बांग्लादेश चुनाव में 'भारत फैक्टर' : क्या कह रही हैं अवामी लीग और बीएनपी

भारत-बांग्लादेश संबंध

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    • Author, अबुल कलाम आज़ाद
    • पदनाम, बीबीसी बांग्ला, ढाका

बांग्लादेश के आगामी आम चुनाव में भारत की क्या भूमिका होगी? इस सवाल पर राजनीति में अनुमानों और विश्लेषण का दौर जारी है.

क्या भारत हमेशा की तरह सत्तारूढ़ अवामी लीग का पक्ष लेगा या तटस्थ भूमिका का पालन करेगा? राजनीतिक दल इस सवाल पर गहन विश्लेषण कर रहे हैं.

अमेरिका बांग्लादेश सरकार से बार-बार कह रहा है कि आगामी चुनाव मुक्त और निष्पक्ष तरीके से कराए जाएं. इस बीच, उसने एक वीज़ा नीति का एलान किया है.

उसमें कहा गया है कि जो लोग बांग्लादेश में मुक्त और निष्पक्ष चुनाव आयोजित करने की राह में बाधा पहुंचाएंगे उनको और उनके परिवार के सदस्यों को अमेरिका का वीजा नहीं दिया जाएगा.

इस पृष्ठभूमि में भारत की रवैए पर भी मंथन चल रहा है. इसकी वजह यह है कि भारत अमेरिका का करीबी मित्र है. कई लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शेख हसीना की सरकार पर से दबाव कम करने में भारत कैसी भूमिका निभाता है.

बांग्लादेश चुनाव

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अमेरिका और पड़ोसी भारत

चुनाव बांग्लादेश का आंतरिक मामला होने के बावजूद इस पर ताकतवर देश अमेरिका और पड़ोसी भारत की भूमिका का असर पड़ता है.

बीते दो चुनावों पर विवाद होने के कारण इस बार भारत की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है.

वर्ष 2014 और 2018 के विवादास्पद चुनावों के बाद भी भारत अवामी लीग सरकार का जोरदार तरीके से समर्थन करता रहा है.

भारत के समर्थन के कारण ही अमेरिका और पश्चिमी देशों ने चुनाव के नतीजों पर सार्वजनिक रूप से जोरदार आपत्ति नहीं जताई थी.

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'भारत एक पार्टी का मित्र है'

हाल में एक भारतीय पत्रिका में छपा था कि भारत ने शेख हसीना सरकार के समर्थन में अमेरिका को एक कूटनीतिक संदेश दिया है.

लेकिन विदेश मंत्रालय से इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि भारत ने हकीकत में ऐसा संदेश दिया है या नहीं.

लेकिन इस खबर के प्रकाशन के बाद बीएनपी और अवामी लीग ने परस्पर-विरोधी प्रतिक्रिया दी है.

बीएनपी ने अमेरिका की वीज़ा नीति समेत विभिन्न मुद्दों पर उसकी सक्रियता का स्वागत करने के बावजूद भारत के रवैए पर आपत्ति जताई है.

बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य गएश्वर चंद्र राय दिल्ली की सक्रियता और अतीत में उसकी भूमिका का जिक्र करते हैं.

गएश्वर चंद्र राय
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बांग्लादेश चुनाव

गएश्वर चंद्र राय वर्ष 2014 के चुनाव से पहले भारत की तत्कालीन विदेश सचिव सुजाता सिंह के ढाका दौरे और जातीय पार्टी के तत्कालीन नेता एचएम इरशाद के साथ हुई उनकी बैठक की याद दिलाते हैं.

वह कहते हैं, "सुजाता सिंह ने इरशाद से कहा था कि आपने अगर चुनाव में हिस्सा नहीं लिया तो बीएनपी सत्ता में आ जाएगी. भारत के विदेश मंत्रालय ने तो इसी सप्ताह जारी एक प्रेस नोट में कहा था कि बांग्लादेश चुनाव संविधान के अनुरूप समय पर होगा."

"लेकिन वह ऐसा क्यों कह रहे हैं? जब यहां की सरकार ही यह बात कह रही हो तो उनको (भारत को) कहने की क्या जरूरत है? क्या अब इसके बाद भी कुछ कहने की जरूरत है?"

वीडियो कैप्शन, बांग्लादेश के इन लोगों को भारत का ये बाज़ार इतना पसंद क्यों आता है?

बांग्लादेश का मित्र

राय याद दिलाते हैं कि बांग्लादेश के साथ संबंधों के मामले में भारत संतुलन नहीं बरत रहा है.

"मेरी धारणा थी कि भारत भी पूरी दुनिया की तरह लोकतांत्रिक देश के साथ एक ही सुर में बोलेगा. वैसी स्थिति में हमारे देश के नागरिकों के लिए मतदान का अधिकार हासिल करना सहज होता."

उनका आरोप है कि भारत बांग्लादेश का मित्र होने की बजाय सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी का मित्र बन गया है.

वह कहते हैं, "वह (भारत) सिर्फ एक पार्टी और एक व्यक्ति का मित्र है. आम लोगों के लिए किसी भी स्थिति में यह वांछनीय नहीं है. यह साफ है कि भारत चाहता है कि चाहे जैसे भी हो, अवामी लीग आजीवन यहां सत्ता में रहे."

