भारतीय क्रिकेट टीम के दो स्टार जिनकी चर्चा नहीं होती

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
जिस टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ हों और कप्तान रोहित शर्मा और टीम में विराट कोहली जैसा सुपर स्टार खिलाड़ी तो शायद ही किसी की नज़रें पारस महाम्ब्रे और टी दिलीप जैसे सहायक कोचों पर जाएगी.
ये दोनों लोग टीम इंडिया के लिए गेंदबाज़ी और फील्डिंग कोच की भूमिका निभा रहे हैं.
बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौड़ भले ही द्रविड़ की तरह हाई प्रोफाइल नहीं है लेकिन अपने दूसरे साथियों की तरह एकदम से गुमनाम भी नहीं हैं.
इत्तेफ़ाक़ से राठौड़ ने रवि शास्त्री के दौर से ही टीम इंडिया की कोचिंग के सफर की शुरुआत की थी.
फिलहाल हम बात करेंगे महाम्ब्रे और दिलीप की जो कई मायनों में बेहद समान हैं तो कई मामलों में बिल्कुल अलग.
लेकिन एक बात है जो इन दोनों को जोड़ती है और वो बात ये है कि भारतीय क्रिकेट में दोनों बदलते हुए नज़रिए की गवाह हैं.
दिलीप हैं खिलाड़ियों के चहेते

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टीम के सुपर तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह हों या फिर मोहम्मद शमी दोनों ही महाम्ब्रे के कायल हैं.
दिलीप जिनके पास ना तो फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने का अनुभव है और न ही महाम्ब्रे की ही तरह आईपीएल में एक लंबा कोचिंग अनुभव है.
इसके बावजूद इसके सीनियर से लेकर जूनियर तक फील्डिंग कोच के मुरीद हैं.
2023 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान दिलीप पहली बार सुर्खियों में आए जब उनके अनोखे अंदाज़ ने हर किसी का दिल जीता.
दरअसल, टीम इंडिया के ड्रेसिंग रुम में हर मैच के बाद सबसे बेहतरीन फील्डर को सम्मानित किया जाता था.
ये सोशल मीडिया में खूब वायरल भी हुआ और हर किसी ने बीसीसीआई की सोशल मीडिया टीम की क्रिएटिविटी की तारीफ़ भी की.
लेकिन दिलीप ख़ास-तौर पर प्रेरणा के स्रोत हैं क्योंकि आप में या हम में से कोई भी फील्डिंग कोच बनने का सपना देख सकता है.
दिलीप ने जूनियर लेवल से लेकर नेशनल क्रिकेट एकेडमी तक के सफर को उसी अंदाज़ में जिया है जैसा की आज वो टीम इंडिया के साथ जी रहे हैं.
अगर रविंद्र जडेजा जैसे दबंग फील्डर भी दिलीप के फैन हैं. ऐसे में कुछ ख़ास कमाल तो ये कोच पर्दे के पीछे से लगातार कर ही रहा है.
कप्तान रोहित शर्मा के साथ भी फील्डिंग कोच का समीकरण बेहद संजीदा है.
शायद इसकी वजह ये भी है कि करियर के शुरुआत में डेक्कन चार्जर्स का ये दोनों हिस्सा थे.
महाम्ब्रे का रोल

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साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ पहले वन-डे मैच से ठीक दो दिन पहले जोहानिसबर्ग के नैट्स पर महाम्ब्रे युवा तेज़ गेंदबाज़ अर्शदीप सिंह के साथ क़रीब एक घंटे तक लगातार उनके एक्शन, गेंदबाज़ी ऐंगल और विविधता को लेकर बात करते रहे.
शाम तक महाम्ब्रे वन-डे टीम को छोड़ते हुए प्रिटोरिया में टेस्ट टीम के साथ जुड़ गए.
लेकिन, इसके बाद जब अर्शदीप के उस मैच में 5 विकेट की ख़बर उनके कानों में पहुंची तो जश्न वो भी मना रहे थे.
बाद में जब अर्शदीप प्रेस कॉन्फ्रेंस में नज़र आए तो इस लेखक ने उनसे महाम्ब्रे के योगदान के बारे में पूछा.
इस पर उन्होंने साफ किया कि किस तरह से गेंदबाज़ी कोच युवा खिलाड़ियों के साथ चुप-चाप अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्हें निखारने में जुटे हुए हैं.
शमी-बुमराह और सिराज की तिकड़ी ने वर्ल्ड कप के दौरान ही नहीं बल्कि वन-डे क्रिकेट में गेंदबाज़ी कोच महाम्ब्रे के दौर में इतना बेहतरीन खेल दिखाया है जिसकी मिसाल भारतीय क्रिकेट में नहीं है.
वहीं दिलीप के लिए फील्डिंग जूनून वाला विषय रहा है.
मोहम्मद अज़हरुदीन के शहर हैदराबाद से आने वाले दिलीप ने शुरु से ही देखा है कि किस तरह से उनके शहर के दिग्गजों ने हमेशा फील्डिंग को ज़बरदस्त अहमियत दी.
हैदराबाद के ही आर श्रीधर टीम इंडिया के फील्डिंग कोच थे जिन्होंने भारत के लिए खेले बिना ही इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी कामयाबी से निभाई.
श्रीधर के पास फर्स्ट क्लास क्रिकेट का ज़बरदस्त अनुभव था लेकिन दिलीप सही मायनों में भारतीय क्रिकेट में एक नई क्रांति के प्रतीक हैं.
अंतरराष्ट्रीय अनुभव ना होने संबंधी आलोचनाओं को वो हंसते हुए सह लेते हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि कोहली, रोहित और जडेजा जैसे खिलाड़ियों का भरोसा है उन पर.
द्रविड़ के साथ करियर की शुरुआत

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टीम इंडिया के हेड कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौड़ के साथ पारस महाम्ब्रे ने भी 1996 में इंग्लैंड दौरे से अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की थी.
महाम्ब्रे ने भारत के लिए बहुत ज़्यादा मैच तो नहीं खेले लेकिन मुंबई के लिए बतौर कप्तान भी उन्होंने शानदार छाप छोड़ी.
महाम्ब्रे और दिलीप ने दिखाया कि अगर आप करियर की पहली पारी में कामयाब नहीं हुए तो क्या हुआ. आपको दूसरी पारी को संवारने का मौक़ा भी मिल सकता है.
द्रविड़ के साथ साथ उनके सहयोगियों पर भी बीसीसीआई ने जून 2024 तक का भरोसा दिखाया है.
अगर दक्षिण अफ़्रीका में टीम इंडिया टेस्ट सीरीज़ पहली बार जीतने में कामयाब होती है तो शायद महाम्ब्रे और दिलीप का ये शानदार सफर कुछ और सालों तक टीम इंडिया के साथ जारी रहे.
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