न्यूज़ीलैंड के हीरो रचिन रविंद्र जिनका नाम सचिन और राहुल के नाम पर रखा गया

रचिन रविंद्रन

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    • Author, संजय किशोर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

विश्व कप का आगाज़ हो चुका है. शायद आईसीसी चाहती थी कि पिछला वर्ल्ड कप जहां ख़त्म हुआ था, शुरुआत वहीं से हो. लिहाज़ा पहला मैच खेला गया पिछली विश्व कप विजेता इंग्लैंड और उपविजेता न्यूज़ीलैंड के बीच.

साल 2019 में खेले गए विश्व कप का फ़ाइनल विवादास्पद रहा था.

निर्धारित 50 ओवर में दोनों टीमों ने 241 रन बनाए. सुपर ओवर भी टाई रहा तो आईसीसी ने बाउंड्री के आधार पर इंग्लैंड को चैंपियन घोषित कर दिया.

तब 20 साल का एक एनआरआई युवक बेंगलुरु के एक पब में बैठकर मैच देख रहा था और परिणाम को लेकर काफ़ी हताश था.

बहरहाल लगभग ख़ाली स्टेडियम में 2023 विश्व कप का पहला मैच काँटे का तो कतई नहीं था. न्यूज़ीलैंड टीम ने वर्ल्ड चैंपियन इंग्लैंड को 9 विकेट से करारी शिकस्त दी.

सलामी बल्लेबाज़ डेवन कॉनवे ने नाबाद 152 रन की पारी खेली. मगर ज़्यादा चर्चा में हैं रचिन रविंद्र. केन विलियम्सन की जगह नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करने उतरे रचिन ने नॉट आउट रहते हुए तूफ़ानी 123 रन बनाए.

रचिन वनडे विश्व कप के डेब्यू मैच में शतक बनाने वाले चौथे कीवी खिलाड़ी बन गए. 82 गेंदों के साथ, विश्व कप में न्यूजीलैंड के किसी खिलाड़ी द्वारा बनाया गया ये सबसे तेज शतक था.

उन्होंने डेवन कॉनवे के साथ 273 रन जोड़ विश्व कप इतिहास की चौथी सबसे बड़ी साझेदारी भी दर्ज की. बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर रचिन ने हैरी ब्रुक का विकेट भी लिया था.

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मैच के बाद रचिन का कहना था, “शतक हमेशा खास होता है. लेकिन भारत में अच्छा प्रदर्शन अलग बात है. अपने माता-पिता को मैच देखते हुए अच्छा लगा. वे न्यूज़ीलैंड से आए थे. उस पल का आनंद लेना अच्छा था और भारत आना हमेशा अच्छा लगता है.

"जब भी मैं बेंगलुरु में होता हूं तो अपने दादा-दादी से मिलकर एक पारिवारिक रिश्ते का अहसास होता है.”

रचिन ने 96 गेंदों में नाबाद 123 रनों की पारी खेली. वो वॉर्म मैच में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 3 रन से शतक से चूक गए थे. उन्होंने अपनी इस यादगार पारी का श्रेय सलामी बल्लेबाज डेवन कॉनवे को दिया.

“कभी-कभी यह अविश्वसनीय होता है, लेकिन एक अच्छा दिन तो अच्छा ही होता है. गेंदबाजों ने अच्छी गेंदबाज़ी की. भाग्यशाली था कि डेवन वहां मौजूद थे."

"मैंने डेव के साथ काफी समय बिताया और हम बहुत करीबी दोस्त हैं. मैं थोड़ा अधिक सहज था और मैंने डेव के साथ खूब बातचीत की. विकेट के बीच में सलाह-मशवरा काफ़ी फ़ायदेमंद होता है… बल्लेबाज़ी के लिए सतह बहुत अच्छी और प्यारी थी, हैदराबाद के अभ्यास मैच की तरह.”

किस से प्रेरित है रचिन का नाम?