मतिया चौधरी
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'भारत ने लोकतंत्र के परे कोई बात नहीं कही'

दूसरी ओर, अवामी लीग चुनाव के मुद्दे पर अमेरिका के रवैए को देश के आंतरिक मामलों में एक हस्तक्षेप के तौर पर देखती है. प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस मुद्दे पर असंतोष जताया है.

लेकिन चुनाव के मुद्दे पर भारत का रवैया सरकारी पार्टी के लिए काफी हद तक राहत जैसा लग रहा है.

संसद के उपनेता और अवामी लीग के अध्यक्ष मंडल की सदस्य मतिया चौधरी ने बीबीसी से कहा, "अमेरिका एक महाशक्ति है और भारत भी इस समय किसी से कम नहीं है."

वह कहती हैं, "भारत ने तो लोकतंत्र से परे कोई बात नहीं कही है. ऐसे में इसे लेकर चिंतित होने का क्या कारण है? उलटे जो लोग चुनाव के अलावा दूसरा खेल खेलते हैं उनकी बातों को हम संदेह की निगाहों से देखेंगे."

वीडियो कैप्शन, भारत-बांग्लादेश: 'शुरू में लगा था हार जाएंगे लेकिन खेल बदल गया'

स्वाधीन सार्वभौम राष्ट्र

मतिया चौधरी कहती हैं कि भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक है. उनको फिलहाल भारत को लेकर संदेह की कोई वजह नहीं नजर आती.

उनके मुताबिक, "मैं बेवजह चिंतित या विचलित होने की कोई वजह नहीं देख रही हूं. इससे अतिरिक्त उत्साहित होने की भी कोई वजह नहीं है."

मतिया चौधरी कहती हैं, "बांग्लादेश एक स्वाधीन सार्वभौम राष्ट्र है. इस हकीकत को भारत या कोई और अस्वीकार नहीं करेगा और हम भी इस बात को याद रखेंगे. कोई भी चीज देश हित से ऊपर या इसके नागरिकों को अलग रख कर नहीं हो सकती है."

मुजीबुल हक चुन्नू
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भारत के बिना संभव नहीं

नजदीक पड़ोसी और विभिन्न हितों के कारण भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि बांग्लादेश में कौन सत्ता में है.

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, इस क्षेत्र की स्थिरता और भू -राजनीतिक हित में बांग्लादेश को लेकर भारत की चिंता और रणनीति को स्वाभाविक भी माना जाता है.

जातीय पार्टी के महासचिव मुजीबुल हक चुन्नू ने बीबीसी बांग्ला से कहा, नजदीकी पड़ोसी के तौर पर विभिन्न वजहों से भारत के लिए बांग्लादेश महत्वपूर्ण है.

वह कहते हैं, "यह सच है कि बांग्लादेश की राजनीति में भारत का हित हो सकता है. इसकी वजह यह है कि वह सबसे नजदीकी पड़ोसी है और हमारा देश तीन ओर से भारत से गिरा है. ऐसे में भारत चाहेगा कि बांग्लादेश में जो सरकार हो उसके साथ उसके संबंध बेहतर रहें."

वीडियो कैप्शन, भारत के लिए इतना अहम क्यों है बांग्लादेश?

साझा हित

उनका कहना था कि सीमा के अलावा कानून-व्यवस्था और रणनीति से जुड़े कई मुद्दे हैं. यह मुद्दे भारत और बांग्लादेश दोनों के साझा हितों से जुड़े हैं.

इसे ध्यान में रखते हुए भारत बांग्लादेश के विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श कर अपनी राय कायम कर सकता है.

बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों से भारत के प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंधों की बात गोपनीय नहीं है.

राजनीतिक पार्टियों के बीच प्रतिनिधि स्तर पर या द्विपक्षीय उच्चस्तरीय दौरों के समय भी पार्टी अध्यक्षों के साथ बातचीत होती है.

इस बार चुनाव से पहले अवामी लीग और जातीय पार्टी के चेयरमैन जीएम कादिर ने हाल में भारत का दौरा किया है.

वीडियो कैप्शन, भारतीय सेना के बागी जनरल शाबेग सिंह की कहानी. Vivechana

जातीय पार्टी के महासचिव मुजीबुल हक चुन्नू की राय में भारत को दुश्मन मान कर बांग्लादेश में राजनीति करना या सरकार चलाना संभव नहीं है. इसके राजनीतिक और वाणिज्यिक कारण हैं.

वह कहते हैं, "कुछ दिनों पहले भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने प्याज पर टैक्स लगाने का फैसला किया था. इस बीच, बांग्लादेश में प्याज की कीमत बढ़ गई है. ऐसे कुछ मामले हैं जिनके कारण हम पड़ोसी देशों पर निर्भर हैं."

बांग्लादेश के राष्ट्रीय चुनाव पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दल परस्पर विरोधी रवैया अपना रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से भी मुक्त और निष्पक्ष चुनाव कराने का दबाव है.

लेकिन तमाम राजनीतिक पार्टियो की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत औऱ अमेरिका की भूमिका क्या होती है.

वीडियो कैप्शन, दुनिया में रवींद्रनाथ टैगोर अकेले कवि हैं, जिन्होंने दो देशों के राष्ट्रगान लिखे हैं.

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