कराकर सुर्खियां बटोरीं थीं. इस साल फरवरी में अंडर-19 महिला विश्व कप में सही मायनों में उन्होंने अपनी पहचान बनाई. इस विश्व कप में उन्हें पहली बार स्कॉटलैंड के खिलाफ खेलने को मिला. वह अपनी फिरकी में चार बैटर्स को फंसाने में सफल रहीं.
मन्नत इस विश्व कप में पार्श्वी चोपड़ा के बाद दूसरी सबसे सफल गेंदबाज रहीं. उन्होंने छह मैचों में नौ विकेट निकालकर भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई. इसी तरह एसीसी एमर्जिंग के फाइनल में 20 रन पर तीन विकेट निकालकर भारत को 127 रन बनाने पर भी चैंपियन बना दिया था.
पांच ही खिलाड़ी बन पाईं करोड़पति
ज्यादातर टीमें पहले से ही तैयार हैं. उन्हें सिर्फ अपनी कमियों को ही भरना था, इसलिए बहुत ज्यादा धमाल होने की कोई उम्मीद नहीं थी और ऐसा ही हुआ भी. इस नीलामी में सिर्फ पांच ही खिलाड़ियों को करोड़पति बनने का गौरव हासिल हुआ.
भारतीय वृंदा दिनेश, काशवी गौतम के अलावा करोड़पति बनने वाली दो खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया की हैं. एनाबेल सदरलैंड और फीब लीचफील्ड हैं.
सदरलैंड को दिल्ली केपिटल्स ने दो करोड़ रुपए में खरीदा है. इस तरह वह इस लीग में सबसे महंगी विदेशी खिलाड़ी बन गई हैं.
वहीं लीचफील्ड को गुजरात जायंट्स ने एक करोड़ रुपए में खरीदा है. एक अन्य करोड़पति खिलाड़ी दक्षिण अफ्रीका की शबनम इस्माइल हैं, जिन्हें मुंबई इंडियंस ने 1.20 करोड़ रुपए में खरीदा है.
वैसे इस महिला आईपीएल कहे जाने वाले टूर्नामेंट में सबसे महंगी खिलाड़ी का रिकॉर्ड अभी भी स्मृति मंधाना के नाम है, जिन्हें आरसीबी ने पहले सीजन के दौरान 3.4 करोड़ रुपये में ख़रीदा था.
पहले सीजन से पहले हुई नीलामी में दीप्ति शर्मा को 2.6 करोड और जेमिमा रोड्रिग्स को भी 2.2 करोड़ रुपये में ख़रीदा गया था.
पर दिलचस्प बात यह है कि डिएंड्रा डोटिन, चमारी अटापट्टू, एमी जोंस और किम गार्थ जैसी दिग्गज खिलाड़ी बिना बिके रह गईं.
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