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हर कोई 23 साल के इस नौजवान रचिन रविंद्र के बारे में ज़्यादा जानना चाहता है. यह वही युवक है जो 14 जुलाई 2019 की रात बेंगलुरु के पब में बैठा था. ‘रचिन’ नाम भी थोड़ा अलग-सा है न! जब नाम के बारे में पूछा जाता है तो रचिन थोड़े शर्मा जाते हैं.

दरअसल राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर के नाम को मिलाकर बनाया गया है ‘रचिन’ नाम. राहुल का ‘आरए’ और सचिन का ‘सीएचएआईन’.

उनके पिता रवि कृष्णमूर्ति सॉफ़्टवेयर आर्किटेक्ट हैं. न्यूज़ीलैंड में बसने के पहले बैंगलोर में क्लब क्रिकेट खेलते थे. पिता राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर के बड़े फ़ैन रहे है.

अब नाम का ज़िक्र चला है तो एक और मज़ेदार क़िस्सा साझा करना चाहूँगा.

कहानी काफ़ी दिलचस्प है. क्या आप केएल राहुल का पूरा नाम बता सकते हैं? चलिए हम बताए देते हैं.

कनानुर लोकेश राहुल.

कनानुर लोकेश राहुल का नाम कनानुर लोकेश रोहन होता अगर उनके पिता डॉक्टर केएल लोकेश की याददाश्त ने साथ दिया होता.

दरअसल राहुल के पिता लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर के बहुत बड़े फ़ैन थे. उन्होंने फ़ैसला कर रखा था कि अपने बेटे का नाम गावस्कर के बेटे रोहन के नाम पर रखेंगे.

लेकिन नामकरण के समय वो रोहन का नाम भूल गए और उन्हें लगा कि गावस्कर के बेटे का नाम राहुल है और यही नाम उन्होंने अपने बेटे को दे दिया.

राहुल के पिता एनआईटी में प्रोफेसर हैं जबकि मां राजेश्वरी लोकेश यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑॅफ मंगलोर में लेक्चरर हैं.

बेंगलुरु से नाता

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जब पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर की बात चली है तो बता दें कि लिटिल मास्टर ने अपने बेटे का नाम वेस्टइंडीज़ के पूर्व क्रिकेटर रोहन कन्हाई के नाम पर रखा था.

गावस्कर से पूछा गया कि वे रोहन कन्हाई का इतना सम्मान क्यों करते थे?

तो गावस्कर ने कहा था, “अपनी बल्लेबाज़ी के अलावा, उन्होंने जाने-अनजाने मुझे प्रोत्साहित किया. मैदान के बाहर, मैं जिन लोगों से मिला हूँ, उनमें सबसे अच्छे लोगों में से वे एक थे. मेरे बेटे का नाम उनके नाम पर रखना कोई हैरानी की बात नहीं है.”

बहरहाल लौटते हैं रचिन पर.

साल 2021 में नवंबर में रचिन को भारत के ख़िलाफ़ कानपुर में टेस्ट कैप मिला था. रचिन और एजाज़ पटेल आख़िरी जोड़ी के रुप में क्रीज़ पर डटे रहे और भारत को टेस्ट जीतने नहीं दिया.

रचिन ने अकेले 15.1 ओवर का सामना कर अपनी दृढ़ता और मज़बूत इच्छा शक्ति का परिचय दिया था. भारत में लगातार 14 टेस्ट जीत का टीम इंडिया का सिलसिला टूट गया था.

विश्व कप से पहले, रचिन ने 12 एकदिवसीय मैचों में 23.62 की औसत से 189 रन बनाए थे.

अब तक उन्होंने 3 टेस्ट, 12 वनडे और 18 टी20 मैच खेले हैं और विश्व कप 2023 के अभ्यास मैच में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उन्होंने 97 रन की शानदार पारी खेलकर सभी को प्रभावित किया.

रचिन रविंद्र अपने किशोरावस्था के दिनों में छुट्टियों के दौरान बेंगलुरु आते हैं ताकि क्रिकेट की बारीकियाँ सीख सकें.

रचिन के पिता की भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ से दोस्ती है, जिन्हें रवींद्र प्यार से 'श्री अंकल' कहते हैं.

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